पुराने चावल
पकेगा तो महकेगा खिल खिल के दाना
क्योकि ये चावल पुराना बहुत है
नहीं प्यार करने की हिम्मत बची है
कैसे भी नजरे चुराना बहुत है
कभी पेट में दर्द,खांसी कभी है
सरदर्द का फिर बहाना बहुत है
भले ही हमारी,है ये जेब खली
तजुरबो का लेकिन खजाना बहुत है
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Sunday, November 21, 2010
Sunday, November 14, 2010
hum bujurg hai
हम वो पके हुए फल है
जो सड़े नहीं है,
सूखा मेवा बन गए है
समय की कड़ाई में तले हुए
वो गुलाब जामुन है
जो अनुभवों के रस में सन गए है
भले ही टेडी मेडी सही
हम प्यार के रस में डूबी जलेबिया है
थोड़े चरपरे तो है पर
स्वादिष्ट बीकानेरी भुजिया है
हम ममता के दूध में रडी हुयी
पुराने चावलों की खीर है
हम देशी मिठाइयो की तरह
मिठास से भरे है
पर हमारे मन में एक पीर है
की आजकल की पीड़ी को
देशी मिठाइयो से है परहेज
हमें खेद है हम लेट हो गए
बनने में चाकलेट
परांठा या चीले ही रह गए
पीजा न बन सके
पर आज भी कोई अगर प्रेम से चखे
तो जानेगा हम कितनी स्वादिष्ट है
हम बूड़े है ,हम वरिष्ठ है
भले ही युद्ध में कम नहीं आ सकते है
पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में तो रखे जा सकते है
हम विरासत के वो पुराने दुर्ग है
हम बुजुर्ग है
जो सड़े नहीं है,
सूखा मेवा बन गए है
समय की कड़ाई में तले हुए
वो गुलाब जामुन है
जो अनुभवों के रस में सन गए है
भले ही टेडी मेडी सही
हम प्यार के रस में डूबी जलेबिया है
थोड़े चरपरे तो है पर
स्वादिष्ट बीकानेरी भुजिया है
हम ममता के दूध में रडी हुयी
पुराने चावलों की खीर है
हम देशी मिठाइयो की तरह
मिठास से भरे है
पर हमारे मन में एक पीर है
की आजकल की पीड़ी को
देशी मिठाइयो से है परहेज
हमें खेद है हम लेट हो गए
बनने में चाकलेट
परांठा या चीले ही रह गए
पीजा न बन सके
पर आज भी कोई अगर प्रेम से चखे
तो जानेगा हम कितनी स्वादिष्ट है
हम बूड़े है ,हम वरिष्ठ है
भले ही युद्ध में कम नहीं आ सकते है
पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में तो रखे जा सकते है
हम विरासत के वो पुराने दुर्ग है
हम बुजुर्ग है
Sunday, November 7, 2010
deepotsav aaye
दीपोत्सव आये
प्रमुदित मन हम करे दीप अभिनन्दन,
आज धरा पर कोटि चन्द्र मुस्काए
दीपोत्सव आये
बाल विधु से कोमल चंचल
सुंदर मनहर स्नेहिल निर्झेर
घर घर दीप जले
पल पल प्रीत पले
अंध तमस मय निशा आज मावस की
भूतल नीलाम्बर से होड़ लगाये
दीपोत्सव आये
रस मय बाती लों का अर्चन
पुलकित हे मन जन जन जीवन
नव प्रकाश आया
ले उल्हास आया
रससिक्त दीपक में लों मुस्काई
ज्यो पल्वल में पद्मावली छाये
दीपोत्सव आये
प्रमुदित मन हम करे दीप अभिनन्दन,
आज धरा पर कोटि चन्द्र मुस्काए
दीपोत्सव आये
बाल विधु से कोमल चंचल
सुंदर मनहर स्नेहिल निर्झेर
घर घर दीप जले
पल पल प्रीत पले
अंध तमस मय निशा आज मावस की
भूतल नीलाम्बर से होड़ लगाये
दीपोत्सव आये
रस मय बाती लों का अर्चन
पुलकित हे मन जन जन जीवन
नव प्रकाश आया
ले उल्हास आया
रससिक्त दीपक में लों मुस्काई
ज्यो पल्वल में पद्मावली छाये
दीपोत्सव आये
deepotsav aayeदीपोत्सव आये प्रमुदित मन हम करे दीप अभिनन्दन, आज धरा पर कोटि चन्द्र मुस्काए दीपोत्सव आये बाल विधु से कोमल चंचल सुंदर मनहर स्नेहिल निर्झेर घर घर दीप जले पल पल प्रीत पले अंध तमस मय निशा आज मावस की भूतल नीलाम्बर से होड़ लगाये दीपोत्सव आये रस मय बाती लों का अर्चन पुलकित हे मन जन जन जीवन नव प्रकाश आया ले उल्हास आया रससिक्त दीपक में लों मुस्काई ज्यो पल्वल में पद्मावली छाये दीपोत्सव आये
Saturday, November 6, 2010
Diwali Hoti Hai
सब साथ साथ होते हैं तो दीवाली होती हैं
वरना तो बस हम होते हैं
और चार दीवारी होती हैं
तेरी आखों के दीप जलते है तो उजियारा हैं
वरना अमावस की रात काली होती हैं |
अपनत्व का अनार और स्नेह की रंगोली
सब मिल जाये तो ही दीवाली होती हैं
अमावस की रात, चाँद तू नहीं तो क्या
चाँद की सूरत वालों से रोशन दीवाली होती है |
जबसे शादी हुई तभी से यह जाना
कि घर की असली रौनक घरवाली होती हैं
पत्नी तो होती है फटाके जैसी
पर फूल-झड़ियो सी प्यारी साली होती है |
Composed by – Baheti Brothers (Madan Mohan, Dwarka and Jagdish)
वरना तो बस हम होते हैं
और चार दीवारी होती हैं
तेरी आखों के दीप जलते है तो उजियारा हैं
वरना अमावस की रात काली होती हैं |
अपनत्व का अनार और स्नेह की रंगोली
सब मिल जाये तो ही दीवाली होती हैं
अमावस की रात, चाँद तू नहीं तो क्या
चाँद की सूरत वालों से रोशन दीवाली होती है |
जबसे शादी हुई तभी से यह जाना
कि घर की असली रौनक घरवाली होती हैं
पत्नी तो होती है फटाके जैसी
पर फूल-झड़ियो सी प्यारी साली होती है |
Composed by – Baheti Brothers (Madan Mohan, Dwarka and Jagdish)
Sunday, October 17, 2010
कामनवेल्थ सबकी हेल्थ
कामनवेल्थ सबकी हेल्थ
देखो खेलगाव का मेला
कामनवेल्थ सभी ने खेला
लेकिन सबसे बड़े खिलाडी
तो निकले मिस्टर कलमाड़ी
पहलवान ने दाव लगाये
कुश्ती जीती,गोल्ड जिताए
कलमाड़ी ने दाव लगाया
सबसे ज्यादा गोल्ड कमाया
अपने हिन्दुस्तानी शूटर
रहे पदक में सबसे उपर
लेकिन नहीं कोई भी शूटर
निकला कलमाड़ी से बढ कर
शुरू किया जब शूटिंग करना
बजट शूट हो गया सोगुना
रिले रेस में भी बिलकुल फिट
खुद फिर गिल खन्ना फिर दीक्षित
उनसे अच्छा तीरंदाज
नहीं मिलेगा तुमको आज
ऐसा आया कामनवेल्थ
बनी कई लोगो की हेल्थ
सोचो यदि युग होता त्रेता
कलमाड़ी सा कोई नेता
रामसेतु का ठेका पाता
क्या टाइम पर पुल बन जाता
दाम दस गुने,होती लूट
बनता भी तो जाता टूट
तो फिर केसे रावण मरता
और दशहरा केसे मनता
इसीलिए इश्वर की माया
कलमाड़ी कलयुग में आया
देखो खेलगाव का मेला
कामनवेल्थ सभी ने खेला
लेकिन सबसे बड़े खिलाडी
तो निकले मिस्टर कलमाड़ी
पहलवान ने दाव लगाये
कुश्ती जीती,गोल्ड जिताए
कलमाड़ी ने दाव लगाया
सबसे ज्यादा गोल्ड कमाया
अपने हिन्दुस्तानी शूटर
रहे पदक में सबसे उपर
लेकिन नहीं कोई भी शूटर
निकला कलमाड़ी से बढ कर
शुरू किया जब शूटिंग करना
बजट शूट हो गया सोगुना
रिले रेस में भी बिलकुल फिट
खुद फिर गिल खन्ना फिर दीक्षित
उनसे अच्छा तीरंदाज
नहीं मिलेगा तुमको आज
ऐसा आया कामनवेल्थ
बनी कई लोगो की हेल्थ
सोचो यदि युग होता त्रेता
कलमाड़ी सा कोई नेता
रामसेतु का ठेका पाता
क्या टाइम पर पुल बन जाता
दाम दस गुने,होती लूट
बनता भी तो जाता टूट
तो फिर केसे रावण मरता
और दशहरा केसे मनता
इसीलिए इश्वर की माया
कलमाड़ी कलयुग में आया
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