शीला जवान हुई
मुन्नी बदनाम हुई
सारी व्यवस्थाये,
अब बेलगाम हुई
ऐ मनमोहन अब तो जागो
तू जी स्कैम हुआ
कामनवेल्थ गेम हुआ
कितना घोटाला हुआ
सबका मुहं काला हुआ
ऐ मनमोहन अब तो जागो
मंहगाई सर पे चढ़े
चीजो के दाम बढे
प्याज ने आंसू लाये
आदमी क्या खाए
ऐ मनमोहन अब तो जागो
ऊँची दूकान तुम्हारी
पर फीकी चीजे सारी
नित नए कांड होते
तुम खूँटी तान सोते
ऐ मनमोहन अब तो जागो
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Monday, January 3, 2011
Sunday, January 2, 2011
देखो ये घर टूट न जाये
देखो ये घर टूट न जाये
अपने तुम से रूठ न जाए
क्योकि अगर ये घर टूटेगा
अपनों का ही दिल टूटेगा
धीरे धीरे ,रिसते रिसते
पिघल जायेगे सारे रिश्ते
मुस्काती ,खिलती बगिया की
खुशबू कोई लूट न जाए
देखो ये घर टूट न जाए
पीढ़ी में अंतर होता है
ये समझो तो समझोता है
अगर चाहते बचना गम से
तो रहना होगा संयम से
पनघट पर जाने से पहले,
खुशियों का घट फूट न जाए
देखो ये घर टूट न जाए
अपने तुम से रूठ न जाए
क्योकि अगर ये घर टूटेगा
अपनों का ही दिल टूटेगा
धीरे धीरे ,रिसते रिसते
पिघल जायेगे सारे रिश्ते
मुस्काती ,खिलती बगिया की
खुशबू कोई लूट न जाए
देखो ये घर टूट न जाए
पीढ़ी में अंतर होता है
ये समझो तो समझोता है
अगर चाहते बचना गम से
तो रहना होगा संयम से
पनघट पर जाने से पहले,
खुशियों का घट फूट न जाए
देखो ये घर टूट न जाए
Wednesday, December 29, 2010
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
चीनी तेल सब्जिया दाले
लेते सबके भाव उछाले
क्या क्या छोड़े,क्या क्या खा ले
कैसे अपना बजट संभाले
महगाई बढती जाती है,
हल्का होता पर्स हमारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
घोटालो में उलझे नेता
कोई किसी पर ध्यान न देता
पनप रहे है भ्रष्टाचारी,
वो ही पाता जो कुछ देता
ये सब काबू में आ जाये
एसा हो स्पर्श तुम्हारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
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चीनी तेल सब्जिया दाले
लेते सबके भाव उछाले
क्या क्या छोड़े,क्या क्या खा ले
कैसे अपना बजट संभाले
महगाई बढती जाती है,
हल्का होता पर्स हमारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
घोटालो में उलझे नेता
कोई किसी पर ध्यान न देता
पनप रहे है भ्रष्टाचारी,
वो ही पाता जो कुछ देता
ये सब काबू में आ जाये
एसा हो स्पर्श तुम्हारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
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Tuesday, December 28, 2010
आओ चैन से नींद ले
आओ चैन से नींद ले
रात के हर प्रहार
बढ़ता ही जा रहा है
कोहरे का कहर
कोहरा बे इमानी का ,
भ्रष्टाचार का
कोहरा आतंक का ,नक्सलवाद का
कोहरा महगाई का छा रहा है
सबको रुला रहा है
हम ये करेगे, हम वो करेगे
करेगे खाख, सिर्फ भाषण देंगे
सारे नेता आँख बंद किये बैठे है
हम भी आँखे मीन्द ले
आओ चैन से नींद ले
प्याज के छिल्को की तरह,
परत दर परत
खुलता ही जा रहा है,
भ्रष्टाचार का पिटारा
क्या करे आम आदमी बिचारा
होगा वो ही जो होना है
फिर काहे का रोना है
हमको कोई नहीं देख रहा है
यही सोच कर हम भी
रेत में मुह छुपा
शतुरमुर्ग के मानिंद ले
आओ चैन से नींद ले
रात के हर प्रहार
बढ़ता ही जा रहा है
कोहरे का कहर
कोहरा बे इमानी का ,
भ्रष्टाचार का
कोहरा आतंक का ,नक्सलवाद का
कोहरा महगाई का छा रहा है
सबको रुला रहा है
हम ये करेगे, हम वो करेगे
करेगे खाख, सिर्फ भाषण देंगे
सारे नेता आँख बंद किये बैठे है
हम भी आँखे मीन्द ले
आओ चैन से नींद ले
प्याज के छिल्को की तरह,
परत दर परत
खुलता ही जा रहा है,
भ्रष्टाचार का पिटारा
क्या करे आम आदमी बिचारा
होगा वो ही जो होना है
फिर काहे का रोना है
हमको कोई नहीं देख रहा है
यही सोच कर हम भी
रेत में मुह छुपा
शतुरमुर्ग के मानिंद ले
आओ चैन से नींद ले
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
भ्रष्टाचार खड़ा मुह बाये
महगाई ने पग पसराए
लूटपाट और रिश्वतखोरी
आज कर रहे है मुह्जोरी
बेईमानी इतनी फैली
लगती है हर गंगा मैली
ये हो जाये नो दो ग्यारह
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
उठा रहे है सर आतंकी
वर्षा होती काले धन की
पग पग पर जनता का शोषण
बढता ही जा रहा प्रदूषण
एसा सूरज बन कर चमको
दूर हटादो सारे तम को
दो हज़ार बारह आने तक
हो जाये सबकी पोबारह
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
भ्रष्टाचार खड़ा मुह बाये
महगाई ने पग पसराए
लूटपाट और रिश्वतखोरी
आज कर रहे है मुह्जोरी
बेईमानी इतनी फैली
लगती है हर गंगा मैली
ये हो जाये नो दो ग्यारह
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
उठा रहे है सर आतंकी
वर्षा होती काले धन की
पग पग पर जनता का शोषण
बढता ही जा रहा प्रदूषण
एसा सूरज बन कर चमको
दूर हटादो सारे तम को
दो हज़ार बारह आने तक
हो जाये सबकी पोबारह
ऐसे आओ तुम सन ग्यारह
Sunday, December 26, 2010
मै भारत का जन मन गण हूँ
मै भारत का जन मन गण हूँ
जो चुनाव में दिया गया था ,निभा नहीं वो आश्वाशन हूँ
या फिर किसी भ्रष्ट नेता का ,स्विस खाते में संचित धन हूँ
कई करोडो के घपले का ,मै टू जी का स्पेक्ट्रम हूँ
कामन वेल्थ ,कमाया सब ने ,उन खेलो का आयोजन हूँ
खुल कर खेल रहा सत्ता का भ्रष्टाचारी गठबंधन हूँ
हर दिन जो बढ़ती जाती है,महगाई की मार, चुभन हूँ
सोसायटी आदर्श जहाँ पर ,आदर्शों का हुआ हनन हूँ
दुशाशन के कारण होता ,मै जनता का चीरहरण हूँ
गठबंधन की मजबूरी में ,मन मसोसता ,मनमोहन हूँ
मै भारत का जन मन गण हूँ
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जो चुनाव में दिया गया था ,निभा नहीं वो आश्वाशन हूँ
या फिर किसी भ्रष्ट नेता का ,स्विस खाते में संचित धन हूँ
कई करोडो के घपले का ,मै टू जी का स्पेक्ट्रम हूँ
कामन वेल्थ ,कमाया सब ने ,उन खेलो का आयोजन हूँ
खुल कर खेल रहा सत्ता का भ्रष्टाचारी गठबंधन हूँ
हर दिन जो बढ़ती जाती है,महगाई की मार, चुभन हूँ
सोसायटी आदर्श जहाँ पर ,आदर्शों का हुआ हनन हूँ
दुशाशन के कारण होता ,मै जनता का चीरहरण हूँ
गठबंधन की मजबूरी में ,मन मसोसता ,मनमोहन हूँ
मै भारत का जन मन गण हूँ
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Friday, December 24, 2010
वो बात जवानी वाली थी
वो बात जवानी वाली थी
तुम्हारे कोमल हाथो का
स्पर्श बड़ा रोमांचक था
तन में सिहरन भर देता था
मन में सिहरन भर देता था
कुछ पागलपन भर देता था
और जब गुबार थम जाता था
तब कितनी राहत मिलती थी
अब आई उम्र बुढ़ापे की
तुम भी बूढी, मै भी बूढ़ा
जब पावों में होती पीड़ा
तुम हलके हलके हाथो से
जब मेरे पाँव दबाती हो
सारी थकान मिट जाती है
या फिर झुर्राए हाथों से
तुम मेरी पीठ खुजाती हो
सारी खराश हट जाती है
स्पर्श तुम्हारे हाथों का
अब भी कितनी राहत देता
तुम भी वोही, हम भी वोही
ये सारा असर उमर का है
तुम्हारे कोमल हाथो का
स्पर्श बड़ा रोमांचक था
तन में सिहरन भर देता था
मन में सिहरन भर देता था
कुछ पागलपन भर देता था
और जब गुबार थम जाता था
तब कितनी राहत मिलती थी
अब आई उम्र बुढ़ापे की
तुम भी बूढी, मै भी बूढ़ा
जब पावों में होती पीड़ा
तुम हलके हलके हाथो से
जब मेरे पाँव दबाती हो
सारी थकान मिट जाती है
या फिर झुर्राए हाथों से
तुम मेरी पीठ खुजाती हो
सारी खराश हट जाती है
स्पर्श तुम्हारे हाथों का
अब भी कितनी राहत देता
तुम भी वोही, हम भी वोही
ये सारा असर उमर का है
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