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Friday, February 25, 2011
Wednesday, February 23, 2011
मुझको तेरा प्यार मिल गया
मुझको तेरा प्यार मिल गया
एक नया संसार मिल गया
बहुत अकेला था बिन तेरे
लगा सात ,अग्नि के फेरे
सात जनम संग संग रहने के
सपनो को आकर मिल गया
मुझको तेरा प्यार मिल गया
प्यार भरी जीवन राहों में
तुझको भर अपनी बाहों में
जैसे मैंने चाँद पा लिया
करने को अभिसार मिल गया
मुझको तेरा प्यार मिल गया
पूर्ण हुई इच्छा मन चाही
पाया तुम जैसा हमराही
जीवन पथ पर साथ तुम्हारे ,
चलने का अधिकार मिल गया
एक नया संसार मिल गया
बहुत अकेला था बिन तेरे
लगा सात ,अग्नि के फेरे
सात जनम संग संग रहने के
सपनो को आकर मिल गया
मुझको तेरा प्यार मिल गया
प्यार भरी जीवन राहों में
तुझको भर अपनी बाहों में
जैसे मैंने चाँद पा लिया
करने को अभिसार मिल गया
मुझको तेरा प्यार मिल गया
पूर्ण हुई इच्छा मन चाही
पाया तुम जैसा हमराही
जीवन पथ पर साथ तुम्हारे ,
चलने का अधिकार मिल गया
>कभी कभी मेरा मोबाईल
<h2>कभी कभी मेरा मोबाईल
मुझको बड़ी प्रेरणा देता
करो बेटरी को रिचार्ज तुम
जब मुझको संदेशा देता
कभी कभी जब गलती से मै
भटक दायरे से जाता हूँ
नेटवर्क से बाहर हो तुम
वो मुझको झट चेता देता
दिन भर भाग दोड़ से डर कर
स्लीप मोड में मै जाता हूँ
वाईब्रेशन मोड हिला कर
मुझको नयी चेतना देता
इंटरनेट,फेसबुक,ट्विटर
गाने,वीडियो और केमरा,
सारी दुनिया मुट्ठी में है
मुझको बड़ा होंसला देता
कभी कभी मेरा मोबाईल
मुझको बड़ी प्रेरणा देता</h2>
,
मुझको बड़ी प्रेरणा देता
करो बेटरी को रिचार्ज तुम
जब मुझको संदेशा देता
कभी कभी जब गलती से मै
भटक दायरे से जाता हूँ
नेटवर्क से बाहर हो तुम
वो मुझको झट चेता देता
दिन भर भाग दोड़ से डर कर
स्लीप मोड में मै जाता हूँ
वाईब्रेशन मोड हिला कर
मुझको नयी चेतना देता
इंटरनेट,फेसबुक,ट्विटर
गाने,वीडियो और केमरा,
सारी दुनिया मुट्ठी में है
मुझको बड़ा होंसला देता
कभी कभी मेरा मोबाईल
मुझको बड़ी प्रेरणा देता</h2>
,
Tuesday, February 22, 2011
सत्तरवें जन्म दिन पर
पल पल करके ,गुजर गए दिन,दिन दिन करके ,बरसों बीते
उनसित्तर की उमर हो गयी,लगता है कल परसों बीते
जीवन की आपाधापी में ,पंख लगा कर वक्त उड़ गया
छूटा साथ कई अपनों का ,कितनो का ही संग जुड़ गया
सबने मुझ पर ,प्यार लुटाया,मैंने प्यार सभी को बांटा
चलते फिरते ,हँसते गाते ,दूर किया मन का सन्नाटा
भोला बचपन ,मस्त जवानी ,पलक झपकते ,बस यों बीते
उनसित्तर की उमर हो गयी ,लगता है कल परसों बीते
सुख की गंगा ,दुःख की यमुना,गुप्त सरस्वती सी चिंतायें
इसी त्रिवेणी के संगम में ,हम जीवन भर ,खूब नहाये
क्या क्या खोया,क्या क्या पाया,रखा नहीं कुछ लेखा जोखा
किसने उंगली पकड़ उठाया,जीवन पथ पर किसने रोका
जीवन में संघर्ष बहुत था ,पता नहीं हारे या जीते
उनसित्तर की उमर हो गयी,लगता है कल परसों बीते
Sunday, February 20, 2011
उमर का आलम
उमर का हमारी ये कैसा है आलम
सत्तर का है तन और सत्रह का मन
रंगे बाल हमने,किया फेशियल है
छुपाये न छुपती,मगर ये उमर है
होता हमारा ये दिल कितना बेकल
हसीनाएं कहती,जब बाबा या अंकल
करे नाचने मन,मगर टेढ़ा आँगन
उमर का हमारी ये कैसा है आलम
बहुत गुल खिलाये ,जवानी में हमने
उबलता था पानी,लगी बर्फ जमने
भले ही न हिम्मत बची तन के अन्दर
गुलाटी को मचले है ,मन का ये बन्दर
कटे पर है ,उड़ने को बेताब है मन
उमर का हमारी ,ये कैसा है आलम
सत्तर का है तन और सत्रह का मन
रंगे बाल हमने,किया फेशियल है
छुपाये न छुपती,मगर ये उमर है
होता हमारा ये दिल कितना बेकल
हसीनाएं कहती,जब बाबा या अंकल
करे नाचने मन,मगर टेढ़ा आँगन
उमर का हमारी ये कैसा है आलम
बहुत गुल खिलाये ,जवानी में हमने
उबलता था पानी,लगी बर्फ जमने
भले ही न हिम्मत बची तन के अन्दर
गुलाटी को मचले है ,मन का ये बन्दर
कटे पर है ,उड़ने को बेताब है मन
उमर का हमारी ,ये कैसा है आलम
Saturday, February 19, 2011
मैंने तुम पर प्यार लुटाया ,बस ऐसे ही
मैंने तुम पर प्यार लुटाया ,बस ऐसे ही
जाने क्यों तुम पर दिल आया ,बस ऐसे ही
बसंती ऋतू ,मुस्काती थी ,महक रही थी
कूक रही थी कोयल ,चिड़िया चहक रही थी
मस्त पवन के मदमाते झोके आते थे
भंवरे गुंजन कर फूलों पर मंडराते थे
खेत सुनहरी सरसों के सरसाये ही थे
गेहूं की बाली में दाने आये ही थे
तुमने मादक अंगडाई ली थी अलसा कर
तिरछी नज़रों से देखा था ,कुछ मुस्का कर
उगते सूरज में सोने सा रूप लगा था
मेरे मन में ,प्यार तुम्हारे लिए जगा था
मुझ पर था खुमार सा छाया ,बस ऐसे ही
मैंने तुम पर प्यार लुटाया ,बस ऐसे ही
जाने क्यों तुम पर दिल आया ,बस ऐसे ही
बसंती ऋतू ,मुस्काती थी ,महक रही थी
कूक रही थी कोयल ,चिड़िया चहक रही थी
मस्त पवन के मदमाते झोके आते थे
भंवरे गुंजन कर फूलों पर मंडराते थे
खेत सुनहरी सरसों के सरसाये ही थे
गेहूं की बाली में दाने आये ही थे
तुमने मादक अंगडाई ली थी अलसा कर
तिरछी नज़रों से देखा था ,कुछ मुस्का कर
उगते सूरज में सोने सा रूप लगा था
मेरे मन में ,प्यार तुम्हारे लिए जगा था
मुझ पर था खुमार सा छाया ,बस ऐसे ही
मैंने तुम पर प्यार लुटाया ,बस ऐसे ही
Friday, February 18, 2011
ये उमर बुढ़ापे की भी होती कमाल है ,
कहने को तो हम हो रहे सत्तर की उमर के
दिल की उमर अभी भी सिर्फ सत्रह साल है
है बदन बदहाल और तन पर है बुढ़ापा ,
लेकिन मलंगी मन में ,मस्ती है ,धमाल है
हो जाए बूढा कितना भी लेकिन कोई बन्दर,
ना भूले मारने का गुलाटी खयाल है
जब भी कभी हम देखते है हुस्न के जलवे
बासी कढी में फिर से आ जाता उबाल है
ये बात सच है आजकल गलती है देर से,
लेकिन कभी ना कभी तो गल जाती दाल है
ना कोई चिंता है किसी की ,ना ही फिकर है
ये उमर बुढ़ापे की भी होती कमाल है
,
दिल की उमर अभी भी सिर्फ सत्रह साल है
है बदन बदहाल और तन पर है बुढ़ापा ,
लेकिन मलंगी मन में ,मस्ती है ,धमाल है
हो जाए बूढा कितना भी लेकिन कोई बन्दर,
ना भूले मारने का गुलाटी खयाल है
जब भी कभी हम देखते है हुस्न के जलवे
बासी कढी में फिर से आ जाता उबाल है
ये बात सच है आजकल गलती है देर से,
लेकिन कभी ना कभी तो गल जाती दाल है
ना कोई चिंता है किसी की ,ना ही फिकर है
ये उमर बुढ़ापे की भी होती कमाल है
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