Wednesday, May 4, 2011

सा पर बा भारी पड़ता है

सा पर बा भारी पड़ता है
----------------------------
 बाल सदा है सर के ऊपर,सूरज को ढक लेते बादल
बा याने बीबी भारी है,श याने हर एक शोहर पर
सूखे पर बारिश है भारी,शातिर पर भारी बम बारी
सा याने की ओसामा पर,बहुत पड़े ओबामा भारी

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Tuesday, May 3, 2011

सच ,तुम जैसी हो ,बड़ी अच्छी हो

जब मै सोया होता हूँ,
तो मुझे झझकोर कर,
यूँ तो तुम मुझे कई बार जगाती हो
शायद मेरे खर्राटों से तंग होकर,
या बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने के लिए,
या चाय का प्याला ठंडा न हो जाये इसलिए,
लेकिन कभी कभी जब तुम मुझे,
प्यार से सहला कर,यूँ ही जगा देती हो
तो तुम्हारी ये मादक जगाहट,
सचमुच मुझे निहाल कर देती है
या कभी जब तुम सज धज कर,
मेरे सामने आती हो
और तुम्हारे बिना पूछे की तुम कैसी लग रही हो
मै तुम्हारी तारीफ़ कर देता हूँ
तो तुम्हारे चेहरे पर आई ,संतुष्टि की मुस्कान
सच मुच बड़ी लुभावनी होती है
या जब नौकर या कामवाली बाई के ना आने पर
जब तुम बहुत व्यस्त और पस्त हो जाती हो
तो तुम्हारे कामो में मेरे  थोड़े से हाथ बँटा देने पर
तुम्हारी आँखों में आया धन्यवाद् का भाव
मुझे कितना गदगद कर देता है
या फिर जब कभी भी तुम मिठाई बनाती हो,
और मेरे डाईबिटिक होने के बावजूद भी
मीठी मीठी मनुहार कर
पहले मुझे चखाती हो
सच जीवन में कितना मिठास भर जाता है
या फिर तुम्हारे बिना जिद किये ,
जब मै तुम्हारे लिए कोई साडी या गहना,
तुम्हे सरप्राईज गिफ्ट देने को ले आता हूँ
तो तुम्हारा मुझ से ख़ुशी से लिपट जाना
कितना रोमांचक होता है
कभी कभी जब मेरी कुछ बात
तुम्हारी समझ में नहीं आती
पर तुम मुस्कराकर समझ जाने का अभिनय करती हो
तब कितनी समझदार लगती हो
और जब मेरी शरारत के जबाब में
तुम भी शरारत पर उतर आती हो
तो जिंदगी में कितना आनंद आ जाता है
बस तुम इसी तरह
मेरी जिंदगी में
हंसी ख़ुशी और रस की बरसात करती रहना
क्योकि तुम मुझ से बे इन्तहां मोहब्बत करती हो
और दिल की सच्ची हो
सच ,तुम जैसी हो ,बड़ी अच्छी हो

मदन मोहन बहेती 'घोटू'





Monday, May 2, 2011

अवहेलना

 क्या आपने कभी,
अपनी एक  दो दिन की बड़ी
दाढ़ी पर हाथ फेरा है
खुरदरे ,कंटीले ,चुभने वाले बाल
जिन्हें बार बार काटने को जी चाहता है
और हम उन्हें काटते भी हैं
पर निर्लज्ज फिर बढ जाते है
और लगते है चुभने
ये ही बाल,जब काटे नहीं जाते
तो बढ़ जाते है रेशमी मुलायम होकर
जिन्हें बार बार सहलाने को जी चाहता है
आदमी का छोटापन ,
उसे बना देता है
एक दो दिन की बढ़ी दाढ़ी के जैसा
खुरदुरा ,कंटीला और चुभने वाला
और उसका बढ्प्पन,उसे बनाता है
रेशमी ,मुलायम बालों जैसा
सबके मन को लुभानेवाला.
तो क्यों न हम,
छोटे लोगों के टुच्चे पन की तरफ
ध्यान ही न दें
शायद हमारी यह अवहेलना ही
उन्हें रेशमी  ,मुलायम बनादे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

रावण हर युग में मरता है

रावण हर युग में मरता है
-------------------------------
कितना ही हो ज्ञानी ,ध्यानी,कितनी ही भाषा का ज्ञाता
किन्तु बुद्धि यदि विध्वंशक हो ,सारा ज्ञान धरा रह जाता
ट्विन टॉवर पर हो हमला या,सीताजी का हुआ अपहरण
ओसामा बिन लादेन या फिर ,हो दशमुख लंकापति रावण
किन्तु कर्म हो अगर अधर्मी,करनी का फल मिलता ही है
ओसामा बिन   हो या रावण,  दुष्ट हमेशा   मरता   ही  है
आतंकी ,आतंकवाद को,एक दिन झुकना ही पड़ता है
त्रेता युग हो या फिर कलयुग, रावण हर युग में मरता है

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Sunday, May 1, 2011

सवेरे सवेरे

        सवेरे सवेरे
----------------------
रात के बासीपन की,
भीनी भीनी खुशबू
और सवेरे की ताजगी की
सोंधी सोंधी सुगंध,
उनींदी पलकें,
अनसंवारी अलकें
और अपनी सुघड़ता के प्रति,
अनजानी लापरवाही
आलस भरी अंगड़ाइयों में
उमड़ता हुआ आव्हान,
सुनो,
कहीं चाय का प्याला ,
ढलक न जाए

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

हनुमान जी के मंदिर में

हनुमान जी के मंदिर में
----------------------------
             १
एक कंवारी कन्या
श्रद्धा भरे दिल में
हर मंगलवार को जाती थी
हनुमान जी के मंदिर में
पूजन के बाद
चढ़ाती थी प्रशाद
माथे पर सिन्दूर का टीका लगा
मांगती थी आशीर्वाद
हे प्रभु!मेरी इच्छा पूरी करदो
अच्छा सा वर दो
आपके प्रशाद का ये जो टीका
मै लगाती हूँ अपने माथे पर
उसे थोडा ऊँचा करवा दो
मेरी मांग में भरवा दो
           2
हनुमान जी के एक परम भक्त
प्रभु ध्यान में अनुरक्त
रोज हनुमान मंदिर जाते थे
हनुमान चालीसा गाते थे
चाहते थे बस इतना
जैसे राम के साथ  हनुमान पूजे जातें है,
ये भी बॉस के साथ पूजे जाये उतना
प्रभु की कृपा से एक दिन हुई अंतर प्रेरणा
बॉस को अपने कन्धों पर बताओ
उनके काम के लिए ,दूसरों का ग्राम जलाओ
बॉस की बीबी के लिए,समंदर भी लाँघ जाओ
उनके भाई बंधू के लिए पहाड़ भी उठाओ
बस,बॉस की अनुकंपा होगी अक्षुण
और बॉस के साथ पूजे जाओगे तुम
                    ३
हाथ जोड़ विनती करे,श्री बजरंगीलाल
एन.आर.आइ.बनादो,हमको दीनदयाल
हमको दीनदयाल ,कृपा हो जाए तुम्हारी
मंदिर में लटका दूं झालर डालर वाली
वर्क परमिट दिलवा दो ,प्रभु ,दिलवादो वीसा
अमेरिका में फैला दूं,हनुमान चालीसा

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

आम

                       1
काट कर टुकड़े किये,कांटा चुभाया,खा लिया
फल के राजा आम को ,ऐसे नहीं खाते मियां
हाथ में ले गिल बिलाओ,पियो रस की घूंट टिया
आम का असली मज़ा है,चूसने में   गुट टिया
      
                  2
आम  फलों का राजा होता है
ये जो आम होता है
बड़ा ही ख़ास होता है
ऐसा फलों में ही क्यों होता है?
ऐसा इंसानों में क्यों नहीं होता?
वह दिन जाने कब आएगा?
जब आम आदमी भी खास बन जाएगा

  madan mohan baheti'ghotoo'