Thursday, May 19, 2011

मेरे घर, गमले की भिन्डी

मेरे घर गमले की भिन्डी
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मैंने अपने घर,गमले में
बोया बीज एक भिन्डी का
बड़े प्रेम से उसको सींचा
एक दिन देखा,
एक नन्ही कोंपल मुस्काई
मन में कितनी खुशियाँ छाई
धीरे धीरे एक नन्हा पौधा विकसा था
और एक दिन ,एक पीला सा फूल खिला था
एसा लगा की एक नन्ही सी कोई परी है
पीली पीली फ्रोक पहन कर नाच रही है
धीरे धीरे एक छोटी सी भिन्डी विकसी
हरे रंग की ,कोमल कोमल,और नाजुक सी
सुबह सुबह उठाते ही जाती,
उस गमले के नित्य पास मै
उत्सुकता से देखा करती,
रोज रोज उसका विकास मै
धीरे धीरे भिन्डी विकसी,लिए छरहरी सुन्दर काया
तब मेरे मन ने समझाया
इसे पकाले,वर्ना यदि ये पक जायेगी
कोई काम नहीं आएगी
इतने दिन का सब रोमांच,
रह गया बन कर सिर्फ याद था
हाँ, उस दिन सब्जी में आया बड़ा स्वाद था

मदन मोहन बहेती 'घोटू'


 

Wednesday, May 18, 2011

एक प्यासे कौवे की कथा-एक सूखी गगरी की व्यथा

ओ बेदर्दी!ओ बेदर्दी!
तुमने अपनी प्यास बुझाली,लेकिन मेरी मुश्किल कर दी
ओ बेदर्दी! ओ बेदर्दी!
कौन गाँव और कौन ठांव से,आये थे तुम प्यासे कागा
भोली भाली कांव कांव सुन ,प्यार मेरे मन में भी जागा
प्यासी आँख बिसुरती देखी,सूखे पांख फड़कते देखे
आकुल व्याकुल तन मन देखा ,नैना नीर तरसते देखे
मुझको देख अकेला छत पर,मन ही मन थे तुम मुस्काये
चमक आ गयी थी आँखों में,सच तुम थे कितने हर्षाये
आये झटपट,उड़ कर छत पर,बैठे ,इधर उधर कुछ ताका
सहमे ,धीरे धीरे बढ़ कर,मेरे मन अंतर में झाँका
देखा जीवन,मेरे उर में,सूनापन और भरी जवानी
मेरी तब नादान उमर थी,था छिछला छिछला ही पानी
तुम्हारा  अपना मतलब था ,तुम को थी निज प्यास बुझानी
लेकिन प्यार समझ मै बैठी,ये मेरी ही थी नादानी
मैंने सोचा,मै माटी की गुडिया,क्षण भर जीवन मेरा
अगर किसी के काम आ सकूं, होगा पूर्ण समर्पण मेरा
फिर तुम्हारी, प्यार भरी नज़रों ने था बेचैन कर दिया
तुम उड़ जाते,प्यार जताते,चुग चुग लाते थे कांकरिया
तुम्हारी ये प्रेम भेंट पा,मेरा मन भर भर जाता था
मै विव्हल सी ,हो जाती थी,प्रेम नीर ऊपर आता था
कुछ पागलपन ,एसा छाया,हम दोनों का,धीरज टूटा
और एक पल एसा आया,तुमने मेरा ,सब कुछ लूटा
 इतनी भाव विभोर हुई मै,मुझको कुछ भी होंश नहीं था
थोड़ी गलती ,मेरी भी थी,तुम्हारा सब दोष नहीं था
मै तो सपनों में खोई थी,आँख खुली जब सपना भागा
देखा तो तुम चले गए थे,अपनी प्यास बुझा कर कागा
 पल भर को तो चोंक गयी मै,विरह वेदना में थी खोयी
बेदर्दी थी,याद तुम्हारी ,मै कितने ही ,आंसू रोयी
पर तुमको आना ही कब था ,लोभी थे,रस के ,अवसर के
मैंने अपने उर में झाँका ,केवल कंकर ही कंकर थे
इसी झूठन बना गए तुम,नहीं किसीने भी अपनाया
हाय अभागन,रही बिलखती,बचा खुचा सब नीर सुखाया
सब जीवन रस ,सूख चुका अब,रस की जैसे याद रह गयी
तुमने तो नव जीवन पाया ,पर मै तो ,बर्बाद रह गयी
तुम तो बुद्धिमान कहाए ,मै मूरख रह गयी बिलखती
तुमने अपनी प्यास बुझाली ,लेकिन मेरी मुश्किल कर दी
  ओ बेदर्दी! ओ बेदर्दी!

मदन मोहन बहेती'घोटू'

Tuesday, May 17, 2011

मेरी जानू तेरे मन में क्या है,ये मै कैसे जानू?

मेरी जानू
तेरे मन में क्या है,ये मै कैसे जानू?
तेरी सुषमा
पैदा करती मुझमे ऊष्मा
तेरी खुशबू
कर देती मुझको बेकाबू
तेरा सपना
लगता मुझको बिलकुल अपना
और तेरे लब
मद के प्याले भरे लबालब
तेरी पलकें
जिनमे सपने पलते कल के
तेरी आँखें
चुभ चुभ जाती मन में आके
तेरा चेहरा
मन में प्यार जगाता गहरा
तेरे गाने
लगते दिल में  प्यार जगाने
तेरे ताने
लगते है सरगम की ताने
 छू तेरा तन
आता है मुझ में परिवर्तन
तुम कमाल हो
और हुस्न से भरा  माल हो
तेरा यौवन
कब मह्कायेगा मेरे जीवन का मधुवन

मदन मोहन बहेती 'घोटू'



 

मैंने पाया प्यार तुम्हारा-दिलसे है आभार तुम्हारा

मैंने पाया प्यार तुम्हारा-दिलसे है आभार तुम्हारा
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मेरी साँसों के स्वर अब बेचैन हुए है
तुझको पाने आकुल व्याकुल नैन हुए है
तुमने ली मनुहार मान और नज़र झुकाली
मुझको लगता है मैंने नव निधियां पाली
तुमने मेरा प्यार कबूला,ये मन झूला
एक तुम्ही मन में छाई ,सब सुध बुध भूला
हर पल, हर क्षण,दिल में तुम्हारी आहट है
मन में पहले मधुर मिलन की घबराहट है
बसे हुए है,नयनों में बस ,सपन तुम्हारे
गीत मिलन के उमड़ रहे है,मन में सारे
प्रियवर तुम कितनी सुन्दर हो,आकर्षक हो
तुम मनहर हो,मनभावन हो ,मनमोहक हो
चहक तुम्हारी,महक तुम्हारी,दहक तुम्हारी
 कितनी अच्छी,कितनी मादक,कितनी प्यारी
तुम में मधुवन की सुगंध है,तुम में यौवन
आसक्ति,आव्हान,आलिंगन,आल्हादन
तुमसे अपरम्पार प्यार है मेरे मन में
युगों युगों की प्यास  बुझा दी,युगल नयन ने
मै खुशकिस्मत हूँ,जो पाया प्यार तुम्हारा
मेरी प्रियतम ,है दिल से आभार तुम्हारा

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

 

आओ हम मंहगाई बढायें

आओ हम महंगाई बढ़ाये
जब तक सत्ता में है,जम कर लूट मचाएं
दूध,तेल,पेट्रोल,सब्जियां,आटा,दालें
धीरे धीरे करके इनके  दाम  बढाले
क्योंकि जीवन व्यापन को ये बहुत जरूरी
इन्हें खरीदना तो है जनता की मजबूरी
सस्ती हो या महंगी,लेना आवश्यक है
थोड़े दिन तक तो होती थोड़ी दिक्कत है
स्केमो,घोटालों में जो लूटा धन था
उसकी भी भरपायी करेगी  भोली जनता
जितना भी हो सकता,करलो,इसका दोहन
लड़ना भी है ,फिर से अगली बार इलेक्शन
उसके लिए जुटाना खर्चा आवश्यक है
हारेंगे या जीतेंगे,इस में भी शक है
आने वाले पांच साल का चना चबैना
इंतजाम इन सबका है हमको कर लेना
जनता का क्या ,जनता चिल्लाती रहती है
धीरे धीरे मारो तो सब कुछ सहती है
जब चुनाव आएगा कुछ रहत कर देंगे
कुछ दिन चूसो,लालीपॉप थमा कर देंगे
भले विरोधी दल कितने चींखे चिल्लायें
आओ हम मंहगाई बढायें

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Sunday, May 15, 2011

ब्रेक के बाद --आपका भविष्य

     ब्रेक के बाद --आपका भविष्य
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टी.वी. वाले भी गजब ढाते है
पहले तो ये ख़बरें दिखाते है
पेट्रोल के दाम पांच रूपये बढे
 ढूध के दाम  दो रूपये  चढ़े
रिज़र्व बैंक ने ब्याज की दरें बढाई
इस हफ्ते फिर बढ़ी महंगाई
इस बार महंगा आम होगा
बंद के कारण सड़कों पर जाम होगा
फलों को केमिकल से ,बढ़ाते ,पकाते है
मिठाइयों में सिंथेटिक खोवा मिलाते है
इस बार गरमी का ,रिकार्ड टूट जायेगा
बिजली में कटौती होगी,पानी कम आएगा
झपट्टेमार खींच लेते गले से चेन है
बेकाबू कानून व्यवस्था ,कर रही बेचैन है
और इसके बाद,हमें  ये सुनायेंगे
ब्रेक के बाद,
आपका आपका आज का दिन कैसा रहेगा,
पंडित जी बतलायेगे

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Saturday, May 14, 2011

ट्राफिक जाम

ट्राफिक जाम
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सारे रस्ते जाम पड़े है,तेरे दिल तक आने के,
ट्राफिक सिग्नल फ़ैल हुए या हवालदार छुट्टी पर है
ह्रदय रोड पर इतना ट्राफिक ,मैंने देखा कभी नहीं,
कैसे तुझ तक पहुचूँगा मै,बहुत दूर तेरा घर है
ढूंढ रहा हूँ कोई शोर्ट कट,जिससे जल्दी आ पाऊ,
नयन द्वार तू खोले रखना,इन्तजार करना मेरा,
तू मेरे दिल में है,मै भी तेरे दिल में बस जाऊ,
जीवन की साड़ी आशाएं टिकी हुई अब तुझ पर है

मदन मोहन बहेती 'घोटू'