Monday, June 27, 2011

वर्षा गीत

वर्षा गीत
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बदल घुमड़े,घिर घिर ,घुम घुम
पानी बरसा,रिमझिम, रिमझिम
मस्तीवाला,प्यारा मौसम
बचपन नाचा,छमछम,छमछम
उछल उछल कर,छपछप,छपछप
गीली माटी,थप थप,थप थप
हाथ उठा कर,नाचें,कूदें
पकड़ रहे पानी की बूँदें
नन्हे होंठ,पुष्प से खिल खिल
किलकारी भरते,किल किल किल
राग द्वेष ना,चिंता,उलझन
कितना निश्छल,प्यारा बचपन
भोले भाले,चंचल,चंचल
हँसते गाते,हरपल,पल पल
ठुम ठुम ठुमके,कदम सुहाने
अपनी ही धुन में मस्ताने
माँ बुलाएगी,जबतक,तबतक
नाच रहें हैं,छप छप,छप छप
माँ डाटेंगी,तो रो देंगे
प्यार करेंगी,फिर हंस देंगे
सो जायेंगे,थक,थक,थक थक
माँ के आँचल,से लग लग लग

मदन मोहन बाहेती 'घोटू

Tuesday, June 21, 2011

कवितायेँ-किसम किसम की ----------------------------------

    कवितायेँ-किसम किसम की
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बिना किसी लाग लपेट,
बेईमानी,भ्रष्टाचार,
दुर्दशा दर्शाती,
        नंगी सी  कविता
दो चार पंक्तियाँ
क्षणिकाएं या दोहे,
छिपी हुई पर सार्थक,
          चड्डी सी कविता
दिल के बहुत करीब,
भावनाओं के उभार,
दर्शाती है निखार,
          चोली सी कविता
ऊपर से दिखे एक,
पर नीचे मतलब दो,
द्विअर्थी या श्लेष,
          पायजामा कविता
द्रोपदी के चीर सी,
जितना भी पढ़ते जाओ,
उतनी ही बढती जाये,
        साडी सी कविता
अलंकर आभूषित,
मन को लुभानेवाली,
शब्दों से सजी धजी,
      श्रंगार सी कविता

मदन मोहन  बाहेती 'घोटू'

Monday, June 20, 2011

सोने की चिड़िया

      सोने की चिड़िया
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एक नामी संत के शयन कक्ष से,
अड़तीस करोड़ की ,संपत्ति मिलने के बाद
आपको ,लग गया होगा अंदाज
की हमारे संतो,मंदिर और मठों के पास,
कितनी अकूत दौलत का खजाना होगा
शायद  स्विस बेंक में जमा,
काले धन से भी ज्यादा होगा
अगर कोई ईमानदार राजनेता (?)
सत्ता में आजाये
और कुछ ऐसा क़ानून बनाए जिससे
 इन मंदिर ,मठों की अपार सम्पति,
और स्विस बेंक में जमा धन,
देश के काम आजायेगा
तो भारत फिर से,
सोने की चिड़िया बन जाएगा

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

नोयडा
 

अपनो की मार

    अपनो की मार
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            १
आँखों का काजल,
वो ही चुरा सकता है
जो आँखों में बसता है
               २
अकेली लोहे की कुल्हाड़ी
बिलकुल बेबस है बेचारी
लेकिन हत्ते की लकड़ी जब लगती है
तो लकड़ी का पूरा जंगल,
काट वो सकती है
                ३
दही ,दूध का जाया है
मगर ,उसी के एक कतरे ने
दूध को भी जमाया है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
 






Sunday, June 19, 2011

गर्दभ कहे गदही से,

बैशाखनंदन ने,क्रंदन कर ,मन खोला,
                 रेंक गदही से बोला,प्यार मेरा सच्चा है
तू इतनी है प्यारी,चल चले मतवाली,
                 रूप तेरा अच्छा और गान तेरा अच्छा है
मुझे रोज करती तंग,धोबी के बेटे संग,
                 घाट चली  जाती है,दे जाती गच्चा है
गर्दभ कहे गदही से,आँख मूँद,कर जोड़,
                   सच सच बतला दे ना, तेरे मन में क्या है  

मदन मोहन बहेती'घोटू'

हाँ, हम भ्रष्ट है

हाँ, हम भ्रष्ट है
आपको क्या कष्ट है
जनता की भीड़ में,
भाषण देते हो,चिल्लाते हो
हमें भ्रष्टाचारी बताते हो
चुप रहा करो,
नहीं तो हम बता देंगे,
क्या  औकात है तुम्हारी
तुम्हे पता नहीं, हम है सत्ताधारी
कल ही हमारे प्रवक्ता,
डुगडुगीबजा कर ,
दुनिया को देंगे बता
की तुम्हारे दादा के दादा ने,
एक दलित लड़की को छेड़ा था
तुम्हारे दादा ने भी ,
किया कुछ बखेड़ा था
, तुम्हारे पिता ,जो मिठाई की दुकान चलाते थे
सिंथेटिक खोवा काम  में लाते थे
चोरी की चीनी की चासनी से,
जलेबी बनाते थे
तुम्हारी झोपड़ी में जो घांस लगायी गयी है
वो रिजर्व फोरेस्ट से चुरायी गयी है
हम इन आरोपों की जांच के लिए
 एक कमीशन भी बेठा देंगे
हमसे मत लो पंगा
जनता के बीच में,
हम को मत करो नंगा
वर्ना तुम नहीं जानते,
हम तुम्हारा जीना हराम कर सकते है
तुम्हारे हर आयोजन को,
चार जून का रामलीला मैदान कर सकते है


मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

फादर डे

फादर डे
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साल भर में
 एक दिन पिता का
एक दिन माता का,
उस दिन ,माता या पिता को,
धन्यवाद का कार्ड या भेंट देकर,
हो जाती कर्तव्य की पूर्ती है
अरे! ये तो विदेशी संस्कृति है
हमारे संस्कार तो,
हर पल ,हर दिन,
माँ बाप को समर्पित होना सिखाते है
फिर भी हम माता पिता का ऋण,
नहीं चुका पाते हैं
आज हम जो,
सांसें ले रहे है,
फलफूल रहे है,
खुशहाल और आबाद है
ये पिताजी की प्रेरणा और तपस्या है,
और माँ का आशीर्वाद है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'