Sunday, August 7, 2011

दास्ताने लालू

दास्ताने लालू
----------------
उनकी बकवास भी लोगों को भली लगती थी
उनकी  भैंसें भी  हरे नोट चरा  करती  थी
भीड़ रहती थी लगी,घर पर सदा भक्तों की
ये  तो है बात रंगीले,   सुनहरे वक्तों  की
बोलती रहती थी तूती बिहार में जिनकी
बड़ी बिगाड़ दी हालत है हार ने इनकी
नाव जो डूबी,संग छोड़ा साथ वालों ने
आया जो वक्त बुरा, छोड़ दिया सालों ने
अब तो तन्हाई में बस वक्त गुजारा करते
गए वो दिन जब मियां,फाख्ता मारा करते
खाते है बैठके बीबी के संग लिट्टी,आलू
सबकी होती है यही नियति,है हम सब लालू




मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

पूरण पूरी

पूरण पूरी
-----------
पूरी होती तो पूरी है,फिर भी मगर अधूरी है
क्योंकि दिल होता है खाली,दो परतों में दूरी है
पर जब भर जाता मिठास का,पूरण इस खाली दिल में,
तब होती सम्पूर्ण और कहलाती पूरण पूरी है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मै तो नीर भरी बदली हूँ

मै तो नीर भरी बदली हूँ
सचमुच मै कितनी पगली हूँ
मदद ताप की ले सूरज से
नीर चुराती मै सागर से
और छुपा अपने आँचल में
भटका करती इधर उधर मै
क्योंकि सिपाही नीलाम्बर के
मुझे  देखते चोरी  करते
और हवायें पीछे पड़ती
बिजली की तलवार कड़कती
और हवाओं के दबाब में
सभी चुराया हुआ माल मै
धरती पर बरसा देती हूँ
पाक साफ़ दामन करती हूँ
नीर चुराया मेरा सब पर
जब गिरता सूखी धरती पर
लोगों के चेहरे हर्षाते
नाले ,नदियाँ सब भर जाते
हरी भरी धरती  मुस्काती
खेतों में फसलें लहराती
मेरा मन हो जाता विव्हल
यदि यह है चोरी का प्रतिफल
चोरी करना  भी स्वीकार्य है
सचमुच ये तो पुण्य कार्य है
इसीलिये मै ना डरती हूँ
बार बार चोरी करती हूँ
ना बदलूंगी,ना बदली हूँ
मै तो नीर भरी  बदली हूँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Saturday, August 6, 2011

केग रिपोर्ट

राजा गए ,गए कलमाडी,जेल सभी को हो ली
अब तिहार में जा पहुंचेगी, जाने किस की डोली
          कामनवेल्थ गेम का खेला
          सबने खाया,खुल कर खेला
जिसने जब भी मौका पाया,भरली अपनी झोली
अब तिहार में जा पहुंचेगी, जाने किसकी डोली
        खर्च एक के बदले दस कर
         खूब देश को लूटा जी  भर
 लेकिन केग रिपोर्ट ने आकर,पोल सभी की खोली
अब तिहार में जा पहुंचेगी,जाने किसकी  डोली
        दाड़ी खुजा कहे मनमोहन
        पाक साफ़ है मेरा दामन
सब  आदेश मिले ऊपर से,मैंने बस हाँ  बोली
अब तिहार में जा पहुंचेगी,जाने किसकी डोली

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
                   

सौवां शतक बनाओगे कब?

सचिन जोश में आओगे कब?
सौवाँ  शतक बनाओगे  कब?
 आस लगाये बैठे है हम,
मन सब का हर्षाओगे कब?
एजबेस्टन  में घन न बरसे,
बस बरसे तो रन ही बरसे
चौके बरसे,छक्के बरसे,
वो विकेट लेने को तरसे
ये जलवा दिखलाओगे  कब?
सौवां शतक बनाओगे कब?
ये मत भूलो,अंग्रेजों ने,
हमपर राज किया बरसों तक
बहुत सताया,इसका बदला,
बल्ले के बल से ले लो अब
कीर्ति ध्वजा फहराओगे कब?
सौवां शतक बनाओगे  कब?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Friday, August 5, 2011

काले रंग की बात निराली होती है

भरी नीर से बदली काली होती है
काले रंग की बात निराली होती है
रूपगर्विता होती है गोरी बीबी,
सीधीसादी काली घरवाली होती है
काले बालों से नारी मुख की शोभा  है,
सुन्दर आँखें काली कजरारी होती है
गोरे मुख पर काला तिल शोभा देता,
रोम रोम काली रुआंली  होती है
धर  अवतार धरा पर जब प्रभु आते है,
छवि सलोनी श्यामल काली होती है
काले कान्हा,कई गोपियाँ दीवानी,
कृष्ण दीवानी राधा प्यारी होती है
मजबूती का द्योतक है काला लोहा,
सदा अडिग चट्टानें काली होती है
गहरा जल काला गंभीर सदा दिखता,
काली मूंछे भी मर्दोंवाली होती है
करती है बरसात लक्ष्मी जब धन की,
काली मावस रात दिवाली होती है
काला रंग उष्मा का शोषण करता है,
काले की तासीर निराली होती है
उजले दिन में काम काम आराम नहीं,
चैन दिलाती रातें काली होती है
बाद रात के भोर उजाली होती है
काले रंग की बात निराली होती है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Thursday, August 4, 2011

ये सरकार अगर गिरती है

ये सरकार अगर गिरती है
गिरना ही इसकी नियति है
कुछ मंत्री थे,गिरे हुए है
अब मुश्किल में घिरे हुए है
कुछ आरोपों के घेरे में
साख बचाने के फेरे में
कुछ सत्ता के मद में अंधे
कुछ के गिरेबान है गंदे
कुछ गरूर से होकर पागल
दिखा रहे है अपना सब बल
कोई खिलाडी है पहुंचे,पर
खेती को क्रिकेट समझ कर
जनता के संग खेल रहे है
महंगाई हम झेल रहे है
जनता त्रस्त,भ्रष्ट है नेता
सेवक नहीं,बने विक्रेता
जनता करती त्राहि,त्राहि
सुरसा सी बढती मंहगाई
उधर बजाते अपना बाजा
भोंपू बने डुगडुगी राजा
इस भ्रष्टाचारी दलदल के
छींटे पड़े हुए है सबपे
इनके नेता मगर,मौन है
जनता की सुन रहा कौन है
बातें करते गोलमोल है
प्रजातंत्र का ये मखौल है
कोंग्रेस का ग्रेस गया सब
सबको है कुसी से मतलब
लेकिन अब जनता जागी है
लगे गूंजने स्वर बागी है
जनता जान गयी गलती है
ये सरकार अगर गिरती है
गिरना ही इसकी नियति है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'