Friday, August 19, 2011

विदेशी हाथ

       विदेशी हाथ
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देश में होने वाली हर गड़बड़ी का,
ठीकरा ,विदेशों के माथे फोड़ने वाले,
एक नेता से हमने पूछा,
आपकी पत्नी का पेट फूल रहा है,
क्या बात है?
उनने बिना सोचे समझे,
अपने चिरपरिचत अंदाज में कहा,
इसमें भी विदेशी हाथ है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

हम को अब बदलाव चाहिए

हमको अब बदलाव चाहिए
काबिल और इमानदारों का,
करना हमें चुनाव चाहिए
लूटपाट के इस गिरोह का,
अब होना बिखराव चाहिए
रिश्वतखोरी और करप्शन,
में अब बस ठहराव चाहिए
भारत धन का स्विस बेंकों में,
होना बंद रिसाव चाहिए
नेताओं में देशप्रेम का,
जज्बा और लगाव चाहिए
मंहगाई की धूप प्रबल है,
हमको ठंडी छाँव चाहिए
आता,तेल,दाल,चांवल के,
होना सस्ते भाव चाहिए
दीन ,दलित,दुखिया जनता को ,
राहत के प्रस्ताव चाहिए
मिलजुल हल हो सभी समस्या,
अब ना ये टकराव चाहिए
हम को अब बदलाव चाहिए

मदन मोहन बहेती'घोटू'

क्रांति बीज

      क्रांति बीज
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मुझे अपने पोते को देना था  उपहार
और कुछ खरीदने के लिए,गया मै बाज़ार
दुकानदार से पूछा,बच्चों के लिए कोई उपहार दिखलाइये
दुकानदार बोला कोई पुस्तक ले जाइये
क्योंकि पुस्तक ज्ञान का भण्डार होती है
सबसे अच्छा उपहार होती है
या फिर कोई खिलौना जैसे उड़ने वाला हेलिकोफ्टर
या रोबोट जो चलता है अपने पैरों पर
या फिर आप ले लीजिये चोकलेट
सभी बच्चों को अच्छी लगती है ये भेंट
तभी कुछ एसा दिखा,जिसे मैंने खरीद लिया,
बिना कुछ ज्यादा सोचे बिचारे
वह था एक तिरंगा झंडा,
और एक सफ़ेद टोपी,
जिस पर लिखा था 'मी हजारे'
मेरा उपहार पाकर मेरा पोता अति प्रसन्न है
और घर में गूँज रहा,
जय हिंद और वन्देमातरम् है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, August 18, 2011

अन्ना हजारे

अन्ना हजारे
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       १
शांति दूत है,ये सपूत है,भारत माँ का बेटा अन्ना
राज घाट पर,हरी घांस पर,देव दूत सा बैठा अन्ना
            इतना साथ दिया जनता ने
            घुटने टेक दिए सत्ता  ने
भ्रष्टाचार मिटाने को अब,सत्याग्रह पर बैठा अन्ना
           2
अग्नि में इतनी शीतलता,पहले कभी नहीं देखी थी
एक चेतन में इतनी दृढ़ता,पहले  कभी नहीं देखी थी
उजले कपडे वालों की,कितनी काली करतूतें देखी,
श्वेत वसन में ये निर्मलता,पहले कभी नहीं देखी थी
मौन,शांत,गंभीर,अडिग और जो हरदम रहता चोकन्ना
है व्यक्तित्व करिश्माई जो, हम उसको कहते है अन्ना

मदन मोहन बहेती'घोटू'

Wednesday, August 17, 2011

टुकड़े टुकड़े जीवन

टुकड़े टुकड़े जीवन
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बंटा हुआ है ये जीवन टुकड़ों टुकड़ों में
हमें नींद भी आती है टुकड़ों टुकड़ों में
कुछ टुकड़े झपकी के ,कुछ टुकड़े खर्राटे
और कुछ टुकड़े,करवट बदल बदल कर काटे
कुछ टुकड़े खुशियों के, कुछ टुकड़े है गम के
कुछ टुकड़े बचपन के, कुछ टुकड़े यौवन के
प्यार हमारा बंटा हुआ है टुकड़े टुकड़े
कुछ बच्चों को,जीवनसाथी को कुछ टुकड़े
अगर बचा,माँ बाप जरा सा टुकड़ा पाते
हालांकि वो बच्चों पर जी जान लुटाते
देते डाल सिर्फ रोटी के बस दो टुकड़े
दिल के टुकड़े,कर देते है  दिल के  टुकड़े
यूं ही बुढ़ापा कटता है टुकड़ों टुकड़ों में
आंसू बन, बहते दुखड़े,टुकड़ों टुकड़ों में

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

विद्रोह के स्वर

विद्रोह के स्वर
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स्वर विद्रोह के अब,उभरने लगे है
जरा सी हो आहट, वो डरने लगे है 
करे कोई इनकी,जरा भी खिलाफत,
शिकंजा उसी पर, ये कसने लगे है
तारीफ़ में खुद की ,गाते कसीदे,
बुराई सुनी तो,भड़कने लगे है
 करे कोई अनशन या सत्याग्रही हो,
डंडे उसी पर बरसने  लगे है
हुई बुद्धि विपरीत,विनाश काले,
खुद ही जाल में अपने फंसने लगे है
किये झूंठे वादे और सपने दिखाए,
हकीकत ये 'वोटर',समझने लगे है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

डुगडुगी राजा

डुगडुगी  राजा
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जब से लोगों ने दिखाए थे काले झंडे
तब से कुछ दिन तक पड़े थे ये ठन्डे
पर टी वी पर आने की लालसा इतनी प्रबल है
करने लग गए फिर से बातें अनर्गल  है
जब भी कोई विद्रोह का स्वर उठाता है
तो इनका कुनबा ,उसकी चार पुश्तों की,
जन्मपत्री खंगालने में जुट जाता है
काजल के टीके को भी,काला दाग  कह कर के,
डुगडुगी बजायेंगे
अपने गिरेबान में तो ,झाँक कर के तो देखे,
खुद को पूरा काला पायेगे
वोह तो गनीमत है की आजकल,
हाय कमांड ने लगा दिया प्रतिबन्ध है
और इनकी जुबान बंद है
वर्ना ये फिर बकवास करते कुछ ऐसे
'अन्ना के नाम में ही अन्न है,
फिर वो भूख हड़ताल पर कैसे '?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'