Tuesday, August 30, 2011

मेरी बीबी,बदली सी है

मेरी बीबी,बदली सी है
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बहुत गरजती है पहले ,फिर रस  बरसाती
मेरी बीबी इसी तरह से प्यार जताती
बिजली  सी कड़का करती है,बहुत कड़क है
माटी जैसी  मगर  मुलायम,अन्दर तक है
दग्ध ह्रदय का ताप,पीर है सब हर लेती
मुस्का,प्यार फुहार,प्रेम से बरसा देती
भिगा,प्रेम में, पागल करती,खुद हो पगली
मेरी बीबी,प्यार भरी है,सुख की बदली
यही कड़कपन,गर्जन,मन को लगे है भली
बदला सब कुछ,उम्र ,ज़माना,ये ना बदली
 


मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आदमी,संभल संभल जाता है

आदमी,संभल संभल जाता है
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कभी शर्म के मारे
कभी दर्द के मारे
दुःख और वेदना में
प्यार की उत्तेजना में
           आदमी ,पिघल  पिघल जाता है
पडोसी की प्रगति देख
दोस्त की सुन्दर बीबी देख
प्यार में दीवाने सा
शमा पर परवाने सा
            आदमी,जल जल जल जाता है
गर्मी में पानी देख
मचलती  जवानी देख
भूख में खाने को
हुस्न देख पाने को
              आदमी मचल मचल  जाता है
प्यार भरी भाषा से
अच्छे  दिन की आशा से
सुन्दर सी हिरोइन
देख ,मधुर सपने बुन
                 आदमी,बहल बहल जाता है
प्यार में सब खोकर
लगती है जब ठोकर
अपनों के दिए दुःख से
और हवाओं के रुख से
                    आदमी संभल संभल जाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'



 

शांति से क्रांति

शांति से क्रांति
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आज देश में,अग्निवेश में,कितने ही जयचंद छुपे है
दुराग्रही और अड़ियल कितने,कुटिलों को हम जान चुके है
ये चाहे जो करे कोई भी,नहीं विरोध प्रकट कर सकता
वरना तुमको गाली देने,रहते है तैयार  प्रवक्ता
कहने को तो जन प्रतिनिधि है,पर करते हैं तानाशाही
लूट खसोट हो रही कितनी,कितनी बढ़ा रहे मंहगाई
गीता कहती,जब धरती पर,घटता धर्म,पाप बढ़ता है
करने तभी धर्म की रक्षा,इश्वर को आना पड़ता  है
खुद में छुपी हुई ताकत को,जब हनुमत ने था पहचाना
लांघ समुद्र ,नहीं मुश्किल था,वापस  सीताजी को लाना
जब भी अत्याचार बढ़ा है,जागृति का संचार हुआ है
रावण हो या कंस,अंत में,सबका ही संहार हुआ है
भ्रष्टाचार मिटाने का यह,मुहीम चलाया है अन्ना ने
गाँव गाँव और गली गली में,अलख जगाया है अन्ना ने
देखो जन सैलाब उमड़ता,नयी क्रांति की राह यही है
भष्टाचार मुक्त भारत हो,जन जन की अब चाह यही है
अब जनता ,गुस्सा आने पर,तांडव ना,उपवास करेगी
और शांति से,नयी क्रांति का,उद्भव और विकास करेगी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

अनशन के बाद

 १
लालूजी ने संसद में भाषण दिया
और बतलाया कि किस तरह आक्रोश में,
जनता ने एक एम.पी.को ट्रेन से उतार दिया
सत्ताधारियों!यह तो एक ट्रेलर था,
पर इससे आप जनता के मूड को ताड़ सकते है
भष्टाचार नहीं मिटाया,
तो आज तो ट्रेन से उतारा,
कल सत्ता कि कुर्सी से उखाड़ सकते है
   २
अन्ना के अनशन के बाद,
एक जेब कतरे ने,
अपने ढंग से विद्रोह जतलाया
कि उसने तीन सांसदों कि जेब काट,
उन्हें अपना निशाना बनाया
उसने संकल्प किया है,
कि जिनने जनता कि जेब काटी है
उनसे शांतिपूर्ण ढंग से बदला लूँगा
अब सिर्फ नेताओं की ही जेब काटूँगा

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Saturday, August 27, 2011

हुंकार

हुंकार
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अब सड़कों पर उतर आई है,जनता भर कर क्रोध में
लोकपाल बिल लाना होगा,भ्रष्टाचार विरोध में
तम्हे चुना,संसद में भेजा,मान तुम्हारे वादों को
समझ नहीं पायी थी जनता,इतने भष्ट इरादों को
तुमने सत्ता में आते ही,जी भर लूट खसोट करी
कोई करे क्या,राज्य कोष को,लगे लूटने जब प्रहरी
जनसेवा को भूल ,लिप्त तुम थे आमोद प्रमोद में
अब सड़कों पर उतर आई है जनता भर कर क्रोध में
कई करोड़ों लूट ले गया,राजा  अपनी  गाडी  में
खेल खेल में,कई करोड़ों ,लूट लिए कलमाड़ी ने
आदर्शों की सोसाइटी में,आदर्शों का हनन हुआ
भष्टाचार,लूट,घोटाले,रोज रोज का चलन हुआ
कठपुतली बन,नाचे तुम,पूंजीपतियों की गोद में
अब सड़कों पर उतर आई है जनता भर कर क्रोध में
सुरसा से मुख सी मंहगाई,रोज रोज बढती जाती
 कैसे नेता हो जो तुमको,ये सब नज़र नहीं आती
 काबू इसे नहीं कर सकते,कहते हो,मजबूरी है
नहीं पास में हाथ तुम्हारे,कोई जादू की छड़ी है
बहुत त्रसित है और दुखी है,जनता है आक्रोश में
अब सड़कों पर उतर आई है,जनता भर आक्रोश में
लूट देश का पैसा कितना,स्विस बेंकों में भेज दिया
पास मगर चालीस बरसों में,लोकपाल बिल नहीं किया
शोषक जब होती है सत्ता,जन आक्रोश उमड़ता है
मिश्र,लीबिया सा गद्दी को,छोड़ भागना पड़ता है
देखो जन जन,लोग करोड़ों,अब सब हुए विरोध में
अब सड़कों पर उतर आई है,जनता भर आक्रोश में
लोकपाल बिल लाना होया,भ्रष्टाचार विरोध में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, August 25, 2011

अन्ना का अनशन-प्रतिक्रियाएं

अन्ना का अनशन-प्रतिक्रियाएं 
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                 १
जब से अन्ना ने किया है अनशन,
रिश्वत खोरों का बुरा हाल है
उन्हें खाने को कुछ नहीं मिल रहा,
उनकी भी भूख हड़ताल है
                 २
एक बूढा संत,दस दिनों से भूखा है
पर सरकार का रुख,अभी तक रूखा है
करोड़ों लोग,अन्नाजी के साथ है
पर सत्ता तो भ्रष्टाचारियों के हाथ है
सबकी मांग है कि भ्रष्टाचार मिट जाए
और जन लोकपाल बिल पास हो जाये
पर भ्रष्टाचारी कहते है कि इतनी जल्दी,
ये बिल कैसे पास कर पायेंगे
अगर भ्रष्टाचार मिट जाएगा ,तो बच्चे क्या खायेंगे
मगर वो ये नहीं समझ पा रहे है,
कि अगर भ्रष्टाचार नहीं मिटा पाए,
तो जनता उन्हें मिटा  देगी
अगले चुनाव में उन्हें,
सत्ता से हटा देगी

घोटू

Wednesday, August 24, 2011

साड़ी

साड़ी
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कई बार मै सोचा करता हूँ रातों में
नारी नर से अग्रणीय क्यों सब बातों में
घर घर वह देवी सी क्यों पूजी जाती है
नर नौकर पर नारी रानी कहलाती है
इसका कारण मुझे समझ में अब आया है
शायद यह सब केवल साडी की माया है
साडी,जी हाँ,किन्तु आप चकराते क्यों है
साडी देखी उधर नज़र ललचाते क्यों है
साडी ना,साडी वाली के गुनगाहक है
साडी को कर रहे तिरस्कृत ये नाहक है
सचमुच  ही हम  पुरुष लोग है बड़े अनाड़ी
अभी तलक पहचान ना पाए ,क्या है साडी
पेंट कोट के इस लफड़े में पड़े हुए हैं
झूंठे  फेशन के चक्कर में अड़े हुए है
अरे पेंट के बटन टूटते धोबी के घर
और पाजामे का नाड़ा भी होता बाहर
टूटे बटन सियो,नाड़े का फिर हंगामा
बतलाओ,साडी अच्छी या पेंट पाजामा
दोनों टांगें बिछुड़ा करती पाजामे में
दरजी का खर्चा होता है सिलवाने में
साडी मिला रही टांगों को ,वह भी ढक कर
निश्चित  ही साडी ही है इन सब से बेहतर
साडी,गागर,जिसमे सागर भरा हुआ है
इतने गुण है ,कि हम सब का भला हुआ है
मौका पड़ने पर चादर भी बन जाती है
खूब बिछाओ,ओढो,सभी काम आती है
'करटन' सा लटका सकते हो दरवाजे पर
सब्जी भी तुम ला सकते हो झोली  भर कर
गर्मी में आँचल का फेन बना सकते हो
बिन रुमाल के भी तुम काम चला सकते हो
झगडे कि नौबत आये तो कमर कसोगे
मौके पर फांसी का फंदा बांध सकोगे
तन ढकता है,मक्खी मच्छर दूर भगेंगे
और फट गयी,तो दो पेटीकोट बनेंगे
इतनी अच्छी,फिर भी फेशन कहलाती है
इसीलिए तो साडी सबके मन भाती है
जब गलती होती तो नाम प्रभू का लेते
पर अब गलती करने पर हम'सारी' कहते
तो क्या ये सारी या साडी देवीजी है
शायद इसीलिए नारी इन पर रीझी है
जितनी देवी कि तस्वीरें पड़ी दिखायी
कोई भी स्कर्ट धारिणी नज़र ना आयी
हो सकता है साडी ही पूजी जाती हो
या साडी के कारण वो देवी कहलाती हो
कुछ भी हो जी ,साडी सचमुच,'दी ग्रेट'है
दुःख में देती काम,मनुज की बड़ी 'पेट' है
दुःख में राजा नल के आयी कौन अगाड़ी?
साथी थी वह दमयंती की आधी साडी
चीर हरण के समय द्रोपदी पर जब बीती
लाज रखी उसकी वह भी तो साडी ही थी
यह पुराण की कथा कह रही बन कर ज्योति
पांच पति से बढ़ कर है एक साडी होती
इतनी बातें सोच आज आया हूँ कहने
मेरे पुरुष दोस्तों,हम भी साडी पहने
सच कहता हूँ,सुख और सुविधा हो जायेगी
साडी लख,साडी वाली भी ढिग आएगी
पेंट कोट में कसे कसे रहने के बदले
साडी में हम हो जायेंगे उरले,पुरले
बचत योजना है ये,खर्चा  घट जायेगा
दरजी का,धोबी का खर्चा  कट जायेगा
 आधा दर्जन साडी घर में सिर्फ रखेंगे
उलट पुलट कर मियां बीबी पहन सकेंगे
होगी इतनी बचत,योजना सफल बनेगी
खुद साडी लायेंगे,बीबी और मनेगी
एक ड्रेस में इक्वल होंगे सब नर नारी
बहुत बोअर कर दिया आपको,अच्छा,सारी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'