Monday, September 19, 2011

आजकल मेरी आँखों पर बाईफोकल चश्मा है

जवानी में,
हसीनो को,
कमसिनो को
पड़ोसिनो को,
ताकते, झांकते,
मेरी दूर की नज़र कमजोर हो गयी,
और मेरी आँखों पर,
दूर की नज़र का चश्मा चढ़ गया
बुढ़ापे तक,
अपनी बीबी को,
रंगीन टी वी को
कुछ करीबी को
पास से देखते देखते ,
मेरी पास की नज़र कमजोर हो गयी,
और मेरी आँखों पर,
पास की नज़र का चश्मा चढ़ गया
जवानी के शौक,
और बुढ़ापे की आदतें,
ये उम्र का करिश्मा है
आजकल  मेरी आँखों पर ,
बाईफोकल  चश्मा है 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

.....और लगता भूकंप आगया

.....और लगता भूकंप आगया
   ----------------------------------
अन्नाजी के आन्दोलन से
या नेताओं के अनशन से
सोनिया के वापस आने से
या अमर के जेल जाने से
                 धरती सहमी
पेट्रोल के दाम बढ़ने से
मंहगाई के ऊपर चढ़ने से
बढती हुई ब्याज की दर से
गेस के दाम बढ़ने की खबर से
                  धरती हिली
आतंकवादियों के विस्फोट से
पडोसी के मन की खोट से
घोटाले और भ्रष्टाचार से
हमारे नेताओं के  व्यवहार से
                  धरती  दहली
मंत्रियों की बढती हुई वेल्थ से
जनता की बिगडती हुई हेल्थ से
सड़कों की खस्ता हालत से
रोज रोज बढती हुई मुसीबत से
                 धरती कांपी
........ और लगता भूकंप आ गया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Sunday, September 18, 2011

अब शानू ,आशीष हो गया

पापा पापा ,मम्मी,दीदी,करता कभी नहीं थकता था
सीधा सादा,आज्ञाकारी,भोला सा प्यारा लगता था
लेकिन वोदीन बचपन के था,पर अब तो वो बड़ा हो गया
इतना बड़ा हो गया है कि,सबके ऊपर खड़ा हो गया
मेहनत और लगन से सच्ची,मंजिल पायी,सफल हुआ है
दिन दूनी और रात चोगुनी,करे तरक्की,यही दुआ है
पर लगता है धीरे धीरे ,उसमे कुछ बदलाव आ गया
इतना सब कुछ पा जाने पर,एक अहम् का भाव आ गया
इतना ज्यादा उलझ गया है,पूरा करने निज सपनो को
व्यस्त हो गया,समय नहीं है,लगा भूलने है अपनों को
भूले से भी याद न करता,अब वो बड़ा रईस  हो गया
   अब शानू ,आशीष हो गया

तुमने मेरी सुबह बना दी

तुमने मेरी सुबह बना दी
-----------------------------

तारे सारे डूब गए थे,दूर हो रहा अँधियारा था

नभ में उषा की लाली थी,सूरज उगने ही वाला था
शबनम की बूंदों के मोती ,हरित  तृणों पर चमक रहे थे
और पुष्प रजनी गंधा के,अब भी थोड़े महक रहे थे
पंछी अभी नीड़ में ही थे,अपना आलस भगा रहे थे
पुरवैया के झोंके थपकी,दे पुष्पों को जगा रहे थे
कब कलियाँ चटके और विकसे,रसिक भ्रमर थे इन्तजार में
मै भी अलसाया लेटा था, खोया सपनों के खुमार में
तुमने अपनी आँखें खोली,करवट बदली,ली अंगडाई
लतिका सी मुझसे आ लिपटी,मेरी बाहों में अलसाई
सूरज उगा,प्रखर हो चमका,तन मन में वो आग लगा दी
सुबह सुबह मुझ को सहला कर,तुमने मेरी सुबह बना दी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Wednesday, September 14, 2011

या मै जानू या तुम जानो

या मै जानू या तुम जानो
-----------------------------
हम दोनों का प्यार पुराना,
परिणिति  परिणय में बदली
पंख लगा कर उड़ते थे हम,
मै भी पगला,तुम भी पगली
और फिर जीवन चक्र चला तो,
सर पर आयी जिम्मेदारी
घर से दफ्तर,दफ्तर से घर,
भाग दौड़ ,मेहनत,लाचारी
थका हुआ आता दफ्तर से,
मुझे  प्यार से तुम सहलाती
प्यार भरा सुन्दर चेहरा लख,
मेरी सब थकान मिट जाती
नए जोश और नयी फुर्ती से,
भरने लगता मन उडान है
जब है मेरा प्यार उमड़ता,
चढ़ जाती फिर से थकान है
लगती कभी एश्वर्या तुम,
लगती कभी सायरा बानो
कैसा है ये खेल प्यार का,
या मै जानू या तुम जानो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

श्वेत किरण और सात रंग

श्वेत किरण और सात रंग
------------------------------
विधाता ने जब सृष्टि का सृजन किया,
और अपने प्रकाश पुंज की किरणों से,
मानव का निर्माण किया
तब हर मानव,प्रकाश की किरणों सा,
चमकीला,निष्कलंक और श्वेत था
 कालांतर में कुछ त्रिपार्श्व कांचो(prism ) का,
उद्भव हुआ,
जिसने प्रकाश की श्वेत किरणों को,
कई रंगों में बाँट डाला,
ये अलग अलग रंग,
अलग अलग धर्मो की पहचान बन गए
और दुनियां में एक दुसरे के बीच,
दीवारें खड़ी हो गयी
ये जगती,एक चक्र सी है,
जिसमे साफ साफ सात रंग दिखाई देते है,
अब प्रतीक्षा है,
एक ऐसे अवतार की,
जो इस चक्र को,
इतनी तेज गति से घुमा दे कि,
सातों रंग अपनी विविधता छोड़,
फिर से सिर्फ श्वेत ही दिखने लगें

मदन मोहन बहेती'घोटू' 


मैया,बहुत दिनन में आयी

(सोनिया जी के वेदेश से वापस आने पर)
              पद
            ------
मैया,बहुत दिनन में आयी
दस जनपथ सूना सूना था,समय  कटा दुःख दायी
भ्रष्टाचार हटे  जनता  ने,ऐसी मुहिम  चलायी
चिदंबरम की चल चित भयी,गयी कपिल कुटिलाई
अन्ना जी के आन्दोलन ने,सबको धूल चटायी
सभी विपक्षी एक हो गये,संसद चल ना पायी
सांसद के खरीद मुद्दे पर,अमर  जेल भिजवायी
अब चुनाव  नज़दीक आत है,जन जागृति है छायी
अब तो तुम्ही सहारा  मैया,देत न राह दिखायी
कोई लोलीपोप चुसा दो,जनता को भरमायी
सत्ता सुख भोगें राहुल को,हम पी एम बनायी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'