Saturday, March 3, 2012

प्रियतमा तुम,सिर्फ हो तुम

प्रियतमा  तुम,सिर्फ हो तुम
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हूँ प्रफुल्लित,हुआ हर्षित,महक के उन्माद से मै
मन तरगित,नहीं बंधित,अब किसी भी बाँध से मै
मै समर्पित,तुम्हे अर्पित,अर्चना का  फूल प्यारा
तुम अविरल,बहो कल कल,सरिता तुम,मै किनारा
मै क्षुधा हूँ,तुम सुधा हो,मै पलक हूँ,आँख हो तुम
बिन तुम्हारे उड़ न पाता,पंछी हूँ मै,पांख  हो तुम
मै चमत्कृत,हुआ झकृत,तुम्हारा स्पर्श पाकर
लहर सा मन में बसा हूँ,प्यार का तुम हो समंदर
तुम्हारी धुन में मगन मै,ताल हो तुम,गीत हूँ  मै
मीत हो तुम,प्रीत हो तुम,प्रणय का संगीत हूँ मै
सूर्य की तुम रश्मि सी हो,मै अकिंचन चन्द्रमा हूँ
तुम्ही से उर्जा मिली है, तभी आलोकित बना हूँ
मै शिशिर सा,ग्रीष्म सा भी,तुम बसंती मस्त मौसम
पल्लवित,हर दम प्रफुल्लित,प्रियतमा तुम,सिर्फ हो तुम

मदन मोहन बहेती'घोटू'

आज तुम ना नहीं करना

आज तुम ना नहीं करना
जायेगा दिल टूट वरना
तुम सजी अभिसारिका सी,दे रही मुझको निमंत्रण
देख कर ये रूप मोहक, नहीं  अब मन पर नियंत्रण
खोल घूंघट पट खड़ी हो,सजी अमृतघट   सवांरे
जाल डोरों का गुलाबी ,नयन में  पसरा तुम्हारे
आज आकुल और व्याकुल, बावरा  है मन मिलन को
हो रहा है तन तरंगित,चैन ना बेचैन मन को
प्यार की उमड़ी नदी में,आ गया सैलाब सा है
आज दावानल धधकता,जल रहा तन आग सा है
आज सागर से मिलन को,सरिता  बेकल हुई है
तोड़ सब तटबंध देगी,  कामना पागल हुई है
और आदत है तुम्हारी,चाह कर भी, ना करोगी
बांह में जब बाँध लूँगा,समर्पण सम्पूर्ण दोगी
चाहता मै भी पिघलना,चाहती तुम भी पिघलना
टूट मर्यादा न जाये, बड़ा मुश्किल है  संभलना
व्यर्थ में जाने न दूंगा,तुम्हारा सजना ,संवारना
केश सज्जा का तुम्हारी ,आज तो तय  है बिखरना
    आज तुम ना नहीं करना
    जायेगा दिल टूट  वरना

मदन मोहन बहेती'घोटू'

मुक्तक

मुक्तक
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  १
क्या भरोसा जिन्दगी की,सुबह का या शाम का
आज जो हो,शुक्रिया दो,उस खुदा के नाम का
गर्व से फूलो नहीं और ये कभी भूलो  नहीं,
अंत क्या था गदाफी का,हश्र  क्या सद्दाम  का
     २
नहीं सौ फ़ीसदी खालिस,इस सदी में कोई है
धन कमाने की ललक में,शांति सबकी खोई है
बीज भ्रष्टाचार के,इतने पड़े है है खेत में,
काटने वो ही मिलेगी,फसल जो भी बोई है
    ३
है बहुत सी कामनाएं,काम ही बस काम है
ना जरा भी चैन मन में,और नहीं आराम है
आप जब से मिल गए हो,एसा है लगने लगा,
जिंदगी एक खूबसूरत सी बला  का नाम है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Friday, March 2, 2012

ससुराल-मिठाई की दूकान

ससुराल-मिठाई की दूकान
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सालियाँ,नमकीन सुन्दर,और साला  चरपरा
टेड़ी सलहज जलेबी सी,मगर उसमे  रसभरा
सास रसगुल्ला रसीली,कभी चमचम रसभरी
काजू कतली उनकी बेटी,मेरी बीबी  छरहरी
और लड्डू से लुढ़कते, ससुर  मोतीचूर  हैं
हर एक बूंदी रसभरी है,प्यार से भरपूर  है
गुंझिया सा गुथा यह परिवार रस की खान है
ये मेरा ससुराल  या मिठाई  की दूकान  है
(होली की शुभकामनाये)
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, March 1, 2012

चिंतन

    चिंतन
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                1
मैल जब मन का धुलेगा,तभी मन का मेल होगा
खुलेंगे संकोच बंधन, तभी खुल कर  खेल होगा
जिंदगी की परीक्षा है, सभी को देनी पड़ेगी,
कभी कोई पास होगा,कभी कोई  फ़ैल होगा
                   २
कदम कितने ही रखोगे, देख कर या भाल कर
नाचना सबको पडेगा ,वक़्त की हर ताल पर
छूट पल में जाएगा जग,आएगा  जब बुलावा,
व्यर्थ क्यों होते परेशां, यूं ही चिंता  पाल कर
                      ३
जरा सी चिंदी मिली,चूहा नशे में चूर  है
खोल कर दूकान कपडे की बड़ा मगरूर है
जरा सी उपलब्धियों पर,इसे इठलाओ नहीं,
बहुत बढ़ना है तुम्हे और अभी दिल्ली दूर है

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

चुनाव के बाद

चुनाव   के बाद
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         १
मिनिस्टर थे,हार कर के इलेक्शन  ऐसा  लगा
गये वो दिन ,जब कि मियां मारते थे  फ़ाकता
अब समझ में आ रहा है,जिंदगी का फलसफा,
सेज फूलों की गयी और चुभे कांटे ,खामखाँ
            २
गोपियाँ थी,मस्तियाँ थी,और थे संग ग्वाल बाल
खूब मचता था बिराज में,कृष्ण का  होली धमाल
द्वारका के धीश जब से बन गये है  कृष्ण जी,
औपचारिता निभाने को लगा  लेते बस  गुलाल

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Wednesday, February 29, 2012

अबीर गुलाल
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तेरा अबीर ,तेरी गुलाल,
सब लाल लाल, सब लाल लाल
उस मदमाती सी होली में
जब ले गुलाल की झोली मै
       आया तुम्हारा मुंह रंगने
तुम सकुचाई सी बैठी थी
कुछ शरमाई  सी बैठी थी
      मन में भीगे भीगे सपने
मैंने बस हाथ बढाया था
तुमको छू भी ना पाया था
      लज्जा के रंग  में डूब गये,
      हो गये लाल,रस भरे गाल
तेरा अबीर ,तेरी गुलाल
सब लाल लाल,सब लाल लाल
मेंहदी का रंग हरा लेकिन,
जब छूती है तुम्हारा  तन,
       तो लाल रंग आ जाता है
इन काली काली आँखों में,
प्यारी कजरारी आँखों में,
      रंगीन जाल छा जाता  है
चूनर में लाली लहक रही,
होठों पर लाली दहक  रही
     हैं खिले कमल से कोमल ये,
      रखना  संभाल,पग  देख भाल
तेरा अबीर,  तेरी गुलाल
सब लाल लाल,सब लाल

मदन मोहन बाहेती'घोटू'