Wednesday, April 18, 2012

भैयाजी! स्माईल!!

      भैयाजी ! स्माईल !!

गाँव गाँव घूमे हम,किये बहुत वादे
क्लीन स्वीप करने के लेकर  इरादे
जनता को तरक्की का, सपना दिखलाया
गरीबों के झोंपड़े में,खाना भी खाया
पर लगता समझदार,हो गयी है जनता
जबानी जमा खर्च से काम नहीं बनता
गोवा भी गया  और पंजाब हारे,
यू, पी . में 'हाथ' कुचल ,निकल गयी 'साईकिल'
और टी वी वाले कहते है "भैयाजी! स्माईल!
दिल्ली में कामनवेल्थ गेम्स भी करवाये
कितने ही बड़े बड़े ,फ्लायओवर बनवाये
मेट्रो भी लाये और नयी बसें आयी
क्या करें थोड़ी  जो बढ़ गयी मंहगाई
हम तो बस रह गए 'हाथ' ही हिलाते
और एम.सी.डी.भी गयी,'कमल'के खाते
लगता है 'अन्ना 'ने,जगा दिया इनको,
दिल्ली की जनता ने ,तोड़ दिया है दिल
और टी.वी.वाले कहते है"भैयाजी! स्माईल!! 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, April 16, 2012

सपने आपके-मुसीबत बच्चों की

       सपने आपके-मुसीबत बच्चों की

कितनी ही आकांक्षाएं ,आपके बचपन में थी

जो कि पूरी हो न पायी,कामनाये मन में थी
चाहते है आप,बच्चा आपका   पूरी करे
आपके सपने अधूरों में वो नवजीवन भरे
डांस,गाना,क्रिकेट ,जुडो,सभी में परफेक्ट हो
सभी फील्डों में सफलता,एक बस ऑब्जेक्ट हो
बाप चाहे,बने वो,आइ आइ टी  इंजीनियर
चाहती माँ, जाय वो बन,कोई ऊंचा डाक्टर
जाए फारेन  ,डालरों में,कमाई पैसा करे
नाम उनका करे रोशन,काम कुछ एसा करे
छोटे से बच्चे से इतनी अपेक्षाए मत करो
उसके नाजुक कन्धों पर तुम,बोझ मत इतना धरो
करो कोशिश जानने की,उसके मन की चाह क्या
किस तरफ है लगन उसकी,ढूंढता वो राह क्या
अपने सपने उस पे मत थोंपो  वो कुम्हला  जाएगा
मज़े बचपन के भला वो किस तरह पा पायेगा
मत  करो स्पून फीडिंग,पीने दो तुम खुद उसे
अपना जीवन ,अपने ढंग से,जीने दो तुम खुद उसे
फ्रेंड  उसके ,फिलासफर और गाईड तुम बनो
उसे प्रोत्साहित करो,मत राह का रोड़ा  बनो
क्योकि उसको ,जिंदगी की दौड़ में बढ़ना है खुद
और अपनी सब लड़ाई ,को उसे  लड़ना है  खुद
आपके सपनों में बच्चा ,इस कदर पिस  जाएगा
ना इधर का रहेगा ना उधर   का रह पायेगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Sunday, April 15, 2012

आप आये जिंदगी में

        आप आये जिंदगी में
इस चमन में अब बहारें,इस कदर छाने लगी है
चांदनी भी अब यहाँ पर,उतर,इतराने  लगी है
आप आये ,जिंदगी में,फूल इतने खिल गए है,
खुशबुए हर तरफ से ही,प्यार की आने लगी है
कल तलक ग़मगीन सी थी,बड़ी ही बेचैन,बेकल,
जिंदगी,पुलकित प्रफुल्लित,आज मुस्काने लगी है
घुट रही थी मन ही  मन में,सिसकती,चुपचाप थी,
बुलबुलें फिर से चमन में,गीत अब गाने लगी है
थे अधूरे आप भी और हम भी थे पूरे   नहीं,
मिलन जब अपना हुआ तो पूर्णता आने लगी है
शीत की सिहरन गयी और तपन गर्मी की मिटी,
अब तो बारह मास ही,ऋतू  बसंती छाने लगी है
 
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

देश विदेश

          देश विदेश

गए थे तुम जिन दिनों  
नियागरा
                   उन दिनों हम घुमते थे आगरा
भ्रमण पर थे जिन दिनों तुम चीन में,
                   हमने भी कोचीन का था रुख करा
तुम गए जब टोकियो  जापान में,
                   उन दिनों हम टोंक  राजस्थान में          
 घूमते थे हम मसूरी पहाड़ पर,
                    जिन दिनों थे आप सूरीनाम  में                   
आप रियो  में थे तो रीवां में हम,
                   हम मनाली में थे तुम थे  मनीला
केन्या
में सफारी तुमने  किया,
                  कान्हा में टाइगर  हमको मिला
तुमने  आबूधाबी में शोपिंग करी,
                 हमने आबू जी में जा ,दर्शन किया
उन दिनों हम लोग थे इन्दोर में,
                 जिन दिनों तुम गये इंडोनेशिया
 आप थे दुबाई  हम मुम्बाई में,
                आप सिंगापूर, हम सिंगरूर  में
हम भ्रमण करते रहे निज देश में,
               और  तुम घूमे  विदेशी  टूर  में

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Friday, April 13, 2012

गुलाब गाथा

             गुलाब गाथा
कंटकों से भरी टहनी है ये दुनिया,
                 और जीवन फूल एक गुलाब का है
diरंग सुन्दर,बदन खुशबू से भरा है,
                 दिया तोहफा ,खुदा ने,नायाब सा है
डाल पर यदि रहोगे यूं ही अकड़ कर,
                पंखुडियां बन,बिखर जाओगे धरा पर
अगर जीवन को सफल है जो बनाना,
                 जियो जीवन तुम किसी के काम आकर
महक जायेगी तुम्हारी जिंदगानी,
                   किसी का महकाओ जीवन मुस्करा कर
कोई प्रेमी प्रेम से अभिभूत होगा ,
                    प्रेमिका के केश में  तुमको  सजा  कर
गए गुंथ जो यदि  किसी वरमाल में तुम,
                     बनोगे बंधन किसी के नेह का तुम    
 अगर बिखरोगे मिलन की सेज पर तुम,
                    पाओगे स्पर्श पागल देह का तुम
कभी अपने भाग्य पर इठलाओगे तुम,
                   बन सजावट किसी के गुलदान की तुम
या कि सज सकते हो गुलदस्ते में कोई,
                      दास्ताँ बन कर किसी पहचान कि तुम
नियति में यदि तुम्हारे जो ये लिखा है,
                      सुगंधी  कोई बदन रस चूंस   लेगा
कोई तुम को शर्करा मीठी खिला के,
                      धूप में रख कर बना    गुलकंद  देगा    
धन्य जीवन तुम्हारा हो जाएगा यदि,
                        देव चरणों  में हुआ  अर्पण तुम्हारा
है क्षणिक जीवन सभी का जिस तरह से,
                        जाएगा कुम्हला कभी भी तन तुम्हारा
कभी  केशव पर   चढोगे ,कभी शव पर,
                        कभी वैभव में  कभी श्रृगार  में तुम
जिंदगी के रंग सारे देख लोगे,
                           जीत जाओगे कभी गुंथ  हार में तुम

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

   

      

तुमने जो सहला दिया है

तुमने जो सहला दिया है

तुमने जो सहला दिया है

मन मेरा बहला दिया है
जरा से ही इशारे में,
बहुत कुछ कहला  दिया है
तुम्हारी प्यारी  छुवन ने
लगा दी है आग तन में
एक नशा सा छागया है
और मन पगला गया है
जब तुम्हारी सांस महके
जब तुम्हारे  होंठ दहके
तुम्हारी  कातिल  अदायें
तरंगें मन में  जगायें
कामनाएं  बलवती है
सांस की दूनी गति है
घुमड़ कर घन छा गए है
ह्रदय को तडफा गए   है
तुम्हे अब क्या बताएं हम
बड़ा ही बेचैन है    मन
अगर बारिश आएगी ना
प्यास ये बुझ पायेगी  ना
तुम्हारी इन शोखियों ने,
ह्रदय  को दहला दिया है
तुमने जो सहला  दिया है
मन मेरा बहला दिया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, April 12, 2012

बाल रंग कर के बूढा आया है

बाल रंग कर के बूढा आया है

देखो कैसा जूनून छाया है

बाल रंग कर के बूढा आया है
पहन ली जींस,बड़ी टाईट है
और टी शर्ट भी बड़ी फिट है
खूब परफ्यूम तन पे है छिड़का
बड़ा रंगीन है मिजाज़ इसका
गोल्ड का फेशियल कराया है
देखो कैसा जूनून छाया है
बहुत गुल खिलाये जवानी में
लगाई आग ठन्डे पानी में
आजकल बहुत कसमसाता है
स्वर्ण  की भस्म रोज़ खाता है  
देख कर हुस्न छटपटाया है
देखो कैसा जूनून छाया है
भले ही बूढा हो गया बन्दर
जोश अब भी है जिस्म के अन्दर
हरकतें मनचलों सी करता है
गुलाटी के लिए  मचलता है
बासी कढ़ी में उबाल आया है
देखो कैसा जूनून छाया है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'