माटी की महक-ऊँचाइयों की कसक
पहली पहली बारिश पर ,
माटी की सोंधी सोंधी महक
फुदकते पंछियों का कलरव,चहक
भंवरों का गुंजन
तितलियों का नर्तन
आम्र तरु पर विकसे बौरों की खुशबू
कोकिला की कुहू.कुहू
खिलती कलियाँ,महकते पुष्प
हरी घांस पर बिखरे शबनम के मोती,
या दालान में पसरी,कुनकुनी धूप
कितना कुछ देखने को मिलता था
जब मै जमीन से जुड़ा था
अब मै एक अट्टालिका में बस गया हूँ,
जमीन से बहुत ऊपर,धरा से दूर
ऊपर से अपने लोग भी बोने से ,
रेंगते नज़र आते है,मजबूर
अब ठंडी बयार भी नहीं सहलाती है
हवाये सनसनाती,सीटियाँ बजाती है
अब सूरज को लेटने के लिए दालान भी नहीं है,
वो तो बस आता है
और खिड़की से झांक कर चला जाता है
कई बार सोचता हूँ,
जमीन से इतना ऊंचा उठ कर भी,
मेरे मन में कितनी कसक है
मैंने कितना कुछ खोया है,
न भंवरों का गुंजन है,न माटी की महक है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Friday, May 11, 2012
Wednesday, May 9, 2012
यादें
यादें
रात की नीरवता में,
जब तन और मन दोनों शिथिल होतें है,
और चक्षु बंद होते है,
मष्तिष्क के किसी कोने से,
सहसा एक फाइल खुलती है
जो कभी थपकी देकर,नन्ही परी सी,
मन को सहला देती है,
या कभी कठोरता से,
मन को दहला देती है
कभी सूखते घावों की,
जमती हुई पपड़ी को,
अपने तीखे नाखुनो से खुरच,
घाव को फिर से हरा कर देती है
तो कभी रिसते घावों पर,
मलहम लगा कर राहत देती है
कभी हंसाती है,
कभी रुलाती है
कभी तडफाती है,
कभी झुलसाती है,
मीठी भी होती है
खट्टी भी होती है
कडवी भी होती है
चटपटी भी होती है
कभी पूनम की चांदनी सी
कभी मावस की कालिमा सी
कभी सुनहरी,कभी रुपहरी
कभी गुलाब की खुशबू भरी,
बड़ी ही द्रुत गति से,
जीवन के कई काल खण्डों को,
कूदती फांदती हुई,
स्मृति पटल पर ,छा जाती है,
यादें
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
रात की नीरवता में,
जब तन और मन दोनों शिथिल होतें है,
और चक्षु बंद होते है,
मष्तिष्क के किसी कोने से,
सहसा एक फाइल खुलती है
जो कभी थपकी देकर,नन्ही परी सी,
मन को सहला देती है,
या कभी कठोरता से,
मन को दहला देती है
कभी सूखते घावों की,
जमती हुई पपड़ी को,
अपने तीखे नाखुनो से खुरच,
घाव को फिर से हरा कर देती है
तो कभी रिसते घावों पर,
मलहम लगा कर राहत देती है
कभी हंसाती है,
कभी रुलाती है
कभी तडफाती है,
कभी झुलसाती है,
मीठी भी होती है
खट्टी भी होती है
कडवी भी होती है
चटपटी भी होती है
कभी पूनम की चांदनी सी
कभी मावस की कालिमा सी
कभी सुनहरी,कभी रुपहरी
कभी गुलाब की खुशबू भरी,
बड़ी ही द्रुत गति से,
जीवन के कई काल खण्डों को,
कूदती फांदती हुई,
स्मृति पटल पर ,छा जाती है,
यादें
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Friday, May 4, 2012
भगवान जी,आपका एक अवतार तो बनता है
भगवान जी,आपका एक अवतार तो बनता है
जब धरा पर पाप का भार बढ़ता है
बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ता है
राजा,सत्ता के मद में मस्त होता है
आम आदमी परेशान और त्रस्त होता है
ऋषियों के तप भंग किये जाते है
दुखी हो सब त्राहि त्राहि चिल्लाते है
भागवत और पुराण एसा कहते है
ऐसे में भगवान अवतार लेते है
चुभ रहे सबको मंहगाई के शूल है
सारी परिस्तिथियाँ,आपके अवतार के अनुकूल है
जनता दुखी है,मुसीबत ही मुसीबत है
भगवान जी,अब तो बस आपके अवतार की जरूरत है
कई बार आपके आने की आस जगी
लेकिन हर बार ,निराशा ही हाथ लगी
कंस की बहन देवकी ,कारावास गयी,
मगर कृष्ण रूप धर तुम ना आये
कई रानियाँ रोज सत्ता की खीर खा रही है,
पर राम रूप धर तुम ना आये
कितने ही पुलों के खम्बे है टूट गये
फिर भी आप नरसिंह की तरह ना प्रकट भये
प्रभु जी आपसे निवेदन है कि
जब आप अवतार ले कर आना,
मच्छ अवतार की तरह ,दिन दिन दूनी बढती,
मंहगाई की तरह मत आना
ढीठ नेताओं की तरह ,कछुवे की पीठ कर,
कच्छ अवतार की तरह मत आना
राम की तरह आओ तो आपको,
एक बात बतलाना जरूरी है
रावणों ने अपनी सोने की लंका,
स्विस बेंको में शिफ्ट करली है
व्यवस्थाएं हो रही है बेलगाम
इसलिए चाहे कृष्ण बनो,वामन या परशुराम ,
बहुत बेसब्री से इन्तजार कर रही जनता है
भगवान जी,ऐसे में आप का एक अवतार तो बनता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
जब धरा पर पाप का भार बढ़ता है
बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ता है
राजा,सत्ता के मद में मस्त होता है
आम आदमी परेशान और त्रस्त होता है
ऋषियों के तप भंग किये जाते है
दुखी हो सब त्राहि त्राहि चिल्लाते है
भागवत और पुराण एसा कहते है
ऐसे में भगवान अवतार लेते है
चुभ रहे सबको मंहगाई के शूल है
सारी परिस्तिथियाँ,आपके अवतार के अनुकूल है
जनता दुखी है,मुसीबत ही मुसीबत है
भगवान जी,अब तो बस आपके अवतार की जरूरत है
कई बार आपके आने की आस जगी
लेकिन हर बार ,निराशा ही हाथ लगी
कंस की बहन देवकी ,कारावास गयी,
मगर कृष्ण रूप धर तुम ना आये
कई रानियाँ रोज सत्ता की खीर खा रही है,
पर राम रूप धर तुम ना आये
कितने ही पुलों के खम्बे है टूट गये
फिर भी आप नरसिंह की तरह ना प्रकट भये
प्रभु जी आपसे निवेदन है कि
जब आप अवतार ले कर आना,
मच्छ अवतार की तरह ,दिन दिन दूनी बढती,
मंहगाई की तरह मत आना
ढीठ नेताओं की तरह ,कछुवे की पीठ कर,
कच्छ अवतार की तरह मत आना
राम की तरह आओ तो आपको,
एक बात बतलाना जरूरी है
रावणों ने अपनी सोने की लंका,
स्विस बेंको में शिफ्ट करली है
व्यवस्थाएं हो रही है बेलगाम
इसलिए चाहे कृष्ण बनो,वामन या परशुराम ,
बहुत बेसब्री से इन्तजार कर रही जनता है
भगवान जी,ऐसे में आप का एक अवतार तो बनता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
अभी तो मै जवान हूँ
अभी तो मै जवान हूँ
सिर्फ बाल रंगाने से आदमी जवान नहीं होता
ताक़त की दवा खाने से आदमी जवान नहीं होता
फेशियल कराने से ,आदमी जवान नहीं होता
झुर्रियां नाशक क्रीम लगाने से,आदमी जवान नहीं होता
जींस,शर्ट पहनने से ,आदमी जवान नहीं होता
लड़कियों से फ्लर्ट करने से ,आदमी जवान नहीं होता
जवानी एक जज्बा है ,जो दिल से निकलता है
जवानी एक अहसास है ,जो मन में मचलता है
जवानी तन की तरंग नहीं,मन की उमंग है
जवानी स्वच्छंद कामनाओं की लहराती पतंग है
कई जवान ,चढ़ती जवानी में भी बूढ़े दिखलाते है
कई बूढ़े ,बुढ़ापे में भी ,जवान नज़र आते है
मेरी कृष काया नहीं,मेरे जज्बात देखो
अभी मै जवान हूँ,मुझमे है कुछ बात देखो
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
सिर्फ बाल रंगाने से आदमी जवान नहीं होता
ताक़त की दवा खाने से आदमी जवान नहीं होता
फेशियल कराने से ,आदमी जवान नहीं होता
झुर्रियां नाशक क्रीम लगाने से,आदमी जवान नहीं होता
जींस,शर्ट पहनने से ,आदमी जवान नहीं होता
लड़कियों से फ्लर्ट करने से ,आदमी जवान नहीं होता
जवानी एक जज्बा है ,जो दिल से निकलता है
जवानी एक अहसास है ,जो मन में मचलता है
जवानी तन की तरंग नहीं,मन की उमंग है
जवानी स्वच्छंद कामनाओं की लहराती पतंग है
कई जवान ,चढ़ती जवानी में भी बूढ़े दिखलाते है
कई बूढ़े ,बुढ़ापे में भी ,जवान नज़र आते है
मेरी कृष काया नहीं,मेरे जज्बात देखो
अभी मै जवान हूँ,मुझमे है कुछ बात देखो
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
तिलहन,दलहन और दुल्हन
तिलहन,दलहन और दुल्हन
लोग क्लोरोस्ट्राल से घबराते है
इसलिए तेल कम खाते है
फिर भी तेल के दाम बढे जाते है
उपज कम है,इसलिए ,मंहगी है तिलहन भी
सब तरफ दाल में काला ही काला है
मंहगाई ने सबका दम ही निकाला है
दाल बिना रोटी का सूखा निवाला है
कम होती है पैदा,मंहगी है, दलहन भी
नारी तो है देवी,नारी है मातायें
लेकिन नारी को ही,अब बेटी ना भाये
नहीं रुकी कन्या के भ्रूण की हत्याएं
हो जाएगी दुर्लभ,तब मिलना दुल्हन भी
मदन मोहन बहेती'घोटू'
लोग क्लोरोस्ट्राल से घबराते है
इसलिए तेल कम खाते है
फिर भी तेल के दाम बढे जाते है
उपज कम है,इसलिए ,मंहगी है तिलहन भी
सब तरफ दाल में काला ही काला है
मंहगाई ने सबका दम ही निकाला है
दाल बिना रोटी का सूखा निवाला है
कम होती है पैदा,मंहगी है, दलहन भी
नारी तो है देवी,नारी है मातायें
लेकिन नारी को ही,अब बेटी ना भाये
नहीं रुकी कन्या के भ्रूण की हत्याएं
हो जाएगी दुर्लभ,तब मिलना दुल्हन भी
मदन मोहन बहेती'घोटू'
Wednesday, May 2, 2012
गुस्सा या शृंगार
गुस्सा या शृंगार
(घोटू के छक्के )
पत्नी अपनी थी तनी,उसे मनाने यार
हमने उनसे कह दिया,गलती से एक बार
गलती से एक बार,लगे है हमको प्यारा
गुस्से में दूना निखरे है रूप तुम्हारा
कह तो दिया,मगर अब घोटू कवी रोवे है
बात बात पर वो जालिम गुस्सा होवे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
(घोटू के छक्के )
पत्नी अपनी थी तनी,उसे मनाने यार
हमने उनसे कह दिया,गलती से एक बार
गलती से एक बार,लगे है हमको प्यारा
गुस्से में दूना निखरे है रूप तुम्हारा
कह तो दिया,मगर अब घोटू कवी रोवे है
बात बात पर वो जालिम गुस्सा होवे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Sunday, April 29, 2012
लक्ष्मी जी का परिवार प्रेम
लक्ष्मी जी का परिवार प्रेम
(समुद्र मंथन से १४ रत्न प्रकट हुए थे-शंख,एरावत,उच्च्श्रेवा ,धवन्तरी,
कामधेनु,कल्प वृक्ष,इंद्र धनुष,हलाहल,अमृत,मणि,रम्भा,वारुणी,चन्द्र और लक्ष्मी
-तो लक्ष्मी जी के तेरह भाई बहन हुए,और समुद्र पिताजी-और क्योंकि
विष्णु जी समुद्र में वास करते है,अतः घर जमाई हुए ना )
एक दिन लक्ष्मी जी,अपने पति विष्णु जी के पैर दबा रही थी
और उनको अपने भाई बहनों की बड़ी याद आ रही थी
बोली इतने दिनों से ,घरजमाई की तरह,
रह रहे हो अपने ससुराल में
कभी खबर भी ली कि तुम्हारे तेरह,
साला साली है किस हाल में
प्रभु जी मुस्काए और बोले मेरी प्यारी कमले
मुझे सब कि खबर है,वे खुश है अच्छे भले
तेरह में से एक 'अमृत 'को तो मैंने दिया था बाँट
बाकी बचे चार बहने और भाई आठ
तो बहन 'रम्भा'स्वर्ग में मस्त है
और दूसरी बहन 'वारुणी'लोगों को कर रही मस्त है
'मणि 'बहन लोकर की शोभा बड़ा रही है
और 'कामधेनु'जनता की तरह ,दुही जा रही है
तुम्हारा भाई 'शंख'एक राजनेतिक पार्टी का प्रवक्ता है
और टी.वी.चेनल वालों को देख बजने लगता है
दूसरे भाई 'एरावत'को ढूँढने में कोई दिक्कत नहीं होगी
यू.पी,चले जाना,वहां पार्कों में,हाथियों की भीड़ होगी
हाँ ,'उच्च्श्रेवा 'भैया को थोडा मुश्किल है ढूंढ पाना
पर जहाँ अभी चुनाव हुए हो,ऐसे राज्य में चले जाना
जहाँ किसी भी पार्टी नहीं मिला हो स्पष्ट बहुमत
और सत्ता के लिए होती हो विधायकों की जरुरत
और तब जमकर 'होर्स ट्रेडिंग' होता हुए पायेंगे
उच्च श्रेणी के उच्च्श्रेवा वहीँ मिल जायेंगे
'धन्वन्तरी जी 'आजकल फार्मा कम्पनी चला रहे है
और मरदाना कमजोरी की दवा बना रहे है
बोलीवूड के किसी फंक्शन में आप जायेंगी
तो भैया'इंद्र धनुष 'की छटा नज़र आ जाएगी
और 'कल्प वृक्ष'भाई साहब का जो ढूंढना हो ठिकाना
तो किसी मंत्री जी के बंगले में चली जाना
और यदि लोकसभा का सत्र रहा हो चल
तो वहां,सत्ता और विपक्ष,
एक दूसरे पर उगलते मिलेंगे 'हलाहल'
अपने इस भाई से मिल लेना वहीँ पर
और भाई 'चंद्रमा 'है शिवजी के मस्तक पर
और शिवजी कैलाश पर,बहुत है दूरी
पर वहां जाने के लिए,चाइना का वीसा है जरूरी
और चाइना वालों का भरोसा नहीं,
वीसा देंगे या ना देंगे
फिर भी चाहोगी,तो कोशिश करेंगे
तुम्हारे सब भाई बहन ठीक ठाक है,कहा ना
फिर भी तुम चाहो तो मिलने चले जाना
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
(समुद्र मंथन से १४ रत्न प्रकट हुए थे-शंख,एरावत,उच्च्श्रेवा ,धवन्तरी,
कामधेनु,कल्प वृक्ष,इंद्र धनुष,हलाहल,अमृत,मणि,रम्भा,वारुणी,चन्द्र और लक्ष्मी
-तो लक्ष्मी जी के तेरह भाई बहन हुए,और समुद्र पिताजी-और क्योंकि
विष्णु जी समुद्र में वास करते है,अतः घर जमाई हुए ना )
एक दिन लक्ष्मी जी,अपने पति विष्णु जी के पैर दबा रही थी
और उनको अपने भाई बहनों की बड़ी याद आ रही थी
बोली इतने दिनों से ,घरजमाई की तरह,
रह रहे हो अपने ससुराल में
कभी खबर भी ली कि तुम्हारे तेरह,
साला साली है किस हाल में
प्रभु जी मुस्काए और बोले मेरी प्यारी कमले
मुझे सब कि खबर है,वे खुश है अच्छे भले
तेरह में से एक 'अमृत 'को तो मैंने दिया था बाँट
बाकी बचे चार बहने और भाई आठ
तो बहन 'रम्भा'स्वर्ग में मस्त है
और दूसरी बहन 'वारुणी'लोगों को कर रही मस्त है
'मणि 'बहन लोकर की शोभा बड़ा रही है
और 'कामधेनु'जनता की तरह ,दुही जा रही है
तुम्हारा भाई 'शंख'एक राजनेतिक पार्टी का प्रवक्ता है
और टी.वी.चेनल वालों को देख बजने लगता है
दूसरे भाई 'एरावत'को ढूँढने में कोई दिक्कत नहीं होगी
यू.पी,चले जाना,वहां पार्कों में,हाथियों की भीड़ होगी
हाँ ,'उच्च्श्रेवा 'भैया को थोडा मुश्किल है ढूंढ पाना
पर जहाँ अभी चुनाव हुए हो,ऐसे राज्य में चले जाना
जहाँ किसी भी पार्टी नहीं मिला हो स्पष्ट बहुमत
और सत्ता के लिए होती हो विधायकों की जरुरत
और तब जमकर 'होर्स ट्रेडिंग' होता हुए पायेंगे
उच्च श्रेणी के उच्च्श्रेवा वहीँ मिल जायेंगे
'धन्वन्तरी जी 'आजकल फार्मा कम्पनी चला रहे है
और मरदाना कमजोरी की दवा बना रहे है
बोलीवूड के किसी फंक्शन में आप जायेंगी
तो भैया'इंद्र धनुष 'की छटा नज़र आ जाएगी
और 'कल्प वृक्ष'भाई साहब का जो ढूंढना हो ठिकाना
तो किसी मंत्री जी के बंगले में चली जाना
और यदि लोकसभा का सत्र रहा हो चल
तो वहां,सत्ता और विपक्ष,
एक दूसरे पर उगलते मिलेंगे 'हलाहल'
अपने इस भाई से मिल लेना वहीँ पर
और भाई 'चंद्रमा 'है शिवजी के मस्तक पर
और शिवजी कैलाश पर,बहुत है दूरी
पर वहां जाने के लिए,चाइना का वीसा है जरूरी
और चाइना वालों का भरोसा नहीं,
वीसा देंगे या ना देंगे
फिर भी चाहोगी,तो कोशिश करेंगे
तुम्हारे सब भाई बहन ठीक ठाक है,कहा ना
फिर भी तुम चाहो तो मिलने चले जाना
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
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