Wednesday, July 4, 2012

मार दी

        मार दी

हुस्नवाले हो गए है ,देखो कितने बेरहम,

              गिराई बिजलियाँ हम पर, नज़र तिरछी मार दी
वो भी थे कुछ में और हम भी थे कुछ सोच में,
               जरा सी गफलत हुई, आपस  में टक्कर   मार दी
 देख उनको आँख फडकी,बंद सी कुछ हो गयी,
                हम पे है आरोप हमने ,  आँख उनको   मार दी
व्यस्त थे हम देखने में ,जलवा उनके हुस्न का,
                 दिलजले ने मौका पा,पाकिट हमारी मार दी
दिखाये थे हमको उनने,सपन सुन्दर,सुहाने,
                  वक़्त कुछ देने का आया ,उनने डंडी मार दी
वोट के बदले में हमको नेताजी ने क्या दिया,
                    दाम चीजों के बढ़ा,   मंहगाई की बस मार दी
बड़ा लम्बा लेक्चर था,और वो भी बेवजह,
                    हमने देखा,हमसे कितनो ने थी झपकी  मार दी
आ रहा था बड़ा आलस,मूड था आराम का,
                     बिमारी के बहाने हमने     भी छुट्टी   मार दी
लोग इतने प्रेक्टिकल हो गये है आजकल,
                     जिसको भी मौका मिला  तो दूसरों की  मार दी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'         

Tuesday, July 3, 2012

चार दिन की चांदनी

         चार दिन की चांदनी

कौन कहता है कि होती चांदनी है चार दिन,

                         और उसके बाद फिर होती अँधेरी रात है
आसमां की तरफ को सर उठा ,देखो तो सही,
                         अमावास को छोड़ कर ,हर रात आता चाँद है
सर्दियों के बाद में चलती है बासंती हवा,
                       और  तपती गर्मियों के    बाद में  बरसात है
वो ही दिख पाता है तुमको,जैसा होता नजरिया,
                      सोच  जो आशा भरा है,  तो सफलता  साथ  है
  देख कर हालात को ,झुकना,  बदलना  गलत है,
                     आदमी वो है कि जो खुद ,बदलता    हालात है
 सच्चे मन से चाह है,कोशिश करो,मिल जाएगा,
                      उस के दर पर ,पूरी होती ,सभी की  फ़रियाद  है
      
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

तेरी रहमत चाहिये

      तेरी रहमत चाहिये

कोई नक़्शे को इमारत में बदलने के लिये,

                     थोड़ी ईंटें,थोडा गारा, थोड़ी मेहनत   चाहिये
चाँद को पाने की मन में हो  कशिश तो मिलेगा,
                     हो बुलंदी हौंसले में,  सच्ची चाहत    चाहिये
खूब सपने देखिये,अच्छा है सपने देखना,
                     सपने पूरे करने को ,करनी कवायत   चाहिये
जिंदगी के इस सफ़र में,आयेंगे रोड़े कई,
                     मन में मंजिल पाने का जज्बा और हिम्मत चाहिये
हँसते हँसते ,जिंदगी ,कट जाएगी आराम से,
                      एक सच्चे हमसफ़र  का संग,सोहबत    चाहिये
जन्म देकर ,पाला पोसा और लायक बनाया,
                     साया हो माँ बाप का सर पर,न जन्नत  चाहिये
खुदा ने बोला कि बन्दे,मांग  ले जो मांगना,
                      मैंने  बोला मिल गया तू, तेरी रहमत    चाहिये

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, July 2, 2012

तैरना

          तैरना

ये दुनिया,

पानी भरा  तालाब है
इसमें तुम जब उतरते  हो
डूबने लगते हो
पानी में हाथ पैर मारोगे,
तो बदले में पानी भी,
तुम्हे ऊपर की तरफ उछालेगा
और तुम्हारा ये हाथ पैर मारना ही,
तुम्हे डूबने से बचा  लेगा
डर को भगाओगे
तो अपने आप तैरना सीख जाओगे
क्योंकि मुझे,आपको सबको पता है
की मार के आगे भूत भी भागता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

लज्जत

             लज्जत

जो मज़ा शादी के पहले,शादी के पश्चात् क्या
लुत्फ़ भूखे पेट का वो खाना खाने बाद क्या
सौ गुना बेहतर है सन्डे से सटरडे ईवनिग,
जल्दी उठने की फिकर में,सोवो वो भी रात क्या
देती है राहत जो आती, गर्मियों के बाद में,
झड़ी लग करती परेशां, ऐसी भी बरसात क्या
गोलगप्पे का मज़ा,पानी भरो और गटक लो,
देर की और गल गये  तो बचा उनमे  स्वाद क्या
समंदर के सीने से पैदा हो सीधे   भागती,
किनारे पर लहरों का देखा मिलन उन्माद क्या
कभी आइसक्रीम,कुल्फी,दही,रसगुल्ला कभी,
मज़ा दे हर रूप में जो,दूध की  है बात क्या
खाने की लज्जत है असली,लोग कहते उँगलियाँ,
मुंह में घुलता ही न जो रह जाये  फिर वो स्वाद क्या
पकड़ ऊँगली,सीखा चलना,अब दिखाते उँगलियाँ,
साथ में बढती उमर के,  बदलते हालात  क्या

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, June 30, 2012

शिकायत

       शिकायत

बड़ी बड़ी दावतों में जाना

और जम कर पीना,खाना
तरह तरह के पकवानों का,
लेते लेते स्वाद
आदमी इतना डट कर खा लेता है,
कि खाने पीने के बाद
डकारें लेता है,पेट सहलाता है
घर आते ही बिस्तर पर,
गिरता ,सो जाता  है
ये सच है,दावत खाने के बाद,
आदमी किसी भी काम का नहीं रह जाता है

मदन मोहन बहेती'घोटू'

इतिहास दुहरा रहा है

     इतिहास दुहरा रहा है

केकैयी ने,

अपने बेटे भरत को,
राजगद्दी दिलवाने के लिए,
राम को रास्ते से हटाया
चौदह वर्षों का वनवास दिलवाया
ताकि बारात के राज्याभिषेक में,
कोई आड़े ना आ पाये
सोनिया जी ने,
अपने बेटे राहुल को,
प्रधानमंत्री बनवाने को,
प्रणव को रास्ते से हटाया
उन्हें राष्ट्रपति बनवाया
ताकि राहुल के राज्याभिषेक में,
कोई आड़े ना आ पाये
क्योंकि अगली बार जब भी मौका आता
प्रणव दादा जैसा कद्दावर व्यक्तित्व,
राहुल के रास्ते में आ जाता
वैसे तो और भी कई नेता है
पर कोई कमाई में लगा है
कोई चाटुकार है,
तो कोई आरोपों के दलदल में फंसा है
राहुल को टक्कर देनेवाला कौन बचा है?
प्रणव के राष्ट्रपति बन जाने का रास्ता साफ़ है
देखो दुहरा रहा इतिहास है

 मदन मोहन बाहेती'घोटू'