Monday, July 16, 2012

क्या जरूरी गाय घर में पालना?

    क्या जरूरी गाय घर में पालना?

क्या जरूरी गाय घर में पालना,

                      दूध मिलता है बहुत बाज़ार में
क्यों उठायें सेकड़ों हम जहमतें,
                      दूध पाने के लिए    बेकार में
चंद महीने दूध देती गाय  है,
                        कुछ दिनों के बाद होती ड्राय है
साथ में बछड़ा पड़ेगा पालना,
                        दूध पीने का  अगर जो   चाव है
दूध देती गाय मारे लात भी,
                         दूध के  संग  लात भी तो खाइये
मार  से बचना अगर है आपको,
                        प्यार से पुचकारिये, सहलाइये
 घास भी सूखी,हरी चरवाईये ,
                        दाना,पानी,खली ,बंटा दीजिये
बांध कर रखिये,न तो भग जायेगी,
                        सौ तरह की मुश्किलें सर लीजिये
सींगों से भी बचना होगा संभल कर,
                          बहुत पैनापन है  इनकी  मार में
क्या जरूरी गाय घर में पालना,
                          दूध मिलता है बहुत   बाज़ार में

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

   
 

Sunday, July 15, 2012

सत्ता का खेल

         सत्ता का खेल

मेरे मोहल्ले में,

कुछ कुत्तों ने,
 अपना कब्ज़ा जमा रखा है
जब भी किसी दूसरे मोहल्ले से,
कोई कुत्ता हमारे मोहल्ले में ,
घुसने की जुर्रत करता है,
ये कुत्ते ,भोंक भोंक कर,
उसके पीछे पड़,उसे खदेड़ देते है
पर जब ,हमारे ही मोहल्ले की,
तीसरी या चौथी मंजिल की गेलरी से,
कोई पालतू कुत्ता भोंकता है,
ये कुत्ते ,सामूहिक रूप से,
गर्दन उठा,उसकी तरफ देख,
कुछ देर तक तो भोंकते रहते है,
पर अंत में,बेबस से बोखलाए हुए,
उस घर के  नीचे की दीवार पर,
एक टांग उठा कर,
मूत कर चले जाते है
अपनी एक छत्र सत्ता को ऐसे ही चलाते है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'



Friday, July 13, 2012

मुस्कराना सीख लो

         मुस्कराना सीख लो

जिंदगी में हर ख़ुशी मिल जायेगी,

                        आप थोडा  मुस्कराना  सीख लो
रूठ जाना तो बहुत आसन है,
                      जरा रूठों  को मनाना   सीख लो
जिंदगी  है चार दिन की चांदनी,
                       ढूंढना    अपना ठिकाना  सीख लो
अँधेरे में रास्ते मिल जायेंगे,
                      बस जरा  अटकल लगाना  सीख लो
विफलताएं सिखाती है बहुत कुछ,
                    ठोकरों से  सीख पाना,    सीख लो
सफलता मिल जाये इतराओ नहीं,
                     सफलता को तुम पचाना  सीख लो
कौन जाने ,नज़र कब,किसकी लगे,
                     नम्रता सबको दिखाना सीख लो
बुजुर्गों के पाँव में ही स्वर्ग है,
                     करो सेवा,मेवा पाना सीख लो
सैकड़ों आशिषें हैं बिखरी पड़ी,
                    जरा झुक कर ,तुम उठाना सीख  लो
जिंदगी एक नियामत बन जायेगी,
                    बस सभी का  प्यार पाना  सीख लो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'



पति -दो दृष्टिकोण

         पति -दो दृष्टिकोण
      1
पति वो प्राणी है,
जो नहीं होता बीबी का नौकर
क्योंकि नौकर,
कब रहा है किसी का होकर
जरा सी ज्यादा पगार मिली,
दूसरे   का हो जाता है
पति तो प्रेम में अभिभूत,
वो शरीफ बंदा है,
जो उमर भर ,
बीबी के हुकुम बजाता है
          २
भगवान वो शक्ति है
जो इस संसार को चलाये रखती है
हम सबको है इस बात का ज्ञान
कि भावनाओं के भूखे है भगवान
हम भगवान को प्रसाद चढाते है
नाम उनका होता है पर खुद खाते है
वो मिटटी का माधो सा,मूर्ती बना,
 बिराजमान रहता है मंदिर के अन्दर
और सभी काम होते है,
उसका नाम लेकर
पति कि गती भी,
ऐसी ही होती है अक्सर
वो भी मूर्ती बना ,
चुपचाप रहता है घर के अन्दर
और उसकी पत्नी,पुजारन बनी,
उसका नाम लेकर ,
घर  का सब काम काज संभालती है
ठीक हो तो यश खुद लेती है,
गलत हो तो जिम्मेदारी उस पर डालती है
और पति मौन,
सब कुछ सहता जाता है
फिर भी मुस्कराता है
इसीलिये पति को परमेश्वर कहा जाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Wednesday, July 11, 2012

आज फिर मौसम सुहाना हो गया है

आज फिर मौसम सुहाना हो गया है

शुरू तेरा मुस्कराना  हो गया है

आज फिर मौसम सुहाना हो गया है
 जिंदगी बदली है जब से इस गली में,
शुरू तेरा आना जाना हो गया है
तरसती आँखें तेरे दीदार को,
आरजू बस तुझको पाना हो गया है
दिखा कर हुस्नो अदाये, नाज़ से,
काम  बस हमको   सताना हो गया है
अब भी आतिश है हमारे जिगर में,
जिस्म का चूल्हा पुराना हो गया है
बारिशों में भीगता देखा तुम्हे,
बेसबर ये दिल दीवाना हो गया है
ऐसी तडफन बस गयी दिल में मेरे,
हँसे खुलके,एक ज़माना हो गया है
क्या बतायें,आजकल अपना मिजाज़,
कुछ अधिक ही आशिकाना हो गया  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

कंसल्टंट(consultant )

 कंसल्टंट(consultant )

जिंदगी की राह   में कुछ लोग,

जब मुश्किलों से घिर जाते है
ठोकर खाते है और गिर जाते है
और फिर उठ कर जब खड़े होते है
उनके पास अनुभव बड़े होते है
मैदाने जंग में गिरने वाले शहसवार
जब फिर से होते है घोड़े पर सवार
अनुभवों की धूल से सन जाते है
और कुछ बने न बने,
कंसल्टंट  जरूर बन जाते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

Monday, July 9, 2012

प्याज और प्यार

          प्याज  और प्यार

प्याज                                      प्यार

आज                                       मेरे यार
कितने ही रसोईघरों में,             जीवन का
कर रहा है राज                          है सच्चा  सार
कितनी ही परतों में,                  दिल की गहराइयों में
छुपा हुआ रहता है                     बसा हुआ रहता है
बाहर सूखा दिखता पर,              उम्र बीत जाने पर भी,
अन्दर ताज़ा रहता है                 सदा जवान रहता है
 अगर काटतें है तो,                  विरह की रातों में,
आंसू भी लाता है                       आंसू बन बहता है
लेकिन वो खाने का,                  जीवन के जीने का,
 स्वाद भी बढाता है                     स्वाद भी बढाता है
दबाये ना दबती,                        छुपाये ना छुपती,
पर इसकी गंध है                       पर इसकी सुगंध है
पर सेहत के लिये,                     प्यार हो जीवन में,
फायदेबंद  है                              आता आनंद है
                   प्याज का आकार
                  दिल के आकार से,
                   कितना मिलता जुलता है
                   प्याज हो या प्यार,
                   दोनों में सचमुच में,
                   कितनी समानता है
 मदन मोहन बाहेती'घोटू'