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Thursday, November 8, 2012
अभी तो मै जवान हूँ?
अभी तो मै जवान हूँ?
इस मकां के लगे हिलने ईंट ,पत्थर
लगा गिरने ,दीवारों से भी पलस्तर
पुताई पर पपड़ियाँ पड़ने लगी है
धूल,मिटटी भी जरा झड़ने लगी है
कई कोनो में लटकने लगे जाले
चरमराने लग गये है ,द्वार सारे
बड़ा जर्जर और पुराना पड़ गया जो ,
कभी भी गिर जाय ,वो मकान हूँ
और मै दिल को तस्सली दे रहा,
यही कहता ,अभी तो मै जवान हूँ
थी कभी दूकान,सुन्दर और सजीली
ग्राहकों की भीड़ रहती थी रंगीली
सब तरह का माल मिलता था जहाँ पर
खरीदी सब खूब करते थे यहाँ पर
लगे जबसे पर नए ये माल खुलने
लगी ग्राहक की पसंद भी ,अब बदलने
धीरे धीरे अब जो खाली हो रही है,
बंद होने जा रही दूकान हूँ
और मै दिल को तस्सली दे रहा,
यही कहता,अभी तो मै जवान हूँ
जवानी कुछ इस तरह मैंने गुजारी
दूध देती गाय को है घांस डाली
अगर उसने लात मारी,लात खायी
बंदरों सी गुलाटी जी भर लगाई
रहूँ करता ,मौज मस्ती,मन यही है
मगर ये तन,साथ अब देता नहीं है
गुलाटी को मचलता है,बेसबर मन,
आदतों से अपनी खुद हैरान हूँ
और मै मन को तस्सली दे रहा हूँ,
यही कहता,अभी तो मैं जवान हूँ
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Wednesday, November 7, 2012
जो मेरी तकदीर होगी
जो मेरी तकदीर होगी
दाल रोटी खा रहे हम,रोज ही इस आस से,
सजी थाली में हमारी ,एक दिन तो खीर होगी
मर के जन्मा ,कई जन्मों,आस कर फरहाद ये,
कोई तो वो जनम होगा,जब कि उसकी हीर होगी
उनके दिल में जायेगी चुभ,प्यार का जज्बा जगा,
कभी तो नज़रें हमारी,वो नुकीला तीर होगी
इंतहां चाहत की मेरी,करेगी एसा असर,
जिधर भी वो नज़र डालेंगे,मेरी तस्वीर होगी
मेरे दिल के चप्पे चप्पे में हुकूमत आपकी,
मै,मेरा दिल,बदन मेरा, आपकी जागीर होगी
रोक ना पायेगा कोई,कितना ही कोशिश करे,
मुझ को वो सब,जायेगा मिल,जो मेरी तकदीर होगी
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
दाल रोटी खा रहे हम,रोज ही इस आस से,
सजी थाली में हमारी ,एक दिन तो खीर होगी
मर के जन्मा ,कई जन्मों,आस कर फरहाद ये,
कोई तो वो जनम होगा,जब कि उसकी हीर होगी
उनके दिल में जायेगी चुभ,प्यार का जज्बा जगा,
कभी तो नज़रें हमारी,वो नुकीला तीर होगी
इंतहां चाहत की मेरी,करेगी एसा असर,
जिधर भी वो नज़र डालेंगे,मेरी तस्वीर होगी
मेरे दिल के चप्पे चप्पे में हुकूमत आपकी,
मै,मेरा दिल,बदन मेरा, आपकी जागीर होगी
रोक ना पायेगा कोई,कितना ही कोशिश करे,
मुझ को वो सब,जायेगा मिल,जो मेरी तकदीर होगी
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
हस्त शक्ति-दे भक्ति
हस्त शक्ति-दे भक्ति
श्री विष्णु ,जग के पालनहार
एकानन है,मगर भुजाएं चार
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर चार
श्री ब्रह्माजी
जिन्होंने ये सृष्टि रची
चतुरानन है,और भुजाएं भी चार
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर एक
और भगवान् शंकर
हर्ता है जो हरिहर
एकानन है और भुजाये है दो
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर दो
रावण,लंका का स्वामी
बुद्धिमान पर अभिमानी
उसके थे दस सर और भुजाएं बीस
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर दो
लक्ष्मी और सरस्वती माता
धन और बुद्धि की दाता
दोनों के एक एक आनन और चार भुजाएं
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर चार
श्री दुर्गा या काली माँ का स्वरूप
शक्ति का साक्षात् रूप
एक आनन पर अष्ट भुजाधारी
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर आठ
यदि उपरोक्त आंकड़ों पर आप गौर फरमाएंगे
तो सांख्यिकी के नियम अनुसार ,ये पायेंगे
कि प्रति सर सबसे ज्यादा हस्त शक्ति
देवी दुर्गा या काली माँ है रखती
जिसका अनुपात
है एक पर आठ
उसके बाद,विष्णु,लक्ष्मी और सरस्वती माता है
जिनका एक पर चार का अनुपात आता है
और क्योंकि हाथों से ही,
उपकार और आशीर्वाद दिए जाते है
इसीलिये ये ज्यादा हाथों के,
औसत वाले ,पूजे जाते है
और सबसे कम औसत पर,
एक सर पर एक हाथवाले ब्रह्माजी आते है
इसीलिए वो सबसे कम पूजे जाते है
और उनके मंदिर ,एक दो जगह ही दिखलाते है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
श्री विष्णु ,जग के पालनहार
एकानन है,मगर भुजाएं चार
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर चार
श्री ब्रह्माजी
जिन्होंने ये सृष्टि रची
चतुरानन है,और भुजाएं भी चार
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर एक
और भगवान् शंकर
हर्ता है जो हरिहर
एकानन है और भुजाये है दो
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर दो
रावण,लंका का स्वामी
बुद्धिमान पर अभिमानी
उसके थे दस सर और भुजाएं बीस
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर दो
लक्ष्मी और सरस्वती माता
धन और बुद्धि की दाता
दोनों के एक एक आनन और चार भुजाएं
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर चार
श्री दुर्गा या काली माँ का स्वरूप
शक्ति का साक्षात् रूप
एक आनन पर अष्ट भुजाधारी
याने सर और हाथ का अनुपात
एक पर आठ
यदि उपरोक्त आंकड़ों पर आप गौर फरमाएंगे
तो सांख्यिकी के नियम अनुसार ,ये पायेंगे
कि प्रति सर सबसे ज्यादा हस्त शक्ति
देवी दुर्गा या काली माँ है रखती
जिसका अनुपात
है एक पर आठ
उसके बाद,विष्णु,लक्ष्मी और सरस्वती माता है
जिनका एक पर चार का अनुपात आता है
और क्योंकि हाथों से ही,
उपकार और आशीर्वाद दिए जाते है
इसीलिये ये ज्यादा हाथों के,
औसत वाले ,पूजे जाते है
और सबसे कम औसत पर,
एक सर पर एक हाथवाले ब्रह्माजी आते है
इसीलिए वो सबसे कम पूजे जाते है
और उनके मंदिर ,एक दो जगह ही दिखलाते है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Monday, November 5, 2012
लेखा जोखा
लेखा जोखा
पिछले कितने ही वर्षों का,
इस जीवन के संघर्षों का ,
आओ करें हम लेखा जोखा
किसने साथ दिया बढ़ने में,
मंजिल तक ऊपर चढ़ने में,
और रास्ता किसने रोका
किसने प्यार दिखा कर झूंठा,
दिखला कर अपनापन ,लूटा,
और किन किन से खाया धोका
बातें करके प्यारी प्यारी,
काम निकाल,दिखाई यारी,
और पीठ में खंजर भोंका
देती गाय ,दूध थी जब तक,
उसका ख्याल रखा बस तब तक,
और बाद में खुल्ला छोड़ा
उनका किया भरोसा जिन पर,
अपना सब कुछ ,कर न्योछावर,
उनने ही है दिल को तोड़ा
खींची टांग,बढे जब आगे
साथ छोड़,मुश्किल में भागे,
बदल गए जब आया मौका
टूट गए जो उन सपनो का ,
बिछड़े जो उन सभी जनों का
सभी परायों और अपनों का
नहीं आज का,कल परसों का
विपदाओं का, ऊत्कर्षों का,
आओ करें हम लेखा जोखा
पिछले कितने ही वर्षों का,
इस जीवन के संघर्षों का,
आओ करें हम लेखा जोखा
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Saturday, November 3, 2012
संकट तो है सब पर आते
संकट तो है सब पर आते
लेकिन जो धीरज धरते है,
मुश्किल में भी है मुस्काते
संकट तो है सब पर आते
हिल जाते है,पात,टहनियां,
लेकिन तना,तना रहता है
होती गहरी जड़ें ,उसीका,
बस अस्तित्व बना रहता है
झंझावत और तूफानों में,
सुदृढ़ वृक्ष ना हिल पाते है
संकट तो सब पर आते है
शिवशंकर,भगवान हमारे,
भी तो आये थे संकट में
भस्मासुर को वर दे डाला,
दौड़ा भस्म उन्ही को करने
रख कर रूप मोहिनी वाला,
श्री विष्णु है उन्हें बचाते
संकट तो है सब पर आते
राम रूप में प्रगटे भगवन ,
कितने संकट आये उन पर
भटके वन वन,उस पर रावण,
उड़ा ले गया,सीता को हर
संकटमोचन बन कर हनुमन,
सीता का है पता लगाते
संकट तो है सब पर आते
इसीलिये यदि आये संकट,
नहीं चाहिए हमको डरना
बल्कि धीर धर ,निर्भयता से,
रह कर अडिग,सामना करना
सच्चे साथी,साथ निभाते,
रहो अटल,संकट टल जाते
संकट तो है सब पर आते
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Friday, November 2, 2012
करने पड़ते है समझौते
करने पड़ते है समझौते
जीवन के हर एक मोड़ पर
अपने सब सिद्धांत छोड़ कर
चाहे हँसते, चाहे रोते
करने पड़ते है समझौते
बेटी का करना विवाह है
अच्छे वर की अगर चाह है
पढ़ा लिखा और अच्छे पद पर
है कमाऊ,सुन्दर लड़का पर
उसके माता पिता तेज है
मांग रहे मोटा दहेज़ है
नेता आप,समाज सुधारक
आदर्शों को आले में रख
बेटी सुख का ख्याल करेंगे
मुंहमांगा दहेज़ दे देंगे
अच्छा रिश्ता,यूं ना खोते
करना पड़ते है समझौते
अफसर आप इमानदार है
चलते नियम अनुसार है
मोटा टेंडर कोई खुलेगा
ऊपर से आदेश मिलेगा
ये बोला मंत्री जी ने है
टेंडर भरा भतीजे ने है
नियमो को करके अनदेखा
देना होगा उसको ठेका
उनका काम पड़ेगा करना
परेशान होवोगे वरना
नहीं किया तो ट्रांसफर होते
करने पड़ते है समझौते
लड़का,लड़की हुए सयाने
एक दूसरे को ना जाने
जब उनका विवाह होता है
शादी भी एक समझौता है
तज कर घर को मात पिता के
नए ,पराये घर में आके
रंगना पड़ता नए रंग में
जीना पड़ता नए ढंग में
समझौते करने है सबसे
सास,ससुर से और ननद से
परिवार ,सुखमय तब होते
करने पड़ते है समझौते
इस समझौते के ही मारे
भीष्मपिता रह गए कुंवारे
मत्स्य भेद कर,जीत स्वयंबर
अर्जुन लाये ,द्रौपदी को घर
समझौते ने करी ये गती
पांच पति में बंटी द्रौपदी
राम और रावण युद्ध हुआ जब
साथ आई वानर सेना सब
समझौता,सुग्रीव ,राम का
रावण वध में ,बना काम का
युगों युगों से देखा होते
करना पड़ते है समझौते
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Wednesday, October 31, 2012
ऊपरवाला
ऊपरवाला
जब भी घटती है कोई घटना,बुरी आ अच्छी
लोग कहते हैं'ऊपरवाले की मर्जी'
कभी कोई अच्छा या बुरा करता है
हम कहते 'ऊपरवाला सब देखता है'
लोग कहते है'जब ऊपरवाला देता है'
'तो वो पूरा छप्पर फाड़ कर देता है'
एक प्रश्न अक्सर मेरे मन में उठता रहता है
'ये ऊपरवाला कौन है और कहाँ रहता है?'
ब्रह्मा ,विष्णु और महेश,जो भगवान कहाते है
जो सृष्टि का निर्माण,पालन और संहार कराते है
विष्णु भगवान का निवास क्षीर सागर है
ब्रह्मा जी का निवास ब्रह्म सरोवर है
और शिवजी का वास है पर्वत कैलाश
ये सब स्थान तो नीचे ही है,हमारे आसपास
तो फिर वो कौन है जो ऊपरवाला कहलाता है
हर अच्छे बुरे का श्री जिसको जाता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
जब भी घटती है कोई घटना,बुरी आ अच्छी
लोग कहते हैं'ऊपरवाले की मर्जी'
कभी कोई अच्छा या बुरा करता है
हम कहते 'ऊपरवाला सब देखता है'
लोग कहते है'जब ऊपरवाला देता है'
'तो वो पूरा छप्पर फाड़ कर देता है'
एक प्रश्न अक्सर मेरे मन में उठता रहता है
'ये ऊपरवाला कौन है और कहाँ रहता है?'
ब्रह्मा ,विष्णु और महेश,जो भगवान कहाते है
जो सृष्टि का निर्माण,पालन और संहार कराते है
विष्णु भगवान का निवास क्षीर सागर है
ब्रह्मा जी का निवास ब्रह्म सरोवर है
और शिवजी का वास है पर्वत कैलाश
ये सब स्थान तो नीचे ही है,हमारे आसपास
तो फिर वो कौन है जो ऊपरवाला कहलाता है
हर अच्छे बुरे का श्री जिसको जाता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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