Saturday, December 15, 2012

कटु सत्य

         कटु सत्य

वैज्ञानिक बताते है
कि औसतन हम अपने जीवन के ,
पांच साल खाने  में बिताते है
और  अपने  वजन का ,
सात हज़ार गुना खाना खाते है
जब ये बात मैंने एक नेताजी को बतलाई
तो बोले,सच कह रहे हो मेरे भाई
एक बार जब हमें ,आप चुनाव जितलाये  थे 
पूरे पांच साल ,हमने खाने में  बिताये  थे 
आपसे क्या छुपायें,कितना ,क्या कमाया था ,
अपनी औकात से ,सात हज़ार गुना खाया था
        घोटू 
   
      सपनो को क्या चाटेंगे

तुम भी मुफलिस ,हम भी मुफलिस,आपस में क्या बाटेंगे
बची खुची जो भी मिल जाए ,     बस वो       खुरचन  चाटेंगे
एक कम्बल है ,वो भी छोटा,और सोने वाले  दो  हैं,
यूं ही सिकुड़ कर,सिमटे ,लिपटे,  सारा  जीवन  काटेंगे
लाले पड़े हुये खाने के,  जो भी दे  ऊपरवाला ,
पीस,पका  कर ,सब खा  लेंगे ,क्या बीनें,क्या छाटेंगे
झोंपड़ पट्टी और बंगलों के बीच खाई एक ,गहरी है,
झूंठे आश्वासन ,वादों से       ,कैसे इसको    पाटेंगे
क्या धोवेगी और निचोडेगी ,ये किस्मत नंगी है,
यूं ही फांकामस्ती में  क्या  ,बची जिन्दगी काटेंगे
किसके आगे अपना दुखड़ा रोने को तुम बैठे हो ,
ना ये तुम्हे सांत्वना देंगे,ना ही सुख दुःख बाटेंगे
  पेट नहीं भरता बातों से ,तुम जानो,हम भी जाने,
मीठे सपने,मत पुरसो  तुम,सपनो को क्या चाटेंगे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Thursday, December 13, 2012

जम्बू फल प्रियं

       जम्बू फल प्रियं 
( गजाननं भूतगणादी  सेवकं ,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणं ....)
 लम्बोदर है श्री  विनायक
आगे भरे थाल में  मोदक
मोदकप्रिय ,स्थूल देह है
शायद  इनको मधुमेह है
इसीलिए प्रिय फल है जामुन
जो करता है मधुमेह कम
मधुमेह उपचार कहाता
जामुन उनके  मन को भाता
      घोटू 

वकील या श्री कृष्ण

         वकील या श्री कृष्ण 

झगडा जोरू ,जमीन और ज़र का
ये  किस्सा तो है  हर घर का
भाई भाई के परिवार
जब हो आपस में लड़ने को तैयार
और किसी के मन में ये ख्याल आ जाय
भाई और रिश्तेदारों से क्यों लड़ा जाय
ऐसे में जो लडाई करने को उकसाता है 
वो या तो वकील होता है,
या श्री कृष्ण कहलाता है
        घोटू

pate ki baat


पक्षपात

      पक्षपात
जब होता है समुद्र मंथन
तो दानव और देवता गण
करते है बराबर की मेहनत
पर जब निकलता है अमृत
तो विष्णु भगवान,मोहिनी रूप धर
सिर्फ देवताओं को अमृत बाँट कर
स्पष्ट ,करते पक्षपात है
बरसों से चली आ रही ये बात है 
जो सत्ता में है,राज्य करते  है
अपने अपनों का घर भरते है
अपनों को ही ठेका और प्रमोशन
टू जी ,या कोल ब्लोक का आबंटन
देकर परंपरा निभा रहे है
तो लोग क्यों हल्ला मचा रहे है ?
          घोटू

मधुर मिलन की पहली रात

  मधुर मिलन की पहली रात

मेंहदी से तेरे हाथ रचे ,और प्यार रचा मेरे मन में
मुझको पागल सा कर डाला ,तेरी शर्मीली चितवन में
तेरे कंगन की खन खन सुन ,
                         है खनक उठी  मेरी नस नस
तेरी मादक,मदभरी महक,
                         है खींच रही मुझको बरबस 
नाज़ुक से हाथों को सहला ,
                         मन बहला नहीं,बदन दहला
हूँ विकल ,करू किस तरह पहल,
                         यह मिलन हमारा है पहला 
मन हुआ ,बावला सा अधीर,है ऐसी अगन लगी तन में
मेंहदी से तेरे हाथ रचे, और प्यार रचा मेरे   मन में
मन का मयूर है नाच रहा,
                             हो कर दीवाना  मस्ती में
तुमने निहाल कर दिया मुझे,
                               बस कर इस दिल की बस्ती में
चन्दा सा मुखड़ा दिखला दो,
                                क्यों ढका हुआ  घूंघट पट से
मतवाली ,रूप माधुरी का,
                                रसपान करूं ,अमृत घट से
सब लाज,शर्म को छोड़ छाड़ ,आओ बंध  जाये  बंधन में
मेंहदी से तेरे  हाथ रचे ,और प्यार रचा  मेरे मन   में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'