कर्म और धर्म
लक्ष्मी पूजन कभी भी ,ना किया बिल गेट्स ने,
फिर भी वो संसार का सबसे धनी इंसान है
सरस्वती पूजन किया ना,कभी आइन्स्टीन ने,
मगर उसके ज्ञान से ,उपकृत हुआ विज्ञान है
देख कर इनकी सफलता ,यही लगता मर्म है
धर्म अपनी जगह पर है,सबसे बढ़ कर कर्म है
घोटू
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Friday, December 21, 2012
Wednesday, December 19, 2012
परिधान-पर दो ध्यान
परिधान-पर दो ध्यान
आदमी का पहनावा ,आदमी के जीवन में,
काफी महत्त्व रखता है
कसी जींस या सूट पहन कर,आदमी जवान ,
और फुर्तीला दिखता है
ढीले ढाले से वस्त्र पहनने से ,ढीलापन और,
सुस्ती सी छा जाती है
जैसे नाईट सूट पहनने पर सोने को मन करता
और नींद सी आजाती है
,सजधज कर रहने वाले,न सिर्फ जवान दिखते है,
ज्यादा दिन टिकते है
अच्छी तरह पेक किये गए सामान,कैसे भी हों,
पर मंहगे बिकते है
इसीलिये,लम्बा सुखी जीवन जीना है तो श्रीमान,
अपने परिधान पर दो ध्यान
सजेधजे रहोगे तभी खींच पाओगे सबका ध्यान ,
और पाओगे सन्मान
घोटू
आदमी का पहनावा ,आदमी के जीवन में,
काफी महत्त्व रखता है
कसी जींस या सूट पहन कर,आदमी जवान ,
और फुर्तीला दिखता है
ढीले ढाले से वस्त्र पहनने से ,ढीलापन और,
सुस्ती सी छा जाती है
जैसे नाईट सूट पहनने पर सोने को मन करता
और नींद सी आजाती है
,सजधज कर रहने वाले,न सिर्फ जवान दिखते है,
ज्यादा दिन टिकते है
अच्छी तरह पेक किये गए सामान,कैसे भी हों,
पर मंहगे बिकते है
इसीलिये,लम्बा सुखी जीवन जीना है तो श्रीमान,
अपने परिधान पर दो ध्यान
सजेधजे रहोगे तभी खींच पाओगे सबका ध्यान ,
और पाओगे सन्मान
घोटू
चाँद और अमावास
चाँद और अमावास
भोलाभाला ,शांत,शीतल, और बन्दा नेक मै
करते सब बदनाम मुझको ,कि बड़ा दिलफेंक मै
पर बड़ा ही शर्मीला हूँ,और घबराता बहुत,
बादलों में जाता हूँ छुप, हसीनो को देख मै
चमचमाती तारिकाओं से घिरा मै रात भर ,
सभी मेरा साथ चाहें,और बन्दा एक मै
अमावस को थके हारे ,चंद्रमा ने ये कहा ,
महीने भर में ,एक दिन का,चाहता हूँ ,ब्रेक मै
घोटू
भोलाभाला ,शांत,शीतल, और बन्दा नेक मै
करते सब बदनाम मुझको ,कि बड़ा दिलफेंक मै
पर बड़ा ही शर्मीला हूँ,और घबराता बहुत,
बादलों में जाता हूँ छुप, हसीनो को देख मै
चमचमाती तारिकाओं से घिरा मै रात भर ,
सभी मेरा साथ चाहें,और बन्दा एक मै
अमावस को थके हारे ,चंद्रमा ने ये कहा ,
महीने भर में ,एक दिन का,चाहता हूँ ,ब्रेक मै
घोटू
Tuesday, December 18, 2012
माचिस की तिली
माचिस की तिली
पेड़ की लकड़ी से बनती,कई माचिस की तिली ,
सर पे जब लगता है रोगन,मुंह में बसती आग है
जरा सा ही रगड़ने पर ,जलती है तिलमिला कर,
और कितने दरख्तों को ,पल में करती खाक है
घोटू
पेड़ की लकड़ी से बनती,कई माचिस की तिली ,
सर पे जब लगता है रोगन,मुंह में बसती आग है
जरा सा ही रगड़ने पर ,जलती है तिलमिला कर,
और कितने दरख्तों को ,पल में करती खाक है
घोटू
सम्बन्ध
सम्बन्ध
हमारे संबंध क्या हैं ?पारदर्शी कांच है
खरोंचे उस पार की भी,नज़र आती साफ़ है
जरा सा झटका लगे तो,टूट कर जाते बिखर ,
सावधानी से बरतना ,ही अकल की बात है
घोटू
हमारे संबंध क्या हैं ?पारदर्शी कांच है
खरोंचे उस पार की भी,नज़र आती साफ़ है
जरा सा झटका लगे तो,टूट कर जाते बिखर ,
सावधानी से बरतना ,ही अकल की बात है
घोटू
अजब बात
अजब बात
देख सकते आप जिसको ,आपके जो साथ है
प्यार उसको कर न पाते,पर अजब ये बात है
नहीं देखा कभी जिसको ,उस प्रभू के नाम का,
जाप करते रोज है और पूजते दिन रात है
घोटू
देख सकते आप जिसको ,आपके जो साथ है
प्यार उसको कर न पाते,पर अजब ये बात है
नहीं देखा कभी जिसको ,उस प्रभू के नाम का,
जाप करते रोज है और पूजते दिन रात है
घोटू
आगर की माटी
आगर की माटी
मालव प्रदेश की भरी मांग ,
इसमें सिन्दूरी लाली है
है सदा सुहागन यह धरती ,
मस्तानी है,मतवाली है
जोड़ा है लाल,सुहागन सा,
महकाता इसका कण कण है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
है ताल तले भैरव बाबा ,
जिसकी रक्षा करने तत्पर
और तुलजा मात भवानी का,
है वरद हस्त जिसके सर पर
बन बैजनाथ ,कर रहे वास ,
उस महादेव का वंदन है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
है मुझे गर्व ,इस धरती पर,
इस माटी पर,इस आगर पर
मै इस माटी का बेटा हूँ,
करता प्रणाम इस को सादर
इसमें है कितना वात्सल्य ,
कितनी ममता अपनापन है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मालव प्रदेश की भरी मांग ,
इसमें सिन्दूरी लाली है
है सदा सुहागन यह धरती ,
मस्तानी है,मतवाली है
जोड़ा है लाल,सुहागन सा,
महकाता इसका कण कण है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
है ताल तले भैरव बाबा ,
जिसकी रक्षा करने तत्पर
और तुलजा मात भवानी का,
है वरद हस्त जिसके सर पर
बन बैजनाथ ,कर रहे वास ,
उस महादेव का वंदन है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
है मुझे गर्व ,इस धरती पर,
इस माटी पर,इस आगर पर
मै इस माटी का बेटा हूँ,
करता प्रणाम इस को सादर
इसमें है कितना वात्सल्य ,
कितनी ममता अपनापन है
माथे पर इसे लगाओ तुम,
आगर की माटी चन्दन है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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