आप आये
सर्द मौसम,आप आये
अकेलापन ,आप आये
दुखी था बमन,आप आये
बड़ी तडफन ,आप आये
खिल उठा मन,आप आये
हुई सिहरन,आप आये
मिट गया तम,आप आये
रौशनी बन ,आप आये
खनका आँगन,आप आये
बंधे बंधन,आप आये
बहका ये तन,आप आये
महका जीवन आप आये
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Tuesday, December 25, 2012
ये मन बृन्दावन हो जाता
ये मन बृन्दावन हो जाता
तेरी गंगा, मेरी यमुना ,
मिल जाते,संगम हो जाता
तन का ,मन का ,जनम जनम का,
प्यार भरा बंधन हो जाता
जगमग दीप प्यार के जलते ,
ज्योतिर्मय जीवन हो जाता
रिमझिम रिमझिम प्यार बरसता ,
हर मौसन सावन हो जाता
प्यार नीर में घिस घिस ये तन,
महक भरा चन्दन हो जाता
इतने पुष्प प्यार के खिलते ,
जग नंदनकानन हो जाता
श्वास श्वास के मधुर स्वरों से,
बंसी का वादन हो जाता
रचता रास ,कालिंदी तीरे ,
ये मन वृन्दावन हो जाता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
तेरी गंगा, मेरी यमुना ,
मिल जाते,संगम हो जाता
तन का ,मन का ,जनम जनम का,
प्यार भरा बंधन हो जाता
जगमग दीप प्यार के जलते ,
ज्योतिर्मय जीवन हो जाता
रिमझिम रिमझिम प्यार बरसता ,
हर मौसन सावन हो जाता
प्यार नीर में घिस घिस ये तन,
महक भरा चन्दन हो जाता
इतने पुष्प प्यार के खिलते ,
जग नंदनकानन हो जाता
श्वास श्वास के मधुर स्वरों से,
बंसी का वादन हो जाता
रचता रास ,कालिंदी तीरे ,
ये मन वृन्दावन हो जाता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा
पहले तो ये सजना धजना ,
मुझे लुभाना और रिझाना
बाँहों में लूं ,छोडो छोडो ,
कह कर मुझसे लिपटे जाना
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा ,
रूठ रूठ कर के मन जाना
वो प्यारी सी मान मनोवल ,
आकर पास ,छिटक फिर जाना
इन्ही अदाओं का जादू तो,
मन की तड़फ ,आग भड़काता
अगर ना नुकर तुम ना करती ,
कैसे मज़ा प्यार का आता
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
पहले तो ये सजना धजना ,
मुझे लुभाना और रिझाना
बाँहों में लूं ,छोडो छोडो ,
कह कर मुझसे लिपटे जाना
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा ,
रूठ रूठ कर के मन जाना
वो प्यारी सी मान मनोवल ,
आकर पास ,छिटक फिर जाना
इन्ही अदाओं का जादू तो,
मन की तड़फ ,आग भड़काता
अगर ना नुकर तुम ना करती ,
कैसे मज़ा प्यार का आता
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Sunday, December 23, 2012
बलात्कार
बलात्कार
एक बलात्कार ,ka
पांच छह उद्दंड दरिंदों ने ,
एक बस में,
एक निरीह कन्या के साथ किया
और जब इसके विरोध में,
देश की जनता और युवाओ ने ,
इण्डिया गेट पर शांति पूर्ण प्रदर्शन किया ,
तो दूसरा बलात्कार ,
दिल्ली पुलिस के सेकड़ों जवानो ने ,
हजारों प्रदर्शनकारियों के साथ किया ,
जब आंसू गेस से आंसू निकाले ,
लाठियों से पीटा,
और सर्दी में पानी की बौछारों से गीला किया
कौनसा बलात्कार ज्यादा वीभत्स था?
क्या एक अबला लड़की के साथ ,
हुए अन्याय के विरुद्ध ,
न्याय मांगना ,एक आम आदमी का ,
अधिकार नहीं है या जुर्म है ?
ये कैसा प्रजातंत्र है?
ये कैसी व्यवस्था है?
हम शर्मशार है कि ऐसी घटनाओं पर ,
एक तरफ तो नेता लोग ,
मौखिक सहानुभूति दिखलाते है ,
और दूसरी और ,प्रदर्शनकारियों को,
लाठी से पिटवाते है
घोटू
एक बलात्कार ,ka
पांच छह उद्दंड दरिंदों ने ,
एक बस में,
एक निरीह कन्या के साथ किया
और जब इसके विरोध में,
देश की जनता और युवाओ ने ,
इण्डिया गेट पर शांति पूर्ण प्रदर्शन किया ,
तो दूसरा बलात्कार ,
दिल्ली पुलिस के सेकड़ों जवानो ने ,
हजारों प्रदर्शनकारियों के साथ किया ,
जब आंसू गेस से आंसू निकाले ,
लाठियों से पीटा,
और सर्दी में पानी की बौछारों से गीला किया
कौनसा बलात्कार ज्यादा वीभत्स था?
क्या एक अबला लड़की के साथ ,
हुए अन्याय के विरुद्ध ,
न्याय मांगना ,एक आम आदमी का ,
अधिकार नहीं है या जुर्म है ?
ये कैसा प्रजातंत्र है?
ये कैसी व्यवस्था है?
हम शर्मशार है कि ऐसी घटनाओं पर ,
एक तरफ तो नेता लोग ,
मौखिक सहानुभूति दिखलाते है ,
और दूसरी और ,प्रदर्शनकारियों को,
लाठी से पिटवाते है
घोटू
Saturday, December 22, 2012
जीवन पथ
जीवन पथ
जीवन की इतनी परिभाषा
कभी धूप है,कभी कुहासा
आते मौसम यहाँ सभी है
पतझड़ कभी ,बसंत कभी है
कभी शीत से होती सिहरन
लू से गरम ,कभी तपता तन
देता पावस कभी दिलासा
जीवन की इतनी परिभाषा
जीवन में संघर्ष बहुत है
पीड़ा भी है,हर्ष बहुत है
सुख दुःख दोनों का ही संगम
होता है जीवन का व्यापन
कभी खिलखिला ,कभी रुआंसा
जीवन की इतनी परिभाषा
फूल खिलेंगे ,कुम्हलाएँगे
भले बुरे सब दिन आयेंगे
पथ है दुर्गम,कितनी मुश्किल
चलते रहो ,मिलेंगी मंजिल
बुझने मत दो ,मन की आशा
जीवन की इतनी परिभाषा
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
जीवन की इतनी परिभाषा
कभी धूप है,कभी कुहासा
आते मौसम यहाँ सभी है
पतझड़ कभी ,बसंत कभी है
कभी शीत से होती सिहरन
लू से गरम ,कभी तपता तन
देता पावस कभी दिलासा
जीवन की इतनी परिभाषा
जीवन में संघर्ष बहुत है
पीड़ा भी है,हर्ष बहुत है
सुख दुःख दोनों का ही संगम
होता है जीवन का व्यापन
कभी खिलखिला ,कभी रुआंसा
जीवन की इतनी परिभाषा
फूल खिलेंगे ,कुम्हलाएँगे
भले बुरे सब दिन आयेंगे
पथ है दुर्गम,कितनी मुश्किल
चलते रहो ,मिलेंगी मंजिल
बुझने मत दो ,मन की आशा
जीवन की इतनी परिभाषा
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Friday, December 21, 2012
जूताचोर
जूताचोर
यूरोप के चर्चों में देखा ,सब जूते पहने जाते है
तुर्की की मस्जिद में जूते ,संग थैली में ले जाते है
हम तो मंदिर के बाहर ही,है जूते खोल दिया करते
एसा लगता उन देशों में ,हैं जूते चोर बहुत बसते
घोटू
यूरोप के चर्चों में देखा ,सब जूते पहने जाते है
तुर्की की मस्जिद में जूते ,संग थैली में ले जाते है
हम तो मंदिर के बाहर ही,है जूते खोल दिया करते
एसा लगता उन देशों में ,हैं जूते चोर बहुत बसते
घोटू
आत्मज्ञान
आत्मज्ञान
फोन से अपना ही नंबर ,मिला कर देखो कभी
टोन तुमको सुनाई देगी सदा इंगेज की
दूसरों बात करने में तो सब ही मस्त है
खुद से बातें करने की पर सभी लाईन व्यस्त है
घोटू
फोन से अपना ही नंबर ,मिला कर देखो कभी
टोन तुमको सुनाई देगी सदा इंगेज की
दूसरों बात करने में तो सब ही मस्त है
खुद से बातें करने की पर सभी लाईन व्यस्त है
घोटू
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