Wednesday, September 25, 2013

जीवन- चार दिनों का या महीने भर का

  जीवन- चार दिनों का या महीने भर का

बड़े भाग्य से प्राप्त हुआ है ,यह वरदान हमें इश्वर का
चार दिनों का नहीं दोस्तों,ये जीवन है महीने भर का
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को,जैसे होता है चंद्रोदय
वैसे ही तो इस जगती में ,होता है जीवन का उद्बव
बढ़ता जाता चाँद दिनोदिन ,पूर्ण विकसता ,आती पूनम
वैसे ही विकसित होता है जीवन, पूनम मतलब यौवन
फिर होता है क्षीण दिनोदिन,चालू होता घटने का क्रम
जैसे आता हमें बुढापा ,और जर्जर होता जाता तन
हो जाता है लुप्त एक दिन ,आती है जिस तरह अमावस
कभी उसे ढक  लेते  बादल,लेते कभी राहु केतु  डस
सारा जीवन रहो चमकते ,तम हर लो धरती ,अम्बर का
चार दिनों का नहीं दोस्तों ,ये जीवन है महीने भर का

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Tuesday, September 24, 2013

अन्दर की बात

         अन्दर की बात

सुन्दर ,स्वच्छ ,धवल वस्त्रों में ,नेताजी की भव्य छटा है
पर अन्दर की बात  यही है ,कि इनका बनियान  फटा है
मत जाओ इनकी बातों पर ,ये कहते कुछ,करते कुछ है,
घोटाले और स्केंडल में , इनका  कार्य काल   सिमटा  है
कभी किसी के नहीं हुए है ,बस अपना मतलब साधा है,
दम है जिधर,उधर ही हम है ,कह करके  पाला पलटा है
कोई कितनी भी गाली दे ,इनको फरक नहीं पड़ता है,
लेकिन अपनी स्वार्थ सिद्धी से ,कभी न इनका ध्यान हटा है
देश हमारा प्रगति शील था,इनने  शील हरण कर डाला ,
दुराचार के आरोपों से ,इनका अंग अंग  लिपटा है
शौक बहुत मख्खनबाजी का ,लगवाते है और लगाते,
घिरे रहे चमचों,कड़छों से ,अब तक जीवन यूं ही कटा है
जब से राजनीति में आये ,पाँचों ऊंगली घी में रहती ,
बस केवल करना पड़ता है,दंद फंद  उलटा सुलटा  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

चाशनी

                चाशनी

पानी को ,चीनी के साथ,
जब गर्मी देकर उबाला जाता है
एक मधुर ,रसीला तरल पदार्थ बन जाता है ,
जो चाशनी कहलाता है
और ये चाशनी जिस पर भी चढ़ जाती है
उसका स्वाद और लज्जत ही बदल जाती है
फटा हुआ दूध भी ,
जब इस चाशनी में उबाला जाता है
रसगुल्ला बन जाता है
और ओटे हुए दूध की गोलियां तल कर,
जब इसमें डाली जाती है
गुलाब जामुन बन जाती है
 सड़ा  हुआ मैदा ,जब अटपटे ,उलटे सीधे ,
उलझे हुए आकारों में तल कर,
जब इसका रस पी लेता है
जलेबी बन कर ,गजब का स्वाद देता है
मैदा या  बेसन,जब अलग अलग आकारों में ,
इसका संग पाते है
तो कभी घेवर ,कभी फीनी ,
कभी बालूशाही बन जाते है  
सिका  हुआ आटा ,सूजी,या पीसी हुई मूंगदाल,
जब इसके संपर्क में आती है
तो हलवा बन कर लुभाती है
ये सारे रसासिक्त व्यंजन
भूख जगाते है और मोहते है मन
पर मुझे इन सबसे ज्यादा ,
लगती है मनमोहक और लुभावनी
तेरा मदभरा प्यार और तेरे रूप की चाशनी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'


Monday, September 23, 2013

मन-वृन्दावन

     मन-वृन्दावन

हमारे पड़ोस के प्रोढ़ होते हुए एक सज्जन
हर महीने दो महीने बाद
अपनी पत्नी के साथ
चले जाते  है वृन्दावन
एक दिन हमने उनसे पूछ लिया श्रीमान
दे दो हमको थोडा सा ज्ञान
वो ही मंदिर है ,वो ही मूरतें है
पंडित,पुजारी,धर्माचार्यों की ,वो ही सूरतें है
और जहाँ तक हमें ज्ञान है
हर जगह मौजूद रहते भगवान है
अगर सच्ची भावना से देखो,
तो हर मूर्ती में प्राण है
आपके घर में भी ,राधा कृष्ण की मूरत है
तो हर महीने आपको ,
वृन्दावन जाने की क्या जरूरत है
उन्होंने हमसे मुस्करा कर पूछा
आप  कभी वृन्दावन गए है क्या ?
वहां के चप्पे चप्पे में,बसते घनश्याम है
और हर गली में गूंजता राधा का नाम है
 पूरा वृन्दावन ,राधा कृष्ण मय लगता है
वहां का वातावरण ,
उनके प्यार की,खुशबू से महकता है
वहां के प्रेममय वातावरण की ,हवाओं मे
लेकर तो देखो ,कुछ साँसे
ढलती उमर के साथ ,आपका ढलता प्यार
भी पुनर्जीवन पा जाएगा
आपकी पत्नी को आप कृष्णमय लगेंगे ,
और आपको पत्नी में राधा का रूप नज़र आयेगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Sunday, September 22, 2013

रितु चुनाव की आयी

         घोटू के पद
रितु  चुनाव की आयी

सखी री ,रितु चुनाव की आयी
मनमोहन ने ,दस वर्षों में ,दुर्गत बहुत बनाई
बेटे को मिल जाए सिंहासन ,चाहे सोनिया माई
बन मुंगेरीलाल ,देखते ,सपन ,मुलायम  भाई
बिल्ली बन ,छींका टूटन की ,आस नितीश लगाई
मौके पर ही ,वार करेंगे,कहे  पंवार  मुस्काई
नमो नमो नारायण की रट ,नारद रहे लगाई
पांच बरस में ऐसी लीला,'घोटू' पड़े  दिखाई
सखी री,रितु चुनाव की आई
 घोटू

किस मुंह माने वोट

   घोटू के पद

किस मुंह माने वोट

अब हम,किस मुंह मांगे वोट
पांच बरस तक,मौज उडाई,करके लूट खसोट
बहुत किये घोटाले हमने ,खूब कमाए नोट
बार बार मंहगाई बढ़ा  कर,करी चोंट पर चोंट
सारे वोटर जान गए है,हम में है कुछ  खोट
एक बार ,फिर से सत्ता में ,मुश्किल आना ,लौट
'घोटू'अब तो,नमो नारायण ,बिठा रहा है गोट
अब हम ,किस मुंह मांगे वोट
घोटू

हे भगवान -दे वरदान

       हे  भगवान -दे वरदान

हे मेरे प्रभू  ,
आजकल कितना बदल गया है तू
मै दिन रात ,
पूरी श्रद्धा और भक्ति  के साथ
तेरे पूजन में रहा लगा
रतजगों में पूरी रात जगा
पर आज महसूस कर रहा हूँ ठगा
क्योंकि शायद तूने आजकल,
छोड़ दिया है रखना भक्तों का ख़याल
इसीलिये ,मै  हूँ बदहाल
मुश्किलों से नसीब होते है रोटी दाल
फिर भी रोज तेरे मंदिर जाता हूँ
आपको दो मुट्ठी चांवल  चढ़ाता हूँ
राशन की दूकान से ख़रीदे सुदामा के चांवल
एक बार प्रेम से चबा लो प्रभुवर
और दीनदयाल,मुझे खुशहाल करदो
सुदामा की तरह निहाल करदो
हे प्रभू ,अपने इस परम भक्त का ,
थोड़ा सा तो ख्याल करो
कोई क्रीमी पोस्टिंग ही दिला कर ,
मुझे मालामाल करो
वरना मै आपके चरण पकड़ कर
बैठा ही रहूँगा यहीं पर
मै विनती कर ही रहा था कि ,
मुझे कुछ रोशनी का आभास हुआ
एक दिव्य प्रकाश हुआ
भगवान प्रकट हुए और बोले ,
अब ज्यादा मत खींच मेरी टांग  
बोल तुझे क्या चाहिये,मांग
मै बोला ,प्रभू ,मुझे न चांदी न सोना चाहिए
बस आपका आशीर्वाद होना चाहिए
मै हूँ निर्बल,असहाय
मुझे तो भगवन ,दिला दो एक गाय
मगर वो गाय हो कपिला
जिससे जो भी मांगो ,देती है दिला
जो भी मै चाहूंगा ,वो मुझे दे देगी
प्रभूजी ने टोका ,भक्त ,छोटा सा है तेरा घर
और वो भी सातवीं मंजिल पर ,
वहां गाय कैसे बंधेगी ?
मै बोला ,अच्छा प्रभू ,गाय नहीं ,
तो कल्पवृक्ष ही दिलवा दो ,
जिसके बारे में ये कहा जाता है
उसके नीचे बैठ कर जो भी मांगो,मिल जाता है
प्रभू बोले ,फिर वही पागलों सी बात ,
तेरे  समझ में कब आयेगा
सातवीं मंजिल के छोटे से फ्लेट में,
कल्पवृक्ष  कैसे समायेगा ?
मै बोला 'सॉरी ' प्रभू ,
मै गया था अपनी औकात भूल
और माँगता रहा यूं ही ऊल जलूल
मुझे तो आप एक छोटी सी वस्तु मात्र  दे दो
जो द्रोपदी को दिया था,वैसा अक्षय पात्र दे दो
उसमे जो भी पकेगा ,वो सदा भरा ही रहेगा
मेरे और मेरे आसपास के ,
गरीबों और भूखों का पेट भरेगा
और मेरे छोटे फ्लेट में आराम से रखा जाएगा
इसके पहले कि प्रभू कुछ कहते ,
पत्नी जी ने झिंझोड़ कर जगाया ,
और दूध  का पात्र देती हुई बोली,
सपने ही देखते रहोगे ,तो दूध कौन लाएगा ?

मदन मोहन बाहेती'घोटू'