Thursday, November 21, 2013

शहनाइयां और बेंड

     शहनाइयां और बेंड

पहले ,जब होती थी शादियां
तब बजा करती थी शहनाइयां
और शादीशुदा जिंदगी में जीवनभर
गूंजते थे ,शहनाई के मधुर स्वर
पर, आजकल ,शादियों में,
 बेंड बजा करता है
और आदमी का जीवन भर
बेंड बजा करता है
घोटू

अंगरेजी -क्षणिकाए

     अंगरेजी -क्षणिकाए
                  १
      अंग्रेजी चक्कर
अंगरेजी चक्कर में,
संस्कार 'फेड'हुए
जीवित माँ ,बनी 'ममी '
पिताजी 'डेड'हुए
              २ 
            हाय
पड़ोसी लड़के से ,
हाय,हाय करती लड़की ,
प्यार में इतना पगलाई ,
उसके संग भग गयी
घरवाले बोले ,
हाय,हमारी बेटी को ,
किसकी हाय लग गयी
                ३
          पॉटी
अंगरेजी परिपाटी
पॉट पर बैठ कर ,करो तो 'पॉटी  '
मगर आजकल देशी लोग ,
जो लोठा ले जंगल जाते है
उसे भी 'पॉटी 'बतलाते है
                ४
             बाथरूम 
छोटा बच्चा चिल्लाया
मम्मी ,बाथरूम आया
बाथरूम अचल था
बच्चा बेकल था
मम्मी आयी और हुई लालपीली थी
बच्चे की चड्डी गीली थी
                ५
         परमोशन
एक पड़ोसन से बोली ,दूसरी पड़ोसन
आज तुम्हारे पति  जी ,हैं घर पर
क्या बीमार  है,गए नहीं दफ्तर
पड़ोसन बोली, नहीं ,कोई खास बात नहीं,
तबियत तो है ठीक,हुए है,पर 'मोशन '
दूसरी बोली ,मिठाई खिलाओ ,
मुबारक हो पति जी का परमोशन
                   ६
       लेट आउंगा
मातहत ने साहब को फोन किया ,
आज ट्रेन से आरहे है बच्चे ,बीबी साथ ,
मै ज़रा लेट आउंगा
अगर आपकी परमोशन पाउँगा
साहब ने जबाब दिया गुस्से में  थे 
अगर लेटना ही है ,
तो छुट्टी क्यों नहीं ले लेते 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

विवाह -क्षणिकाएं

          विवाह -क्षणिकाएं
                      १
      चूड़ियाँ
उनके प्यार का स्क्रू ,
एक एक चूड़ी ,चढ़,
दिल पर चढ़ गया ,
एक दम टाइट हो है
उनके हाथों में ,
नौ नौ चूड़ियाँ जो है
                 २
      अंगूठी
'रिंग सेरेमनी '
ये प्रथा है अनूठी
शादी के रिश्ते को,
'ओ'रिंग 'की तरह
'सील' करके रखती है,
सगाई की अंगूठी
                    ३
    वरमाला
वर ने वधू  को,वरमाला पहना दी
क्योकि फूलों की थी ,
वधू  ने ,वैसी ही ,दूसरी लौटा दी
अबकी बार वर ने,
वधु के गले में ,
सोने का मंगलसूत्र डाल दिया 
सोने को देख वधू  ने
यह प्रक्रिया नहीं दुहराई ,
इस तरह सोने ने ,
दोनों को एक सूत्र से बाँध दिया
              ४
        सोचो ,समझो और करो
एक विवाह के अवसर पर
एक बुजुर्ग बाँट रहे थे ,एक पुस्तक ,मित्रवरों!
'सोचो,समझोऔर करो,
                 ५
         खरबूजा
प्यार किया उसने
या प्यार किया तुमने ,
एक समझदार ने ये बूझा
कटा तो खरबूजा
                 ६
         अंदाज
समझदार लड़के
पहले लड़की का मुंह नहीं ,
पैर देखते है झुक के
लोग समझते है शरमीले है,
पर उनका अंदाज है जुदा
पैरों की  उँगलियों में ,बिछुवा को देख कर ,
पहले ही जान लेते है ,
कंवारी है या शादीशुदा
                 ७
             मांग
एक समझदार,
 कंवारी लड़की ने
रचाया ये  स्वांग
भरली अपनी मांग
मन में ये विचार के
शादीशुदा पर लड़के ,
लाइन नहीं मारते

मदन मोहन बाहेती'घोटू '

Tuesday, November 19, 2013

घर घर की कहानी

     घर घर की कहानी

रहो मिल ,बन दूध ,पानी
जिंदगी होती    सुहानी
दूध ही  कहलाओगे तुम
काम में आ जाओगे तुम
तेल,पानी सा न बनना 
कभी भी होगा मिलन ना
तैरते   ही  रहोगे  पर
अलग  अलग ,लिए स्तर
काम कुछ भी आओगे ना
मिलन का सुख पाओगे ना
प्यार हो जो अगर सच्चा
साथ रहना तभी अच्छा
एक में जल भाव जो है
एक तेल स्वभाव  जो है
साथ  ये  बेकार का  है
बस दिखावा  प्यार का है
भिन्न हो विचारधारा
मेल क्या होगा तुम्हारा
अलग रहना ही सही है
क्योंकि सुखकर बस यही है
अलग निज पहचान तो है
आप आते काम तो है
भले ना सहभागिता है
स्वयं की उपयोगिता है
बात यूं तो   है  पुरानी
किन्तु घर घर की कहानी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आ गया चुनाव है

       आ गया चुनाव है

मुफलिसी और बदनसीबी ,झेलना मुश्किल बहुत 
अगर झगडालू हो बीबी,   झेलना  मुश्किल बहुत
भूख,बदहाली ,गरीबी,    झेलना  मुश्किल बहुत
आधासीसी हो या टी बी ,झेलना  मुश्किल बहुत
                          झूंठे वादे और भाषण ,झेल अब ना पाएंगे
                           मीठी बातें,आश्वासन,झेल अब ना पाएंगे
                        चीर खींचे जो दुःशासन ,झेल अब ना पाएंगे
                        भ्रष्ट हो ,ऐसा कुशासन , झेल अब ना पाएंगे
रोज के   आरोप,  प्रत्यारोप में क्या रख्खा है
कोल माईन या कि बोफोर तोप में क्या रख्खा है
रोज की झूंठी दिलासा  ,होप  में क्या   रख्खा है
इस तरह नाराजगी और कोप में क्या रख्खा है
                          बहुत हैं हम चोंट खाये,  आ गया चुनाव है
                           बदल डालें व्यवस्थाएं ,आ गया चुनाव है
                          नहीं भ्रष्टों को जिताएं  ,आ गया  चुनाव है
                          नयों को भी आजमाएं ,आ गया चुनाव है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, November 18, 2013

रजाई-मन भायी -सर्दी आयी

       रजाई-मन भायी -सर्दी आयी

अभी तक हम ओढ़ते थे चादरें
आयी सर्दी,चादरें ,उससे  डरें
कुछ दिनों कम्बल का ही सम्बल रहा
पर नहीं अब कम्बलों में बल रहा
पड़ी जबसे ,सर्दियों की ग़ाज है
आजकल बस रजाई का राज है
नरम ,सुन्दर,मुलायम और मखमली
ओढ़ने में बहुत लगती है भली
उष्मा का संचार ये तन में करे
सदा जिसमे दुबकने को मन करे
कितनी है नरमाई इसके तन भरी
सर्दियों में रात की ये सहचरी
मज़ा आता इसे तन पर ओढ़ कर
जी नहीं करता है जाओ छोड़ कर
पहलू में निज बाँध ये लेती हमें
शयन का भरपूर सुख देती हमें
सर्दियों की होती  खुश नसीबी है 
एक रजाई और संग में बीबी है
जब भी आते इनके हम आगोश में
सच बता दें,नहीं रहते होंश में
इस तरह से ,रजाई मन भाई है
आजकल गरमाई ही गरमाई है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

चुनाव-तीन क्षणिकाएं

          चुनाव-तीन क्षणिकाएं
                        १
          चुनाव
       चूना  या नाव
जिसे' नाव' याने 'बोट' मिलते है
उसका बेड़ा हो पार  जाता है
और उसे 'चूना' लगता है ,
जो बाजी हार जाता है
                     २
चुनाव ,एक शादी है
जिसमे दुल्हन एक ,और कई प्रत्याशी है
और दुल्हन किसको बनाएगी वर
इसका निर्णय करते है 'वोटर'
जो सारे होते बाराती है
                    ३
जब भी कोई दल ,सत्ता में आता है
उस प्रदेश या देश के वृक्ष पर ,
अमर बेल की तरह छा जाता है
अपना अस्तित्व कायम रखने के लिए ,
वृक्ष को सुखाता है
और खुद हराभरा होकर ,फैलता जाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'