Friday, November 29, 2013

तीन सामयिक क्षणिकाए

तीन सामयिक क्षणिकाए
            साहस
फंसे कानूनी फंदे में ,बड़े नामी थे एडीटर
बहुत जो संत पूजित थे ,आज है जेल के अंदर
कृष्ण खुद को बताते थे ,भटकते साँई है दर दर
एक लड़की के साहस ने ,दिया है देखो क्या क्या कर

           पुलिस वाले
हम पुलिस वाले है
हमारी मजबूरियों के भी अंदाज निराले है
आज की  राजनैतिक व्यवस्था को कोसते है
क्योंकि कल तक डंडे से ठोकते थे,
आज उन्हें सलाम ठोकते है

          नया कुत्ता
मेरी गली के ,दूसरी मंजिल के फ्लेट में,
किसी ने एक कुत्ता पाला
गली के कुत्तो ने ,उसकी आवाज सुनी ,
हंगामा कर डाला
उनकी गली में नया कुत्ता आ जाये ,
वो हजम ना कर पाये
इसलिए ,उसके फ्लेट के नीचे ,
भोंकते रहे,चिल्लाये
पर जब   कुछ बस न चला तो चुपचाप,
रिरियाते ,अपने आप
फ्लेट की नीची सीढ़ी के आसपास ,
कर के चले गए पेशाब

घोटू 
 

Thursday, November 28, 2013

जवानी सलामत रहे

               जवानी सलामत रहे

नाती ,पोते पोतियों की शादियां होने लगी ,
                उसपे भी हम कहते हैं कि सलामत है जवानी
इसी जिंदादिली ने है अभी तक ज़िंदा रखा ,
                  वरना अब तक खत्म हो जाती हमारी कहानी
बुढ़ापा तन का नहीं,अहसास मन का अधिक है ,
                   जंग हमको बुढ़ापे से ,लड़ते रहना   चाहिये
सोचता है जिस तरह ,इंसान बनता उस तरह,
                    हमेशा खुद को जवां ,हमको समझना चाहिये
घोटू     

नाम

             नाम

होते है सबके अलग अलग ,अपने नाम है
कुछ नाम कमाते है करके नेक काम  है
होते ही पैदा सबसे पहले मिलती चीज जो ,
होती जो तुम्हारी है ,वो तुम्हारा  नाम है
बच्चे के पीछे नाम रहता उसके बाप का,
बीबी के पीछे रहता वो शौहर का नाम है
करते है बुरे काम जो,बदनाम वो होते,
बदनाम जो हुए तो क्या,उसमे भी नाम है  
लगती जो पीछे नाम के दुम जात पात की,
होता बिगड़ना चालू ,यहीं पर से काम है
होता है शुरू सिलसिला ,अलगाव ,बैर का,
बंट  जाता कई खेमो में,इंसान आम है
कुछ राजनेता और थोड़े धरम के गुरु,
लगते चलाने अपनी अपनी ,सब दुकान है
है ईंट वही,चूना वही,वो ही पलस्तर ,
रंग जाते अलग रंग में ,सबके मकान है
तन जाती क्यों तलवारें है ,मजहब के नाम पर,
अल्लाह है वो ही,वो ही यीशु ,वो ही राम है
खिलता हुआ चमन है अपना मादरे वतन ,
हैम एक है और एक अपना हिन्दुस्थान है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

गांधी जी

             गांधी जी

कहते तो हैं वो गाधीजी को राष्ट्र का पिता ,
               बेटों ने अपने बाप के संग,देखो क्या किया
गड्ढों  भरी कुछ सड़कें बची ,उनके नाम की ,
              गांधीजी के सिद्धांतों को,सबने भुला दिया
लाखों ,करोड़ो नोटों पे,गांधी को छाप के ,
                रिश्वत के लेन देन  का,जरिया बना दिया
 गांधी की टोपी पहन के ,नेताजी बन गए ,
                  खद्दर पहन के खुद का मुकद्दर  बना लिया
गांधी का नाम लेके सत्ता से चिपक गये ,
                   जम्हूरियत को पुश्तेनी ,धंधा बना दिया
मारी थी गोडसे ने सिरफ तीन गोलियां,
                    सीने को इनने गांधी के ,छलनी बना दिया
गांधी को बेच बेच के,लिंकन को खरीदा ,
                     जाकर विदेशी बेंक में ,सारा  जमा किया
गांधी का सपना कोई मुकम्मल नहीं किया ,
                     सपनो को उनने अपने ,मुकम्मल बना लिया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'                     

जलने सभी लगे

              जलने सभी  लगे

घर के चिराग सब के सब ,अब तक थे गुल पड़े ,
                 सूरज को ढलता देख कर ,जलने सभी लगे
दिखलाते थे हमदर्दियां ,बिगड़े  नसीब पर ,
                सूरज जो चमका भाग्य का ,जलने सभी लगे
जब तक नहीं वो पास थे ,हम बेकरार थे ,
                   जीवन था कुछ बुझा बुझा ,मायूस बड़े थे ,
उनने जो छुआ प्यार से,आया करंट यूं,
                    अंगों में आग लग गयी , जलने सभी लगे

घोटू  

Wednesday, November 27, 2013

आइना

         आइना

आईने में खुद को ऐसे तुम, देखो नहीं अगर 
बेचारे आईने को कहीं लग गयी नज़र
तुम तो संवर के ,सज के ,चली जाओगी कहीं,
हो जाए 'क्रेक 'आइना ,बेचारा  बेखबर

घोटू 

तहलका

              तहलका
तरुण भी है,तेज भी है ,कलम में भी जोर है ,
कितनो का ही भंडा फोड़ा,जब भी मिल मौक़ा गया
लिफ्ट में एक रूपसी ने लिफ्ट उनको नहीं दी ,
बात बिगड़ी इस तरह कि तहलका सा मच  गया

घोटू