Saturday, March 29, 2014

तीन चतुष्पदियाँ

         तीन  चतुष्पदियाँ
                   १
                 बीमा
अपने संतानों के खातिर ,सोचते  है कितना  हम
मर के भी उनके लिए , कुछ न कुछ कर जाएँ हम 
काट कर  के पेट अपना ,भरते बीमा  प्रीमियम
मिलेगा बच्चों को पैसा ,जब हमें ले जाए   यम
                              २
                      फल
जिंदगी अपनी लुटाते है  हम जिनकी चाह मे
जीते जी, पर  बुढ़ापे में , पूछते  ना   वो   हमें
सोचते ये देख मुझको,आम्र के तरु  ने कहा ,
बोया तुम्हारे पिता ने , दे रहा हूँ , फल तुम्हे
                              ३
                      दान पुण्य
बोला पंडित ,दान करले ,काम ये ही आयेगा
मरने पर इस पुण्य से ही,मोक्ष को तू पायेगा
मैंने  सोचा जन्म अगला,मेरा सुधरे या नहीं ,
दान पाकर,जन्म पंडित का सुधर ,पर ,जाएगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

रिजर्वेशन -स्वर्ग का

               रिजर्वेशन -स्वर्ग का

बोला पंडित ,स्वर्ग में ,बहलायेगी मन अप्सरा ,
और नरक की यातना से,मुक्ती  भी पा लीजिये
चढ़ा  मंदिर में चढ़ावा,  ब्राह्मणो को दान दे,
रिजर्वेशन ,स्वर्ग का ,खुल्ला है ,करवा लीजिये
हमने पंडितजी से बोला ,इतनी जल्दी ना हमें ,
जिंदगी का ले रहे सुख ,हम हैं खुश इस हाल में
आएगा  जब वक़्त वो,पैसा तो ज्यादा लगेगा ,
रिजर्वेशन  स्वर्ग का ,मिल जायेगा 'तत्काल' में   

घोटू

बिना मौसम के बरसात

      देहली की असमय बरसात पर
            देश के तीन नेताओं के ,
                सामयिक भाषण
                         १
         राहुल गांधी का बयान
दोस्तों! गर्मी में हमने ,ऐसी ठंडक लायी है ,
    गर्मियों में बारिशों का  भी  मज़ा  ले लीजिये
'बारिश के अधिकार ' का बिल पास हम करवाएंगे ,
      इसलिए इस इलेक्शन में बोट हमको दीजिये 
                           २
          अरविन्द केजरीवाल का बयान
मित्रो !ये कांग्रेस और बी जे पी तो पहले से ही मिली थी ,
अब इन्होने 'इन्द्र देवता 'को भी अपने साथ मिला लिया है
आम आदमी का गरीबी में यूं ही आटा गीला था ,
इन्होने बारिश करवा के और भी गीला करवा दिया है
ये मै नहीं कह रहा हूँ,ये देश की जनता कह रही है
इसलिए आप पार्टी को बोट देना ही सही है
                        ३
          नरेंद्र मोदी  का बयान
 भाइयों और बहनो !ये शहजादा घबराता है ,
जब इतने लोगों की भीड़ मेरी रैली में आती है
इसलिए उसने मौसम विभाग से मिल कर,
बिना मौसम के बरसात करवा दी है
वो चाहता है करना बर्बाद
मेरी गर्म गर्म चाय का स्वाद
इसलिए बोट देते समय ,
हमेशा बी जे पी को रखे याद

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, March 28, 2014

अब हाशिये पे हम

            अब हाशिये पे हम

अब क्या सुनाएँ आपको ,अपनी कहानी हम
आँखें न कहीं आपकी ,हो जाए सुन के नम
बचपने में बड़े भोले और  मासूम से थे हम
आयी जवानी ,शोखियों का ,था गजब आलम
आया है मगर जब से ,बुढ़ापे का ये मौसम
ना तो इधर के ही रहे और ना उधर के हम
लड़ते ही रहे जमाने से जब तलक था दम
देखें है हमने हर तरह के बदलते  मौसम
कुछ इस कदर से ,बुढ़ापे ने ढायें है सितम  
सचमुच परेशां ,अपनोकी ही बेरुखी से हम
और लिखते लिखते जिंदगी की दास्ताने गम
पन्ना है पूरा भर गया अब  हाशिये पे हम

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

आज अगर जो तुम मिल जाते …

        आज अगर जो तुम मिल जाते   …

आज अगर जो तुम मिल  जाते ,दिल मेरा खिल जाता
होती दूर वेदना दिल को ,कुछ सुकून मिल जाता
शीतल मस्त पवन के झोंके से आ मुझसे मिलते ,
तप्त ह्रदय बेचैन बहुत था ,कुछ तो राहत   पाता
               हम पागल से इंतजारमें ,बैठे पलक बिछाए
               लेकिन तुमको ना आना था ,और नहीं तुम आये
               इतने बेदर्दी निकलोगे ,ये विश्वास नहीं था ,
                प्रीत लगा कर ,तुमसे प्रीतम,हम कितने पछताए 
ना तो होली,ना दीवाली,ना बसंत ना सरदी
हर मौसम में याद तुम्हारी ,आई मुझे बेदरदी
इतनी अगर आरजू करती ,ईश्वर भी मिल जाता,
पर तुमने तो बेगानेपन की ,सचमुच हद करदी
               बहुत दिनों से तरस रही हूँ,पर अब मत तरसाओ
                अब गरमी का मौसम आया,प्रीतम तुम आ जाओ
                विरह ताप से सूख रही है,प्रेमलता  दीवानी ,
               बन  कर प्यार फुहार बरस कर अब इसको सरसाओ 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

दास्ताने इश्क़


          दास्ताने  इश्क़

ऐसा तुम्हारे इश्क़ का छाया जूनून था ,
                 हम पागलों से ,आप के पीछे थे पड़ गये
एक दिन हमारी आशक़ी ,रंग लायी इस कदर,
                 आकर हमारी बाहों में ,तुम खुद  सिमट गए
दावत तो दी थी आपने और भूखे भी थे हम,
                 लेकिन ये मन ,माना नहीं और हम पलट गए
बदनाम ना कर दे तुम्हे बेदर्द ज़माना ,
                    ये सोच कर   के हम  ही थोड़े पीछे हट गए

घोटू  
   

लेन -देन

          लेन -देन

            जिससे तुमको कुछ मिलता है ,   
                 उसको  कुछ  देना  पड़ता है,
    ये लेन देन की रीत पुरानी ,मगर निभानी पड़ती है
                     जो कुत्ते पाला करते है ,
                     वो ही ये बात जानते है ,
स्वामीभक्तों की विष्ठा तक भी ,उन्हें उठानी पड़ती है
   
घोटू