Tuesday, April 8, 2014

मोदी आया-मुसीबत लाया

           मोदी आया-मुसीबत लाया

जनता को बरगलाया ,कर मीठी मीठी बातें
सपने उन्हें दिखाए, कर लम्बे  चौड़े  वादे
जाती है बहल झट से ,जनता है बड़ी भोली
अब तक बहुत खिलाई ,हमने है मीठी गोली
मौसेरे भाई  हम सब,चांदी  भी कट रही थी
और लूट सारी अपनी ,आपस में बंट रही थी
पर जग गयी है जनता,मौसम बदल गया है
आया  है जबसे मोदी ,सब कुछ बिगड़ गया है
नेता थे दादा ,नाना,पुश्तैनी हम  है नेता
अब नेता बन रहा है,ये चाय का विक्रेता
हालत हमारी इसने,आकर के कर दी ऐसी
होने लगी है देखो,हम सब की ऐसी तैसी
ऊपर से धूमकेतु, अरविन्द  आगया  है
हाथों में लेके झाड़ू, सबकी  बजा गया है
अस्तित्व पे है खतरा ,खतरे में विरासत है
मुश्किल में सब फंसे है,हर ओर मुसीबत है
कुत्ता नया गली में ,आता तो चौंकते है
कुत्ते सभी गली के,मिल कर के भोंकते है
कुत्तों से कम से कम हम,इतना सबक तो ले लें
बाहर के दुश्मनों को ,मिल कर के सब खदेड़े
इसलिए आओ,मिल कर ,हम सब उसे दें गाली
कर देगा खड़ी खटिया ,कुर्सी जो उसने पा ली
हम साथ रहें मिल कर ,उससे नहीं डरें हम
वो जो भी बोलता है, आलोचना करें हम
इज्जत जो हमें अपनी ,थोड़ी भी है बचानी
पड़ जाए उसके पीछे ,लेकर के दाना  पानी
अस्तित्व बचाने की,हम सबको अब पडी है
हो जाएँ एक हम सब, संकट  की ये घड़ी है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

Monday, April 7, 2014

इलेक्शन का नतीजा

           इलेक्शन का नतीजा

नतीजो ने इलेक्शन के ,दिया कर पस्त है सबको,
               जिसे देखो बदलने को ,वो दल तैयार बैठा  है
बड़ा शक था ये लोगों को ,ऊँट किस करवट बैठेगा ,
               चाहते सब थे ,उसी करवट ,ऊँट इस बार बैठा है
मुलायम सिंह की भैसों ने ,किया कम  दूध अब देना,
                और माया का हाथी भी,किये हड़ताल बैठा है
हाथ पर हाथ रख कर बैठे है ,अब मम्मीजी और बेटे जी,
                 आप भी झाड़ू फिरवा कर ,बुरा कर हाल बैठा है   
ये जनता का करिश्मा है कि चाय बेचने वाला ,
               जाके दिल्ली की कुर्सी पे,लगा दरबार बैठा है
अबकी बार सिंहासन ,सम्भाला है नरेंदर ने,
               गिरि का शेर बब्बर ,दिल्ली में इस बार बैठा है
    
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

चुनाव और नतीजे

         चुनाव और नतीजे

इस तरह मात दी मोदी ने है सबको इलेक्शन में ,
हरा कर सबको काबिज हो गया ,सत्ता में भारत की
विरोधी लाख चिल्लाये ,मगर कुछ कर नहीं पाये ,
बिचारे शहजादे की ,बड़ी ही उसने  दुर्गत की
नतीजा कुछ भी निकले ,बात पर ये माननी होगी ,
कि अबके से इलेक्शन में ,बहुत उसने है मेहनत की
डूबती नाव जब देखी ,लोग सब छोड़ कर भागे,
रहा फिर भी डटा मैदान में ,उसने ये हिम्मत की
घोटू 

शहजादा

       शहजादा

सफेदी आ गयी  बालों में ,मगर कहता युवा  खुद को ,
उमर तो है ससुर बनने की ,पर अब तक कंवारा  है
निकलता शब्द जो मुंह से ,वही क़ानून  बन जाता ,
उसे कुछ बेशरम चमचों ने ,सच  इतना बिगाड़ा  है
कोई कहता है शहजादा ,कोई कहता है बच्चा है,
है मम्मी की मगर आशा ,और बहना का दुलारा है
देश की राजनीति में ,अड़ाता टांग है अपनी ,
ये धंधा पुश्तेनी इस बिन ,नहीं चलता   गुजारा है

घोटू 

श्वान और इंसान

         श्वान और इंसान

आदमी में और कुत्ते में फर्क क्या दोस्तों ,
           सोचता हूँ आज ये सबको बताना  चाहिए
हमको जब भी आता प्रेशर ,जाते हम टॉयलेट में,
             फिक्स है वो जगह हमको ,जहां जाना चाहिए
मगर कुत्ता सूंघ कर ,तय करता है अपनी जगह,
                 है जरूरी इसलिए ,उसको  घुमाना  चाहिए
आदमी को प्यार करने को तो बीबी 'फिक्स'है ,
                 कुत्ते को हर बार पर नूतन  जनाना  चाहिए

घोटू 

युवराज का परफॉर्मन्स

         युवराज का परफॉर्मन्स

बाल इक्कीस ,और रन ग्यारह ,ट्वेंटी ट्वेंटी फ़ाइनल,
                      हरा डाला देश को ,क्या खेल था युवराज का
हरएक ओवर में है मोदी ,फास्ट बॉलिंग कर रहे ,
                        इलेक्शन में भी न ऐसा ,हश्र  हो युवराज का

घोटू

विरह गीत

         विरह गीत

बीत गए कितने दिन
रीत गए कितने दिन
विरहा की अग्नी में,
तड़फे जब तेरे बिन

निंदिया ने उचट उचट
आंसू ने टपक टपक
सपनो ने भटक भटक
इस करवट,उस करवट
तुम्हारी यादों में,
मीत ,गए कितने दिन
बीत गए कितने दिन
इस दिल ने धड़क धड़क
भावों ने भड़क भड़क
यादों ने उमड़ उमड़
तड़फाया ,तड़फ तड़फ,
कैसे हम जी पाये,
बिना प्रीत,इतने दिन
बीत गए कितने दिन

मदन मोहन बाहेती'घोटू'