Thursday, May 1, 2014

अफवाह

         अफवाह

गजब की खूबसूरत हो
समझदारी की मूरत हो
सुने हर बात और माने
पति को देवता   जाने
कभी भी जो खफा ना हो
कभी भी बेवफा ना हो
करे सब काम जो घर का
नहीं हो शौक ,जेवर  का
न हो फैशन की दीवानी
बने ना घर की महारानी
सास की बात माने जो
बनाये ना ,बहाने जो
जिसे 'ना'कहना ना आये
हमेशा खुश हो मुस्काये
काम करने की आदी हो
बड़ी  ही सीधीसादी  हो
मिले ऐसी अगर बीबी,तो सब वाह वाह कहते है
कहा घोटू ने मुस्का कर
दिवा ये स्वप्न है सुन्दर
भरे गुण इतने ,जिसमे सब
खुदा की फैक्टरी में अब
नहीं ये माल बनता है ,इसे अफवाह  कहते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

दिल के अरमां ,आंसूओ में खो गये

  दिल के अरमां ,आंसूओ में खो  गये
                       १ 
शाम को सजती,संवरती मै रही,
                      आओगे तुम,प्यार निज दरशाओगे
बाँध लोगे बांहों  में अपनी मुझे ,
                       या कि मेरी बांहों  में बंध  जाओगे
आये थके हारे तुम ,खाया पिया ,
                         टी वी देखा  और झटपट  सो गये
क्या बताएं ,रात फिर कैसे कटी ,
                           दिल के अरमां ,आंसूओं में खो गये 
                            २
मुश्किलों से पार्टी का पा टिकिट ,
                       उतरे हम चुनाव के मैदान में
गाँव गाँव ,हर गली ,सबसे मिले ,
                   पूरी ताकत झोंकी अपनी जान  में
पानी सा पैसा बहाया ,सोच ये,
                       कमा लेंगे ,एम पी. जो हो गये
नतीजा  आया ,जमानत जप्त थी,
                       दिल के अरमां , आंसूओं में खो  गये 
                         ३
हुई शादी,प्यारी सी बीबी मिली,
                       धीरे धीरे ,बेटे भी दो हो गये
बुढ़ापे का सहारा ये बनेगें ,
                      लगा कर ये आस हम खुश हो गये
पढ़े,लिख्खे,नौकरी अच्छी  मिली ,
                      हुई शादी,अलग हमसे हो गये
बुढ़ापे में हम अकेले रह गये,
                  दिल के अरमां , आंसूओं में खो  गये

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

मई से मई तक

    मई  से मई तक

मई में,
एक सुरमई आँखों वाली से ,
सुर मिले
उसकी प्रेममयी बातों ने,
प्रेम का मय पान कराया
फिर आनंदमयी जिंदगी के सपने देखे
परिणाम में परिणय हुआ
और अगली मई तक,
वो प्रेममयी ,आनंदमयी ,सुरमई आँखों वाली ,
ममतामयी बन गयी

घोटू

प्रिय पत्नी तारा बाहेती के जन्मदिवस पर

    मेरी प्रिय पत्नी तारा बाहेती के जन्मदिवस पर
               शुभकामनाओं सहित

सड़सठ की हो गयी ,मगर अब भी मतवाली
वही  कशिश  है,वही  अदायें ,सत्रह  वाली
पांच दशक के बाद अभी भी उतनी  दिलकश
पास तुम्हारे आने को मन करता  बरबस 
वही ठुमकती  चाल ,निगाहें वो ही कातिल
मधुर मधुर  मुस्कान ,मोह  लेती मेरा दिल
तिरछी नज़रों वाला वो अंदाज ,वही है
वो ही साँसों की सरगम है ,साज वही है
 तो क्या हुआ ,बढ़ गया कंचन है जो तन पर 
तो क्या हुआ चढ़ गया चश्मा,अगर नयन पर
वो ही सुन्दर तन है,वैसी ही सुषमा है
और प्यार में ,अब भी वैसी ही ऊष्मा है
वही महकता बदन लिये खुशबू चन्दन की
वो ही प्यारी छटा और आभा यौवन की
अब भी तुम में वही चाशनी ,मीठी  रस की
बहुत बधाई तुमको अपने जनम दिवस की
सदा रहे मुख पर छाई  ,मुस्कान निराली
वही कशिश है ,वही अदायें , सत्रह  वाली

मदन मोहन बाहेती 'घोटू' 

पत्नी तारा बाहेती के जन्मदिवस पर

    मेरी प्रिय

               शुभकामनाओं सहित

सड़सठ की हो गयी ,मगर अब भी मतवाली
वही  कशिश  है,वही  अदायें ,सत्रह  वाली
पांच दशक के बाद अभी भी उतनी  दिलकश
पास तुम्हारे आने को मन करता  बरबस 
वही ठुमकती  चाल ,निगाहें वो ही कातिल
मधुर मधुर  मुस्कान ,मोह  लेती मेरा दिल
तिरछी नज़रों वाला वो अंदाज ,वही है
वो ही साँसों की सरगम है ,साज वही है
 तो क्या हुआ ,बढ़ गया कंचन है जो तन पर 
तो क्या हुआ चढ़ गया चश्मा,अगर नयन पर
वो ही सुन्दर तन है,वैसी ही सुषमा है
और प्यार में ,अब भी वैसी ही ऊष्मा है
वही महकता बदन लिये खुशबू चन्दन की
वो ही प्यारी छटा और आभा यौवन की
अब भी तुम में वही चाशनी ,मीठी  रस की
बहुत बधाई तुमको अपने जनम दिवस की
सदा रहे मुख पर छाई  ,मुस्कान निराली
वही कशिश है ,वही अदायें , सत्रह  वाली

मदन मोहन बाहेती 'घोटू' 

Tuesday, April 29, 2014

चोली -दामन

           चोली -दामन

 बच्चों को बतलाई ,पुरानी पीढ़ी की बात
पति और पत्नी जब ले लेते थे फेरे सात
उनमे होजाता था ,चोली और दामन का साथ
नयी  पीढ़ी की कन्या को,समझ न आयी ये बात
बोली कि चोली के साथ,टॉप हो स्लीवलेस
मॉडर्न फेशन की ,बन जाती सुन्दर ड्रेस
चोली के रिश्ते की ,बात तो समझते है हम
पर ये तो बतलाओ,क्या होता है दामन ?

घोटू  

झुकना सीखो

            झुकना सीखो

जब फल लगते है तो डाल झुका करती है
कुवे में जा,झुकी  बाल्टी,जल   भरती   है
बिखरे हुए धरा पर हीरे ,माणिक ,नाना
पाना है तो झुक कर पड़ता उन्हें उठाना 
झुको,बड़ों के चरण छुओ ,परशाद मिलेगा
सच्चे दिल से तुमको  आशीर्वाद   मिलेगा
मुस्लिम जाते मस्जिद,हिन्दू जाते मंदिर
ईश वंदना हरदम की जाती है झुक कर
जब सिग्नल झुकता है,रेल तभी चलती है
झुक कर करो सलाम,बात तब ही बनती है
हरदम रहते तने,बात   करने  ना  रुकते 
वोट मांगने ,अच्छे अच्छे ,नेता    झुकते
तूफानों में,जो तरु झुकते,रहते  कायम
रहते तने,जड़ों से  उखड़ा करते  हरदम 
अगर झुक गयी नज़र,प्यार में  उनकी 'हाँ'है
बिना झुके क्या कभी किसी से प्यार हुआ है
झुकने झुकने में भी पर  होता है  अंतर
झुके सेंध में, घुसे चोर तब घर के अंदर
चीता जब झुकता है,तेज वार है  करता 
जितनी झुके कमान ,तीर तेजी से चलता
चलते है झुक, जब हो जाती अधिक उमर है
झुक कर पढ़ते,जब होती कमजोर नज़र है
 इसीलिये आवश्यक है ये बात  जानना
झुकने वाले की मंशा,  हालात  जानना
अम्बर झुकता दूर क्षितिज में,धरा मिलन को
झुकना सदा सफलता देता है जीवन को

मदन मोहन बाहेती'घोटू'