Tuesday, September 2, 2014

           मिलनी मोहलत  चाहिए

मन मे होना चाहिए कुछ कर गुजरने का जूनून ,
      लगा जी,जुटना पडेगा ,अगर शोहरत  चाहिए
यूं तो सब ही काटते है ,पर सफल वो जिंदगी,
     नाम थोड़ा चाहिए और थोड़ी  इज्जत  चाहिए
बूढ़े बूढ़े लोग भी चढ़ जाते है एवरेस्ट पर,
      थोड़ा जज्बा चाहिए और थोड़ी हिम्मत चाहिए
बिना माचिस  जलाये भी,लोग जलने लगेगें ,
      आप  हो  खुशहाल ,बीबी  खूबसूरत  चाहिए
हमने अपनी जिंदगी का किया सौदा आपसे,
      रुंगावन  में प्यार ,कीमत में रियायत  चाहिए
इतनी सुन्दर रची दुनिया ,जिंदगी दी चार दिन,
     ऐ खुदा!एक और दिन की ,मिलनी मोहलत चाहिए

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
          स्मार्टवाच
नाचते जिसके इशारों पर उमर सारी रहे ,
        हमने अपनी कलाई पर ,उनकी फोटो खींच ली
स्मार्ट है ये वाच या फिर हो गए हम स्मार्ट है,
      कैद मुट्ठी पर किया और मिटा अपनी खीज ली            
घोटू

                    दीवानगी
चाँद बादल में छिपा पर देते उसको अर्घ्य है ,
            ये हमारी आस्था और श्रद्धा की है बानगी
तुमने घूंघट में छिपा कर रखा अपना चन्द्रमुख,
      फिर भी तुम पर मर मिटे ,ये हमारी दीवानगी 
घोटू

                    बरकत
आपका सजना संवरना ,सबका सब बेकार  है ,
       जिंदगी में आपकी जो किसी से चाहत नहीं
कितने ही स्वादिष्ट सुन्दर,आप व्यंजन पकाएं ,
      कोई यदि ना सराहे ,होती सफल मेहनत नहीं
हरे पीले लाल नीले ,कितने भी रंगीन हो ,
      फूलों में खुशबू नहीं तो काम की रंगत नहीं
बिन पसीना बहाये ,आये ,न हो ईमान की,
     'घोटू' ऐसी कमाई में ,होती है बरकत नहीं
घोटू
             चाय की चुस्की
चाहते जो आप जीना मस्ती से सारी उमर ,
     रोज पीना चाहिए फिर दार्जिलिंग की 'ब्लेक टी'
कड़क खुशबू भरी होती चाय भी आसाम की,
     एक प्याला पी लिया तो आ जाती है ताजगी
जीने यदि चाव है,दिल में किसी की चाह है ,
    चाहते हो खुशी से कट जाए सारी   जिंदगी
छोटी छोटी पत्तियों में जोश का जादू भरा,
     चुस्ती लाती है बदन में  ,एक चुस्की चाय की

घोटू   

Monday, September 1, 2014

            बिजली और बीबी

बिजली से होती नहीं कम है हमारी बीबियाँ,
            कड़कती है बिजलियों सी ,होती जब नाराज़ है
बिना उनके दो घड़ी भी गुजारा चलता नहीं,
             होता उनका   इस तरह से आदमी मोहताज है
कंवारी जब होती है तो होती है A .C. करेंट,
            लगता झटका ,अगर छूते ,उनके खुल्ले तार से
शादी करके रहती तो बिजली है,पर A .C . नहीं ,
           बन जाया करती है D .C . चिपकाती है  प्यार से  
कभी स्लिम सी ट्यूब लाईट ,कभी बन कर बल्ब ये,
              अंधियारे जीवन में लाती ,चमचमाती  रोशनी
काम सब करती किचन के ,धोती है कपडे सभी,
               घर को रखती साफ़,सुन्दर,बन कुशल सी गृहणी
सर्दियों में देती ऊष्मा ,हीटरों की तरह वो,
                 गर्मियों में ऐ सी बन कर देती है ठंडक   हमें
दो मिनिट भी चली जाती ,कर देती बेचैन है ,
                  काम उसके बिन न चलता ,जाती पड़ आदत हमें
बन के टी वी दिखाती है ,फैमिली के सीरियल  ,
                    गुनगुनाती रेडियो सी,वो मधुर   संगीत है
और मोबाइल हमारा ,चार्ज करती प्रेम से,
                    बिजली की जैसी ही होती,औरतों की प्रीत है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
                सब्जियों की गपशप

शिकायत भिन्डी ने की ,आवारा है 'बैंगन' मुआ ,
                   हरी ताज़ी देख मुझको ,रोज़ ही है छेड़ता
हाँ में हाँ उसकी मिलाई एक 'शिमला मिर्च'ने ,
               बोली बेपेंदी का है,कल हुआ था मुझ पर फ़िदा
बोला मुझसे लगती हूँ  मैं फूली फूली सेक्सी ,
                मैं ज़रा सी मुस्कराई,मेरे पीछे पड़  गया  
है बड़ा ही फ्लर्ट टाइप का ये बन्दा इस कदर,
            'लाल कॅप्सिकम'दिखी,उसकी तरफ वो बढ़ गया
बीन्स की पतली  फली ने मारा ताना रहने दे ,
              तू भी तो शौक़ीन ,नज़रें हर तरफ है  मारती
कल ही मैंने देखा तुझको आलू के आगोश में,
              कौनसी तू सती है ,जिसकी उतारें आरती
हरे धनिये ने कहा करते है हम भी इश्क़ पर,
               ऊपर ही ऊपर से सबको , सहला लेते रोज है
 मगर ये आलू भी सचमुच है गजब का इश्क़िया ,
              मिल के हरएक सब्जी के संग,ये  उड़ाता मौज है
सब्जियों में चल रही थी इस तरह की गूफ्तगू ,
              एक टमाटर नज़र आया ,लाल , प्यारा ,रसभरा
सब की सब ही बावली सी  उसके पीछे पड़ गयी ,
              और पकने लगा सबके साथ   उसका  माज़रा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, August 30, 2014

            अंदर बाहर

जो बाहर से कुछ दिखते है,
                अंदर कुछ और हो सकते है
नहीं जरूरी वैसे ही हों,
                 जैसे   बाहर  से  लगते  है
बाहर है तरबूज हरा पर ,
                   लाल लाल होता है अंदर
होता श्वेत सेव फल अंदर,
                   लेकिन लाल लाल है बाहर
बाहर कुछ है,अंदर कुछ है ,
                    खरबूजा भी कुछ ऐसा है
लेकिन पीला पका आम फल ,
                     बाहर भीतर एक जैसा है
कच्चे फल कुछ और दिखते है ,
                    बदला करते जब पकते है
जो बाहर से कुछ दिखते है,
                    अंदर कुछ और हो सकते है
केला हो या लीची हो पर ,
                       सबकी ऐसी ही हालत है
वैसे ही कुछ इंसानों की,
                       कुछ है सूरत,कुछ सीरत है
कोई  में  रस होता है तो ,
                          कोई  में  गूदा  है  होता 
कोई में गुठली होती है,
                        सब कुछ जुदा जुदा है होता
   पोले ढोल हुआ करते जो ,
                        वो थोड़े  ज्यादा  बजते है
जो बाहर से कुछ दिखते है,
                       अंदर कुछ और हो सकते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'  
                    आंसू

आंसू सच्चे मित्र और हमदर्द दोस्त है ,
           जब भी होता दर्द ,आँख में आ जाते है
देकर चुम्बन गालों को पुचकारा करते ,
            धीरे धीरे बह  गालों  को  सहलाते   है
जब खुशियों के पल आते मन विव्हल होता ,
 तो ये आँखों से मोती बन, बिखरा करते ,
औरजब दुख के बादल छाते,घुमड़ाते है ,
          नयन नीर बन,तब ये बरस बरस जाते है
जब पसीजता है अंतरतर सुख या दुःख से,
तो यह निर्मल जल नयनों से टपका करता ,
और इनकी बूंदों में इतनी ऊष्मा होती ,
            पत्थर से पत्थर दिल को भी पिघलाते है
अधिक परिश्रम करने पर या अति ग्रीष्म में,
तन के  रोम  रोम से  स्वेद  बहा  करता  है ,
किन्तु भाव जो मन को पिघलाया करते है ,
             आँखों के रस्ते आंसू  बन कर   के आते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'        
          यक्ष प्रश्न

हे भगवान !मुझे ये बतला दे कि ,
मर्दों के साथ ही ,क्यों होता ये अन्याय है
बैल हमेशा हल जोतता रहता है,
और माँ कह कर पूजी जाती गाय  है
विवाह उत्सव में,सजी धजी घोड़ी पर,
दूल्हे राजा को बिठाया जाता है
और बेचारे घोड़े से  हमेशा ही ,
तांगे  या इक्के को खिंचवाया जाता है
मुर्गी अंडा देती है ,इसलिए ,
उसकी होती अच्छी देखभाल है
और बेचारा मुर्गा ही क्यों ,
हमेशा होता हलाल है
भैस दूध देती है तो उसे,
खिलाया पिलाया जाता है
और भेसे से ,भैंसागाडी को,
हमेशा खिंचवाया जाता है
मर्द ,दिन भर काम में पिसता रहता ,
करता कमाई है
और घर पर चैन से ऐश करती ,
उसकी लुगाई है
और जब सब मादाओं को ,
आदमी बहुत करता है प्यार
तो क्यों फिर बेटियां ,
जन्म लेने के पहले ही ,
कोख में दी जाती है मार ? 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'