Monday, October 27, 2014

फूटे हुए पटाखे हम है

                  फूटे हुए पटाखे हम है

सूखी  लकड़ी मात्र नहीं हैं,हम खुशबू वाले चन्दन है
जहाँ  रासलीला होती थी,वही पुराना  वृन्दावन है
कभी कृष्ण ने जिसे उठाया था अपनी चिट्टी ऊँगली पे,
नहीं रहे हम अब वो पर्वत,अब गोबर  के गोवर्धन है
हरे भरे और खट्टे मीठे , अनुभव वाली कई सब्जियां ,
मिला जुला कर गया पकाया ,अन्नकूट वाला भोजन है
बुझते हुए दीयों के जैसी ,अब आँखों में चमक बची है,
जब तक थोड़ा तेल बचा है,बस तब तक ही हम रोशन है
ना तो मन में जोश बचा है,ना बारूद  भरा है तन में,
जली हुई हम फूलझड़ी है,फूटे हुए पटाखे,बम  है

घोटू

Tuesday, October 21, 2014

अपनेवाले

            अपनेवाले

अपने वाले ही बस अपने वाले होते
जो सुखदुख में संगसंग तपनेवाले होते
हर मुश्किल में खुद बढ़ आगे आया करते
हरेक काम मे अपना हाथ बटायां करते
सभी समस्याओं को जो सुलझाया करते
निज जी जान लगा कर खपने वाले होते
अपने वाले तो बस अपने वाले होते
'हाय ,हेल्लो 'के दोस्त प्रीत मुँहदेखी करते
अच्छे दिन में बातें मौज मज़े की करते
पर जब जरुरत पड़ती ,हाथ खींच लेते है,
साथी वो तो बस है सपने वाले   होते
अपने वाले तो बस अपने वाले होते
कुछ रिश्ते ऐसे होते, बस बन जाते है
ये तब होता जब मन से मिल मन जाते है
नहीं जरूरी है हो रिश्ता सिर्फ खून का ,
कई प्यार की माला जपने वाले होते
अपने वाले तो बस अपने वाले  होते

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

पटाखा तुम भी-पटाखा हम भी

             पटाखा तुम भी-पटाखा हम भी

छोड़ती खुशियों का फव्वारा तुम अनारों सा,,
              हंसती तो फूलझड़ी जैसे फूल ज्यों झरते
हमने बीबी से कहा लगती तुम पटाखा हो ,
             सामने आती हमारे ,जो सज संवर कर के
हमने तारीफ़ की,वो फट पडी पटाखे सी,
            लगी कहने  पटाखा मैं  नहीं ,तुम हो डीयर
मेरे हलके से इशारे पे सारे रात और दिन,
           काटते रहते हो,चकरी  की तरह,तुम चक्कर 
भरे बारूद से रहते हो ,झट से फट पड़ते,
           ज़रा सी छूती  मेरे प्यार की जो चिनगारी
लगा के आग,हमें छोड़, दूर भाग गयी,
            हुई  हालत हमारी ,वो ही  पटाखे वाली

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Monday, October 20, 2014

वो बात अब न रही

             वो बात अब न रही

जी तो करता है मेरा ,ये भी करू,वो भी करू,
         मगर मैं क्या करूं ,ये उम्र साथ अब न रही
न तो हम में ही रहा जोश वो जवानी का,
           तुम्हारे जलवों में वैसी बात अब न रही 
फ़ाख़्ता मारते थे जब मियां ,वो दिन न रहे,
           सितारे तोड़ के लाने की उमर बीत गयी,
अब तो अखरोट भी हम तोड़ नहीं पाते है,
          रंगीले दिन और सुहानी वो रात अब न रही
ज़माना वो भी था जब हम पतंग उड़ाते थे,
          माशुका  हाथ में चरखी ले ढील देती  थी,
 हम खुद ही हो गए है इस कदर ढीले ,
           वक़्त की डोर भी तो अपने हाथ अब न रही
बहुत ही चौके और छक्के जड़े  जवानी में ,
            समय के आगे मगर हुए 'कैच आउट'हम
अब तो हम 'पेवेलियन'छोड़ कर जाने वाले ,
           हमारे  बल्ले में वो करामात अब न  रही
कभी डंका हमारे नाम का भी बजता था,
         हमारी आरती भी लोग उतारा करते ,
ज़माना करता नमस्कार चमत्कारों को ,
        हमारे जादू में भी वैसी बात अब न रही

मदन मोहन बाहेती'घोटू'      

विदेशी हूर-स्वाद भरपूर

           विदेशी हूर-स्वाद भरपूर

'पीज़ा'की तरह चीजी है चेहरा ये तुम्हारा ,
             टॉपिंग बदल के  कितने ही मन को हो लुभा रही
ज्यूसी हो 'पास्ते'की तरह नास्ते में तुम,
           'बर्गर'की तरह टेस्ट  में हो हम को भा रही
हो 'ग्रिल्ड सेन्डविच'सी  ताज़ी,गरम गरम ,
                 स्वादिष्ट और हेंडी तुम 'फ्रेंच फ्राई'सी
लगती विदेशी हूर सी भरपूर स्वाद में ,
            'क्रीमी'हो 'पेस्ट्री की तरह ,मुझ पे छारही

घोटू

ब्यूटी चाइनीज-कितनी लजीज

  ब्यूटी चाइनीज-कितनी लजीज

लगती हो 'मंचूरियन 'जैसी,सॉफ्ट सॉफ्ट  तुम ,
               नूडल की तरह लटक रहे सर के बाल है    
नाइस सा प्यार स्वाद'फ्राइड राईस'की तरह,
               'स्प्रिंग रोल 'की तरह   तू  बेमिसाल  है
हो कभी 'चॉप्सी'की तरह लगती कुरमुरी ,
              'चिली पनीर' की तरह का   टेस्ट है कभी ,
तू है लजीज ,चाइनीज फ़ूड की तरह,
              'चिल्ली पोटेटो' की तरह  जलवा कमाल है

घोटू

Saturday, October 18, 2014

ऑरेन्ज काउंटी का नया 'स्पा'

     ऑरेन्ज काउंटी का नया 'स्पा'
                        १ 
पत्नी जी स्पा गयी,लाई रूप निखार
पतझड़ वाले पेड़ पर,आयी नयी बहार
आयी नयी बहार,बाल रंगवाये काले
'कर्लिंग कर्लिंग'प्यारे लेटेस्ट फैशनवाले
'घोटू'खुश है किस्मत उनपर हुई मेहरबां
पेंसठ की बीबी ,पेंतीस सी ' लगे है जवां
                        २
देखा कायाकल्प ये ,उनका निखरा रंग
फिर से दिखें जवान हम,मन में उठी उमंग
मन में उठी उमंग,जोश कुछ ऐसा आया
'स्पा'जा हमने 'पेडी मेनी क्योर'कराया
करा 'फेशियल 'मुंह की रंगत ,हुई सुहानी
और 'बॉडी मसाज'लाई फिर नयी जवानी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'