Monday, December 15, 2014

विदेश में बसी औलाद-माँ बाप की फ़रियाद

     विदेश में बसी औलाद-माँ बाप की फ़रियाद

भूले भटके याद कर लिया करो हमें ,
             बेटे! इतना बेगानापन ठीक नहीं
पता नहीं हम कभी अचानक ही यूं ही,
          चले जाएँ कब, छोड़ ये चमन, ठीक नहीं
तुम बैठे हो दूर विदेशी धरती पर ,
           तुम्हे ले गयी है माया ,भरमाने की 
मातृभूमि की धरती ,माटी,गलियारे,
            जोह रहे है  बाट तुम्हारे  आने की
ऐसे उलझे तुम विदेश के चक्कर में,
            अपने माँ और बाप,सभी को भूल गये
तुमको लेकर क्या क्या आशा थी मन में,
             इतने सपने  देखे, सभी फिजूल गये
यहीं बसा परिवार,सभी रिश्ते नाते,
              ये  तुम्हारा देश,तुम्हारी  धरती  है
आस लगाए बैठे है कब आओगे ,
             प्यासी आँखे ,राह निहारा  करती है
जहाँ पले  तुम ,खेले कूदे ,बड़े हुए,
              याद तुम्हे वो घर और आँगन करता है
तुम शायद ही समझ सकोगे कि कितना,
             याद तुम्हे व्याकुल होकर मन करता है
सोच रहे होगे 'इमोशनल फूल' हमें ,
              हाँ ,ये सच है ,हम में बहुत 'इमोशन' है
नहीं 'प्रेक्टिकल'हैं हम इतने अभी हुये ,
             प्यार मोहब्बत अभी यहाँ का 'फैशन'है
हमको तुम हर महीने भेज चन्द 'डॉलर',
             सोचा करते ,अपना फर्ज निभाते हो
भूले भटके ,बरस दो बरस में ही तुम ,
              शकल दिखाने  ,कभी कभी आ जाते हो
यही देखने कि हम अब तक ज़िंदा है,
               कितनी 'प्रॉपर्टी' है,कीमत  क्या  होगी
हरेक  चीज, पैसों से तोला करते हो ,
               तुम्हे प्यार करने की फुर्सत कब होगी
हम माँ बाप ,तुम्हारी चिंता करते है ,
                देते तुमको सदा दुआ ,सच्चे  मन से
जबकि तुमने सबसे ज्यादा दुखी किया ,
                  बन  निर्मोही,अपने   बेगानेपन  से
 फिर भी इन्तजार में तुम्हारे,आँखें,
                  लौट आओगे ,आस लगाए ,बैठी है
शायद तुमको भी सदबुद्धी आजाये ,
                  मन में यह विश्वास जगाये बैठी  है      
ऐसा ना हो ,इतजार करते आँखें,
                  रहे खुली की खुली ,लगे पथराने सी
मरने पर भी लेट बरफ की सिल्ली पर ,
                   करे प्रतीक्षा ,तुम्हारे आ जाने की
बहुत जलाया हमको तुमने जीवन भर,
                 अंतिम पल भी तुम्ही जलाने आओगे
बहुत बहाये आंसू हमने जीवन भर ,
                   तुम गंगा में अस्थि बहाने आओगे
सदा प्यार से अपने भूखा रखा हमें ,
                    आकर कुछ पंडित को भोज कराओगे
और बेच कर सभी विरासत पुरखों की,
                     शायद अपना अंतिम फर्ज ,निभाओगे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'  

Saturday, December 13, 2014

कोई है

            कोई है
मैं नहीं लिखता ,लिखाता कोई है
नींद से मुझको   जगाता  कोई  है
क्या भला मेरे लिए क्या है बुरा ,
रास्ता मुझको दिखाता कोई  है
कभी गर्मी,कभी सर्दी ,बारिशें ,
ऋतु में बदलाव लाता कोई है
हर एक ग्रह की अपनी अपनी चाल है,
मगर इनको भी  चलाता कोई है
कभी धुंवा ,लपट या चिंगारियां ,
अगन कुछ  ऐसी जलाता कोई है
डालते उसके गले में हार हम ,
जंग हमको पर जिताता  ,कोई है
कौन  है वो ,कैसा उसका  रूप है,
कभी भी ना ,नज़र आता कोई है
दुनिया के कण कण को देखो गौर से,
हर जगह हमको  दिखाता  कोई है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

वक़्त की बात

       वक़्त की बात

वक़्त किसको कब बना दे बादशाह ,
  धूल कब किसको चटा दे ,खेल मे
कल तलक थी जिसकी तूती बोलती ,
  आजकल वो सड़ रहे है   जेल में
खेलते थे करोड़ों में जो कभी ,
   आजकल वो हो गए कंगाल है
हजारों की भीड़ थी सत्संग में,
   कोठरी में जेल की बदहाल है
भोगते फल अपने कर्मो का सभी,
  जिंदगी की इसी रेलमपेल  में
कल तलक थी जिसकी तूती बोलती ,
आजकल वो सड़ रहे है जेल में

घोटू

पड़ी रिश्तों पर फफूंदी

     पड़ी रिश्तों  पर फफूंदी

जब से  मैंने खोलकर संदूक देखा ,
      पुरानी यादें सताने लग गयी है
 बंद बक्से में पड़े रिश्ते  पुराने ,
     महक सीलन की सी आने लग गयी है
फफूंदी सी रिश्तों पर लगने लगी है
    चलो इनको प्यार की कुछ धूप दे दे
पुराना अपनत्व फिर से लौट आये ,
     रूप उनको ,वक़्त के अनुरूप दे दें
दूध चूल्हे पर चढ़ा ,यदि ना हिलाओ,
   उफन, बाहर पतीले से निकल जाता
बिन हिलाये ,आग पर सब चढ़ा खाना ,
    चिपक जाता है तली से ,बिगड़ जाता
बंद रिश्ते बिगड़ जाते वक़्त के संग ,
    इसलिए है उनमे कुछ  हलचल  जरूरी
रहे चलता ,मिलना जुलना ,आना जाना ,
    तभी  नवजीवन मिले , हो  दूर  दूरी
चटपटापन भी जरूरी जिंदगी में ,
    मीठी बातों से सिरफ़  ना काम चलता
बनता है अचार कच्ची केरियों से ,
     मीठे आमों का नहीं  अचार  डलता
खट्टे मीठे रिश्तों को रख्खे मिला कर
दूध को ना उफनने दें ,हम हिला कर
इससे पहले क्षीण हो क्षतिग्रस्त रिश्ते ,
       आओ इनको हम नया एक रूप दे दें  
फफूंदी सी रिश्तो पर लगने लगी है,
        चलो इनको प्यार की कुछ धूप  दे दें

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

बदलाव

        बदलाव

फोन एंड्रॉइड का जबसे लगा उनके हाथ है ,    
 उसको ही सहलाते रहते ,हमको सहलाते नहीं
जबसे पड़ने लग गयी है सर्दियाँ ,वो आजकल,
         रजाई  से लिपटे रहते ,हमसे  लिपटाते नहीं
जब से टी वी घर में आया ,ऐसा कुछ आलम हुआ ,
बढ़ती ही जाती दिनोदिन ,हमसे उनकी बेरुखी,
   देखते रहते उसी को ,वो लगाकर टकटकी ,
  बस उसी से चिपके रहते ,हमको चिपकाते नहीं   

घोटू

वक़्त का मिजाज

           वक़्त का मिजाज

रात जब सोया था छिटकी चांदनी थी ,
 सवेरे जब उठा ,देखा कोहरा  है
यूं ही पल पल रंग है अपने बदलता ,
वक़्त का मिजाज कितना दोहरा है

कौन सा पल कब बदल दे जिंदगानी ,
किसी को होता नहीं इसका पता है 
समय पर बस नहीं चलता है किसीका,
देखिए इंसान की क्या विवशता है
आसमां था साफ़ ,सूरज चमचमाता ,
कुछ पलों के बाद बादल से भरा है
यूं ही पल पल रंग है अपने बदलता ,
वक़्त का मिजाज कितना  दोहरा है

इस तरह से बदल जाती भावनायें ,
कल तलक था प्यार ,अब नफरत भरी है
जिसे देखे बिन नहीं था चैन कल तक,
आज उसने ,नज़र अपनी फेर ली  है
कल तलक था रेशमी तन जो सलोना,
उम्र के संग हो गया वो खुरदुरा  है
यूं ही पल पल रंग है अपने बदलता ,
वक़्त का मिजाज कितना  दोहरा है

कल तलक था दूध मीठे स्वादवाला ,
आज खट्टा पड़ गया है,फट गया है
एक जुट परिवार रहता था कभी जो,
कितने ही हिस्सों में अब वो बंट गया है
देखता है रोज ही ये सभी होते ,
वक़्त से इंसान फिर भी ना डरा  है   
यूं ही पल पल रंग है अपने बदलता ,
वक़्त का मिजाज कितना दोहरा है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Thursday, December 11, 2014

ऐसा भी होता है

       ऐसा भी होता है

एक लड़का ,साइकल पर सवार
पैदल घूम रहे थे एक बुजुर्गवार
लड़के ने उन्हें मार दी टक्कर
बुजुर्गवार  हो गए घायल
लड़के से पिता से जब की गयी शिकायत
उन्होंने  उत्तर ये दे दिया झट
हम क्या करें जनाब
ये तो जानते है आप
'BOYS WILL BE BOYS '
संयोग की बात
थोड़े ही दिनों बाद
उनकी लड़की को,
 पड़ोसी लड़के ने छेड़ दिया
शिकायत करने पर ,
लड़के के बाप ने दिया
वो ही टका सा जबाब
हमक्या करें जनाब
ये तो जानते ही है आप
'BOYS  WILL BE  BOYS '

घोटू