Wednesday, January 14, 2015

वाइब्रंट गुजरात

                   वाइब्रंट गुजरात

छोड़ कर यू पी की मथुरा ,गये गुजरात जब कान्हा,
      वहां पर द्वारका के धीश बन कर हुए  आभूषित
गए घनश्याम  बालक छोड़  घर,गुजरात ,यूपी से ,
     बन गए स्वामिनारायण ,हो गए विश्व   में पूजित
बडी वाइब्रंट ,उपजाऊ ,धरा गुजरात की है ये ,
       यहाँ हर बीज होता पल्ल्वित ,धन धान्य देता है
वहीँ की तो उपज है ये ,हमारे नरेंदर मोदी ,
        आज जो देश ही ना विश्व के  गणमान्य  नेता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

केजरीवाल -३

 केजरीवाल -३

तुम्हारे कान पर मफलर ,तुम्हारे हाथ में झाड़ू,
समझ में ये नहीं आता ,तुम्हारी शक्सियत क्या है
आदमी ,आम है सो आम है ,क्यों लिख्खा टोपी पर ,
समझ में ये नहीं आता  ,तुम्हारी कैफ़ीयत क्या है
तुम अपने साथ फोटो खिचाने का लेते हो पैसा ,
पता इससे ही लग जाता ,तुम्हारी ये नियत क्या है
आप के साथ में हम बैठ कर के खा सके खाना,
आदमी आम हम इतने ,हमारी हैसियत क्या है 
चुना था हमने पिछली बार भी पर टिक न पाये तुम ,
चुने जाने की अबकी बार फिरसे जरूरत क्या है
न अन्ना के ही रह पाये, न हो पाये  हमारे तुम ,
बोलते कुछ हो करते कुछ तुम्हारी असलियत क्या है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मै केजरीवाल आया हूँ-२

    मै  केजरीवाल आया हूँ-२

सुनाने हाल आया हूँ
मैं केजरीवाल आया हूँ
मैं ऊंचे बोल लाया हूँ
बजाने ढोल लाया  हूँ
चिपक कुर्सी पे बैठूंगा,
मैं  'फेविकोल 'लाया हूँ
पांच वर्षों तक सत्ता का ,
ले मन में ख्याल आया हूँ
मैं केजरीवाल आया हूँ
मैं पानी सस्ता कर दूंगा
मैं  बिजली सस्ती करदूंगा
छीन ली झाड़ू मोदी में ,
साफ़ हर बस्ती कर दूंगा
मैं रिश्वतखोर लोगों की ,
खींचने खाल आया हूँ
मैं  केजरीवाल आया हूँ
मोदीजी कहते है ना,
 खाऊंगा,खाने नहीं दूंगा ,
मगर मैं खाऊंगा और,
 खाने के पैसे वसूलूंगा
बीस हज्जार की थाली ,
में रोटी ,दाल लाया हूँ
मैं  केजरीवाल आया हूँ
कमाई करने का अपना ,
तरीका होगा कुछ ऐसा 
मेरे संग फोटो का पैसा
मेरे संग खाने का पैसा
मैं बनिया हूँ,कैसे भी बस,
कमाने माल आया हूँ
मैं  केजरीवाल आया हूँ

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Sunday, January 11, 2015

शादीशुदा जिंदगी

   शादीशुदा जिंदगी

 बड़ी तीखी कुरमुरी सी
 स्वाद से लेकिन भरी सी
जिंदगी शादीशुदा की,
है पकोड़ी चरपरी सी
मज़ा लेकर सभी खाते ,
भले खाके करते सी सी
सभी के मन को सुहाती,
चाट है ये चटपटी सी
जलेबी सी है रसीली ,
भले टेढ़ी ,अटपटी सी
पोल कितनी भी भले हो,
मगर बजती बांसुरी सी
मुंह  जलाती सभी मिर्चे ,
लाल,काली या हरी सी
लगी मुंह से नहीं छूटे ,
सर्दियों में मूंगफली सी
कैसी भी हो,प्यार करती ,
बीबियाँ, लगती  परी सी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, January 10, 2015

किसी के सामने भी जो
        नहीं झुकता अकडता है
उसे अपने ही जूतों के
           सामने झुकना पडता है

पडी कुछ इस तरह सर्दी
        बताये हाल हम कल का
रुइ से बादलों की रजाई मे
         सूर्य जा दुबका
हो गया सर्द था मौसम
           बढ गई इस कदर ठिठुरन
रजाई से न वो निकला
            रजाई से न निकले हम

Thursday, January 8, 2015

ये उत्तर प्रदेश है

            ये उत्तर प्रदेश है

ये मेरा देश है ,उत्तर प्रदेश है
जन्मभूमि यह श्रीकृष्ण की ,यहीं पे जन्मे राम है
मथुरा ,वृन्दावन काशी है और अयोध्या धाम है
गंगा जमुना बहती रहती ,सरयू भी अविराम है
धर्म कर्म शिक्षा संस्कृती का ,यहीं हुआ उत्थान है
दिया बुद्ध ने ,सारनाथ मे,यहीं  ज्ञान  संदेश  है
   ये मेरा देशहै, उत्तर प्रदेश है
शस्यश्यामला है ये धरती ,सभी तरफ हरियाली है
है समृद्ध,  यहाँ के वासी, सुख,शांति, खुशहाली  है
खेत लहलहाते है फसलों से, फलों लदी हर डाली है
रहन सहन और खानपान में ,इसकी बात निराली है
प्रगति पथ पर बढ़ता जाता,बदल रहा परिवेश है
   ये मेरा देश है ,उत्तरप्रदेश  है
हस्तशिल्प उद्योग यहाँ पर ,गाँव गाँव में विकसित है
हर  बच्चा ,अब कंप्यूटर में ,शिक्षित और प्रशिक्षित है
सड़क ,रेल का जाल बिछा है ,वातावरण   सुरक्षित है
नए नए उद्योग यहाँ पर ,रोज हो रहे विकसित है
आमंत्रण, सरकार दे रही ,सुविधा कई  विशेष है
     ये मेरा देश है,उत्तर  प्रदेश है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'