Wednesday, October 21, 2015

जीवन यात्रा

           जीवन यात्रा

जीवन पथ पर तुमको बढ़ते ही जाना है,
ध्येय तुम्हारा अपनी मंजिल को पाना है
बाधाएं कितनी ही आ ,रोकेगी  रस्ता ,
धीरज रख तुमको उनसे ना घबराना है
तुम चुपचाप सड़क पर सीधे जाते होगे ,
तीव्र गति से पास कोई वाहन गुजरेगा
उसके पहिये से गड्ढे में पड़ा हुआ जो,
गंदा और ढेर सारा कीचड़ उछलेगा
और उसके कुछ छींटे ,जाने अनजाने ही ,
तुम्हारे उजले कपड़े ,गंदे  कर देंगे
इस जीवन में ऐसे कई हादसे होंगे ,
तुमको यूं ही परेशान कर,दुःख भर देंगे
इसका मतलब नहीं सड़क से तुम ना गुजरो,
 जीवनपथ लोग कई लोग धोखा करते है
हाथी जब भी चलता शान और मस्ती से,
तो सड़कों पर कुछ कुत्ते भौंका करते है
ये दुनिया है,कुछ ना कुछ होता रहता है,
कई तरह के अच्छे बुरे  लोग मिलते है
किन्तु सबर का फल हरदम मीठा होता है ,
जब मौैसम आता है ,फूल  तभी खिलते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

लेंग्वेज प्रॉब्लम

         लेंग्वेज प्रॉब्लम

मेरे मित्र मुसद्दीलाल ,
जो कुछ दिन पहले ही हुए थे स्वर्गवासी
कल मेरे सपने में आये,चेहरे पर थी उदासी
हमने कहा यार ,
तुम तो स्वर्ग में रहे हो मज़े मार
तो फिर क्यों चेहरा ग़मगीन है
वो बोले यार,
वैसे तो स्वर्ग का माहौल बड़ा हसीन है
अप्सराएं भी आसपास डोलती है
पर मेरी समझ में कुछ नहीं आता ,
वो न जाने कौनसी भाषा बोलती है
पंडित जी मुझे बड़ा मूरख बनाया है
स्वर्ग आने का रास्ता तो बतलाया है
पर यहाँ की भाषा नहीं सिखलाई
इसलिए यहां ,
बड़ा 'कम्युनिकेशन गेप' है मेरे भाई
यहां के फ़रिश्ते और अप्सराएं
एक अलग ही भाषा में बोलें और गाये
जो हमारी समझ में बिलकुल नहीं पड़ता है
वैसे  यहाँ भी,लोकल और 'ऑउटसाइडर'का,
काफी 'पॉलिटिक्स' चलता है
धरती से जब भी कोई आता है
उसे किसी अनजान भाषा बोलने वाले ,
अजनबी के साथ ठहराया जाता है
जिससे आपस में कोई बातचीत नहीं हो पाती  है
थोड़ी शांती तो रहती है ,पर इस माहौल में,
अपनी तो तबियत घबराती है
सोमरस पियो और पड़े रहो
यार ये भी कोई लाइफ है,तुम्ही कहो
न गपशप ,न नोकझोंक,
 न व्हाट्सऐप ,न इंटरनेट
न फेसबुक ,न टी वी,
कोई क्या करे दिन भर यूं ही बैठ   
निर्धारित समय पर ,
कुछ देर के लिए ,अप्सराएं तो आती  है
थोड़ा मन बहलाती है
पर न हम कुछ कह पाते है
न उनकी समझ में कुछ आता है
और इतनी देर में ,उनका हमारे लिए ,
'अलोटेड 'टाइम भी खतम हो जाता है
भैया,इससे तो अपनी धरती की लाइफ ,
ही बड़ी अच्छी थी
गपसप होती रहती थी,मौजमस्ती थी
यहाँ पर आकर तो हम एक दम ,
 बड़े डिसिप्लीन में बंध  गए है
यार,कहाँ  आकर  फंस गए है ?


मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

हम तुम -संग संग

    हम तुम -संग संग

मैं  काहे  कोठी, बंगला लूँ ,
या फ्लेट कहीं बुक करवालूँ
मेरे रहने को तेरे दिल का एक कोना ही काफी है
क्यों चाट पकोड़ी  मैं खाऊँ
'डोमिनो' पिज़ा  मंगवाऊँ
मेरे खाने को तुम्हारी ,मीठी सी झिड़की काफी है
क्यों पियूं कोई शरबत,पेप्सी
बीयर ,दारू  या  फिर  लस्सी
मेरे पीने को तुम्हारा ,ये रूप, प्रेम रस  काफी है
मैं तेरे  दिल में बस जाऊं
और नैनों में तुम्हे बसाऊं 
खुदमें खुद बस कर मुझे मिले,संग तुम्हारा काफी है 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Monday, October 19, 2015

बड़े कैसे बनते हैं

        बड़े कैसे बनते हैं

सबसे पहले अपनी दाल गलानी पड़ती ,
           और फिर मेहनत करना और पिसना पड़ता है
दुनियादारी की कढ़ाई के गरम तेल में,
               धीरे  धीरे  फिर  हमको  तलना  पड़ता  है
फिर जाकर मिलती है कुछ पानी की ठंडक,
            उसमे से भी  निकल, निचुड़ना फिर पड़ता  है
 तब मिलती है हमे दही की क्रीमी लेयर ,
               मीठी  चटनी  और  मसाला  भी  पड़ता  है
जीवन में कितनी ही मेहनत करनी पड़ती ,
                 तब जाकर के कहीं बड़े हम बन पाते है
कोई दहीबड़े कहता है कोई भल्ले ,
                      और  हमारे  बल्ले बल्ल हो जाते है
  
मदन मोहन बाहेती'घोटू'                     
                 
  
              
                 
  
              

गुल और गुलगुले

          गुल और गुलगुले

मित्र हमारे पहुंचे पंडित ,हमने पूछा ,
          है परहेज गुलगुलों से,गुड खाते रहते
मुंह में राम,बगल में छूरी क्यों रखते हो,
          छप्पन छुरियों के संग रास रचाते रहते
बन कर बगुला भगत ढूंढते तुम शिकार हो,
          कथनी और करनी में हो अंतर दिखलाते
सारे नियम आचरण लागू है भक्तों पर ,
         प्याज नहीं खाते पर रिश्वत  जम  कर खाते
उत्तर दिया मित्र ने हमको,कुटिल हंसी हंस ,
           है  परहेज  गुलगुलों से, पर  नहीं  गुलों  से
प्रभू की सुंदर कृतियों का यदि सुख हम भोगें ,
           जीवन का रस पियें ,कोई क्यों हमको कोसे
प्याज अगर खाएं तो मुख से आये बदबू ,
           प्याज खाई है,ये जग जाहिर हो जाता  है
रिश्वत की ना कोई खुशबू या बदबू है,
           पता किसी को इसीलिये ना  चल पाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

नदिया और जीवन

  नदिया और जीवन
         
मैं ,बचपन में थी उच्श्रृंखल
बच्चों सी ,चंचल और चपल 
पर्वतों से उतरते हुए ,
कुलांछे भरते हुए ,
जब जवानी के मैदानी इलाके में आई  ,
इतराई
मेरी छाती चौड़ी होने लगी
और मैं कल कल करती हुई,
मंथर गति से बहने लगी
मेरी जीवन यात्रा इतनी सुगम नहीं थी
मेरे प्रवाह में कई मोड़ आये
कभी ढलान के हिसाब से बही ,
कभी कटाव काट कर,
अपने रस्ते खुद बनाये
लोगों ने मुझे बाँधा ,
मुझ पर बाँध बनाया
मुझसे ऊर्जा ली ,
नहरों से मेरा नीर चुराया
 मेंरे आसपास ,अपना ठिकाना बनाया
मेरी छाती पर चढ़,
अपनी नैया को पार लगाया
किसी ने दीपदान कर ,
मुझे रोशन किया
किसी ने अपना सारा कचरा ,
मुझमे बहा दिया
कभी बादलों  ने ,अपना नीर मुझ में उंढेला
मैंने झेला ,
मुझे बड़ा क्रोध भी आया
मैंने क्रोध की बाढ़ में ,कितनो को ही बहाया
मुझे पश्चाताप हुआ,मैं शांत हुई
 और फिर आगे बढ़ती गयी
राह में कुछ मित्रों ने हाथ मिलाया
मेरे हमसफ़र बने
मेरी सहनशीलता और मिलनसारिता ,
मेरी विशालता का   सहारा बने
आज मैं ,विशाल सी धारा के रूप में,
बाहर से शांत बहती हुई दिखती हूँ
पर मेरे अंतर्मन में ,है बड़ी हलचल
क्योंकि महासागर में,विलीन होने का ,
आनेवाला है पल
आज नहीं  तो कल

  मदन मोहन बाहेती 'घोटू'



 

बचत के रोमांटिक तरीके

        बचत के रोमांटिक तरीके

मंहगाई बढ़ रही हमें कुछ करना होगा ,
ऐसा जिससे मज़ा उठायें  मंहगाई का,
रोमांटिक ढंग से यदि थोड़ी बचत करें तो ,
          मंहगाई की चुभन  नहीं   तड़फ़ा पायेगी
तुम परफ्यूम लगाओ,तुम्हे बांह में ,मैं लूँ ,
तो  मुझ में भी आयेगी तुम्हारी  खुशबू ,
इससे परफ्यूमो का खर्चा घट  जाएगा ,
          हम दोनों में एक जैसी खुशबू आएगी
मेरी बढ़ी हुई दाढ़ी जब चुभती तुमकों ,
तुम्हे  सुहाती है ये हरकत मर्दों वाली ,
मैं दाढ़ी के बाल बढ़ा कर तुम्हे चुभाऊँ ,
          शेविंग क्रीम ,ब्लेड की लागत कम आएगी
बाथरूम में एक तौलिया सिरफ रखेंगे ,
तुम पहले नहा लेना ,अपना बदन पोंछना ,
फिर नहाऊंगा मैं ,और उससे  तन पोंछूँगा ,
                   मुझमे भी तुम्हारी रंगत आ जाएगी    
 दालें मंहगी ,पतली दाल बनाया करना ,
एक थाली में साथ बैठ ,हम तुम खांयेंगे ,
इससे प्यार बढ़ेगा ,बरतन भी कम होंगे,
        विम की टिकिया ,ज्यादा दिन तक चल पाएगी
जब भी मैं मांगूं मिठाई ,तुम मीठी पप्पी,
दे  दे  कर , मेरे मन को  बहलाती रहना ,
इससे डाइबिटीज का खतरा भी न रहेगा,
         खर्चा भी कम ,अच्छी सेहत हो जाएगी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'