Monday, March 27, 2017

उमर इसमें क्या करेगी 

साथ अपनी कबूतरनी को लिए करना गुटरगूं ,
अरे ये है हक़ हमारा,उमर इसमें क्या करेगी 
पंख फैला ,आसमां में,रोज खाना कलाबाज़ी ,
अरे ये है 'लक 'हमारा ,उमर इसमें क्या करेगी 
मन मसोसे देखते रहना और जल कर ख़ाक होना ,
ये निकम्मापन है उनका,उमर इसमें क्या करेगी 
मिली जितनी जिंदगी है,करो तुम एन्जॉय खुल कर,
व्यर्थ है दिल को जलाना ,उमर इसमें क्या करेगी 
कोई घर की रोटी खाये ,कोई मंगवाता है पिज़ा,
सभी का  अपना तरीका ,उमर इसमें क्या करेगी 
कोई की पत्नी पुरानी,पड़ोसन पर कोई रीझा ,
लगे घर का माल फीका ,उमर इसमें क्या करेगी 
आदतें जो पालते हम ,है शुरू से ,ना  बदलती,
रहा करती मरने तक है ,उमर इसमें क्या करेगी 
हसीनो की ताकाझांकी ,का अलग ही लुफ्त होता ,
छूटती ये नहीं लत है,उमर इसमें क्या करेगी 
अगर घंटी नहीं बजती,फोन साइलेंट मोड़ पर है,
बेटरी या हुई डाउन ,उमर इसमें क्या करेगी 
उसको फिर रिचार्ज करवाने,का समय अब आगया है 
नया मॉडल या पुराना ,उमर इसमें क्या करेगी 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Sunday, March 26, 2017

      करिश्मा कृष्ण का 
                  १ 
बिन लिए हथियार कर में,महाभारत के समर में ,
पांडवों की जय कराना, ये करिश्मा कृष्ण का था 
छोड़ अपना राज मथुरा,समंदर के किनारे जा ,
द्वारिका नूतन बसाना ,ये करिश्मा कृष्ण का था 
बालपन में ,उँगलियों से ,बांसुरी की धुन बजाना ,
गोपियों का मन रिझाना ये करिश्मा कृष्ण का था 
और बड़े हो उसी ऊँगली ,पर चढ़ा कर के सुदर्शन ,
चक्र ,दुनिया को हिलाना, ये करिश्मा कृष्ण का था 
                    २ 
लोग अक्सर ऐश्वर्य पा ,भूल जाते सखाओं को ,
दोस्ती पर सुदामा के ,संग निभाई  कृष्ण ने थी 
एक पत्नी झेलना मुश्किल ,मगर रख आठ रानी,
जिंदगी, खुश सभी को रख कर बितायी कृष्ण ने थी 
फलों की चिता किये बिन,कर्म की महिमा बता कर,
 महाभारत के समर  में ,गीता सुनाई कृष्ण ने थी 
ऐसा बंशी बजाने का महारथ हासिल किया था ,
उमर भर ही चैन की  ,बंशी बजायी  कृष्ण ने थी 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'              

शार्ट कट 

मूर्ती को प्रभु समझ हम,पाहनो को पूजते है 
देव क्या ,हम देवता के वाहनों को पुजते है 
शिव का वाहन ,नन्दी है तो,हम उसे भी जल चढाते 
और मन की कामना हम ,कान में उसके  सुनाते 
गजानन वाहन है मूषक ,चढाये मोदक उड़ाता 
कान में उसके मनोरथ ,फुसफुसा  कर कहा जाता
चढ़ाते हनुमानजी को, राम का हम नाम लिखते 
भला क्यों सीधे प्रभु से , मांगने में हम  हिचकते 
सोचते है प्रभु से यदि ,करेगा रिकमंड  वाहन 
तो प्रभु जल्दी सुनेंगें, मिलेगा जो चाहता  मन 
काम चमचों से कराना , शार्ट कट का  रास्ता है
 रीति लेकिन ये पुरानी  ,बन गयी अब आस्था  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
शिकायत -पत्नी की 

छोटा सा सौदा लेने में,कितना मोलभाव करते हो 
एक पेंट भी लेनी हो तो ,तुम दस पेंट ट्राय करते हो 
कभी डिजाइन पसन्द न आती ,कभी फिटिंगमे होता संशय 
बना कोई ना कोई बहाना,टाल दिया करते तुम निर्णय 
तो शादी के पहले जिस दिन,मुझे देखने तुम आये थे 
कुछ मिनिटों में ,कैसे शादी का निर्णय तुम ले पाए थे 
जब तुमने मुझको देखा था ,क्या देखा बस चेहरा ,मोहरा 
केवल  नाकनक्श देखे थे,या देखा था बदन  छरहरा 
या फिर मेरे बाल जाल में, अपनी नज़रें उलझाई थी 
या फिर मेरी मीठी बातें ,तुम्हारे  मन को भायी  थी 
देख आवरण ही बस मेरा क्या तुम मुझको आंक सके थे 
सच बतलाना रत्ती भर भी ,मेरे दिल में झाँक सके थे 
जबकि तुम्हे मालूम था तुमको ,जीवन भर है साथ निभाना 
बहुत मायना रखती उस दिन ,तुम्हारी छोटी  हाँ या ना 
कुछ मिनिटों में कितना मुश्किल,होता है ये निर्णय करना 
अपना जीवन साथी चुनना,जिस के संग है जीना ,मरना 
आपस में कितनी मिलती है ,सोच हमारी और तुम्हारी 
एक गलत निर्णय जीवन भर,दोनों पर पड़ सकता भारी 
तो फिर उस दिन क्या अंदर से,तुम्हारा दिल कुछ बोला था 
या फिर शायद मुझे देख कर ,तुम्हारा भी दिल डोला था 
टालमटोल नहीं कर पाए ,तुमने बस ,हामी भर दी  थी 
ये तुम्हारा निर्णय था या ,फिर ये ईश्वर  की मरजी   थी 
कहते है कि सभी जोड़ियां ,है ऊपर से बन कर आती 
यह नियति का निर्णय होता,किसका ,कौन बनेगा साथी 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Tuesday, March 21, 2017

बूढ़े भी कुछ कम नहीं 

क्या जवानों ने ही ठेका ले रखा ,
           आशिक़ी का,बूढ़े भी कुछ कम नहीं 
बूढ़े सीने में भी है दिल धड़कता ,
             बूढ़े तन में होता है क्या  दम  नहीं 
जवानी में बहुत मारी फ़ाक्ता ,
                अनुभव से काबलियत आ गयी ,
बात ये दीगर है ,पतझड़ आ गया ,
              रहा पहले जैसा अब मौसम नहीं 

घोटू 
परशादखोर 

तरह तरह के प्राणी रहते ,है इस दुनिया के जंगल में 
कुछ गिरगिट जैसे होते है ,रंग बदलते है पल पल में 
बचाखुचा शिकार शेर ,गीदड़ से खाते चुपके से ,
ये परशादखोर ऐसे है ,खुश हो जाते  तुलसीदल  में 
इनको बस मतलब खाने से ,वो भी अगर मिले फ़ोकट में,
वो बस खाते है भंडारा ,जाते नहीं कभी होटल में 
गैरों की शादी में घुस कर ,मज़ा लूटते है दावत का ,
इनसे जब चन्दा मांगो तो ,गायब हो जाते है पल में 

घोटू 
कथनी और करनी 

न जाने लोग कितनी ही ,अजब बातें किया करते ,
जिनकी कथनी और करनी में,न कोई मेल होता है 
प्यार में कहते सजनी से,सितारे मांग में भर दूं ,
सितारे तोड़ कर लाना ,न कोई खेल होता है 
कभी मिलती नहीं आँखें ,मगर कहते नज़र लड़ना,
होठ से होठ मिलने से ,सदा होती नहीं पप्पी 
मिले जब होठ ऊपर का ,तुम्हारे होठ निचले से ,
इसे सीधी  सी भाषा में ,कहा जाता रखो चुप्पी 
न जाने उनकी मुस्काहट,गिराती बिजलियाँ कैसे ,
हंसी उनकी कहाती है ,भला क्यों फूल सा खिलना 
हमारा दिल अलग धड़के ,तुम्हारा दिल अलग धड़के ,
मगर क्यों लोग उल्फत में ,कहा करते है दिल मिलना 
अलग से पकते है चांवल,अलग से दाल भी पकती ,
मगर जब मिल के पकते है ,खिचड़ी गल रही कहते 
जरा भी ना खिसकती है,उसी स्थान पर रहती ,
मगर जब हिलती डुलती तो ,जुबां ये चल रही कहते 
हाथ से हाथ मिलने पर ,दोस्ती होती ना हरदम ,
इस तरह होती क्रिया को ,बजाना ताली कहते है 
वो हरदम बॉस ना होता,डरा करते है हम जिससे,
नाचते जिसके ऑर्डर पर ,उसे घरवाली कहते है 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'