Wednesday, August 9, 2017

जिंदगी और मिठाइयां 

हमारी जिंदगी में  ,
मिठाइयों का रोल है कितना अहम 
कि अपनी कोई भी ख़ुशी का प्रदर्शन 
मिठाई बाँट कर ही करते है हम 
जन्मदिन हो या विवाह हो 
या पूरी हुई ,संतान पाने की चाह हो 
आपने नया घर बनाया हो 
या बच्चे का अच्छा रिजल्ट आया हो 
सगाई हो या रोका हो 
कोई भी ख़ुशी का मौक़ा हो 
त्योंहार हो या कोई शुभप्रसंग 
अपनी प्रसन्नता प्रकट करने का ,
सबसे अच्छा ढंग 
यह कि सब मिलने जुलने वालों का ,
मुंह मीठा करवाया जाता है 
मिठाइयों का खुशीयों  से ,
चोली और दामन का नाता है  
अरे और तो और ,
भगवान से जब लेना होता है आशीर्वाद 
तो उन्हें भी चढ़ाया जाता है ,
मिठाइयों का ही परशाद 
गणेश जी को मोदक और ,
हनुमानजी को बेसन के लड्डू भाते है 
और कृष्ण भगवान को,
छप्पन भोग चढ़ाते है  
पर आजकल हम,
 मोटा न होने के चक्कर में 
या फिर डाइबिटीज के डर में 
जब परहेज से रहते है,
मिठाइयां नहीं खाते है 
हम दुनिया की कितनी अच्छी चीजों के ,
स्वाद से वंचित रह जाते है 
गरम गरम रस टपकाती जलेबियाँ 
जो पहली नज़र में ही चुरा लेती है जिया 
मुंह में पानी आ जाता है जिनका नाम सुन 
रसगुल्ले या गुलाबजामुन 
दूर से अपनी और खींचता है जिनका जलवा 
मूंग की दाल का या गाजर का हलवा 
देखते हम जिन पर हो जाते है लट्टू 
बूंदी के प्यारे प्यारे गोलमोल लड्डू 
क़त्ल करता हुआ ,चांदी की वर्क चढ़ी ,
काजू की कतलियों का यौवन 
देख कर नहीं डोलेगा किसका मन 
और वो आपके सामने अंगड़ाइयां भरती 
रस भरी प्यारी सी इमरती 
या  वो मन मोहते हुए रबड़ी के लच्छे 
देख कर मुंह में पानी भरते अच्छे अच्छे 
लवंगलता और बालूशाही की मिठास 
जो आपके लिए बनी है ख़ास 
 ये इतनी सारी मिठाइयां ,
आपको दे रही हो निमंत्रण 
और ललचाई नज़रों से ,
आप खुद पर कर रहे है नियंत्रण 
क्यों आप इन सबका मोह त्याग कर, बेकार 
अपनी जुबान पर करते है अत्याचार 
क्योंकि यदि आप अपनी जिव्हा को तरसाएगे 
तो बड़ा दुःख पाएंगे 
अरे अगर कुछ केलोरियाँ ,
ज्यादा भी खा ली जाएंगी 
दो चार किलोमीटर घूमने में जल जाएंगी 
पर बिना खाये जो आपका मन जलेगा 
आपको बहुत खलेगा 
ये दो इंच की लपलपाती जिव्हा 
जब तक तृप्त रहेगी 
तब तक मस्त रहेगी 
अगर मीठा खायेगी 
तो मीठा बतियायेगी 
और अगर तरसेगी 
तो कहर बन के बरसेगी 
और  अगर ये गलती से मचल गयी 
बगावत करके फिसल गयी 
तो फिर ये बड़ा सताएगी 
मुंह से निकली बात वापस  न आएगी 
इसलिए इस रसना को। 
रसास्वादन करने दो 
इसे तृप्त रखो ,इसमें मिठास भरने दो 
मीठा मीठा बोल कर सबका मन लुभावो 
जी भर के मिठाइयां खाओ ,
और सबको खिलाओ 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, August 5, 2017

चकमक या बुझता अंगारा 

जवानी में हमारे जिस्म,
चकमक पत्थर की तरह होते है ,
जिनके आपस में टकराने से ,
चिंगारियाँ  निकलती है 
और आग जलती है 
लेकिन बुढ़ापे में ,हो जाते है 
उस बुझते हुए कोयले की तरह 
जिनके ऊपर चढ़ी रहती है,
राख की सतह 
जो कभी कभी हवा के झोंके के आने पर 
थोड़ी सी उड़ जाती है 
और तब बुझते हुए अंगारों की ,
थोड़ी सी दहक नज़र आती है 
जो आज भी ,
अपनी तपिश का दम भरती  है 
अरे गुलाब की सूखी पखुड़ियों में भी ,
थोड़ी खुशबू हुआ करती है 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'


ये दिल कितना पगला होता 

बीती बातें भुला न पाता ,लक्ष्य सामने अगला होता 
ये दिल कितना पगला होता 
अपनी तीन गर्लफ्रेंडों संग ,वो मुश्किल से निभा रहा है 
लेकिन फिर भी मन ना भरता,वो चौथी को पटा रहा है  
उसे पता जब शादी होगी, बीबी नहीं भटकने  देगी 
कन्ट्रोल रख ,नहीं किसीको ,उसके पास फटकने देगी 
लेकिन फिर भी,उनके पीछे,ये दीवाना  कंगला होता 
ये दिल कितना पगला होता 
मौज मस्तियाँ ,चार दिनों की,यूं ही अचानक छूट जायेगी 
परिवार का भार पड़ेगा  ,यारी सारी ,टूट   जायेगी 
वो अपने घर,तुम अपने घर,देख नहीं पहचानो तक भी 
पत्नीजी के अनुशासन में ,नहीं सकोगे ,उसको तक भी 
इधर उधर की सोच बावला ,क्यों फिर यूं ही गंदला होता 
ये दिल कितना पगला होता 
ये तो लालच का मारा है,माँगा करता ,मोर हमेशा 
साथ एक के रहते रहते ,हो जाता है ,बोअर हमेशा 
दिखता कितना ही शरीफ हो,मन में रहता चोर हमेशा 
कितना ही शाकाहारी हो ,रहता आदमखोर  हमेशा 
और ये चक्कर नहीं छूटता ,चाहे सर है टकला होता 
ये दिल कितना पगला होता 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
माँ के हाथ का खाना 

हलवा ,पूरी ,आलू ,होते ,स्वाद बहुत भंडारे के 
तृप्ति मिलती ,जब छकते है लंगर हम गुरद्वारे के 
माँ के हाथों बनी ,दाल और रोटी की लज्जत आगे,
फीके लगते ,सारे व्यंजन,होटल पांच  सितारे  के 

घोटू 

Wednesday, August 2, 2017

दिल दरिया होता 

एक पल प्यार का जो, उनके संग जिया होता 
तड़फते दिल को सुकूं ,मिला  शर्तियां  होता 
डाइबिटीज का भी खतरा हम उठा लेते ,
मीठी बातों से उनने जीत दिल लिया होता 
चाह  थी डाले गले में हम ,सूत्र मंगल का ,
सूत्र राखी का उनने बाँध ना दिया  होता 
दिल में बसने की उनने राह चुनी लम्बी सी,
जल्दी आ जाते अगर शॉर्टकट  लिया होता 
दिल  अगर तोड़ना था ,तोड़ते वो धीरे से,
टुकड़े टुकड़े  न उसे इस तरह किया होता 
सुना तो है बहुत,देखा न अब तलक 'घोटू'
होता छोटा सा ,लोग कहते ,दिल दरिया होता 

मदनमोहन बाहेती'घोटू'
आँखे जाती पनिया है 

दिखाती रंग अजब ,कैसे कैसे दुनिया है 
मुफ्त बदनाम हुआ करती यूं ही मुनिया है 
छुआ न जिंदगी में जिसने निरामिष भोजन ,
ऐसे बन्दे को भी हो जाता  चिकनगुनिया है 
मन्नते पूरी करता ,देख  कर चढ़ावा   है ,
आजकल हो रहा,भगवान तू भी बनिया है 
सरे बाज़ार ,उठा कर के लूट ली जाती ,
बड़ा दुःख देने लगी ,आजकल नथुनिया है 
जहाँ पर महकते ,गुलाब,जूही ,चंपा थे,
वहां पर आजकल उग आयी नागफनियाँ है 
आसमाँ पर चढ़े है भाव अब टमाटर के ,
कभी मुश्किल से मिलता प्याज,लहसुन,धनिया है 
दे दिए जख्म इतने 'घोटू'इस जमाने ने ,
जरा सी बात पर अब आँखें जाती पनिया है 

मदनमोहन बाहेती'घोटू'
आओ,कुछ इंसानियत दिखाए 

खुदा ने जब कायनात को बनाया 
तो उसे कुदरत के करिश्मो से सजाया  
नदियाएँ बहने लगी 
सबको मीठा जल देने लगी 
फिर वृक्ष बनाये 
उनमे मीठे मीठे फल लगाए 
हवाएं बहने लगी 
सबको ठंडक देने लगी 
पहाड़ो पर हरियाली छाई 
ग्रीष्म,शीत ,बारिश और बसंत ऋतू आई 
सूरज ने प्रकाश और ऊष्मा फैलाई 
चाँद ने रात में शीतलता बरसाई 
फूल महकने लगे 
पंछी चहकने लगे 
सबने ,जितना जो दे सकता था ,
खुले हाथों दिया 
और बदले में कुछ नहीं लिया 
और फिर जब भगवान ने इंसान को बनाया 
तो उसने प्रकृति की इन सारी नियामतों का ,
भरपूर फायदा उठाया 
और बदले में क्या दिया 
पेड़ों को कटवा दिया
पहाड़ों का किया दोहन 
 बिगाड़ दिया पर्यावरण 
स्वार्थ में होकर अँधा  
नदियों का पानी किया गंदा 
एक दुसरे से लड़ने लगा  
जमीन के लिए झगड़ने लगा  
धरम के नाम पर आपस में फूट डाल  ली 
कितनी ही बुराइयां पाल ली 
अब तो इस बैरभाव की इंतहा होने लगी है 
धरती भी परेशां होने लगी है 
अब समय आगया है कि हम कुछ सोचे,विचारे 
अपने आप को सँवारे 
अपने फायदे के लिए ,
दूसरों को ना करे बर्बाद 
इसलिए आप सब से है फ़रियाद 
हम इंसान है,थोड़ी इंसानियत फैलाएं 
भाईचारे से रहे ,एक दुसरे के काम आये 
तो आओ ,ऐसा कुछ करें ,
जिससे हमारी छवि सुधरे 
चलो हम किसी रोते  को हंसाये  
किसी भूखे को पेट भर खिलाये  
किसी बिछुड़े को मिलाते है 
किसी गिरते को उठाते है  
किसी प्यासे की प्यास मिटाये 
किसी दुखी का दर्द हटाए 
किसी असहाय को सहारा दे 
किसी डूबते को किनारा दे 
किसी बुजुर्ग के दुःख काटे 
किसी बीमार को दवा बांटे 
किसी को अन्धकार से उजाले में लाये 
किसी भटके को सही राह दिखलाये 
किसी अबला की इज्जत ,लूटने न  दे 
किसी बच्चे का ख्वाब टूटने न दे  
किसी अनपढ़ को चार लफ्ज सिखला दे 
किसी अंधे को रास्ता पार करा दे 
किसी के रास्ते से बुहार दे कांटे 
जितना भी हो सके,सबमे प्यार बांटे 
करे कोशिश कि कोई लाचार न हो 
कम से कम कुछ  ऐसा करे,
जिससे इंसानियत शर्मशार न हो 
मिलजुल कर भाईचारे से रहें,आपस में न लड़े 
ऐसा कुछ न करे जिसका खामियाजा ,
हमारी आनेवाली पीढ़ी को  भुगतना पड़े  
हर तरफ चैन और अमन रहे छाया 
जिससे ऊपरवाले को भी अफ़सोस न हो ,
कि उसने इंसान को क्यों बनाया?  

मदन मोहन बाहेती'घोटू'