Monday, November 4, 2019

एक लड़की  को देखा तो ऐसा लगा

कल मैंने फिर एक लड़की देखी
पचास साल के अंतराल के बाद
मुझे है याद
पहली ड़की तब देखी थी जब मुझे करनी थी शादी
ढूंढ रहा था एक कन्या सीधी सादी
मैं उसके घर गया
मेरे लिए ये अनुभव था नया
वैसे तो कॉलेज के जमाने में खूब लड़कियों को छेड़ा था
काफी किया बखेड़ा था
पर उस दिन की बात अलग थी इतनी
मैं ढूंढ रहा था अपने  लिए एक पत्नी
थोड़ी देर में ,
हाथ में एक ट्रे में  चाय के कप लिए ,
वो शरमाती हुई आई
थोड़ी डगमगाती हुई आई
चाय के कप आपस में टकरा कर छलक रहे थे
उसके मुंह पर घबराहट के भाव झलक रहे थे
थोड़ी देर में वो सेटल हुई और चाय का कप मेरी ओर बढ़ाया
मैं भी शरमाया,सकुचाया और मुस्काया
फिर चाय का कप होठों से लगाया  
तो उसकी मम्मी ने फ़रमाया
चाय बेबी ने है खुद बनाई ,
आपको पसंद आई
बेसन की बर्फी लीजिये बेबी ने ही बनाया है
इसके हाथों में स्वाद का जादू समाया है
मैंने लड़की से पूछा और क्या क्या बना लेती हो ,
लड़की घबरा गयी ,भोली थी
बोली कृपया क्षमा करना ,मम्मी झूंठ बोली थी
मम्मी ने कहा था की लड़का अगर पूछे किसने बनाया ,
तुम झूंठ बोल देना ,पर मेरा मन झूंठ नहीं बोल पाता
पर सच ये है कि किचन का काम मुझे ज्यादा नहीं आता
ये चाय मैंने नहीं बनाई है
और बर्फी भी बाजार से आई है
उसकी इस सादगी और सच्चाई पर मैं रीझ गया
प्रेम के रस भीज गया
उसकी ये अदा ,मेरा मन चुरा गयी
और  वो मेरे मन भा  गयी
और एक दिन वो मेरी बीबी बन कर गयी
बाद में पता लगा कि ये सच और झूंठ का खेल ,
सोचा समझा प्लान था
जिस पर मैं हुआ कुर्बान था
जिसने लड़की की कमजोरी को खूबसूरती से टाल दिया
और उस पर सादगी का पर्दा डाल दिया
पचास वर्षों के बाद  ,
मैं अपने बेटे के लिए लड़की देखने गया था कल
मिलने की जगह उसका घर नहीं ,
थी एक पांच सितारा होटल
लड़की डगमगाती हुई हाथ में चाय की ट्रे लाइ
शरमाई
बल्कि आर्डर देकर वेटर से कोल्ड कोफ़ी मंगवाई
अब मेरा कॉफी किसने बनाई पूछना बेकार था
पर मैं उसके कुकिंग ज्ञान को जानने को बेकरार था  
जैसे तैसे मैंने खानपान की बात चलाई पर
इस फील्ड के ज्ञान में भी वो मुझसे भारी थी
उसे 'मेग्गी' से लेकर 'स्विग्गी' की पूरी जानकारी थी  
फिर मैंने ऐसे मौको पर पूछे जानेवाला,
 सदियों पुराना प्रश्न दागा
क्या तुम पापड़ सेक सकती हो जबाब माँगा
उसने बिना हिचकिचाये ये स्पष्ट किया
वो जॉब करती है और प्रोफेशनल लाइफ के दरमियाँ
बेलने पड़ते है कितने ही पापड़
तभी पा सकते हो तरक्की की सीढ़ी चढ़
जब ये पापड़ बेलने की स्टेज निकल जायेगी
पापड़ सेकने की नौबत तो तब ही आएगी
जबाब था जबरजस्त
मैं हो गया पस्त
मैंने टॉपिक बदलते हुए पूछा 'तुम्हारी हॉबी '
उसने अपने माँ बाप की तरफ देखा
और उत्तर फेंका
मैं किसी को भी अपने पर हॉबी नहीं होने देती हूँ
घर में सब पर मैं ही हाबी रहती हूँ
और शादी के बाद ये तो वक़्त बताएगा
कौन किस पर कितना हॉबी रह पायेगा
हमने कहा हॉबी से हमारा मतलब तुम्हारे शौक से है
वो बोली शौक तो थोक से है
देश विदेश घूमना ,लॉन्ग ड्राइव पर जाना
मालों में शॉपिंग ,होटलों  में खाना
सारे शौक रईसी है
उनकी लिस्ट लंबी है
हमने कहा इतने ही काफी है
इसके पहले कि मैं कुछ और पूछता ,
उसने एक प्रश्न मुझ पर दागा
और मेरा जबाब माँगा
आप अपने बेटे बहू के साथ रहेंगे
या उन्हें अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने देंगे
और बात बात में उनकी लाइफ में इंटरफियर करेंगे
ये प्रश्न मेरे दिमाग में इसलिए आया है
क्योंकि मुझे देखने जिसे शादी करनी है वो नहीं आया है
आपको भिजवाया है
प्रश्न सुन कर मैं सकपकाया
क्या उत्तर दूँ ,समझ में नहीं आया
मैंने कहा ये सोच नाहक है
हर एक को स्वतंत्रता से जीने का हक़ है
हम भला बच्चों की जिंदगी में टांग क्यों अड़ायेगे
अपने अपने घर में अपनी अपनी मल्हार जाएंगे
हम भी अपनी आजादी और सुख देखेंगे
और किसी को अपने पर हॉबी नहीं होने देंगे
वो तो उत्सुकता वश हम तु म्हे देखने गए ,

Wednesday, October 30, 2019

कुछ इधर की ,कुछ उधर की


कुछ इधर की,कुछ उधर की
बात  सारी ,दुनिया भर की
बहुत कुछ है  पोटली में ,
बंधा जीवन के सफर की

प्यार की कुछ मधुर बातें
विरह की दुखभरी  रातें
ठोकरों का है अनुभव
कुछ पुराना और कुछ नव
साथ देते मित्र थोड़े
खड़े  करते कोई रोड़े
मुश्किलें सारी डगर की
कुछ इधर की कुछ उधर की

सामाजिक कितने ही बंधन
कभी खुशियां ,कभी क्रंदन
माँ बहन और प्रिया वाले
रूप नारी के निराले
कभी कलकल ,कभी बादल
रूप कितने बदलता जल
बाढ़ की और समंदर की
कुछ इधर की ,कुछ उधर की

घोटू 
दीपावली पूजन -गणेश लक्ष्मी सरस्वतीजी का आव्हान

गणेश जी

मुझे सुख समृद्धि ,दे दो,तुम  विनायक
घर में रिद्धि सिद्धि दे दो ,तुम विनायक
दो मुझे  शुभ लाभ का वरदान भगवन ,
ज्ञान ,अच्छी बुद्धि दे दो ,तुम विनायक

सरस्वती जी

मुझे  नवलय ,नये स्वर दो ,सरस्वती माँ
बुद्धि का भण्डार भर दो ,सरस्वती माँ
है तमसमय पथ ,उसे ज्योतिर्मयी कर ,
ज्ञान का उजियार भर दो,सरस्वती माँ

लक्ष्मी जी

भाग्य दीपक जला मेरा  ,लक्ष्मी माँ
मेरे घर में डाल डेरा , लक्ष्मी माँ
स्वर्ण ,रत्नों की चमक से जगमगा दे ,
दूर कर घर का अँधेरा ,लक्ष्मी माँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
लक्ष्मी पूजन और आतिशबाजी

उन्होंने वायु प्रदूषण से बचने लिए,
 मुंह पर 'मास्क 'बाँध रखा था ,
ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए ,
कानो में 'इयर प्लग ' थे
पर धार्मिक परम्पराओं को निभाने के ,
उनके ख्यालात गजब थे
वातावरण, बिगड़े तो बिगड़े
प्रदूषण ,बड़े तो बड़े
पर हम आतिशबाजी जलाने की ,
जिद पर रहेंगे अड़े
हमें अपनी परम्पराये ,
निभानी तो निभानी ही है
लक्ष्मी पूजन के बाद ,आतिशबाजी ,
जलानी तो जलानी ही है ,
मोमबत्ती हाथ में ले ,
आतिशबाजी में आग लगाते थे
और डर  के मारे दूर भाग जाते थे
क्योंकि वो आग और धुवें से घबराते थे
जाने क्यों उनकी समझ में ,
ये बात नहीं थी आती
जिस तरह आतिशबाजी के डर से
वो दूर भाग जाते है
उसी तरह इस शोर शराबे से डर कर ,
आती हुई लक्ष्मी जी भी है भाग जाती

घोटू 

Monday, October 28, 2019

दीपावाली मनाई 

कुछ लोगों ने इस तरह दीपावाली मनाई 
गाँठ की लक्ष्मी ख़र्च कर 
ढेर सारे पटाखे लाये
गर्व से इतराये
और लक्ष्मी पूजा के बाद उन्हें जला दिया 
कुछ बच्चे सहमे 
कुछ ने मज़ा लिया 
लोगों ने देखा 
जब उनके पटाखे बोलते थे 
उनका अहम बोलता था 
उनकी आतिशबाज़ी जब ऊँची उड़ती थी 
उनका ग़रूर ऊपर उठता था 
उनका अनार जब फूल खिलाता था 
उनके चेहरे पर फूल खिलते थे 
उन्होंने अपनी लक्ष्मी फूँक
दो घड़ी मज़ा लिया 
पर पर्यावरण बिगाड़ दिया 
घुटन भरे धूमिल वातावरण में 
मुश्किल हो गया लेना साँस
प्रकृति से छेड़छाड़ उन्हें और उनकी आनेवाली पीढ़ी को 
कितनी मँहगी पड़ेगी 
शायद उन्हें नहीं था ये अहसास 

मदन मोहन बाहेती घोटू