Friday, February 28, 2020

जीवन सरिता

मिले पथ में कई पत्थर ,जूझ सबसे ,
जिंदगी की हर जटिल पीड़ा सही है
हुआ ना पथभ्रष्ट पर मैं रहा चलता ,
धार मेरी पर सदा सीधी  बही  है
मिले मुझमे कई नाले ,मैल वाले ,
कई पावन नदियों संग ,हुआ संगम
दिन ब दिन ,पर रहा बढ़ता पाट मेरा ,
और मेरी गति भी ना पड़ी मध्यम
लगा डुबकी आस्था और भावना की ,
कामना ले पुण्य की फिर लोग आये
उनके भक्तिभाव से पावन हुआ मैं ,
पूर्ण श्रद्धा लिए जो मुझमे ,नहाये
चाह ये है काम मैं आऊं सभी के ,
सभी को मैं प्यार बाटूं इस  सफर में
क्योंकि मालूम है मुझे कि एक दिन तो ,
मुझको जा मिलना है खारे समंदर में

घोटू 
किस तरह से जी रहा हूँ

ये मत पूछो कि जिंदगी,
 कैसे बिता रहा हूँ
संतोष का फल बड़ा मीठा होता है ,
आजकल वो ही खा रहा हूँ
और जिंदगी की आपाधापी में ,
विवशता के आंसू पी रहा हूँ
बस इसी तरह खाते  पीते ,
जिंदगी जी रहा हूँ
मेरा  जीवन ,
खोमचे में सजे हुए खाली गोलगप्पों की तरह ,
इन्तजार में है उस हसीना के ,
जो इनमे प्यार का चटपटा पानी भर ,
चटखारे ले लेकर गटकाती जाये
जो जीवन की भूलभुलैया में ,
मेरी ऊँगली पकड़ ,खुद भी भटके,
और मुझे भी भटकाती जाए
मैं कंटीली झाड़ियों में खिला हुआ ,
गुलाब का वो फूल हूँ ,
जिसे प्रतीक्षा है उस रूपसी की ,
जो उसे तोड़ ,अपने केशों में सजा ले
मैं कश्मीर की पश्मीना शाल की तरह ,
दूकान में सिमटा बैठा ,
इन्तजार में हूँ कि कोई सुंदरी ,
आये और मुझे ओढ़ कर ,
सर्दी में गर्मी का मजा ले
तन्हाई ,
जिसका खुद का कोई अस्तित्व नहीं है ,
वो भी मुझे काटने को दौड़ रही है और ,
मेरा अकेलापन मुझे कचोटता रहता है
औरों की भरी पूरी खिलती बगिया के रौनक देख ,
मेरे सीने पर सांप लोटता  रहता है
 इस तरह की बेबसी के आलम में ,
खून  के घूँट पी रहा हूँ
बस आजकल इसी तरह जी रहा हूँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Wednesday, February 26, 2020

विडंबना
  कार ली,मंदिर गए,स्वस्तिक लगा,की आरती,
  नज़र ना कोई लगे,पंडितजी पूजा कर गए
नीबुओं पर नज़र ऐसी लगी नूतन कार की,
दब के नीचे,टायरों के,चार नीबू मर गए
घोटू
तीन युगल त्रिपदियां 

                 प्रथम 
                    १ 
    चार पहियों के नीचे , 
    चार नीबू शहीद हुए ,
     किसी की नयी कार आयी 
                    २  
     वधू  का बाप ,
      भारी कर्ज से लदा ,
      वर के घर,बहार आयी 
           
               द्वितीय 
                     १ 
  सास के चेहरे पर ,
   छाई हुई उदासी ,
   बहू ने बेटी जनी
                २ 
मातृत्व सुख पाकर भी,
सहमी सी बहू है ,
थोड़ी सी अनमनी 

            तृतीय  
                १ 
 सब कुत्ते भोंक रहे ,
लगता है गली में ,
आया है नया कुत्ता 
               २ 
देश के कर्णधार ,
देश की संसद में ,
हो रहे गुत्थमगुत्था 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, February 24, 2020

दिल की सुन-लोगों की मत सुन

मुझे ज़माना ,अपने अपने ढंग, से समझाता रहता है  
लेकिन मै  वो ही करता हूँ,जैसा मेरा मन कहता  है 
मम्मी कहती ऐसा करले,पापा कहते वैसा करले
कहते दोस्त ,संभल कर कुछ कर ,मत तू ऐसा वैसा करले
पडूं बीमार,कोई कहता है,जाओ,डाक्टर को दिखलाओ
कोई कहता ,डाक्टर छोडो,तुम देशी इलाज  करवाओ
देता है कोई सलाह कि होम्योपेथी आप दवा लो
कोई कहता किसी सयाने से तुम झाड फूंक करवा लो
कोई कहता ,जा हकीम के पास दवा लो तुम यूनानी
तुम आयुर्वेदिक इलाज लो,तभी बिमारी जड़ से जानी
लोगबाग़ कुछ समझाते है ,छोडो यार दवा का चक्कर
बाबा रामदेव के आसन ,तुमको स्वस्थ रखे जीवन भर
बीमारी में हालचाल जो ,मेरा कोई पूछने आता
तरह तरह की राय बता कर ,सलाहकार मेरा बन जाता
जितने मुंह है,उतनी बातें,कन्फ्यूजन  हरदम रहता है
लेकिन मै वो ही करता हूँ,जैसा मेरा दिल कहता है
बच्चे ने स्कूल करलिया ,आगे इसको क्या पढवाना
कितने ही मेरे शुभचिंतक ,देते मुझे सलाहें  नाना
यूं कर कोटा भेज इसे तू,आई आई टी की कोचिंग करवा
कोई कहे पी एम टी करवा,इसे डाक्टर अच्छा बनवा
अच्छा जॉब कराना है तो ,तू करवा इसको एम बी ए
जो अच्छी कमाई करवाना ,तो तू बनवा  ,इसको सी ए
कोई कहे फोरेन  भेज दे,वहां पढाई  करना  अच्छा
कोई कहे ये मत कर वर्ना ,निकल हाथ से जाए बच्चा
कोई ना कहता है पूछो,कि बच्चे के मन में क्या है
या उसका इंटरेस्ट किधर है,आगे  उसको बनना क्या है
हम खुद,कुछ हों या ना हो पर,सलाहकार सबसे अच्छे है 
कोई पूछे या ना पूछे,मुफ्त मशविरा दे देते है  
दिल की सुन,लोगों की मत सुन,बस इसमें ही सुख रहता है
इसीलिए मै वो करता हूँ,जो भी मेरा दिल कहता  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, February 21, 2020

शहादत 
अपनी रंगत ,अपनी सेहत ,अपनी खुशबू छोड़ कर ,
          भीगता है रोज ,घिसता , साफ़ करता गंदगी 
खुद फना हो जाता ,जिससे साफ़ इन्सां  हो सके ,
             ऐसे साबुन की शहादत  को है मेरी बंदगी   

घोटू

Thursday, February 20, 2020

ठोकर खाकर सीखेगा  

बात बात पर गर्मी मत  खा,
                            तू गम खाकर  सीखेगा 
ठीक किस तरह ,सेहत रखना ,
                             तू कम खाकर सीखेगा 
माँ बोली कि खा बादामें ,
                              अक्ल तेज हो जायेगी,
देसी घी का मालताल तू,
                              सब तर खा के ,सीखेगा 
कहा पिताजी ने चलने दो ,
                              इसको अपने ही ढंग से ,
इधर उधर जब ये भटकेगा ,
                               चक्कर खाकर  सीखेगा 
गुरु ने बोला ,जीवन का ये,
                           सफ़र,जटिल आसान नहीं
पथरीले रास्तों पर चल कर ,
                            ठोकर खाकर  सीखेगा 
समझदार कोई ये बोला ,
                            इसकी शादी करवा दो,
डाट ऊमर भर घरवाली की ,
                            ये खा खा कर सीखेगा 
मदन मोहन बाहेती'घोटू '