Wednesday, May 19, 2021

बाद में भूल जाएंगे

तुम स्वर्ग जाओ या नर्क
किसी को पड़े न कोई फर्क
तुम्हे स्वर्गवासी कह कर पर ,लोग बुलाएँगे
कुछ दिन तुम्हारी फोटो पर ,फूल चढ़ाएंगे
बाद में भूल जाएंगे
बाद में भूल जाएंगे
जब तुम हो से थे हो जाते
कुछ दिन याद बहुत हो आते
साथ समय के धीरे धीरे ,
तुमको है सब लोग भुलाते
जो आया है ,सो जायेगा ,
इस प्रकृति का यही नियम है
साथ नहीं कुछ भी जाएगा ,
ये मेरा है ,केवल भ्रम है
करो सद्कर्म,निभाओ धर्म
यही है इस जीवन का मर्म
पुण्य तुम्हारे बेतरणी को पार कराएँगे
कुछ दिन तुम्हारी फोटो पर फूल चढ़ायेगे
बाद में भूल जाएंगे
बाद में भूल जाएंगे

तुमने जीवन भर मेहनत कर ,
कोड़ी कोड़ी ,माया जोड़ी
लेकिन खाली हाथ गए तुम ,
दौलत सभी यहीं पर छोड़ी
देह दहन हो ,अस्थि रूप में ,
गंगाजी में जाओगे बह
जब तक तुम्हारे बच्चे हैं ,
बने वल्दियत जाओगे रह
और बाद में ,एक बरस में
वो भी केवल श्राद्धपक्ष में ,
तुम्हारा प्रिय भोजन ,ब्राह्मण को खिलवायेंगे
कुछ दिन  तुम्हारी फोटो पर ,फूल चढ़ाएंगे
बाद में भूल जाएंगे
बाद में भूल जाएंगे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 

Sunday, May 16, 2021

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 जी करता है तुमको डाटूं

पकड़ूँ गलती छोटी मोटी
खूब सुनाऊँ खरी और खोटी
यूं ही बेतुकी बातें करके
तुम्हे सताऊं मैं जी भर के
गुस्से में तुमको पागल कर ,
मैं दिमाग तुम्हारा चाटूँ
जी करता है तुमको डाटूं

ढूँढूँ कोई न कोई बहाना
अच्छा नहीं बनाया खाना
आज दाल में नमक नहीं है
चावल भी ना पके सही है
रोज कमी रहती कुछ ना कुछ
लापरवाह हुई तुम सचमुच
जब दिखलाने लगता तेवर
बात टालती तुम मुस्का कर
मेरा नाटक पकड़ा जाता
मैं पानी पानी हो जाता  
तुम कहती क्यों मुझे चिढ़ाते
झूंठ ठीक से बोल न पाते
ये सच तुम्हारा खाना है ,
स्वाद बहुत ,मैं ऊँगली चाटूँ
जी करता है तुमको डाटूं

घर को रखती सदा सजा कर
सबसे मिलती हो मुस्काकर
ख्याल सदा है परिवार का
तुम हो सागर भरा प्यार का
ना रूठो ना किचकिच करती
गलत काम करने से डरती
ना फरमाइश ना झगड़ा है
हृदय तुम्हारा बहुत बड़ा है
नहीं ढूंढती कमियां मेरी
तुम में खूबी है बहुतेरी
बहुत चहेती  सबके मन की
मूरत  हो तुम अपनेपन की
भरी हुई तुम सद्भावों से ,
तुममे गलती कैसे छांटूं
जी करता है तुमको डाटूं

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Friday, May 14, 2021

पत्नीजी को खुश रखो

जिसकी किचकिच ,किस''जैसी है ,
जिसके ताने ,लगे सुहाने
जिसकी  तूतू मैमै में भी ,
प्यार बसा ,माने ना माने
जो नयना ,बरसाते शोले ,
नैनमटक्का करते थे कल
आज होंठ जो बकबक करते ,
उनसे चुंबन झरते थे कल
जिनकी रूप अदा का चुंबक ,
खींचा करता आकर्षित कर
उनके संग क्यों खींचातानी ,
अब चलती रहती है दिनभर
क्या कारण घर बना हुआ रण ,
जो  होता ,रमणीक कभी था
जहाँ रोज अब ठकठक होती ,
बहुत शांत और ठीक कभी था
उनको आज शिकायत रहती ,
उनका रखता ना ख्याल मैं
उनकी बातें ,एक कान सुन ,
दूजे से देता निकाल मैं
दिन भर व्यस्त काम में रह कर ,
होती पस्त और जाती थक
और शिकायतों का गुबार भी
सारा जाता निकल रात तक
तब वह बिस्तर पर पड़ जाती।
आता कुछ सुकून है मन में
मिट जाती सारी थकान है ,
मेरी बाहों के बंधन में
और फिर आने वाले कल हित ,
संचित ऊर्जा हो जाती है
जो मधुमख्खी ,शहद पिलाती ,
कभी काट भी तो जाती है
उनकी लल्लोचप्पो करना ,
डरना उनकी नाराजी से
उनकी हाँ जी हाँ जी करना ,
खुश रखना,मख्खनबाजी से
यह छोटा सा ही नुस्खा पर ,
भर देता जीवन में खुशियां  
इसको अपना कर तो देखो ,
देगा बदल ,आपकी दुनिया

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
सांत्वना

यादें कल की थोड़ा तो तड़फायेगी
आदतें  तन्हाई की पड़ जायेगी
जीना है तो सम्भलना ही पड़ेगा ,
मुश्किलें वर्ना बहुत बढ़ जायेगी
आशाओं का सूर्य जब होगा उदय ,
गम की बदली छायी जो,छट जायेगी
जिंदगी में आई है जो खाइयां ,
समय के संग संग ,सभी पट जायेगी
जीने की जागेगी मन में फिर ललक,
और चिंताये भी कुछ घट जायेगी
हौंसला रखना पडेगा आपको ,
लम्हा लम्हा जिंदगी कट जायेगी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
मैं तुमको क्यों कर गाली दूँ

तुमको भला बुरा कह अपनी ,क्यों जुबान मैं कर काली दूँ
मैं तुमको क्यों कर गाली दूँ

तुम हो चिकने घड़े तुम्हे छू ,सभी गालियां फिसल जाएंगी
तुम्हारा कुछ ना बिगड़ेगा ,जिव्हा मेरी बिगड़ जायेगी
बहुत कमीने हो तुम ,ना हो ,मेरी गाली के भी लायक
तुम लालच से भरे हुए हो ,सदा साधते अपना मतलब
अपना काम निकल जाने पर ,बिलकुल नज़र नहीं आते हो
निज अहसान फरामोशी का ,पूरा जलवा दिखलाते हो
व्यंग बाण बरसा तुम पर मैं ,निज तूणीर क्यों कर खाली दूँ
मै  तुमको क्यों कर गाली दूँ

अपनों के ही नहीं हुए तुम ,और किसी के फिर क्या होंगे
वक़्त तुम्हे जब ठोकर देगा ,अपनी करनी खुद भुगतोगे
बचा रहा जो तुम्हे डूबने से  ,उसको ही डंक मारते
देगा कौन सहारा तुमको ,मुश्किल में ,ये ना विचारते
अरे अभी भी समय शेष है,सुधर सको तो सुधर जाओ तुम
अपने मन के अंदर झांकों ,प्रेम भावना को जगाओ तुम
समझा रहा ,यही कोशिश है ,तुमको सुख और खुशहाली दूँ
मैं तुमको क्यों कर गाली दूँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
ये शून्य काल है

पक्ष विपक्ष चीखते दोनों ,
पस्त व्यवस्था ,बुरा हाल है
ये शून्य काल है
ये शून्य काल है
हमको ये दो ,हमको वो दो ,
बढ़ चढ़ मांग हर कोई करता
फिर जिसको जितना भी दे दो ,
उसका पेट कभी ना भरता
मांग अधिक ,आपूर्ति कम है ,
क्योंकि संसाधन है सीमित
कोप महामारी का इतना ,
कि इलाज से जनता वंचित
पीट रहे सब अपनी ढपली ,
ना सुर कोई ,नहीं ताल है
ये शून्य काल है
ये शून्य काल है
हर कोई लेकर बैठा है ,
कई शिकायत भरा पुलंदा
रायचंद सब राय दे रहे ,
बस ये ही है उनका धंधा
ये बाहर कुछ,अंदर कुछ है ,
बहुत दोगली इनकी बातें
बेच दिया इनने जमीर है ,
बस गाली देते ,चिल्लाते
चोर चोर मौसेरे भाई ,
पनपाते काला बाजार है
ये शून्य काल है
ये शून्य काल है
इस विपदा के कठिन काल में ,
भी ये अवसर देख रहे है
अपनी अपनी राजनीती की ,
ये सब रोटी सेक रहे है
'ब्लेम गेम 'में लगे ,उठाया ,
इनने सर पर आसमान है
पर इस आफत के निदान में ,
रत्तीभर ना  योगदान है
कौवा पोत सफेदी ,चलने
लगा हंस की आज चाल है
ये शून्य काल है
ये शून्य काल है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '