Friday, September 17, 2021

बदलते मौसम 

तू जो ना संग, लगती सर्दी,
 बढ़ जाती है तन में ठिठुरन
तू पास आती, बढ़ती ऊष्मा ,
होता गर्मी वाला मौसम 
तू मिल जाती ,फूल महकते,
 खिलता मौसम, बासंती बन  
 मिलन हमारा बारिश जैसा, 
 प्यार बरसता रिमझिम रिमझिम 
 कभी गर्म तू सूरज जैसी, 
 कभी चांदनी सी शीतल है 
 जब भी साथ तेरा मिलता है ,
 मौसम जाते बदल बदल है

मदन मोहन बाहेती घोटू

Thursday, September 16, 2021

जियो आत्मा सम्मान से

जब तक जीवन है तुम जियो शान से 
समझौता मत करो  आत्मसम्मान से 

अगर आत्मविश्वास हृदय में खास है 
धीरज की पूंजी, जो तुम्हारे पास है 
रखो हौसला ,लड़ लोगे तूफान से 
समझौता मत करो आत्म सम्मान से 

औरों में क्या कमियां है यह मत ताको
पहले अपने गिरेबान में तुम  झांको
उन्हें सुधारो , जियोगे आसान से 
समझौता मत करो आत्मसम्मान से 

लोग कहेंगे क्या, इस पर तुम ध्यान न दो 
बकवासों पर दुनिया की तुम कान न दो 
सुनो ,निकालो उसे दूसरे कान से 
समझौता मत करो आत्मसम्मान से 

आसपास की हर हरकत पर नजर रखो 
चौकन्ने से रहो ,सभी की खबर रखो 
क्या होता है ,रहो नहीं अनजान से 
समझौता मत करो आत्मसम्मान से 

नहीं किसी से बैर कोई भी मन में हो 
मिलनसारिता, प्रेम भाव जीवन में हो 
करो मदद कमजोरों की, जी जान से 
समझौता मत करो आत्मसम्मान से 

सार हीन संसार ,करो सत्कर्म सदा 
परोपकार को मानो अपना धर्म सदा 
नाम तुम्हारा होगा अच्छे काम से 
समझौता मत करो आत्मसम्मान से

मदन मोहन बाहेती घोटू

Thursday, September 9, 2021

जीवन शैली 

यदि खुद पर विश्वास करोगे 
नहीं किसी से आस करोगे 
जीत लिया जो तुमने भय है 
तो तुम्हारी सदा विजय है 

रहो सभी के तुम अपने बन 
वही करो, जो कहता है मन 
ख्याल रखोगे जो तुम सबका 
तुम जीतोगे ,यह है पक्का 
नहीं सफलता में संशय है 
तो तुम्हारी सदा विजय है

अगर लड़ोगे हिम्मत के संग 
बनो जुझारू, जीतोगे जंग 
सकारात्मक ,सोच रखोगे 
तो तुम आगे बहुत बढ़ोगे 
जब जागोगे ,तभी सुबह है 
तो तुम्हारी सदा विजय है

मदन मोहन बाहेती घोटू
मेरी चाहत  

नहीं चाहिए हीरा मोती, नहीं चाहिए बंगला कोठी 
बस अपना कर सकूं गुजारा, चाहूं नहीं कमाई खोटी जब तक जीयूं स्वस्थ रहूं मैं,मुझको अच्छी सेहत देना 
सबके साथ रहूं हिलमिल कर,प्रभु प्यार की दौलत देना

 तूने जब जीवन ये दिया है ,तो सुख दुख भी बांटे होंगे 
कभी फूल बरसाए होंगे ,कभी चुभाये कांटे होंगे 
 सब विपदायें झेल सकूं मैं,मुझको इतनी हिम्मत देना 
सबके साथ रहूं हिलमिल कर, प्रभु प्यार की दौलत देना
 
 ऐसा मेरा हृदय बनाना ,भरा हुआ जो संवेदन से  दुखियारों के काम आ सकूं,मैं तन से मन से और धन से
 श्रद्धा रखूं ,बुजुर्गों के प्रति, मेरे मन में इज़्जत देना 
सबके साथ रहूं हिलमिल कर, प्रभु प्यार की दौलत देना

 रहे नम्रता भरा आचरण और घमंड भी जरा नहीं हो 
 मेरे हाथों कभी किसी का, भूले से भी, बुरा नहीं हो 
 मन में भक्ति, तन में शक्ति और सब के प्रति चाहत देना 
सब के साथ रहूं हिलमिल कर ,प्रभु प्यार की दौलत देना

मदन मोहन बाहेती घोटू
सफेदी का चमत्कार 

सफेदी की चमकार
 बार-बार 
 लगातार 
 जी हां ,हम सबको है सफेदी से प्यार 
 सफेद चूने से पोत कर रखते हैं घर की दरो दीवार 
रोज ब्रश करते हैं रखने को दांतों की सफेदी बकरार
 मेहनत करके,टैक्स भर के ,
सफेद कमाई की जाती है 
 वर्षों के अनुभव के बाद सर पर सफेदी आती है 
 सफेद रंग में चीनी का मिठास है 
 सफेद रंग में नमक का स्वाद है 
 सफेद रंग में वाष्प की गरमाई है 
 सफेद रंग में बर्फ़ की ठंडाई है 
 सफेद रंग में दूध की पौष्टिकता है 
 सफेद रंग में रुई की कोमलता है 
 सफेद रंग झरनो की तरह निर्मल है 
 सफेद रंग हिमालय की तरह सुदृढ़ है
 सफेद रंग शांति का द्योतक है 
 सफेद रंग में धूप की चमक है
सफेद कबूतर उड़ा के शांति का संदेश दिया जाता है 
तो क्यों कुछ लोगों का खून सफ़ेद पड़ जाता है
तो क्यों कुछ सफेदपोश नेता काली कमाई करते हैं 
सफेद दाढ़ी वाले कुछ बाबाओं की काली करतूतें है 
तो क्यों लोग सफेद बगुला भगत बने शिकार करते हैं 
तो क्यों कुछ लोग सफेद झूठ बोलने से नहीं डरते हैं
कई लोग जो खुद को बतलाते दूध के धुले हैं 
वे सब सफेद रंग को बदनाम करने में तुले हैं 

मदन मोहन बाहेती घोटू

Sunday, September 5, 2021

गुरु गुड़, चेला शक्कर 

गुरुजी तो रह गए लघु जी, चेले गुरु घंटाल हो गए 
गुरु जी अब भी फटे हाल है, चेले मालामाल हो गए

 गुरुजी रहे सिखाते अ आ इ ई क ख ,एबीसीडी 
 वह अब भी नीचे है ,चेले चढ़े तरक्की की हर सीढ़ी खड़ा बेंच पर किया गुरु ने, वो है अब कुर्सी पर बैठे 
 वह अब ऐंठे ऐंठे रहते ,कान गुरु ने जिनके ऐंठे
 जिनको गुरुजी ने पीटा था,जमकर पैसे पीट रहे हैं बहुत बड़े वह ढीठ आजकल ,बचपन से जो ढीठ रहे हैं 
गुरु थे मुर्गा जिन्हें बनाते, वह मुर्गा हलाल हो गए 
 गुरु जी अब भी फटे हाल हैं,चेले मालामाल हो गए 
 
गुरुजी की गई मास्टरी,चेले मास्टर बहुत बड़े हैं 
जिन्हें क्लास से बाहर करते,दफ्तर बाहर आज खड़े हैं
लंगडी भिन्न सिखाई जिनको, भिन्न हुई उनकी बोली है 
गुरुजी गुड़ की डली रह गए, चेले शक्कर की बोरी है 
जिनको बारह खड़ी सिखाई, उनके आज हुए पौबारा 
कोई नेता कोई अफसर ,कोई बड़ी फैक्ट्री वाला 
दो दूनी चार भुलाया उनने, दो के कई हजार हो गए 
गुरुजी तो अब भी फटेहाल हैं,चेले मालामाल हो गए

मदन मोहन बाहेती घोटू
 शिक्षक दिवस पर धन्यवाद ज्ञापन
 
 है धन्यवाद टीचर ,तुमने मुझे पढ़ाया 
 पग पग पे सीख देकर, जीना मुझे सिखाया 
 
करता था काम चोरी ,आदत मेरी सुधारी 
गालों पर चपत मारी ,हाथों पर बेंत मारी 
देकर के सजा अक्सर ,मुर्गा मुझे बनाया 
पग पग पे सीख देकर, जीना मुझे सिखाया

मुझे डाटते थे अक्सर, कहते थे मैं गधा हूं 
उपकार आपका ये, मै मानता सदा हूं
मेरा गधत्व जागा ,जो अब है काम आया 
पग पग पर सीख देकर ,जीना मुझे सिखाया 

कक्षा में बेंच ऊपर ,करके खड़ा सजा दी 
उपहास सहते रहना, आदत मेरी बना दी 
निर्लज्ज हंसते रहना, चिकना घड़ा बनाया 
पग पग पर सीख देकर, जीना मुझे सिखाया

साहब की बात मानूं, बीबी की बात मानूं
बच्चों की बात मानूं,मैं सब की बात मानूं
ऑबिडिएंट इतना ,तुमने मुझे बनाया 
पग पग पे हाथ सीख देकर, जीना मुझे सिखाया

 ट्रेनिंग ये आपकी अब, मेरे काम आ रही है 
 डाट और डपट का कोई ,होता असर नहीं है 
 मैं ढीठ बना सहता,जाता हूं जब सताया 
 पग पग पे सीख देकर, जीना मुझे सिखाया
 है धन्यवाद टीचर, तुमने मुझे पढ़ाया

मदन मोहन बाहेती घोटू