Monday, December 18, 2023

नजरिया बदलो


यह बुढ़ापा उम्र का वह दौर है

होती नजरे आपकी कमजोर है 

मगर चढ़ता चश्मा है जब आंख का 

बदल जाता नजरिया है आपका 

इस तरह संकेत ईश्वर दे रहा 

बदल दो तुम सोचने का नजरिया 

भूल जाओ मानसिकता रौब की 

लोग घर के तुमसे डरते थे कभी 

तुम रिटायर हुए, बूढ़े हो रहे 

पहले जैसे काम के अब ना रहे 

लाओ अपनी सोच में बदलाव तुम 

नम्रता की भावना अपनाओ तुम 

इसके पहले की अपेक्षा वह करें 

प्यार बरसा, आप सब का मन हरे 

साफ जैसे पहन चश्मा दिखेगा 

सोच बदलो तो करिश्मा दिखेगा 

बड़प्पन जो थोड़ा सा दिखलाओगे 

प्यार और सम्मान सबका पाओगे 

आपकी कोशिश यह रंग लाएगी 

हंसते-हंसते जिंदगी कट जाएगी


मदन मोहन बाहेती घोटू

बहुत नींद आती सवेरे सवेरे


छंटते हैं जब रात के सब अंधेरे

बहुत नींद आती, सवेरे सवेरे 


कई बीती बातें मानस पटल पर 

आ तेरती है ,कई स्वप्न बनकर 

किस्से पुराने बहुत याद आते 

हंसाते कभी तो कभी है रुलाते 

मगर आंख खुलती तो सब भूल जाते

छट जाते यादों के बादल घनेरे 

बहुत नींद आती, सवेरे सवेरे 


तन से लिपट करके रहती रजाई 

नहीं आंख खुलती है,आती जम्हाई

उठो जो अगर तो बदन टूटता है 

मुश्किल से बिस्तर मगर छूटता है 

बड़ा दिल कड़ा कर,अगर उठ भी जाते

आलस के बादल हमें रहते घेरे 

बहुत नींद आती, सवेरे सवेरे 


अगर हो जो छुट्टी या संडे का दिन है उठना सवेरे , बड़ा ही कठिन है 

बीबी जगाती, बना चाय प्याला 

होता सुबह का मजा ही निराला 

बिस्तर में लेकर के चाय की चुस्की,

शुरुआत होती है दिन की सुनहरे 

बहुत नींद आती, सवेरे सवेरे


मदन मोहन बाहेती घोटू

Monday, November 27, 2023

नया वर्ष आया नया वर्ष रे

मिलकर मनाओ सभी हर्ष रे 

वेलकम 2024वेलकम 2024 

अपने संग तुम लेकर आना,

 खुशियां मोर ही मोर 

वेलकम 2024 


फूले फले सभी का जीवन 

और दिनों दिन करें प्रगति हम 

रहे सभी में भाईचारा 

 प्रेम भाव से करें गुजारा 

अपने संग तू लेकर आना 

सुख शांति का दौर 

वेलकम 2024 वेलकम 2024 


हर दिन सब खुशियों से खेलें

नहीं कोई बीमारी फैले 

करें प्रगति सब बढ़ते जाएं 

हर दिन हम त्योहार मनाए 

हटे गरीबी, रहे न कोई 

दीन दुखी कमजोर 

वेलकम 2024 वेलकम 2024 


बने राम का मंदिर प्यारा

बांके बिहारी का गलियारा 

अग्रणीय हो देश हमारा 

विश्व गुरु हम बने दोबारा 

भारत देश की कीर्ति पताका ,

लहराये चहुं ओर

वेलकम 2024 वेलकम 2024


मदन मोहन बाहेती घोटू

Saturday, November 25, 2023

इंतजार ,अगली दिवाली का


दीपावली पर सब आए थे

मन उमंग और जोश भरे थे 

पूरे घर भर में रौनक थी ,

कोने-कोने दीप जले थे 

जब पूरा परिवार साथ हो ,

भाई ,भाभी, बेटे ,पोती 

सब मिलकर के जश्न मनाते ,

तब असली दिवाली होती 

साथ बैठकर खाना पीना 

लक्ष्मी पूजा ,आतिशबाजी 

हल्ला गुल्ला,शोर शराबा ,

कभी ताश की लगती बाजी

अन्नकूट और भाई दूज के 

बाद सभी लौटे अपने घर 

गई चांदनी चार दिनों की,

 फिर से वही पुराना मंजर 

घर में हम दो बूढ़े बुढ़िया 

वक्त अकेले काट रहे हैं 

बची प्यार की पूंजी है जो 

वह हंस-हंसकर बांट रहे हैं 

याद किया करते बीते पल 

बंधा प्यार से परिवार है 

आने वाली दिवाली का 

हमको फिर से इंतजार है 


मदन मोहन बाहेती घोटू 

मोदी तेरे कई विरोधी

प्रगति के हैं सब अवरोधी

सारे के सारे बौराये ,

तूने उन्हें पटकनी जो दी

मोदी ,तेरे कई विरोधी 


एक पप्पू है बाल पक गए,

 पर बुद्धि पर असर नहीं है 

अंट शंट वो क्या बकता है,

 खुद को इसकी खबर नहीं है 

उल्टी सीधी हरकत करके,

 कांग्रेस की नाव डुबो दी

मोदी ,तेरे कई विरोधी 


एक है चारा चोर जेल से 

निकला फिर भी फैल रहा है 

बेटे को सत्ता दिलवा दे ,

रोज खेल कुछ खेल रहा है 

और नीतीश ने बचकुची थी 

वो भी सभी प्रतिष्ठा खो दी

मोदी, तेरे कई विरोधी 


मुफ्त रेवड़ी बांट बांट कर 

झूठ बोल सत्ता में आया 

उल्टे सीधे खेल-खेल कर 

खूब कमाया, जी भर खाया 

तीन मंत्री आज जेल में 

भ्रष्टाचार के हैं आरोपी 

मोदी ,तेरे कई विरोधी 


अखिलेश है आग उगलता,

अंट शंट,ओबीसी वकता

स्टालिन भी देता गाली ,

उद्धव पगलाया सा लगता 

जाने क्या-क्या कहती रहती,

 चुप ना रहती ममता, क्रोधी 

मोदी ,तेरे कई विरोधी 


परिवारवादी सबके सब ,

लेकिन तू प्रगति वादी है 

भारत के जन जन सेवा हित 

तूने अपनी उमर खपा दी 

लोहपुरुष ,निर्भीक चला चल 

हरदम जीत सत्य की होती 

मोदी ,तेरे कई विरोधी


मदन मोहन बाहेती घोटू

Sunday, November 12, 2023

हां,हम दिल्ली में रहते हैं 


जुलूस, रैलियां और धरनों की,

पीड़ाएं निश दिन सहते हैं

हां,हम दिल्ली में रहते हैं


बड़ी अभागन है यह दिल्ली,

परेशान रहती बेचारी 

इसका मालिक कौन 

हो रही राज्य केंद्र में मारामारी

कहे केजरी ये मेरी है,

राज्यपाल अपनी बतलाता 

इन दोनों की खींचतान में ,

दम दिल्ली का निकला जाता 

हम पिसते रहते मुश्किल में

नहीं किसी से कुछ कहते हैं 

हां , हम दिल्ली में रहते हैं 


मुफ्त रेवड़ी बांट बांट कर 

मुख्यमंत्री बना जुगाड़ू 

ऐसा चिन्ह चुनाव बनाया 

दिल्ली पर लगवा दी झाड़ू 

कर ढपोर शंखों  से वादे 

करता बातें ऊंची ऊंची 

काम एक भी ना कर पाया

रही प्रदूषित दिल्ली समूची 

अब भी कचरे के पहाड़ से ,

बदबू के झोंके बहते हैं 

हां ,हम दिल्ली में रहते हैं 


हवा भरी है धूल ,धुंवे से,

मुश्किल श्वास, घुट रहा दम है

खांसी और खराश गले में,

आंखों में हो रही जलन है

वृद्ध घूमने अब ना जाते,

बच्चे बाहर खेल न पाते

वातावरण और शासन का

पॉल्यूशन हम झेल न पाते

झाग भरी जमुना मैया की

आंखों से आंसू बहते है

हां, हम दिल्ली में रहते हैं


घर से हुआ निकालना मुश्किल,

बाहर जाते, मन घबराता

दिन में सूरज, दिखे चांद सा,

और चांद तो नज़र न आता

परतें काले अंधियारे की,

छाई मन के अन्दर, बाहर

क्या ऐसे ही जीना होगा,

हमको जीवन भर, घुट घुट कर

छट दिवाली मना न पाते,

सूने सब उत्सव रहते हैं

हां, हम दिल्ली में रहते हैं 


मदन मोहन बाहेती घोटू

Thursday, November 9, 2023

दीपावली पर भेंटआई 

एक सदाबहार मिठाई ?


बड़े प्रेम से और हर्ष से दीपावली मनाई जाती 

इष्ट मित्र रिश्तेदारों से,बहुत मिठाई है आ जाती 

रसगुल्ला ,मिठाई छेने की, दो दिन में निपटा देते हम

 क्योंकि अगर जो हुई पुरानी ,उन में आ जाता खट्टापन 

भले जलेबी हो या इमरती ,अच्छी लगती गरम-गरम है 

गाजर हलवा गरम सुहाता ,जब होता ठंडा मौसम है 

काजू कतली थोड़े दिन में, चिपचिप करती नहीं सुहाती 

और सभी रस भरी मिठाई ,कुछ दिन में

सूखी पड़ जाती 

सब मिठाईयां होती बासी ,कुछ दिन में ढल जाए जवानी 

केवल एक मिठाई ऐसी, जिसका नहीं कोई भी सानी 

वह चिरयुवा ,स्वाद और सुंदर ,मुंह में रखो पिघल जाती है 

पीतवर्ण,मनभावन ,प्यारी , सोहनपपड़ी कहलाती है 

उसका लंबा टिकने वाला , यौवन ही उसका दुश्मन है 

इस दिवाली भेंट मिली तो अगली तक निपटाते हम हैं

सबसे सुंदर स्वाद स्वदेशी ,यह मिष्ठान बड़ा प्यारा है 

कभी प्रेम से खा कर देखो इसका स्वाद बड़ा न्यारा है 

चॉकलेट से ज्यादा प्यारी ,पर लोगों नाम धर दिया 

इसके स्वस्थ दीर्घ जीवन ने,है इसको बदनाम कर दिया 

सोहनपपड़ी भेंट मिले तो, सुनो दोस्तों डब्बा खोलो 

उसका प्यारा स्वाद चखो तुम ,अपने मुंह में अमृत घोलो 


मदन मोहन बाहेती घोटू