Wednesday, April 10, 2024

Sexy pool girl


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Tuesday, April 9, 2024

Invitation à rejoindre Fun funn

Bonjour baheti.mm.tara4@blogger.com,
terrelllufanu@gmail.com vous a invité à rejoindre le groupe Fun funn.
Message de terrelllufanu@gmail.com

Thanks

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Funny

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Wednesday, April 3, 2024

मैंने हंसना सीख लिया है


अब तक जीवन खूब जिया है

मस्ती की,खाया पिया है

मगर किसी की नजर लग गई ,

तकलीफों ने हैं घेर लिया है 


 परेशानियां और बिमारी 

रोज रोज की मारामारी 

बड़ी अव्यवस्थित  जीवनचर्या ,

पर क्या करता है लाचारी 


रोज दवाई और इंजेक्शन 

खानपान में भी रिस्ट्रिक्शन 

प्रतिबंधों ने बांध रखा हैं 

हुआ बहुत ही नीरस जीवन 


मन घुटता था ,परेशान था 

आखिर इसका क्या निदान था

 क्या अब पूरे जीवन भर ही

 जीने का ये ही विधान था 


फिर एक दिन यह मन ने सोचा 

जब कल का ही नहीं भरोसा 

लंबे जीवन के चक्कर में ,

क्यों खुद को मैं करता कोसा 


बचा रखा है इतना पैसा 

तो घुट घुट कर जीना कैसा 

मन मसोस कर ,क्यों जिएं हम 

मनचाहा खाए पिए हम 


जब मरने का दिवस मुकर्रर 

तो फिर हर दिन क्यों डर-डर कर 

निज दिनचर्या करें नियंत्रित

मृत्यु डर से रह कर चिंतित


बन्धन तभी तोड़ सब डाले 

शिकवे गिल भुलाए सारे

अपने पंखों को पसार कर 

चिंताओं को भूलभाल कर


जो मन में आए वो करना

अब मृत्यु से जरा न डरना 

शान्ति रखना सीख लिया है

मैंने हंसना सीख लिया है


मदन मोहन बाहेती घोटू 


Sunday, March 31, 2024

तेरी तेरी पकड़


तूने मुझे संभाल रखा है वरना अब तक

मैं तो जाने कब का इधर-उधर हो जाता 


मैं चंचल मन का प्राणी हूं 

बात बहुत जानी-मानी है 


शक्ल देखकर मेरी अब भी 

कई लड़कियां दीवानी है 


तू भी ऐसी ही फिसली थी 

गठबंधन में बंधा मगर मैं


ऐसा मंगलसूत्र में बांधा

भटक न पाया इधर-उधर मैं


 तेरे दिल के बैंक ने मुझको 

इतना अच्छा रिटर्न थमाया, 

यही हो गया फिक्सडिपॉजिट 

खोल ना पाया दूजा खाता 


 मुझे संभाल रखा है वरना अब तक

मैं तो जाने कब का इधर उधर हो जाता


 आज जलेबी ,कल  रसगुल्ला

तूने मृदु पकवान खिलाए 


कभी कचोड़ी,आलू की टिक्की 

और गोलगप्पे गटकाये 


चाट पापड़ी , दहीबड़े के 

मधुर स्वाद में यूं उलझाया 


भरता रहा, यूं ही चटकारे 

ऐसा स्वर्गिक आनंद आया 


कोशिश बहुत करी पिज़्ज़ा ने

 बर्गर ने भी लाइन मारी 

पर देसी स्वादों के चंगुल 

से मैं बाहर निकल ना पाया 


तूने मुझे संभाल रखा है वरना अब तक 

मैं तो जाने कब का इधर-उधर हो जाता


मदन मोहन बाहेती घोटू

Sunday, March 24, 2024

जमाने की बात


जमाने की यादें जमा कर रखी है,

बचत की रकम बैंक में सब जमा है

महफिल में कोई, चले जाते हैं तो,

 रंग अपनी बातों से देते जमा है 

तजुर्बों की पूंजी जमा कर रखी है 

देखा सभी क्षेत्रों को आजमा है 

कभी पानी को यह बर्फ में जमाते 

और दूध का दही देते जमा है 

बेसन की, मावे की बर्फी जमा कर

रहा ना दुरुस्त इनका हाजमा है 

मगर चुलबुलापन ,अब भी कायम

चेहरे पर अब भी , जवानी जमा है


मदन मोहन बाहेती घोटू

आज तो होली है


रंगे है रंगों से सब अंग  

सभी में मस्ती और उमंग 

मचाते हल्ला और हुड़दंग 

आज तो होली है ,आज तो होली है


भंग का ऐसा छाया रंग 

नशे में यार दोस्त के संग 

भुलाए सारे रंग और ढंग

आज तो होली है ,आज तो होली है 


उड़ रही है अबीर गुलाल

कंचुकी और साड़ी सब लाल 

गौरी की बदल गई है चाल 

आज तो होली है ,आज तो होली है 


आया है ऐसा प्यारा फाग 

सभी ने लाज शरम दी त्याग

बरसता सभी तरफ अनुराग 

आज तो होली है, आज तो होली है 


हो गए बूढ़े सभी जवान 

कर रहे हैं पूरे अरमान 

गा रहे मस्ती वाले गान 

आज तो होली है ,आज तो होली है


आज हर रमणी राधा प्यारी 

बना हर मानुष कृष्ण मुरारी

घूमता हाथ लिए पिचकारी 

आज तो होली है ,आज तो होली है


गुजिया खायें ,खिलाए लोग 

बाहरऔर भीतर मधुर संयोग 

इस तरह बन जाए सब लोग 

आज तो होली है, आज तो होली है


जलाकर बैर भावऔर रार

रंग की बनी रहे बौछार 

प्यार की मलो अबीर गुलाल 

आज तो होली है ,आज तो होली है


मदन मोहन बाहेती घोटू

Monday, March 18, 2024

मैं फिट हूं 


उमर बयांसी पार हो गई ,

मैंने खुद को फिट रक्खा है 

फिर भी कुछ ना कुछ तकलीफें ,

हो जाती  इक्का दुक्का है 


उम्र जन्य सारी बीमारी ,

सबको होती, मुझको भी है 

अब चलने पर घुटने भारी 

सबके होते, मेरे भी हैं 

थोड़ा ऊंचा भी सुनता हूं 

आंखों में है धुंधलापन भी 

याददाश्त भी साथ में देती

हाथ पांव में बचा न दम भी 

लेकिन मैंने कमजोरी को ,

लोगों के आगे ढक्का है 

उमर बयांसी पार हो गई ,

मैंने खुद को फिट रक्खा है 


मंद हो गई पाचन शक्ति 

और भूख भी लगती कम है 

ज्यादा चललो ,सांस फूलती 

कमजोरी का यह आलम है 

काम धाम ना कुछ करने को 

डूबा रहता हूं आलस में 

ज्यादा कोई परिश्रम करना 

रहा नहीं अब मेरे बस में 

चुस्ती फुर्ती सभी खो गई 

तन रहता थक्का थक्का है 

उम्र बयांसी पार हो गई 

मैंने खुद को फिट रक्खा है 


हुई भूलने की बिमारी,

याद न रहते नाम किसी के 

याद मगर आते रहते हैं 

यौवन के दिन हंसी खुशी के 

बच्चे मेरी बात न सुनते 

घर में मेरी ना चलती है 

मैं मिठाई का प्रेमी लेकिन

खान-पान पर पाबंदी है 

फिर भी मैंने पकवानों को 

चुपके चुपके से चख्खा है 

उम्र बयांसी पार हो गई 

मैंने खुद को फिट रक्खा है


मदन मोहन बाहेती घोटू