जुल्फें
कल रात मेरी जुल्फे,रुखसार पर बिखराई
तारीफ करके कितनी, तुमने उन्हें सराही
देखा उन्ही बालों को ,जो सुबह दाल में तो,
व्यवहार पिया बदला, खोटी खरी सुनाई
घोटू
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मैं सभी का शुक्र गुजार हूं
वो जिनकी दुआओं में बन दवा
मेरी बीमारी का है इलाज किया
सभी दोस्त यारों का शुक्रिया
मुझे लगा ही नहीं कि मैं बीमार हूं
मैं सभी का शुक्र गुजार हूं
रहा लंबी बिमारी का सिलसिला
दिया मुझको कितनी ही बार हिला
तब जिन्होंने बढ़ाया था हौसला
मैं उन सभी का कर्जदार हूं
मैं सभी का शुक्र गुजार हूं
मेरी बेटी, बेटा ,मेरी हमसफर
रखी रात दिन मेरी खैरो खबर
यह है उनके प्यार का ही असर
मैं उनके दिल का करार हूं
मैं सभी का शुक्र गुजार हूं
मदन मोहन बाहेती घोटू
रोज ही रात पड़ने पर, नींद आंखों में घुल जाती
किसी का फोन आता है, नींद झट से है खुल जाती
जगाती लाख है पत्नी ,मगर हम उठ नहीं पाते
पलंग पर पांव फैला कर ,भरा करते हैं खर्राटे
बड़ी मस्ती के आलम में, मुंह को ढक के चादर से
करो कोशिश कितनी भी ,नहीं उठ पाते
बिस्तर से
डूबते रहते आलस में ,हमेशा पागलों भांति किसी का फोन आ जाता ,नींद झट से है खुल जाती
जगाया कूक कोयल ने, मधुर से गीत गा
गाकर
बोलकर कुकड़ू कूं मुर्गा,थक गया पंख फैला कर
थपथपा कर हवा ने भी ,जगा दें हमको, कोशिश की
सूर्य की किरणों ने आकर, उठा दे हमको
साजिश की
झटक कर लेकिन उठ जाते,फोन की घंटी जब आती
किसी का फोन आ जाता,नींद झट से है खुल जाती
मदन मोहन बाहेती घोटू