Sunday, May 4, 2025

पत्नी जी के जन्मदिन पर 

जन्मदिन आया तुम्हारा 
 प्यार तुमको ढेर सारा 
डूबते मेरे हृदय को, 
दिया तुमने आ सहारा 

आई तुम तकदीर बनकर 
मरुस्थल में नीर बनकर
 जिंदगी मेरी संवारी ,
मेरे दिल की हीर बनकर

 प्यार हो तुम प्रेयसी तुम
 मेरे दिल में आप बसी तुम 
जिंदगी महकाई तुमने,
मेरे जीवन की खुशी तुम

कई जन्मों के हम साथी 
मैं दिया हूं, तुम हो बाती 
रहो हरदम खुश हमेशा 
प्यार ऐसे ही लुटाती

मदन मोहन बाहेती घोटू 

पाबंदी 


 मिष्ठान और मीठे फल ,

खाने को यदि वर्जित है 

कभी-कभी चखने पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


सुंदर जवान लड़कियों से,

 छेड़छाड़ ठीक नहीं 

मगर उन्हें तकने पर ,

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


दहेज का आदान-प्रदान,

 शादी में गलत रीत,

प्रेमपत्र के आदान प्रदान पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


दिल तो बावरा है ही,

 जाने क्या-क्या चाहता है

आशिकाना मिजाज रखने पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


मदन मोहन बाहेती घोटू 

Friday, April 18, 2025

मैंने तुझको देख लिया है 


मैंने पंखुड़ी में गुलाब की , हंसती बिजली ना देखी थी 

बारह मास रहे जो छाई,ऐसी बदली ना देखी थी

ना देखे थे क्षीर सरोवर,उन में मछली ना देखी थी 

सारी चीजें नजर आ गई ,मैंने तुझको देख लिया है 


तीर छोड़ कर तने रहे वो तीर कमान नहीं देखे थे

पियो उमर भर पर ना खाली हो वो जाम नहीं देखे थे 

गालों की लाली में सिमटे , वो तूफान नहीं देखे थे 

सारी चीजें नजर आ गई मैंने तुझको देख लिया है 


ढूंढा घट घट, घट पर पनघट, घट पनघट पर ना देखे थे 

कदली के स्तंभों ऊपर ,लगे आम्र फल ना देखे थे 

सरिता की लहरों में मैंने,भरे समंदर ना देखे थे 

सारी चीजें नजर आ गई ,मैंने तुझको देख लिया है


मदन मोहन बाहेती घोटू

Wednesday, April 16, 2025

मुक्तक 

1
अचानक एक दिन यूं ही तमाशा कर दिया मैंने 

 खुलासा करने वालों का खुलासा कर दिया मैंने

 वो तड़फे, तिलमिलाए पर,नहीं कुछ कर सके मेरा ,
बहुत बनते थे बस नंगा जरा सा कर दिया मैंने
2
बड़े तुम बोल,ना बोलो अपनी तारीफ मत हांको 

कभी भी दूसरों को अपने से छोटा नहीं आंकों

तुम्हारी क्या हकीकत है की दुनिया जानती है सब, 
फटा का गरेंबां हो जब, फटे दूजे में मत झांको 

मदन मोहन बाहेती घोटू

Monday, April 14, 2025

बदलाव 

मैंने देखा साथ वक्त के 
कैसे लोग बदल जाते हैं 
बीज वृक्ष बन जाता उसमें,
 फूल और फिर फल आते हैं 

दूध फटा बन जाता छेना 
जमता दूध ,दही कहलाता 
सूख खजूर ,छुहारा बनता,
रूप रंग सब बदला जाता 

और अंगूर सूख जब जाते,
 हम उनको किशमिश कहते हैं 
नाले निज अस्तित्व मिटाते,
तो फिर नदिया बन बहते हैं 

चावल पक कर भात कहाते 
गेहूं पिसते ,बनता आटा 
गर्म तवे पर बनती रोटी ,
घी लगता बन जाए परांठा 

पक जाने पर हरी मिर्च भी,
रंग बदल कर,लाल सुहाती 
और सूखे अदरक की गांठे ,
बदला नाम, सोंठ कहलाती 

उंगली पकड़ चले जो बच्चे,
तुमको उंगली दिखलाते हैं 
मैंने देखा साथ वक्त के,
 कैसे लोग बदल जाते हैं 

मदन मोहन बाहेती घोटू 

Sunday, April 13, 2025

अपनो से 

तुम मुझसे मिलने ना आते,
तो मुझे बुरा नहीं लगता है ,
पर कभी-कभी जब आ जाते,
तो यह मन खुश हो जाता है 

मैं यही सोच कुछ ना कहता,
तुम बहुत व्यस्त रहते होंगे ,
क्या मुझसे मिलने कभी-कभी,
 मन तुम्हारा अकुलाता है 

कोशिश करोगे यदि मन से 
तो समय निकल ही जाएगा,
मिलने जुलने से प्रेम भाव 
आपस वाला बढ़ जाता है 

है दूरी भले घरों में पर ,
तुम दिल में दूरी मत रखना ,
यह कभी टूट ना पायेगा,
 मेरा तुम्हारा नाता है 

इतनी तो अपेक्षा है तुमसे,
तुम कभी उपेक्षा मत करना 
वरना तुम्हारी यह करनी ,
हर दम मुझको तड़पाएगी 

मैं हूं उसे मोड़ पर जीवन के,
क्या पता छोड़ दूं कब सबको ,
तुम कभी-कभी मिल लिया करो,
 तो उम्र मेरी बढ़ जाएगी

मदन मोहन बाहेती घोटू 
घर का खाना

वही अन्न है, वो ही आटा ,
वही दाल और मिर्च मसाला 
फिर भी हर घर के खाने का,
 होता है कुछ स्वाद निराला 

हर घर की रोटी रोटी का ,
अपना स्वाद जुदा होता है 
घर की रोटी के आटे में,
 मां का प्यार गुंथा होता है 

कोई मुलायम फुल्का हो या
गरम चपाती , टिक्कड़ मोटी 
अलग-अलग पर सबको भाती ,
है अपने ही घर की रोटी

कुछ सिकती है अंगारों पर,
 कोई तवे पर फूला करती 
कोई तंदूरी होती है ,
स्वाद निराला अपना रखती

जला उंगलियां जिसे सेकती 
है मां वो रोटी है अमृत 
ममता के मक्खन से चुपड़ी ,
तुम्हें तृप्त करती है झटपट 

होटल से महंगीसे महंगी 
सब्जी तृप्त नहीं कर सकती 
पकवानों की भीड़ लगी पर 
पेट तुम्हारा ना भर सकती 

सब फीका फीका लगता है,
 घर वाले खाने के आगे 
तृप्त आत्मा हो जाती है 
अपने घर की रोटी खा के 

पांच सितारे होटल वालो 
के गरिष्ठ होते सब व्यंजन 
पर सुपाच्य और हल्का होता 
अपने घर का भोजन हरदम 

जिसके एक-एक ग़ासे में,
 स्वाद भरा हो अपनेपन का 
सबके ही मन को भाता है 
क्या कहना घर के भोजन का

मदन मोहन बाहेती घोटू