Monday, May 5, 2025

गृह शांति 


पत्नी मूड अगर हो बिगड़ा 

नहीं चाहते घर में झगड़ा 

पुरुषत्व पर तुम मत ऐंठो 

बेहतर है चुप होकर बैठो 

कुछ ही देर में देखोगे तुम 

बदल जाएगा घर का मौसम 

चार मिनट चुप्पी तुम्हारी 

करती दूर मुसीबत सारी 

भले तुम्हारी बात सही हो 

पत्नी जी ही गलत रही हो 

लेकिन उस क्षण में विवाद के

 रहो सदा तुम मौन साध के 

यदि कुछ बोला तो भुगतोगे 

 एक कहोगे, चार सुनोगे 

 पत्नी को यदि क्रोध आएगा 

तो गृह युद्ध भड़क जाएगा 

इसीलिए ऐसे अवसर पर 

रक्षक होता मौन अधिकतर 

धीरज अगर रखोगे कुछ क्षण 

रह सकती गृह शांति कायम


मदन मोहन बाहेती घोटू

मेरे भगवान,मेरे माता-पिता 


मेरे माता-पिता भगवान है 

मेरा शत-शत उन्हे प्रणाम है 


उनने मुझको जन्म दिया है 

पाल पोस कर बड़ा किया है 

मैं रोया तो दूध पिलाया 

गोदी में ले मुझे सुलाया 

मुझपे उनके बहुत एहसान है 

मेरे माता-पिता भगवान है 


उंगली पकड़ सिखाया चलना 

अक्षर ,गिनती ,लिखना,पढ़ना 

मुझे सिखाई ,दुनियादारी 

कितनी बातें प्यारी प्यारी 

दिया उनका सभी कुछ ज्ञान है 

मेरे माता-पिता भगवान है 


मेरे सुख-दुख के हर क्षण में 

मेरा साथ दिया जीवन में 

आगे बढ़कर दिया सहारा 

साथ निभाया ,भाग्य संवारा 

उनका हरदम ही गुणगान है 

मेरे माता-पिता भगवान है 


उनसे जो कुछ सीखा , पाया

काम बहुत जीवन में आया 

उनकी आशीषों का फल है 

मेरा जीवन हुआ सफल है 

उनने हरदम दिया वरदान है 

मेरे माता-पिता भगवान है 


मेरे लिए वह देव तुल्य है

दिया ज्ञान उनका मूल्य है 

उनके आदर्शों पर चलकर 

जीवन आज बना है सुंदर 

 उनका व्यक्तित्व महान है 

 मेरे माता-पिता भगवान है 


मेरे माता-पिता, मेरे माता-पिता

 मेरी रामायण, है मेरी गीता 

मेरे रामचंद्र, है मेरी सीता 

सबके सुखदायक,सर्वहिता 

वह तो सर्वश्रेष्ठ इंसान है

 मेरे माता-पिता भगवान है 

मेरा शत-शत उन्हे प्रणाम है


मदन मोहन बाहेती घोटू

Sunday, May 4, 2025

मेरे भगवान,मेरे माता-पिता 

मेरे माता-पिता भगवान है 
मेरा शत-शत उन्हे प्रणाम है 

उनने मुझको जन्म दिया है 
पाल पोस कर बड़ा किया है 
मैं रोया तो दूध पिलाया 
गोदी में ले मुझे सुलाया 
मुझपे उनके बहुत एहसान है 
मेरे माता-पिता भगवान है 

उंगली पकड़ सिखाया चलना 
अक्षर ,गिनती ,लिखना,पढ़ना 
मुझे सिखाई ,दुनियादारी 
कितनी बातें प्यारी प्यारी 
दिया उनका सभी कुछ ज्ञान है 
मेरे माता-पिता भगवान है 

मेरे सुख-दुख के हर क्षण में 
मेरा साथ दिया जीवन में 
आगे बढ़कर दिया सहारा 
साथ निभाया ,भाग्य संवारा 
उनका हरदम ही गुणगान है 
मेरे माता-पिता भगवान है 

उनसे जो कुछ सीखा , पाया
काम बहुत जीवन में आया 
उनकी आशीषों का फल है 
मेरा जीवन हुआ सफल है 
उनने हरदम दिया वरदान है 
मेरे माता-पिता भगवान है 

मदन मोहन बाहेती घोटू 
पत्नी जी के जन्मदिन पर 

जन्मदिन आया तुम्हारा 
 प्यार तुमको ढेर सारा 
डूबते मेरे हृदय को, 
दिया तुमने आ सहारा 

आई तुम तकदीर बनकर 
मरुस्थल में नीर बनकर
 जिंदगी मेरी संवारी ,
मेरे दिल की हीर बनकर

 प्यार हो तुम प्रेयसी तुम
 मेरे दिल में आप बसी तुम 
जिंदगी महकाई तुमने,
मेरे जीवन की खुशी तुम

कई जन्मों के हम साथी 
मैं दिया हूं, तुम हो बाती 
रहो हरदम खुश हमेशा 
प्यार ऐसे ही लुटाती

मदन मोहन बाहेती घोटू 

पाबंदी 


 मिष्ठान और मीठे फल ,

खाने को यदि वर्जित है 

कभी-कभी चखने पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


सुंदर जवान लड़कियों से,

 छेड़छाड़ ठीक नहीं 

मगर उन्हें तकने पर ,

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


दहेज का आदान-प्रदान,

 शादी में गलत रीत,

प्रेमपत्र के आदान प्रदान पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


दिल तो बावरा है ही,

 जाने क्या-क्या चाहता है

आशिकाना मिजाज रखने पर 

पाबंदी नहीं होनी चाहिए 


मदन मोहन बाहेती घोटू 

Friday, April 18, 2025

मैंने तुझको देख लिया है 


मैंने पंखुड़ी में गुलाब की , हंसती बिजली ना देखी थी 

बारह मास रहे जो छाई,ऐसी बदली ना देखी थी

ना देखे थे क्षीर सरोवर,उन में मछली ना देखी थी 

सारी चीजें नजर आ गई ,मैंने तुझको देख लिया है 


तीर छोड़ कर तने रहे वो तीर कमान नहीं देखे थे

पियो उमर भर पर ना खाली हो वो जाम नहीं देखे थे 

गालों की लाली में सिमटे , वो तूफान नहीं देखे थे 

सारी चीजें नजर आ गई मैंने तुझको देख लिया है 


ढूंढा घट घट, घट पर पनघट, घट पनघट पर ना देखे थे 

कदली के स्तंभों ऊपर ,लगे आम्र फल ना देखे थे 

सरिता की लहरों में मैंने,भरे समंदर ना देखे थे 

सारी चीजें नजर आ गई ,मैंने तुझको देख लिया है


मदन मोहन बाहेती घोटू

Wednesday, April 16, 2025

मुक्तक 

1
अचानक एक दिन यूं ही तमाशा कर दिया मैंने 

 खुलासा करने वालों का खुलासा कर दिया मैंने

 वो तड़फे, तिलमिलाए पर,नहीं कुछ कर सके मेरा ,
बहुत बनते थे बस नंगा जरा सा कर दिया मैंने
2
बड़े तुम बोल,ना बोलो अपनी तारीफ मत हांको 

कभी भी दूसरों को अपने से छोटा नहीं आंकों

तुम्हारी क्या हकीकत है की दुनिया जानती है सब, 
फटा का गरेंबां हो जब, फटे दूजे में मत झांको 

मदन मोहन बाहेती घोटू