Sunday, August 21, 2011

वो लेट क्यों आते है?

वो लेट क्यों आते है?
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कुछ लोग पार्टियों में,
हमेशा देर से आते है
और सबका अटेंशन पाते है
उनका ये सोचना है,
कि सजने सँवारने में इतना टाइम लगाओ

लेटेस्ट फेशन के कपड़ों में,पार्टी में जाओ
और देखने वाले हों बस
केवल आठ या दस
तो बताओ आपको क्या मज़ा आएगा?
सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा
मज़ा तो तब है,जब आपकी एंट्री हो
चारों तरफ अच्छी जेन्ट्री हो
पचासों लोगों कि निगाहें
आप पर आकर ठहर जाए
हर कोई आपसे मिलना चाहेगा
आपका सजना संवारना सफल हो जाएगा
जब पार्टी शबाब पर होती है
आपकी आमद गुलाब सी होती है
लेट आने पर मिलती है सभी कि अटेंशन
अरे ये तो है प्रकृति का नियम
क्योंकि जब पैदा होता इंसान है
तो होते दो हाथ,दो पैर,आँखें और कान है
पर शरीर के कुछ अंग जो देर से आते है
तो सबसे ज्यादा अटेंशन पाते है
जैसे मर्दों कि दाड़ी मूंछे,लेट आती है
और औरतों के यौवन का उभार लेट आता है
मन को कितना लुभाता है
ये ही वो चिन्ह है कि जिनको,
जवानी कि पहचान कहा जाता है
लेट आना प्रतीक है यौवन का,
इसलिए जब पार्टी  जवान होती है
  वो नज़र आते है
अब समझ गए ना,
वो पार्टी में लेट क्यों आते है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

इंटरव्यू -कृष्ण कन्हैया से

इंटरव्यू -कृष्ण कन्हैया से
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कल मैंने डेयरी पर देखा
हुलिया एक अजीब ,अनोखा
लम्बे बाल लिया काँधे था
सर पर मोर पंख बांधे था
मैंने उसको हिप्पी जाना
पर लगता था कुछ पहचाना
आखिर मैंने पूछ ही डाला
क्या है भैया नाम तुम्हारा?
बोला बड़ा अचम्भा लाये
मुझको तुम पहचान न पाये
पूजो रोज़ जिसे तुम भैया
मै गोकुल का किशन कन्हैया
मै बोला कान्हा,जय कृष्णा
दूर करी नैनों की तृष्णा
धन्य हुआ जो दर्शन पाया
लेकिन नहीं समझ में आया
'क्यू' में यूं क्यूं आप खड़े है
क्या राधा से आज लड़े है?
बोले ना ये बात नहीं है
राधा जी  तो साथ नहीं है
मै तो आया ऐसे ही था
हाल जानने इस धरती का
इतने में ही भूख लग गयी
दिखा कहीं ना दूध या दही
लोगों ने यह ठौर बताया
पता पूछता हूँ मै आया
मै बोला प्रभु धन्य भाग है
हमसे कितना अनुराग है
मुझको सेवा का अवसर दो
मेरी कुटिया पवित्र करदो
नहीं विदुर की पत्नी जैसे
खिलवाऊँ कैले के छिलके
 बल्कि असली दूध मिलेगा
और अमूल का मख्खन होगा
'बटर टोस्ट ' के साथ खाइए
भगवन मेरे साथ आइये
मै उनको अपने घर लाया
बैठाया,जलपान कराया
फिर बोला उपकार करो प्रभु
थोडा सा इंटरव्यू  दो प्रभु
बोले माफ़ करो तुम भैया
मेरे पास ना टका,रुपैया
चावल खाए सुदामा के थे
जो भी था,उसको डाला दे
अब खाकर मख्खन तुम्हारा
ये गलती ना करूं दुबारा
कुछ भी मेरे पास नहीं है
मै बोला ये बात नहीं है
मेरा मतलब इतना केवल
दे दो कुछ प्रश्नों के उत्तर
बरसों बाद आप है आये
कैसा तुमको यहाँ लगा है ?
बोले भैया,गया ज़माना
अब क्या गाऊं गीत पुराना
ना वो गोकुल,ना वो गायें
नहीं गोपियाँ,क्या बतलाये
पहले दूध दही था  बहता
अब बोतल,पाउच में रहता
पहले जब माखन की हंडिया
लेकर जाती गोपी,सखिंया
मै उनको छेड़ा करता था
हंडीयाये फोड़ा करता था
अब छेड़ूं तो क्या बतलाऊं
सर पर कई सेंडिल खाऊं
अब वो प्यारे वक़्त को गए
ग्वाले भी होशियार हो गए
सारा दूध टिनो में भर कर
बेच रहे रख साईकिल पर
और गोपियाँ अपने घर में
खुश है अपने ट्रांजिस्टर में
सुनती हैं जब फ़िल्मी गाने
कौन सुने मुरली की ताने?
क्या बतलाऊ तुमको भैया
सूख गयी है जमुना मैया
घर घर में बाथरूम हो गए
चीर हरण के चांस खो गए
मैंने उन्हें टोक ही डाला
माफ़ करो नंदजी के लाला
आलोचक है निंदा करते
चीर हरण थे तुम क्यों करते?
कृष्ण कन्हैया बोले झट से
मै ना डरता आलोचक से
चीर हरण यदि मै ना करता
तो बतलाओ कैसे रखता
लाज द्रोपदी की दुनिया में
चीर बढाता भरी सभा में
मेरे पास स्टोक ना होता
तो बतलाओ फिर क्या होता?
चीर हरण कर कर मै लाया
मैंने था स्टोक बढाया
तो मौके पर काम आ गया
मेरा कितना नाम छा गया
वैसे कई चीज ऐसी  है
जो अब भी पहले जैसी है
राजनीती का रंग वही है
उल्टा सीधा ढंग वही है
नेता  चुन दिल्ली जाते है
लेकिन  कभी नहीं आते है
लेने खबर क्षेत्र की अपने
जैसे कभी किया था  हमने
गोकुल से चुन मथुरा आया
लेकिन  कभी लौट ना पाया
इतना उलझ गया वैभव से
भेजा सन्देशा उद्धव से
  पहले भी संयुक्त कई दल
कौरव जैसे बने बढा बल
पर पांडव से युद्ध कराया
ये है राजनीती की माया
अच्छा देर हुई बंधुवर
मुझको जाना है अपने घर
इतने में ही मुझे सुनाया
जागो,कितना दिन चढ़ आया
श्रीमती जी जगा रही थी
मेरा सपना भगा रही थी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

 

Saturday, August 20, 2011

तुम्हे क्या आपत्तियां है

तुम्हे क्या आपत्तियां है
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आज हमतुम है अकेले,बुझ गयी सब बत्तियां है
                    तुम्हे क्या आपत्तियां है
तुम्हे कोई देख ना ले,इसलिए  आती शरम है
तुम्हे ढंग से अँधेरे में,देख भी पाते न हम है
देख तुम्हारी शरम को,चाँद छुप कर झांकता है
रूप का कैसा खजाना,छुपा कर तुमने रखा है
तुम्हे छूने में हवांए,भी सहम ,कतरा रही है
आई जो खुशबू तुम्हारी,चमेली शरमा रही है
छुई मुई की तरह तुम,लाजवंती हो लजीली
तुम्हारा स्पर्श मादक,तुम्हारी नज़रें नशीली
मै मधुप प्रेमी तुम्हारा,चाहता रसपान करना
कभी शरमा कर सिमटना,कभी मुस्का कर झिझकना
हुई बेकल मधु मिलन को,हमारी अनुरक्तियाँ है
                      तुम्हे क्या आपत्तियां है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

अब सुनामी आ गया है

अब सुनामी आ गया है
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देख कर अन्ना का अनशन
और जनता का    प्रदर्शन
 अरे भ्रष्टों,संभल जाओ, अब सुनामी आ गया है
जड़ तुम्हारी हिला देगा
और तुमको मिटा देगा
गिरा देगा महल,जन सैलाब एसा  छा गया  है
बहुत लूटा देश तुमने,
         और जनता को सताया
बढाई मंहगाई इतनी,
           खून के आंसू  रुलाया
जोश जनता में भरा है
भर गया अब तो घड़ा है
पाप-घट के फूट जाने का समय अब आ गया है
अरे भ्रष्टों संभल जाओ,अब सुनामी आ गया है
बहुत घोटाले हुए है,
                  और भ्रष्टाचार  फैला
मिटाने को अब करप्शन ,
                  नहीं अन्ना है अकेला
सभी मिल कर जुट गए है
हाथ लाखों उठ  गए है
बांध टूटा सबे का है, और विप्लव आ गया है
अरे भ्रष्टों संभल जाओ, अब सुनामी आ गया है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

 

Friday, August 19, 2011

मै,तुम और चटपटी जिंदगी


 मै,तुम और चटपटी जिंदगी
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मै किचन में काम करती,
               सजन तुम मन में बसे हो
रसमलाई सी मधुर मै,
             चाट से तुम चटपटे  हो
मै स्लिम काजू की कतली,
              और मोतीचूर हो तुम
  मै जलेबी रसभरी और,
             प्रेम रस भरपूर हो तुम
मै पूरी की तरह फूली,
             तुम पंराठे से हो केवल
मै हूँ बिरयानी सुहानी,
             दो मिनिट के तुम हो नूडल
आलू की टिक्की महकती,
              मै हूँ,तुम हो गोलगप्पे
मै करारी सी कचोरी,
             तुम तिकोने से समोसे
तुम हो कटहल से कटीले,
            और मै लौकी लजीली
तुम हो चमचे,मै छुरी हूँ,
              तुम तवा हो मै पतीली
तुम कडाही  की तरह हो,
                और मै प्रेशर कुकर हूँ
गेस का चूल्हा सजन तुम,
               और मै तो लाइटर  हूँ
बाटियों सी स्वाद हूँ मै ,
                 और तड़का दाल हो तुम
मै सजी थाली परोसी,
                 और टपकती लार हो तुम
मै हूँ धनिया तुम पुदीना,
                 बनी चटनी जिंदगी है
प्यार झगडे के मसाले,
                इसलिए ये चटपटी है


मदन मोहन बाहेती 'घोटू' 

,बहनजी -प्रतिक्रिया

अगर बस में कोई लड़का,पास आ बैठे तुम्हारे
बात को आगे बढ़ाने,बहनजी कह कर पुकारे
इस पर तुम्हारी प्रतिक्रिया कैसी होगी?
मेडम जी क्या बतलाओगी ?
    प्रतिक्रिया -1
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अजीब बेवकूफ आदमी है,
ना सोचता है,न विचारता है
मुझ जैसी हसीं लड़की को,
बहन जी पुकारता है
       २
मुझे बहनजी कहना मंहगा पड़  जाएगा
 जब टिकिट के लिए कंडक्टर आएगा
उसे पता लग जाएगा,कितनी स्मार्ट है बहना
जब मै कहूँगी भाई साहेब,
टिकिट के पैसे आप दे देना
         ३
बड़ा पागल लगता है
जो हर लड़की को बहन समझता है
           4
पूछूंगी भैया,जरा अपने घर का पता बताना
मुझे राखी बांधने तुम्हारे घर है आना
            ५
ए मिस्टर,क्या पड़ेगा तुमको बताना
लड़की पटाने का ये तरीका है पुराना
             ६
भरी बस में वो मुझे बहनजी कह कर पुकार गया
हाय राम,मेरा सारा सजना धजना बेकार गया
              ७
लल्लू,मुझे बहन जी मत समझना
बहनजी होगी  तेरी अम्मा
                ८
मै स्मार्ट और मॉडर्न लड़की हूँ
क्या मै तुम्हे बहनजी टाईप लगती हूँ?
                ९
बिलकुल बुद्धू है,बहनजी पुकारता है
क्या आजकल एसे भी कोई लाइन मारता है?
               १०
अगर सब लड़कियों को बहनजी बतलायेगा
तो फिर अपनी बीबी किसे बनाएगा?

(अभी तक उपरोक्त प्रतिक्रियाये ही मिली है

 अगर आप की कोई प्रतिक्रिया हो तो लिखें)
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

एक नजरिया यह भी

एक नजरिया यह भी
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जब से प्रधानमंत्री पद के लिए,राहुल गाँधी का नाम आया है
कुछ बढ़ बोले कोंग्रेसी नेताओं का मन कसमसाया है
कल का छोकरा प्रधान मंत्री बन जाएगा
हमारा सारा किया धरा मिटटी में मिल जाएगा
पी.एम की कुर्सी पर कब से गढ़ाए थे नज़र
पर अब लगता है,सपने जायेंगे बिखर
तभी से उल जलूल हरकतें करने लगे है
जिसके दंश अब कोंग्रेस को भी चुभने लगे है
करने लगे है बयानबाजी बेवकूफी भरी
जिससे रोज रोज होती है कोंग्रेस की किरकिरी
बहुत ही हो रही है इसकी छीछालेदर
क्या ये सब हो रहा है जान बूझ कर
अपने ही अपनों पर भीतरी घात कर रहे है
मदम जी,क्या आप ये सब समझ रहे है?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'