Sunday, October 16, 2011

अपहरण

अपहरण
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जो अपनी बहन के अपहरण का
 बदला लेने के लिये,
पृथ्वीराज को हरवा दे,
उसे जयचंद कहते है
और जो खुद अपने मित्र अर्जुन के साथ,
अपनी बहन सुभद्रा को   भगवा दे,
उसे श्रीकृष्ण कहते है
लोगों की सोच में,
या अपहरण अपहरण में कितना अंतर है

मदन मोहन बहेती 'घोटू;

चंदा मामा और करवाचौथ

चंदा मामा और करवाचौथ
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जब भी कभी होती है पूनम की रात
मेरे मन में उठती रह रह यह बात
चाँद और सूरज  दोनों चमकते है
राहू और केतु दोनों को डसते  है
पर सूरज  हर दिन चमकता ही रहता
और  चाँद पंद्रह दिन बढ़ता फिर घटता
अमावस  की रात को चाँद कहाँ है जाता
और चंदा बच्चों का मामा क्यों कहलाता
औरते करवा चौथ को,क्यों पूजती है चाँद को
सामने छलनी रख,क्यों देखती  है चाँद को
मनन करने पर आया कुछ ज्ञान मन में
सभी प्रश्नों का किया समाधान हमने
चाँद की शीतलता जानी पहचानी है
चन्द्रमा दुनिया का सबसे बड़ा दानी है
सूरज से रौशनी वो लेता उधर है
बांटता दुनिया को,करता उपकार है
इसी दान वीरता और परोपकार के कारण
बढ़ता ही रहता है ,जब तक कि हो पूनम
और पूर्ण होने पर,अहंकार है  आता
इसी लिए रोज़ रोज़ फिर घटता ही जाता
चाँद को केरेक्टर थोडा सा ढीला है
वैसे भी तबियत का थोडा  रंगीला है
अहिल्या के किस्से से,औरतें घबरायी
चाँद को बना लिया उनने अपना भाई
कहने लगी बच्चों से,ये चंदा मामा है
भाई का फ़र्ज़ बहन कि इज्जत बचाना है
 फिर भी कर्वाचोथ का व्रत वो करती है
चाँद और अपने बीच,चलनी रख लेती है
जिससे बस धुंधली सी शकल ही नज़र आये
रूप देख चंदा की नीयत ना ललचाये
दुखी हो पड़ा रहता ,धुत्त ,सोमरस पीकर
इसीलिए अमावास को नहीं आता धरती पर

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Saturday, October 15, 2011

सूरज पसर गया

सूरज पसर गया
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दूर दूर तक बिखरे हुए घर
और घरों की छतों से,
आसमान की और झांकते हुए एंटीना
और  पानी से भरी, लदी,
काली काली काया वाली,
ढेरों टंकियां
कहीं कहीं  सर उठाते हुए,
मोबाईल के टॉवर
सड़क के किनारे,
नन्हे से कन्धों पर,
भविष्य का भारी बोझा लादे
बस्ते लिये हुए ,
बस का इंतजार करते हुए बच्चे
मसहरी छोड़,
अंगडाई लेती हुई ललनायें
पुरब के कोने से,
सूरज ने झाँका और,
खाली सी छतों पर,
पग फैला कर पसर गया
और सुबह हो गयी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, October 14, 2011

काम ही पूजा है

काम  ही पूजा है
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निष्काम भाव से काम नहीं है होता
क्योंकि काम में काम बसा है होता
और काम ही पूजन है आराधन
आराधन के मन में भी रहता धन
आराधन  के बाद आरती   होती
बसी आरती में भी रति है होती
और आरती बाद भोग है चढ़ता
और भोग सम्भोग शब्द में बसता
काम ,रति,सम्भोग,सृजन क्रियाएं
करें आरती ,पूजन ,भोग चढ़ाएं

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 

पानी ही पानी

पानी ही पानी
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जब किसी सुन्दर सी लड़की की जवानी,
और चेहरे का पानी देख
किसी लड़के के मुंह में पानी आता है
तो वह उसे पटाने के लिए ,
पैसा पानी की तरह बहाता है
और जब प्यार परवान चढ़ता है
तो वह उससे पाणिग्रहण  करता है
 अपना घर बसाता है
गृहस्थी का बोझ,जब कंधो पर पड़ता है
साड़ी मौज मस्ती पर पानी फिर जाता है
और फिर वह घर चलाने के लिए
पसीना पानी की तरह बहाता है
कभी प्यार में,कभी मनुहार में
पानी पानी होता रहता है
बहुत कुछ  सहता है
और जब पानी सर के ऊपर से
गुजरने लगता है
उसकी आँखों से पानी बहता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

रावण का पुनर्जन्म

रावण का पुनर्जन्म
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रामायण की कथा ,मुझे अच्छी लगती है
राम से बेटे,
सीता सी पत्नी,
और लक्ष्मण से भाई
आज के सन्दर्भ में,ये बातें,
अविश्वसनीय तो है,
मगर एक बात आज भी सच्ची लगती है
की रावण नाभि में,अमृत कुंड था,
ये तथ्य आज भी नज़र आता है
  हम हर साल दशहरे पर रावण को मारते है
पर हर अगले दशहरे पर, 
उसका पुनर्जन्म हो जाता है
कोई कितनी ही कोशिश करे,
उसका कुछ नहीं बिगड़ सकता
ये भ्रष्टाचार का रावण है
कभी मर नहीं सकता

मदन मोहन बहेती]घोटू'

 

एक चिठ्ठी -मनमोहन सिंह जी के नाम

एक चिठ्ठी -मनमोहन सिंह जी के नाम
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आदरणीय मनमोहन सिंह जी,
सादर प्रणाम
(राम राम नहीं करूँगा ,
वर्ना आप मुझे बी जे पी का समझ लेंगे
और ये चिठ्ठी दिग्विजय सिंह को दे देंगे)
दशहरे के दिन आपको टी वी पर देखा,
रामलीला मैदान में
हाँ,उसी राम लीला मैदान में,
जहाँ आपकी सेना ने,
युद्ध के सारे नियमो का अवलंघन कर,
रात के दो बजे,
लाठी चार्ज किया था,
सोती हुई महिलाओं और साधू संतो पर
आपने मंचासीन होकर,
सोनिया जी के साथ में
धनुष बाण लेकर हाथ में
कागज के पुतले रावण पर तीर चलाया
हर साल की प्रक्रिया को दोहराया
जैसे हर साल आप पंद्रह अगस्त पर,
लाल किले पर भाषण देते हुए,
अपनी मृदुल वाणी में बतलाते है
की मंहगाई घटा देंगे
भ्रष्टाचार मिटा देंगे
पर ये दोनों बढ़ते ही जाते है
आप कुछ नहीं कर पाते है
और इसे गठबंधन की मजबूरी बताते है
वैसे ही दशहरे के दिन तीर चलाने से,
भ्रष्टाचार का रावण नहीं मर पायेगा
आपका तीर खाने को बार बार,
हर साल दशहरे को आएगा
क्योंकि उसकी महिमा प्रचंड है
आप लोगों की कृपा से,
उसकी नाभि में ,अमृत कुंड है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'