Sunday, November 13, 2011

गोल गप्पे

गोल गप्पे
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जिंदगी,
पानीपूरी के पानी की तरह,
खट्टी,मीठी,चटपटी,तीखी,
और स्वादिष्ट होती है
और आदमी इसे गटागट पी भी सकता है
पर उसमे इतना मज़ा नहीं आता
अगर उसका असली स्वाद लेना हो,
तो गोलगप्पे की तरह,
एक जीवनसाथी की जरुरत पड़ती है,
जिसमे भर भर कर,
घूँट घूँट पीने से,
जिंदगी का असली मज़ा आता है

मदन मोहन बहेती'घोटू'

लेटना

लेटना
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लेटना,एक शारीरिक प्रक्रिया है,
जिसमे  आदमी,
अकेला या किसी के साथ,
पैर फैला कर या सिकोड़ कर,
थका हुआ,या  अनथका ,
 आराम करने के लिए या थकने को,
सीधा,उल्टा या करवट लेकर,
पसर जाता है,
उसे लेटना कहते है
आदमी जब दुनिया में आता है,
तो आते ही लेटता है,
और जब दुनिया से जाता है ,
तो लेट कर ही जाता है
और अपना एक तिहाई से भी ज्यादा जीवन,
लेट कर ही बिताता है
नींद,लेटने की परम मित्र है,
और वो कई बार लेटने के साथ ही आ जाती है,
सुलाती है और सपने दिखाती है
और सोना इंसान को बहुत प्रिय है,
 और किसी के साथ सोने में उसे आनंद मिलता है,
पर  असल में उस समय  ,
वो सोता नहीं,लेटता है
और इस तरह जागते हुए सोने की प्रक्रिया,
आनंद दायिनी होती है,
धन प्रदायिनी होती है,
करियर बढ़ावनी होती है
धन लुटावनी होती है
पर सुहावनी होती है
अक्सर ,इस तरह लेटने से,
शरीर की मांसपेशियों का तनाव दूर हो जाता है
इसलिए लेटना आदमी के लिए जरूरी है
क्योंकि बिना लेटे जिंदगी अधूरी है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Saturday, November 12, 2011

वृद्ध का सन्मान कर दो

बहुत पूजित वृद्ध जन है
प्यार का ऊंचा गगन है
सफलता की सीढियां है,
संस्कृति का ये चमन है
हमारे बूढ़े ,बड़े  है
मुश्किलों से ये लड़े है
डगमगाए जब कभी हम,
थामने हरदम खड़े  है
आज ये पीढ़ी पुरानी
सफलताओं की कहानी
आज हम जो है,जहाँ है,
ये इन्ही की मेहरबानी
उम्र मत तुम  प्यार देखो
भावना,उपकार देखो
करो सेवा,पाओगे तुम,,
आशीषें  हर बार देखो
जिन्होंने सारी उमर भर
लुटाया,निज नेह तुम पर
मांगते ,प्रतिकार में है,
प्यार और सन्मान केवल
उमर का यशगान  करदो
वृद्ध  का सन्मान कर दो
प्यार की ले पुष्पमाला,
अनुभवों का मान कर दो
हो ख़ुशी मुस्कायेंगे वो
भाव से भर जायेंगे वो
मुदित हो विव्हल ह्रदय से,
अश्रुजल छलकायेंगे वो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आएगा कब 'लिटिल बच्चन ?'

आएगा कब 'लिटिल बच्चन ?'
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लगा कर के टकटकी सब
प्रतीक्षा में   लगे है   अब
जल्द आये वह मधुर क्षण
आएगा  जब 'लिटिल बच्चन'
अमित जी उत्सुक बहुत है
जया जी व्याकुल बहुत है
उल्लसित  अभिषेक जी है
प्रतीक्षा में  ये सभी है
मगन मन बेचेन श्वेता
आएगा  नन्हा चहेता
एश्वर्या दर्द पीड़ित
किये मन में प्यार संचित
राह पर है  प्रसूति की
एक नयी अनुभूति  की
ह्रदय में आनंद ज्यादा
बनेंगे अमिताभ दादा
और 'गुड्डी 'जया  दादी
खबर ने खुशियाँ मचा दी
टिकटिकी कर रही टक टक
धड़कने बढ़ रही   धक धक
प्रतीक्षा में है सभी जन
आएगा कब 'लिटिल बच्चन'
 मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, November 11, 2011

एक कबूतर ---

एक कबूतर ---
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एक कबूतर आता जाता
मेरा फ्लेट सातवीं मंजिल पर बिल्डिंग की,
फिर भी ऊपर उड़ कर आता,ना इतराता
वही सादगी और भोलापन
मटकाता रहता है गरदन
अपनी वही गुटरगूं  करना
सहम सहम धीरे से चलना
कभी कभी जब होता प्यासा,
रखे गेलरी में पानी से भरे पात्र में,
चोंच डूबा,कुछ घूंटे भर कर प्यास बुझाता
एक कबूतर आता जाता
एक दिन उसके साथ आई थी एक कबूतरी
सुन्दर सी मासूम ,जरा सी भूरी भूरी
उसकी नयी प्रेमिका थी वो,
ढूंढ रहे थे वो तन्हाई
बैठ गेलरी के कोने में चोंच लड़ाई
इधर उधर ताका और झाँका,
प्यार जताया एक दूजे से
और प्रणय क्रीडा में थे वो लीन हो गए
फिर दोनों ने पंख फैलाये,फुर्र हो गए
देखा कुछ दिन बाद साथ में कबूतरी के,
चोंचे भर भर तिनके लाता
शायद निज परिवार बसाने,नीड़ बनाता
एक कबूतर आता जाता

मादा मोहन बाहेती'घोटू'

सोने की चेन और चैन का सोना

सोने की चेन और चैन  का सोना
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बहुत शिकायत मुझसे तुमको,कि मै बड़ी देर सोता हूँ
होश नहीं रहता सपनो में,मै इतना गाफिल होता हूँ
चिंतामुक्त आदमी होता,नींद उसे आती आती है गहरी
इसीलिए मै सो जाता हूँ,भले रात हो या दोपहरी
सोना नींद चैन कि केवल,किस्मत वालों के नसीब में
तुम भी सोती नीद प्रेम से,भर खर्राटे बीच बीच में
नींद बड़ी गहरी आती है,जब कोई मेहनत कर थकता
पैसे वाला परेशान है,करवट लेता सिर्फ बदलता
सोना तो सचमुच सोना है,सबके मन को प्रिय लगता है
पर जिसके घर ज्यादा सोना,रातों रात सदा जगता है
त्रेता युग में कुम्भकरण जो रावण का भाई होता था
रामायण ये बतलाती है,वो छह छह महीने   सोता था
वो राक्षस था मगर देव भी,चार चार महीने सोते है
रहते प्रेमी दुखी इन दिनों,शादी ब्याह नहीं होते है
राक्षस,मानव,देव सभी को,होती है आदत सोने की
मुझे चैन   से सोने दो, ला दूंगा चेन तुम्हे सोने की
मुझे जगाती ही रहती हो,जब मै सपनो में खोता हूँ
नहीं शिकायत करना अब तुम,कि मै बहुत देर सोता हूँ

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Thursday, November 10, 2011

लोक- परलोक

लोक- परलोक
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हमारे एक धार्मिक प्रवृत्ति  के दोस्त ने समझाया
उम्र बढती जारही है,
और तुमने ना कोई पुण्य कमाया
थोडा दान धरम कर लो
थोड़ी कथा भागवत सुन लो
ये ही पुण्य बाद में काम आएगा
तुम्हे स्वर्ग दिलवाएगा
देखो आजकल लोगों की प्रवृत्ति में,
धार्मिकता कितनी बढ़ गयी है
मंदिरों और कथा भागवत में भीड़ उमड़  रही है
सबके सब जुटे है पुण्य कमाने में
सीधा स्वर्ग जाने में
मैंने कहा यार तुमको पता है
भीडभाड से मेरा मन डरता है
मंदिरों या सत्संगो की भीड़ से घबराता हूँ
इसीलिए ऐसे आयोजनों में नहीं जाता हूँ
और फिर इतनी सारी जनता,जो पुण्य कमा रही है,
सीधे स्वर्ग जायेगी
तो निश्चित ही स्वर्ग में भी भीड़ बढ़ जायेगी
शांति कहाँ मिल पाएगी
ऐसे स्वर्ग जाने से फायदा ही क्या है यार,
यहाँ भी झेलो भीड़ भाड़ और वहां भी भीड़ भाड़
अगर हम दिल के सच्चे है
तो ऐसे ही अच्छे है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'