मन बिरहन का
बरस बरस कर रीते मेघा,
उमर कट गयी बरस बरस कर
बरस बरस तक ,बहते बहते,
आंसू सूखे,बरस बरस कर
मन में लेकर,आस दरस की,
रह निहारी,कसक कसक कर
हमने साड़ी,उम्र गुजारी,
यूं ही अकेले, टसक टसक कर
गरज गरज ,छाये घन काले,
बहुत सताया ,घुमड़ घुमड़ कर
आई यादों की बरसातें,
आंसू निकले ,उमड़ उमड़ कर
नयन निगोड़े,आस न छोड़े,
रहे ताकते,डगर डगर पर
मेरे सपने,रहे न अपने,
टूट गए सब,बिखर बिखर कर
ना आना था,तुम ना आये,
रही अभागन,तरस तरस कर
बरस बरस कर,रीते मेघा,
उमर कट गयी,बरस बरस कर
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Friday, September 7, 2012
प्रकृति और मानव
प्रकृति और मानव
समंदर का खारा पानी,
प्रकृति के स्पर्श से,
सूरज की गर्मी पा,
बादल बन बरसता है
मीठा बन जाता है
सब को हर्षाता है
और वो ही शुद्ध जल,
पीता जब है मानव,
तो मानव का स्पर्श पा,
शुद्ध जल ,शुद्ध नहीं रह पाता
मल मूत्र बन कर के,
नालियों में बह जाता
प्रकृति के संपर्क से ,
बुरा भी बन जाता भला,
और मानव के संपर्क से,
भला भी जाता बिगड़ है
प्रकृति और मानव में,
ये ही तो अंतर है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
समंदर का खारा पानी,
प्रकृति के स्पर्श से,
सूरज की गर्मी पा,
बादल बन बरसता है
मीठा बन जाता है
सब को हर्षाता है
और वो ही शुद्ध जल,
पीता जब है मानव,
तो मानव का स्पर्श पा,
शुद्ध जल ,शुद्ध नहीं रह पाता
मल मूत्र बन कर के,
नालियों में बह जाता
प्रकृति के संपर्क से ,
बुरा भी बन जाता भला,
और मानव के संपर्क से,
भला भी जाता बिगड़ है
प्रकृति और मानव में,
ये ही तो अंतर है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Thursday, September 6, 2012
रुंगावन
रुंगावन
मै तो लेने गया था ,इस जग की जिम्मेदारियां ,
रुंगावन में बाँध दी संग,उसने कुछ खुशियाँ मुझे
कुछ ठहाके,कहकहे कुछ,और कुछ मुस्कान भी,
लगी फिर से अच्छी लगने, ये तेरी दुनिया मुझे
देता है सौदा खरा और नहीं डंडी मारता,
मुकद्दर से ही मिला है,तुझसा एक बनिया मुझे
कितने कांटे,कितने पत्थर और कितनी ठोकरें,
रोकने को राह ,रस्ते में मिला क्या क्या मुझे
यहाँ से लेकर वहां तक ,मुश्किलें ही मुश्किलें,
पार करना पडा था एक आग का दरिया मुझे
दूसरों के दोष मैंने देखना बंद करदिया,
नज़र खुद में ,लगी आने सैकड़ों ,कमियां मुझे
उसने रोशन राह करदी,सब अँधेरे मिट गए,
राह में मिल गयी बिखरी,हजारों खुशियाँ मुझे
लिखा था जो मुकद्दर में,उससे ज्यादा ही मिला,
उसकी मेहर हो गयी और मिल गया क्या क्या मुझे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
मै तो लेने गया था ,इस जग की जिम्मेदारियां ,
रुंगावन में बाँध दी संग,उसने कुछ खुशियाँ मुझे
कुछ ठहाके,कहकहे कुछ,और कुछ मुस्कान भी,
लगी फिर से अच्छी लगने, ये तेरी दुनिया मुझे
देता है सौदा खरा और नहीं डंडी मारता,
मुकद्दर से ही मिला है,तुझसा एक बनिया मुझे
कितने कांटे,कितने पत्थर और कितनी ठोकरें,
रोकने को राह ,रस्ते में मिला क्या क्या मुझे
यहाँ से लेकर वहां तक ,मुश्किलें ही मुश्किलें,
पार करना पडा था एक आग का दरिया मुझे
दूसरों के दोष मैंने देखना बंद करदिया,
नज़र खुद में ,लगी आने सैकड़ों ,कमियां मुझे
उसने रोशन राह करदी,सब अँधेरे मिट गए,
राह में मिल गयी बिखरी,हजारों खुशियाँ मुझे
लिखा था जो मुकद्दर में,उससे ज्यादा ही मिला,
उसकी मेहर हो गयी और मिल गया क्या क्या मुझे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
बाती और कपूर
बाती और कपूर
खुद को डूबा प्रेम के रस में,
तुम जलती हो बन कर बाती
जब तक स्नेह भरा दीपक में,
जी भर उजियाला फैलाती
और कपूर की डली बना मै,
जल कर करूं आरती ,अर्चन,
निज अस्तित्व मिटा देता मै,
मेरा होता पूर्ण समर्पण
तुम में ,मुझ में ,फर्क यही है,
तुमभी जलती,मै भी जलता
तुम रस पाकर फिर जल जाती,
और मै जल कर सिर्फ पिघलता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
खुद को डूबा प्रेम के रस में,
तुम जलती हो बन कर बाती
जब तक स्नेह भरा दीपक में,
जी भर उजियाला फैलाती
और कपूर की डली बना मै,
जल कर करूं आरती ,अर्चन,
निज अस्तित्व मिटा देता मै,
मेरा होता पूर्ण समर्पण
तुम में ,मुझ में ,फर्क यही है,
तुमभी जलती,मै भी जलता
तुम रस पाकर फिर जल जाती,
और मै जल कर सिर्फ पिघलता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Tuesday, September 4, 2012
चुनाव लड़ने की घोषणा
चुनाव लड़ने की घोषणा
भाइयों,दोस्तों और मेरे शुभ चिंतकों,
मै आपको अभी से सूचित कर रहा हूँ
कि मै आने वाला आम चुनाव लड़ रहो हूँ
सभी राजनेतिक पार्टियों से मेरा मोह भंग हो गया है
इनके झूंठे वादों,भ्रष्टाचार और मंहगाई से,
आम आदमी तंग हो गया है
इसलिए यदि आप साथ देंगे,
तो मै अकेले ही घोड़ी चढूँगा
और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडूंगा
ये सच है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है
पर अकेला जूता दुष्टों के सर फोड़ सकता है
इसलिए मैंने अपना चुनाव चिन्ह रखा है'जूता'
क्योंकि सब काम कराने का इसीमे है बूता
ये आपको काँटों से बचाता है
ठोकरों से भी बचाता है
और सही सलामत मंजिल तक पहुंचाता है
ये आम आदमी का दोस्त है,
बड़ा मददगार है
और दुश्मनों से लड़ने के लिए,
सबसे सुगम हथियार है
सत्तारूढ़ पार्टी से जब भी कोई काम कराना होगा
तो जाहिर है,मुझको जूता ही चलाना होगा
क्योंकि क्लिंटन हो या चिदंबरम,
जब जूता चल जाता है
तो खानेवाला और चलानेवाला,
बड़ी पब्लिसिटी पाता है
और आपका मुद्दा जनता के सामने आ जाता है
मुझे विश्वास है,आपका सब काम ,
करवाउंगा मै जूते के बूते
क्योंकि मै जानता हूँ कि अगर मै,
आपकी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा,
तो आप ही मुझे मारेंगे जूते
इसलिए कृपा करके अभी से नोट कीजिये
कि आने वाले चुनाव में जूते को ही बोट दीजिये
और दुआ कीजियेगा कि,
किसी भी पार्टी का बहुमत न आये
और कई दल मिलजुल कर सरकार बनाएं
और ऐसी सिचुवेशन में ,स्वतंत्र उम्मीदवार का,
महत्त्व तो आप जानते ही है
और आपके इस अदने से,जूतेवाले सेवक को,
तो आप पहचानते ही है
तोड़ जोड़ करके यदि बन गया मिनिस्टर
तो फिर आपकी सारी उम्मीद पर,
एकदम एसा खरा उतरूंगा
कि अपने चुनावक्षेत्र को,पोलिश कर,
एकदम जूते सा चमका दूंगा
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
भाइयों,दोस्तों और मेरे शुभ चिंतकों,
मै आपको अभी से सूचित कर रहा हूँ
कि मै आने वाला आम चुनाव लड़ रहो हूँ
सभी राजनेतिक पार्टियों से मेरा मोह भंग हो गया है
इनके झूंठे वादों,भ्रष्टाचार और मंहगाई से,
आम आदमी तंग हो गया है
इसलिए यदि आप साथ देंगे,
तो मै अकेले ही घोड़ी चढूँगा
और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडूंगा
ये सच है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है
पर अकेला जूता दुष्टों के सर फोड़ सकता है
इसलिए मैंने अपना चुनाव चिन्ह रखा है'जूता'
क्योंकि सब काम कराने का इसीमे है बूता
ये आपको काँटों से बचाता है
ठोकरों से भी बचाता है
और सही सलामत मंजिल तक पहुंचाता है
ये आम आदमी का दोस्त है,
बड़ा मददगार है
और दुश्मनों से लड़ने के लिए,
सबसे सुगम हथियार है
सत्तारूढ़ पार्टी से जब भी कोई काम कराना होगा
तो जाहिर है,मुझको जूता ही चलाना होगा
क्योंकि क्लिंटन हो या चिदंबरम,
जब जूता चल जाता है
तो खानेवाला और चलानेवाला,
बड़ी पब्लिसिटी पाता है
और आपका मुद्दा जनता के सामने आ जाता है
मुझे विश्वास है,आपका सब काम ,
करवाउंगा मै जूते के बूते
क्योंकि मै जानता हूँ कि अगर मै,
आपकी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा,
तो आप ही मुझे मारेंगे जूते
इसलिए कृपा करके अभी से नोट कीजिये
कि आने वाले चुनाव में जूते को ही बोट दीजिये
और दुआ कीजियेगा कि,
किसी भी पार्टी का बहुमत न आये
और कई दल मिलजुल कर सरकार बनाएं
और ऐसी सिचुवेशन में ,स्वतंत्र उम्मीदवार का,
महत्त्व तो आप जानते ही है
और आपके इस अदने से,जूतेवाले सेवक को,
तो आप पहचानते ही है
तोड़ जोड़ करके यदि बन गया मिनिस्टर
तो फिर आपकी सारी उम्मीद पर,
एकदम एसा खरा उतरूंगा
कि अपने चुनावक्षेत्र को,पोलिश कर,
एकदम जूते सा चमका दूंगा
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Monday, September 3, 2012
पति को पटाने के तीन नुस्खे
पति को पटाने के तीन नुस्खे
१
अगर आप चाहती है कि आपके पति,
आपमें अरुचि ना रखें,
तो आप गरिष्ठ भोजन में अरुचि रखें
ताकि आपका बदन छरहरा रहे
और यौवन हरा भरा रहे
अपने शरीर को फैलने का मौका मत दो
और अपने पति को ,इधर उधर,
झाँकने का मौका मत दो
मतलब साफ़ है,यदि पति को पटाना है
तो आपको अपना वजन घटाना है
२
भजन,पूजन,कीर्तन,सब है आवश्यक
लेकिन ये अच्छे है,बस एक सीमा तक
धार्मिक बनो पर धर्म कि पराकाष्ठा मत करो
और देवताओं के चक्कर में ,अपने पति को मत बिसरो
क्योंकि पति भी होता है,एक रूप परमेश्वर का
उसकी सेवा में ही भला है घर भर का
भजन कीर्तन में इतना समय मत लगाओ
कि अपने पति को ही समय ना दे पाओ
यदि आपको अपने पति का प्यार पाना है
तो भगवान के साथ साथ,पति के गुण भी गाना है
३
हमेशा मायके के गुण मत गाओ
और ससुरालवालों को बुरा मत बतलाओ
क्योंकि अब तुम्हारा घर,मायका नहीं,ससुराल है
और ससुराल वालों से मिला कर रखनी ताल है
पर सास,ननद और रिश्तेदारों की सेवा के चक्कर में
कई बार परेशानी भी हो जाती है घर में
इस चक्कर में खुद को इतना मत उलझादो
कि अपने प्यारे पतिदेव को ही भुलादो
अगर आपको प्यार का रस चखना है
तो अपने पति का पूरा पूरा ख्याल रखना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
१
अगर आप चाहती है कि आपके पति,
आपमें अरुचि ना रखें,
तो आप गरिष्ठ भोजन में अरुचि रखें
ताकि आपका बदन छरहरा रहे
और यौवन हरा भरा रहे
अपने शरीर को फैलने का मौका मत दो
और अपने पति को ,इधर उधर,
झाँकने का मौका मत दो
मतलब साफ़ है,यदि पति को पटाना है
तो आपको अपना वजन घटाना है
२
भजन,पूजन,कीर्तन,सब है आवश्यक
लेकिन ये अच्छे है,बस एक सीमा तक
धार्मिक बनो पर धर्म कि पराकाष्ठा मत करो
और देवताओं के चक्कर में ,अपने पति को मत बिसरो
क्योंकि पति भी होता है,एक रूप परमेश्वर का
उसकी सेवा में ही भला है घर भर का
भजन कीर्तन में इतना समय मत लगाओ
कि अपने पति को ही समय ना दे पाओ
यदि आपको अपने पति का प्यार पाना है
तो भगवान के साथ साथ,पति के गुण भी गाना है
३
हमेशा मायके के गुण मत गाओ
और ससुरालवालों को बुरा मत बतलाओ
क्योंकि अब तुम्हारा घर,मायका नहीं,ससुराल है
और ससुराल वालों से मिला कर रखनी ताल है
पर सास,ननद और रिश्तेदारों की सेवा के चक्कर में
कई बार परेशानी भी हो जाती है घर में
इस चक्कर में खुद को इतना मत उलझादो
कि अपने प्यारे पतिदेव को ही भुलादो
अगर आपको प्यार का रस चखना है
तो अपने पति का पूरा पूरा ख्याल रखना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
एक छोटी सी प्रार्थना
एक छोटी सी प्रार्थना
हे कमलनयन!
किसी कमल नयनी,सुकोमल,
सुमुखी सुंदरी के नयनों से,
मेरे नयन मिलवा दो
हे गिरिधारी!
अपने वक्श्थल पर,
द्वि गिरी धारण किये हुए,
यौवन से लदी,
किसी षोडसी कन्या से,
मेरा मिलन करवादो
हे चतुर्भुज!
किसी कोमल,कमनीय,
कमलनाल सी भुजाओं वाली,
कामिनी के करपाश में बंध कर,
मै भी चतुर्भुज हो जाऊं,एसा वर दो
हे हिरण्यमयी लक्ष्मी के नाथ,
किसी स्वर्णिम आभावाली,
स्वर्ण सुंदरी की स्वर्णिम मुस्कराहटों से,
मेरा जीवन भी स्वर्णिम कर दो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
हे कमलनयन!
किसी कमल नयनी,सुकोमल,
सुमुखी सुंदरी के नयनों से,
मेरे नयन मिलवा दो
हे गिरिधारी!
अपने वक्श्थल पर,
द्वि गिरी धारण किये हुए,
यौवन से लदी,
किसी षोडसी कन्या से,
मेरा मिलन करवादो
हे चतुर्भुज!
किसी कोमल,कमनीय,
कमलनाल सी भुजाओं वाली,
कामिनी के करपाश में बंध कर,
मै भी चतुर्भुज हो जाऊं,एसा वर दो
हे हिरण्यमयी लक्ष्मी के नाथ,
किसी स्वर्णिम आभावाली,
स्वर्ण सुंदरी की स्वर्णिम मुस्कराहटों से,
मेरा जीवन भी स्वर्णिम कर दो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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