Saturday, September 14, 2013

निशब्द

       निशब्द

जब सामनेवाले की बात का ,आपके पास ,न हो जबाब
या किसी अपने ख़ास से,बहुत दिनों बाद,मिले हो आप
मन में अचानक ही ,बहुत ज्यादा खुशी छा जाए
या किसी अनचाही घटना से ,आपको सदमा लग जाए
किसी सुन्दर ,अलोकिक ,प्रकृती की रचना को देख कर
या अपरिमित सौन्दर्य से लदी ,किसी ललना को देख कर
कोई अजूबा सा हो,आप सहम  कर,हो जाए भोंचक्के
या कोई सुमुखी सुन्दर महिला ,प्रेम का प्रस्ताव रखे
या फिर कोई आपके मुंह में ,पूरा लड्डू ही भर जाए
या  आपका मुख ,किसीके साथ,चुम्बन में लिप्त हो जाए
या फिर आपके मुख में भरा  हो ,तम्बाखू वाला  पान
या छाले ,दांत का दर्द या टोंसिल बढ़ कर करे परेशान
या आपको  मोटी  लाटरी खुलने का समाचार हो मिला  
या ज्यादा सर्दी जुकाम से बैठ गया हो आपका गला
जब ऐसी स्थिति आती या घटना घट  जाती है
कि अचानक ,आपकी सिट्टी पिट्टी गुम  हो जाती है
चाहते हुए भी आप कुछ भी नहीं बोल पाते है
तब,आप अवाक रह जाते,निशब्द हो जाते है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

मै गलत हूँ या सही ?

            मै गलत हूँ या सही ?

मै जानता हूँ ,
श्री गणेश जी को है ये आशीर्वाद
कि हर शुभ काम आरम्भ होता है,
उनके प्रथम पूजन के बाद
फिर भी ,मै जब भी पूजन करता हूँ
पहले शिवजी को चन्दन चढ़ाता हूँ,
फिर गणेशजी का वंदन करता हूँ
क्योकि मेरा मानना है ,
कि पिता प्रथम पूजनीय है ,होते है बड़े
और हर पिता  ये चाहता है,
कि उसका पुत्र ,उससे भी आगे बढे
तरक्की की सीढी चढ़े
उसके बेटे का उससे भी ऊंचा हो स्थान
इसीलिए शिवजी ने दिया होगा ,
गणेशजी को प्रथम पूजा का वरदान
ये उस पिता की महानता थी ,
और इसी महानता के कारण
मै शिव रूपी पिता का पहले करता हूँ पूजन  
इसलिए मै जानना चाहता हूँ यही
कोई मुझे बताये,मै गलत हूँ या सही ?

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, September 13, 2013

माँ की ममता

    माँ की ममता

ये ममता भी अजब चीज होती है
माँ,अपनी औलाद के लिए हरदम क्यों रोती है
औलाद ,लायक हो या नालायक
बूढी धुंधली आँखों से ,प्रतीक्षा करती रहती है,
वो जब तक ना आये,तब तक
वो बेटा ,जो अपने व्यसन के चक्कर में ,
ले गया था ,उसका मंगलसूत्र छीन कर
उसने कुछ खाया पीया या भूखा होगा ,
इसी चिंता में खोयी रहती है हरपल
उसकी सुख शान्ति की दुआ करती है
रोज जीती है,रोज मरती है
वो बेटा ,जो उसके पति की अंतिम निशानी ,
उसकी चूड़ी,जिस पर सोने का पतरा जडा  था
जिसके लिए वो बहुत दिनों से पीछे पडा था
एक दिन मारपीट कर के छीन ले गया था
और घर को छोड़ कर भाग गया था
वो बेटा ,जिसकी हर हरकत में हैवानी है
जिस का खून हो गया पानी है
उसकी याद में आंसू बहाती है
उसके  लौटने की दुआ मनाती है
इसलिए जब खाना बनाती है
ये सोच कर कि वो कहीं अचानक ,
लौट कर ना आ जाए ,
उसके लिए दो रोटी बचाती है
उसकी याद में दिनरात रोती  है
ये ममता भी अजब चीज होती है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

स्कर्ट अवतरण

         {आज राधा अष्ठमी है -राधाजी के और आज के
          फेशन से जुडी एक कल्पना प्रस्तुत है }
                       स्कर्ट अवतरण

          राधारानी भोलीभाली
          बरसाना की रहने वाली
         और दूसरी और कन्हैया
          नटखट थे अति चोर कन्हैया
          फोड़ी हंडिया ,माखन खाते
          चीर हरण करते,छुप जाते
           सब गोपी डरती थी उनसे
           मगर प्यार करती थी उनसे 
          चली होड़ उनमे आपस में
          कौन करे कान्हा को बस में    
           मगर किसी को लिफ्ट नहीं दी
           कान्हा की आदत अजीब थी
           राधाजी का हुआ बर्थडे
           पहने नए नए सब कपडे
           रंगबिरंगी चुनरी अंगिया 
           ऊंची ऊंची पहन घघरिया
           सहम सहम कर धीरे धीरे
            चली खेलने ,जमुना तीरे
             नहां रही  जमुना में सखियाँ
            मगर पडी कान्हा पर अँखियाँ
           बस फिर तो घबराई  राधा
            चीर हरण का डर  था ज्यादा
            नए वस्त्र का ख्याल छोड़ कर
            जमुना में घुस गयी दौड़ कर
            ऊंची घघरी  नयी नयी थी
             'सेन्फ्राइज्ड' की छाप नहीं थी
             जल से बाहर निकली रधिया
              सिकुड़ गयी थी नयी घघरिया
              घुटनों तक ऊंची चढ़  आयी
              पर कान्हा मन इतनी भायी
              कि राधा पर रीझ गए वो
              और प्रेम रस भीज गए वो
              उन दोनों का प्यार छुपा ना
              राज गोपियों ने जब जाना
              शुरू हो गया कम्पीटीशन
              ऊंची घघरी वाला फेशन
              फैला ,अपरम्पार हो गया
              और स्कर्ट  अवतार हो गया   
 
 मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, September 12, 2013

अखिंया ,चंचल शोख बड़ी

              घोटू के पद
अखिंया ,चंचल शोख बड़ी
बेसुध,बेकल दीवानी है,साजन संग लड़ी
देखा करती पिया मिलन के ,सपने घडी घडी
कभी हवा का झोंका बन कर ,आँचल को लहराती
तितली सी जाती उड़ उड़ कर ,आसपास मंडराती
कभी भ्रमर सी गुंजन करती ,चुम्बन कर रस पीती
मधु मख्खी सी,मधु संचित कर ,मिलन आस में जीती
घर और द्वारे,राह निहारे .पिय  की  खड़ी खड़ी
देखा करती ,मधुर  मिलन के,सपने घड़ी घड़ी
अँखियाँ ,चंचल ,शोख  बड़ी

घोटू 

क्रीम ही क्रीम

    क्रीम ही क्रीम

आजकल जिधर देखो ,उधर ही क्रीम है
क्रीम सबसे बढ़ कर सुप्रीम है
दूध को तेजी से मथने पर ,
एक लेयर ऊपर आती है
जो बजन में हल्की होती है ,
क्रीम कहलाती है
हमारे देश में भी एक लेयर ,
जो रहती है सबसे ऊपर ,
क्रीमीलेयर  कहलाती है
उसकी मानसिकता भी अक्सर ,
हल्की ही पायी जाती है
मिनिस्टरी में कुछ क्रीमी पोर्टफोलियो होते है
ऑफिस में कुछ क्रीमी पोस्टिंग होती है
जहाँ पर क्रीम ही क्रीम है और मिलते मोती है
आजकल क्रीम खूब  लगाई भी जाती है
 और चाव से  खायी भी जाती है
इस श्रेणी में ,फ्रूट क्रीम है ,आइसक्रीम है
केक हो या पेस्ट्री ,क्रीम ही क्रीम है
क्रीम खाने का स्वाद बढ़ा  देती है
काली दाल को ,माखनी दाल बना देती है
क्रीम,पूरा करती है आपकी सुन्दरता का ड्रीम
बस चेहरे पर लगालो ,व्हाइटनिग  क्रीम
बालों को रंगने के लिए क्रीम है ,
तो ब्लीच करने के लिए भी क्रीम
बालों को सजाने को बिलक्रीम है ,
तो हटाने को हेयर रिमूविंग क्रीम 
क्रीम काले रंग को गोरा बना देता है
गालों पर गुलाबी रंगत ला देता  है
 आपके होंठों पर मुलामियत लाता है
आपके रूप को कमल सा खिलाता है
सीने के उभार के लिए क्रीम है
देर तक प्यार के लिए क्रीम है
आपको मोटापा बढ़ाना है,क्रीम खाइए
आपको मोटापा घटाना है ,क्रीम लगाइए
विवाई फटे तो क्रीम
चोंट लगे तो क्रीम
सर या बदन में दर्द हो तो क्रीम
मौसम ज्यादा सर्द हो  तो क्रीम
शेविंग करने के लिए ,शेविंग क्रीम
दांतों की सफाई के लिए ,डेंटल क्रीम
एंटी रिंकल क्रीम लगा कर ,चेहरे की झुर्री हटाइए
ताजगी और सुन्दरता के लिए,
ब्यूटीक्रीम मिले हुए साबुन से नहाइए
तन के दागों को मिटाने के 'नो मार्क 'क्रीम आता है
चेहरे पर मोती सी चमक या स्वर्णिम आभा के लिए ,
भी स्पेशियल क्रीम लगाया जाता है
कहीं क्रीम में नीम है ,कहीं हर्बल क्रीम है
कहीं बोरोप्लस है,कहीं बोरोलीन है
हर जगह,हर जरुरत के लिए ,क्रीम ही क्रीम है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'



 

सत्संगी दोहे

    सत्संगी दोहे
           १ 
स्वर्णपात्र में उबाला ,आओ पीयो दुग्ध
फिर हमतुम सत्संग करें,तनमन दोनों शुद्ध
               २
खाकर गोंद पलाश का,आता ऐसा  जोश
लगे दहाड़े मारने ,शेर बने  खरगोश
                ३
लाज शरम सब छोड़ दो ,अब इसका क्या काम
तुम कोमल खिलती कली ,मै हूँ  आसाराम

घोटू