Thursday, October 3, 2013

समझोता या समर्पण

          समझोता या समर्पण

समझे थे सिंह दहाड़ेंगा ,रह गया मगर म्याऊं कर के
हो रिंग मास्टर से जलील,फिर भी उसकी'हाँ'हूँ'कर के
शायद उसकी मजबूरी थी ,या फिर था प्रेम पिंजरे से ,
या फिर वो उसको फंसा न दे,बोला'मै क्यों जांऊ',डर के

घोटू 

Wednesday, October 2, 2013

कायापलट

        कायापलट

 आपने मुझको है ये क्या  कर दिया
गेंहूं था मै ,पीस   आटा  कर दिया
इस तरह ,कायापलट ,मेरी  करी ,
घी लगा ,सेका ,परांठा  कर दिया
बांह में एसा समेटा ,आपने ,
समोसे में जैसे  आलू भर दिया
प्यार में अपने डुबाया इस तरह,
रस से रसगुल्ला बना कर भर दिया
मै सडा ,मैदा पड़ा ,उफना हुआ,
टेडा मेडा आपने  जब तल दिया
डुबा कर के चाशनी में प्यार में,
 रस भरे प्यारी जलेबी कर दिया
मै तो सूखी घास का तृण मात्र था,
आपने था प्यार से जब चर लिया
अपने तन में इस तरह से समाया,
दूध सा प्यारा ,सुहाना  कर दिया
गर्ज ये है  ,जो भी था मै ,आपने,
मुझको अपने मन मुताबिक़  गढ़ लिया
काबिले तारीफ़ हरेक अंदाज से,
स्वाद ले लेकर मज़ा पूरा लिया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

गांधी जयन्ती पर

       गांधी जयन्ती पर
                    १
   गांधीजी ,रह गए ,
   फोटो बन,टंग कर
   या फिर है दिल्ली में,
   वे दस जनपथ पर
                   २
   नाम पर सड़कें है,
   मौन सी  पड़ी
   चलती ही रहती है,
    गड्ढों  से  भरी
                ३
     गांधी के नाम की,
     आज भी है आंधी
      बड़े बड़े नोटों पर,
       गांधी  ही गांधी  
 
घोटू

Tuesday, October 1, 2013

वरदान पर प्रतिबन्ध

         वरदान पर प्रतिबन्ध

प्राचीन काल में जब भी कोई भगवान
होता था किसी पर मेहरबान
दे  दिया करता था उसको वरदान
और उनकी इस कमजोरी का ,
राक्षस बड़ा फायदा उठाते थे
थोड़े दिन तपस्या करके ,मख्खन लगाते थे
और उनको प्रसन्न कर ,मांग लेते थे एसा वर
जो कर देता था,दाता का जीना दुर्भर
जैसे कि भोले भंडारी शंकर भगवान
ने दे दिया था भस्मासुर को वरदान
कि वो जिसके सर पर हाथ रखेगा ,
वो भस्म हो जाएगा
उन्हें क्या पता था कि वो राक्षस ,
उन्ही के सर पर हाथ उठाएगा
वो तो भला हो विष्णु जी का ,
जिन्होंने रूपसी नारी का रूप धर लिया
और उस पर मुग्ध होकर ,
भस्मासुर ने अपने ही सर पर हाथ रख लिया
और खुद हो गया भस्म
वरना त्रिदेव में से एक देव हो जाता कम
महिषासुर,रावण या अन्य असुर ,
भगवान की इस कमजोरी का फायदा उठाते थे
और जिनसे वरदान पाते थे,
उन्ही के सर पर चढ़ जाते थे
हिरनकश्यप ने ,तप कर,प्रभु को प्रसन्न किया
और अपने लिए ,एक 'टेलर मेड ',फूलप्रूफ'
वरदान मांग लिया
जिसे पाकर उसका अत्याचार इतना बढ़ा
कि भगवान को ,उसके संहार के लिए ,
नरसिंह का अवतार लेकर आना पड़ा
द्रौपदी ने भगवान से,
पांच गुण वाले पति का माँगा था वरदान
पर जब नहीं मिला एसा कोई इंसान
तो भगवान ने अपना वरदान पूरा करने के लिए
उसे अलग अलग गुणवाले ,पांच पति दे दिए
कुंती को मिला था वरदान
कि   वो करेगी जिसका ध्यान
वो सामने प्रकट हो जाएगा
और उसे पुत्रवती बनाएगा
गर नहीं होता उसके पास ये वरदान मनोरथ का
तो न पांडव होते ,न कर्ण ,
और न युद्ध होता महाभारत का
तो इसतरह अपने वरदानो का दुरूपयोग ,
और प्रतिफल देख कर
तीनो देवताओं ने आपस में मिल कर
एक ये जरूरी फैसला लिया है
कि आजकल ,वरदान देने पर ,प्रतिबन्ध लगा दिया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मच्छरों का प्रतिशोध

          मच्छरों का प्रतिशोध

मच्छर ,भगवान  के पास,
लेकर गए एक डेपुटेशन 
और दिया ये  रिप्रेजेंटेशन
कि प्रभो !जैसे आपने बनाया है इंसान ,
वैसे ही हम भी है आपके क्रियेशन
पर आपने हमें इतना कमजोर क्यों बनाया है
ये कैसा जुलम ढाया है
 आदमी जब  चाहे  हमें मसलता है
हमारा कोई बस नहीं चलता है
कभी 'कछुवा' जलाता है ,कभी 'हिट 'छिड़कता है
हमें मिटाने की हर कोशिश करता है
यदि ऐसे ही चलता रहा हमारा कतल
तो ख़तम ही हो जायेगी हमारी नसल
हे प्रभु ,हम भी क्रियेशन है आपके
हमें ऐसी शक्ति दो ,कि हम इंसान से,
अपने खून का बदला ले सकें
भगवान ने उनकी बात ध्यान किया
और उनको,एक नयी शक्ति  का वरदान दिया
एक लीडर मच्छर को बोला ,
आज से तुम मलेरिया के मच्छर कहलाओगे
वो इंसान,बिमारी से होगा परेशान ,
जिसे तुम अपना डंक चुभाओगे
दूसरे मच्छर से बोला ,तुम होगे और भी ताक़तवर
तुम कहलाओगे ,'डेंगू' के मच्छर
तीसरे  मच्छर से बोला ,जो तेरा चुम्बन पायेगा
उसे 'चिकनगुनिया' हो जाएगा
इन सभी बीमारियों से इंसान  काफी क्षति पायेगा
और तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हो जाएगा
भगवान के मच्छरो के दिए वरदान का ,
नतीजा आज इंसान झेल रहा है
हर तरफ ,मलेरिया,डेंगू और
 चिकनगुनिया फैल रहा है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, September 30, 2013

पुनर्मिलन

      पुनर्मिलन

निवेदन तुमसे प्रणय का
भाव था मेरे ह्रदय का
प्रकट जो मैंने किया था
झटक बस तुमने दिया था
और फिर रह अनमने से
गर्व से थे पर तुम सने से
आपने ये क्या किया था
निवेदन ठुकरा दिया था
अगर तुम जो ध्यान देते
बात मेरी मान लेते
प्रीत की बगिया महकती
जिंदगानी थी चहकती
पर नहीं एसा हुआ कुछ
चाह  थी,वैसा हुआ  कुछ
आपने दिल तोड़ डाला
मुझे  तनहा छोड़ डाला
आज हम और तुम अकेले
कब तलक तन्हाई झेले
आओ फिर से जाए हम मिल
दूर होगी सभी मुश्किल
लगे ये जीवन चहकने
प्यार की बगिया महकने
देर पर दुरुस्त  आये
फिर से जीवन मुस्कराये

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

फेंकू

         फेंकू

दिल्ली में शेर दहाड़ा
तो सत्तारुढो ने  ताड़ा
मोदी आया पोस्टर फाड़
देगा सबको फेंक ,उखाड़
इसीलिए पोस्टर लगवाया
आया आया ,फेंकू  आया

घोटू