Sunday, October 20, 2013

ब्रह्मज्ञानी

               ब्रह्मज्ञानी

मै ब्रह्मज्ञानी हूँ
मै जानता हूँ कि विधाता ने ,
ये सारा ब्रह्माण्ड बनाया है
नर और मादा के मिलन से ही,
इस संसार में जीवन आया है
प्रभु की बनायी हुई इस धरती पर ,
करके थोडा बहुत अतिक्रमण
अगर मैंने बना लिए ,अपने आश्रम
तो ये सब ब्रह्मज्ञान फैलाने के लिए है
भक्तों को ,मिलन की महत्ता बतलाने के लिए है
यहाँ ,मेरी भक्तिने और भक्तगण
अपना सबकुछ कर देते है मुझे समर्पण
मै ,इस युग में,कृष्ण बन कर
 द्वापर  युग से प्रेम की प्यासी ,
गोपियों की प्यास बुझाता हूँ
उनके संग ,जल क्रीडा कर,चीरहरण करता हूँ,
और फिर रास रचाता हूँ
सच तो ये है ,कि सम्भोग ही सच्ची समाधि है
तो अपनी भक्तिनो संग ,एकान्त कुटी में,
ब्रह्मज्ञान में लीन होने पर ,
दुनिया  क्यों कहती मुझको अपराधी है
भागवत में लिखी है ये बात साफ़
स्वर्ण में रहता है कलयुग का वास
इसलिए मै स्वर्ण को भस्म कर देता हूँ,
और स्वर्ण भस्म को ,उदरस्त कर लेता हूँ
कितने ही लोगों को कलियुग के अभिशाप से बचाता हूँ
देर तक प्रेम में लीन होने का पाठ पढाता हूँ
एक ऋषि विश्वामित्र होते थे ,वो भी ब्रह्मज्ञानी थे
एक अप्सरा मेनका को देख ,हुए पानी पानी थे
भूल गए थे सब तप ,छाई थी ऐसी मस्ती
मेरे आश्रम में तो ,सैंकड़ों मेनकाएँ है ,
जब विश्वामित्र पिघल गए ,तो मेरी क्या हस्ती
मेरी एकांत कुटी में मेनकाओं के संग,
प्रेम और ब्रह्मज्ञान का दीपक रोज जलता है
दुनिया भले ही कुछ भी बोले ,
पर ब्रह्मज्ञानी को ,कोई भी पाप नहीं लगता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, October 18, 2013

इश्क की हकीकत

         इश्क की हकीकत

अकेले में प्यार का इजहार जब हमने किया ,
हाथ मेरा ,उनने पकड़ा ,और सहलाने लगे
देख ये रिस्पोंस उनका ,बढ़ा अपना हौसला ,
धीरे धीरे और भी नजदीक हम जाने लगे
उनने   झटका हाथ,झिड़का ,और पीछे हट गए ,
बोले अपनी रहो हद में,पास क्यों आने लगे
इससे ज्यादा तुम न हरकत करो और आगे बढ़ो,
इसलिए था हाथ पकड़ा ,हम को बतलाने लगे

घोटू

विज्ञापन और हकीकत

         विज्ञापन और हकीकत

एक लड़के ने ,एक लड़की को पटाया
फिर और आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाया
लड़की ने मना किया ,आने न दिया पास
तो लड़का बोला होकर के बड़ा उदास
'क्या तुमने घडी डिटर्जेंट का विज्ञापन नहीं देखा,
'पहले इस्तेमाल करो,फिर करो विश्वास '
लड़की ने नाराज़ होकर
दो सेंडिल मारे उस के सर पर
और बोली 'उसी विज्ञापन की दो और लाइने है प्यारी
'सब से भारी ,घडी हमारी '

घोटू

सपना

          सपना

सारी  टी वी  चेनलों ,पर दो ख़बरें आम
एक सोने का खजाना ,दूजे   आसाराम
दूजे आसाराम ,खबर बाकी सब हल्की
मोदी और राहुल की ख़बरें बस  दो पल की
ये दोनों भी देख रहे सत्ता का सपना
'घोटू' ,इन सब पर भारी ,साधू का सपना

घोटू

Thursday, October 17, 2013

मै तो हूँ इन्द्रधनुष

       मै तो हूँ इन्द्रधनुष

 पराये जल के कण ,
पराई सूर्यकिरण
पराया नीलगगन 
फिर भी मै जाता तन
सतरंगी आभा में ,
इन्द्रधनुष जैसा बन
दिखने में सुन्दर हूँ,
लगता हूँ मनभावन
ना काया ,कोई तन
आँखों का केवल भ्रम
होता बस कुछ पल का ,
ही मेरा वो जीवन
आपस में फिर मिलते ,
सब के सब सात रंग
मै पाता  मूल रूप ,
बन शाश्वत श्वेत रंग
जीवन के इस क्रम में ,
यूं ही बस रहता खुश
मै  तो हूँ  इन्द्रधनुष

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Wednesday, October 16, 2013

मेरा पता -फ्लैट नंबर 7 0 1

    मेरा पता -फ्लैट नंबर 7 0 1

सप्त ऋषि है ,सप्त सागर ,सात ही  महाद्वीप है ,
                           और एक सप्ताह में बस सात होते वार है
सात है हम वचन देते,सात फेरे काटते ,
                           तभी जा सम्पूर्ण होता,विवाह का संस्कार है
सात जन्मो का है बंधन ,बंधता पत्नी पति में,
                           एक दूजे प्रति समर्पण ,होता सच्चा प्यार है
सात स्वर संगीत के है ,सात ही बस लोक है ,
                             सातवीं मंजिल पे बसता ,'घोटू'का परिवार है

घोटू 

मोटापे का इलाज

    मोटापे का इलाज

मोटापे से परेशान ,
एक पत्नी ने लगाई गुहार
माय डीयर पतिदेव ,
अगर करते हो मुझसे सच्चा प्यार
तो करो कुछ एसा जतन
कि कम हो जाय मेरा वजन
पति जी बोले डीयर ,
तुम हो इतनी प्यारी और सुन्दर
पर मुश्किल ये है हमारी
तुम पड़ती हो मुझ पर भारी
तुमसे कितना प्यार है ,क्या बतलाऊं
जी करता है तुम्हे चाँद पर ले जाऊं
वहां पर तुम्हारा वजन ,छह गुना घट जाएगा
मून पर हमतुम ,हनीमून मनाएंगे ,
कितना मज़ा आयेगा
'मून पर हनीमून मनाने कि बात सुन ,
पत्नी जी खुश हुई ,पर फिर बोली पलट कर
पर डीयर ,तुम्हारा भी बजन तो ,
कम हो जाएगा ,चाँद  पर जाकर
पतीजी बोले ,कोई परवाह नहीं ,
मै तुमसे इतना प्यार करता हूँ ,जाने मन
तुम्हारी इच्छा पूरी करने के लिए ,
क्या कुर्बान नहीं कर सकता ,अपना बजन  

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'