Tuesday, December 31, 2013

नमस्कार


         नमस्कार

आगे पीछे 'नर'है जिसके ,और बीच में 'मस्का'है
नमस्कार की परिभाषा ये सबसे अच्छा चस्का है
दोनों हाथ जोड़ कर उनको ,सिर्फ यही बतलाना है,
अजी आप इन हाथों में ,सब काम हमारे बस का है

घोटू

मख्खन महिमा

             मख्खन महिमा

      नज़रें मत इधर उधर मारो
      यूं ही मत अपना  सर  मारो
       कुछ काम नहीं,ना झक मारो  
      या बैठे बैठे  गप्प मारो
       यदि जीवन सफल बनाना है
       कुछ लेना है ,कुछ पाना है
तो मेरी नेक सलाह सुनो,मुझ पर विश्वास करो यारों
यदि कुछ करके दिखलाना तो ,मख्खन मारो!मख्खन मारो!

है बड़े तपस्वी,सिद्ध,महान ,महिमा है मख्खन  भैया की
सारी गोपी दीवानी थी ,उस मख्खन मार कन्हैया की
जिस को मख्खनबाजी आती ,वो निज मंजिल को पायेगा
पंडितजी को मख्खन मारो तो स्वर्ग तुम्हे मिल जाएगा
गर 'बटरिंग'करना आता है और 'बटर 'तुम्हारा 'प्योर'है
प्रोफ़ेसर पर अप्लाय करो,तो फर्स्ट डिवीजन 'श्योर '  है
पत्नी  को जो मख्खन मारो,पकवान मिलेंगे खाने को
सम्पादक को मख्खन मारो,अपनी कविता छपवाने को
चाहे चमचा बन कर मारो,चाहे कड़छा बन कर मारो
यदि कुछ करके दिखलाना तो,मख्खन मारो!मख्खन मारो!

मख्खनबाजी सीखो साथी यदि जीवन में कुछ करना है
यदि बातें करना आती है तो मुख सोने का झरना है
मख्खन का रिश्ता है धन से,जलती जीवन की ज्योती है
मख्खन के पीछे खन,खन है ,खन खन रुपयों से होती है
जब जमा दूध हम मथते है तो उससे मख्खन आता है
और जब हम मख्खन मलते है ,तो फिर उससे धन आता है
जितना ज्यादा होगा मख्खन,उतनी ज्यादा होगी खन खन
जितनी ज्यादा होगी खन खन ,उतना अच्छा होगा जीवन
मैं झूंठ नहीं सच कहता हूँ,मुझ पर विश्वास करो यारों
यदि कुछ करके दिखलाना तो ,मख्खन मारो!मख्खन मारो!

अंगरेजी भाषा में मख्खन को 'बटर 'पुकारा जाता है
लगता है 'बटर' और 'बेटर ',इन शब्दों में कुछ नाता है
यदि 'बेटर 'बनना है तुमको ,तो 'बटर' काम में लाओ तुम
'बटरिंग'का असर निराला है,अपने सब काम बनाओ तुम  
मख्खन लगने से चेहरे पर ,कुछ ऐसी रौनक आती है
ऐसा चिकनापन छाता है, रंगत ही बदली जाती है
जैसे मख्खी याने कि'फ्लाय 'पर अगर 'बटर 'लग जाती है
तो 'बटर फ्लाय' हो जाती है,याने तितली बन जाती है
तो छोडो सारी खटर पटर ,अब 'बटर 'काम मे लो प्यारों
यदि कुछ करके दिखलाना तो,मख्खन मारो!मख्खन मारो!

यह बात सत्य है एक बार ,जिसको मस्खा लग जाता है
तो फिर मख्खन लगवाने का ,उसको चस्का लग जाता है
ये सेक्रेटरी या फिर पी ऐ ,कुछ लोग किसलिए रखते है
मख्खन की आदत होती है,ये उनसे मख्खन चखते है
'यस सर'यस सर'या जी हज़ूर 'का टॉनिक पिया करते है
जो मख्खन चिपका रह जाता ,खा चमचे जिया करते है
कितने ही लोग पनपते है ,यूं हंसी खुशी चमचे बन के
आजादी के बाद हो गए ,भाव दस गुने  मख्खन के
बढ़ रही खूब मख्खन बाजी ,स्पष्ट बात ये है प्यारों
यदि कुछ करके दिखलाना तो,'मख्खन मारो!मख्खन मारो!

यदि तुमने  मख्खन ना  मारा ,तो समझो जीवन फीका है
पर याद रखो कि मख्खन बाजी का भी एक तरीका  है
साहब को यदि खुश करना है ,खिदमत में उनके साथ रहो
यदि वो जो दिन को रात कहे तो तुम भी दिन को रात कहो
साहब को फिर सलाम करना,पहले टॉमी को सहलाओ
उनके घर के सब काम करो,बीबी बच्चों को टहलाओ
बस साहब खुश हो जायेंगे ,तो समझो फिर  बलिहारी है
शीघ्र प्रमोशन होने की ,पहली रिकमंड तुम्हारी है
सारे रस्ते खुल जायेंगे ,मत प्यारे तुम हिम्मत हारो
यदि कुछ करके दिखलाना तो मख्खन मारो!मख्खन मारो!

पहले दूध दही की नदियां बहती थी ,अब क्या कम है
अब दूध दही सबका मंथन,केवल मख्खन ही मख्खन है
दुनिया के चप्पे चप्पे में ,मख्खन की महिमा मोटी है
मख्खन मारा तो स्वाद अधिक ,हो जाती प्यारे रोटी है
मख्खन के चिकनेपन पर तो ,हर चीज फिसलने लगती है
बन जाते है सब काम,दाल तुम्हारी गलने लगती  है
तुम चमक जाओगे दुनिया में,यदि नित मख्खन की मालिश हो
सब काम सिद्ध हो जायेंगे,यदि मख्खन ,शुद्ध ,निखालिस हो
मैंने आजमा कर देखा है,मुझ पर विश्वास करो यारों
यदि कुछ करके दिखलाना तो,मख्खन मारो!मख्खन मारो!

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

२०१४ का चौहदवीं का चाँद

         २०१४ का चौहदवीं का चाँद
                         १

हमने पत्नी से कहा ,आया है नव वर्ष
बहुत बढ़ी मंहगाई है ,खाली मेरा  पर्स 
खाली मेरा पर्स ,तरस तुम इस पर खाओ
बंद करो फरमाइश ,ये लाओ ,वो लाओ
सन 'तेरह 'में ,तेरा तुझको किया समर्पित
अब जो मेरा ,वो तेरा  यदि  रखा  सुरक्षित
                           २ 
पत्नी बोली बदलते बरस, न बदले आप
तेरह बीता ,अब चलें ,हम चौदह के साथ
हम चौदह के साथ ,पुराणों की ये गाथा
निकले चौदह रत्न ,उदधि जब गया मथा था
मुझे दिलाना ,चौदह रत्नो वाला गहना
चाँद चौहदवीं का तुम मुझको हरदम कहना

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

A VERY VERY HAPPY NEW YEAR TO YOU AND YOUR FAMILY

Monday, December 30, 2013

वादा -चाँद तारे तोड़ने का

        वादा -चाँद तारे तोड़ने का

बीबी बोली ,भरते थे दम ,मेरी चाहत के लिए,
आस्मां से चाँद तारे ,तोड़ कर ले आओगे
बड़ी बातें बनाते थे ,दिखाते थे हेकड़ी ,
मांग मेरी ,सितारों से भरोगे ,चमकाओगे
और अब मैं मांगूं कुछ तो,टालते हर मांग को,
और एक अखरोट तक भी,नहीं तुमसे टूटता
हमने बोला ,हमने जबसे ,शादी की है आपसे,
चाँद तारों की कवायत से न पीछा छूटता
शादी की थी ,तब भी तुमसे ,सात थे वादे किये,
निभाने को जिनके चक्कर में गुजारी ,जिंदगी
आदमी फंस जाता है जब ,गृहस्थी के जाल में,
बैल कोल्हू की तरह ,कटती बिचारी   जिंदगी
फंसता है वो ,चिंताओं के जाल में कुछ इसतरह ,
बाल उड़ते और सर पर, चाँद है आता उतर
इतनी बढ़ती जा रही है,आपकी फरमाइशें ,
आँखों आगे ,दिन में आने लगते है तारे नज़र

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, December 28, 2013

डाट का ठाठ

        डाट  का ठाठ

एटम के युग में तलवार नहीं चल सकती
लेकिन कमजोरों की दाल नहीं गल सकती
हमें नहीं तलवार ,छुरी ,कुछ और चाहिए
वह है केवल ,इस जुबान में, जोर चाहिए
जोर कि इतना जोर ,ज़माना हिम्मत हारे
अरे और तो और ,काँप जाए दीवारें
जग में आगे बढ़ने की तकनीक यही है
कमजोरों को ,डट कर डाटो ,ठीक यही है
अफसर आगे पर भीगी बिल्ली बन जाओ
मीठी बातें करो ,पोल्सन खूब लगाओ
जो समाज में तुम्हे बड़ा कहलाना है तो
मेरी मानो बात , दोस्तों अब भी    चेतो
चालू करो जुबान,मुंह से डाट हटाओ
बात बात पर सबको डट कर डाट लगाओ
ये दुनिया दब्बू है ,और दबा दो ,थोडा
पिचकेगी ,यदि तीर डाट का तुमने छोड़ा
एक डपट की लपट ,कपट को सपट करेगी
झंझट की सारी बातें ,झटपट  सुलझेगी
डबल बना देगी तुम्हारे ठाठ बाट  को
देवी समझो,डेली पूजो ,आप डाट को
करो डाट की सेवा ,डिप्टी बन जाओगे
रिश्वत के भी ,फिफ्टी फिफ्टी बन जाओगे
प्रोफ़ेसर हो ,तो शिष्यों पर,धोंस  पड़ेगी
ओफिसर हो ,तो तुम्हारी  पोस्ट बढ़ेगी
अगर पति हो तो पत्नी का प्यार मिलेगा
और ससुर के घर हो तो सत्कार मिलेगा
इसीलिये कहता हूँ सबको डट कर डाटो
लगे मार से डर तो पीछे हट कर   डाटो  
मगर डाटना ,एक मात्र कर्तव्य आपका
ये प्यार आदर्श निराला ,भव्य आपका
जैसे डाट लगा देते हैं ,हम बोतल पर
अंदर वाली चीज नहीं आ सकती बाहर
ठीक उस तरह डाट लगा लोगों के मुंह पर
हो निश्चिन्त,तान खूंटी ,सोवो जीवन भर
ऐसा डाटो ,कि बेचारा  चूं  न कर सके
ब्यूटी तब है,मरना चाहे,पर न मर सके
सुने आपकी डाट उसे आ जाए पसीना
रौब नहीं तो फिर दुनिया में कैसा जीना
डाट नहीं ,मिस्टर ये जादू का डंडा है
गरम बनो खुद ,तो ऊपर वाला ठंडा है
सुनो साथियों,यदि बच्चों के बाप है
उसे प्यार जतलाते तो कर रहे पाप है
क्योंकि उम्र भर ,उसे प्यार ना,डाट मिलेगी
और प्यार की आदत उसको आफत देगी
बना जूनियर ,ढीठपना ही काम करेगा
और सीनियर बनने पर वह डाट सकेगा
इसीलिये तुम उसे अभी से ठीक बनादो 
डट कर डाटो ,डाट डाट कर,ढीठ  बनादो
मुंह पर डाटो ,भले उसे तुम चाहो ,जी से
सुनो,डाटना चालू कर दो,आज ,अभी से  

ताबीज -गंडा

          ताबीज -गंडा
    (एक नुस्खा- सड़क छाप )

भाइयों और दोस्तों,ठहरो ज़रा ,बस मिनिट भर
मैं   न कोई वैद्य हूँ,ना हकीम ,ना ही डॉक्टर
आप जैसा बनाया ,भगवान का ,मैं  आदमी
हाथ थे ,दो पैर लेकिन एक थी मुझमे कमी
क्या बताऊँ ,दोस्तों ! मैं इश्क़ का बीमार था
लाख की  कोशिश भले ही,मैं मगर लाचार था
वैसे था शादीशुदा मैं , किन्तु फिर भी रोग था
मइके में पढ़ती थी बीबीजी ,उन्हें ये शौक था
हिज्र में हालत ये बिगड़ी ,हड्डी हड्डी मांस ना
जिंदगी क्या जिंदगी है ,जब तलक रोमांस ना
तो अजीजों ,बोअर होकर घूमने को हम चले
हिमालय की कन्दरा में ,एक बाबाजी मिले
बोले बेटा जानता हूँ, तेरे दिल की बात मैं
नहीं घबरा ,दौड़ कर ,आयेगी बीबी पास में
एक नुस्खा दिया,मेरी दूर  चिंता  हो गयी
बताता हूँ आप सबको, दाम कुछ लूंगा नहीं
याद घरवाली की अपनी ,जो सताये रात दिन
बांधलो अपने गले में ,अपनी बीबी का रिबिन
सरल नुस्खा है किसी चतुराई की जरुरत नहीं
रिबिन जो बाँधा गले में,टाई  की जरुरत नहीं
ट्राय करके देखिएगा ,कामयाबी  पाएंगे
कच्चे धागे से बंधे ,सरकार चले  आयेंगे
मगर मेरे दोस्तों जो अगर बीबी दूर   हो
आप उनका रिबिन पाने में अगर मजबूर हो
चिंता की जरुरत नहीं ,आशा रखो,धीरज धरो
अपनी बीबी का रिबिन मैं बेचता हूँ ,दिलवरों
साधू का वरदान है ये ,होगा बिजली सा असर
दाम सस्ता ,सिर्फ लागत ,रुपय्ये में वार भर 

डोनेशन तो बनता है

         डोनेशन तो बनता है

आसाराम और नारायण स्वामी
बाप और बेटे,संत,नामी गिरामी
अवांछित कर्मो के फेर में
दोनों बंद  है जेल में
टी वी पर उनके कारनामे आ रहे थे
और ये दोनों ,काफी फूटेज खा रहे थे
रोज रोज उनकी नयी पोल खुल रही थी
बचीखुची इज्जत भी मिटटी में मिल रही थी
ऐसे समय में बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा
और रोज की बदनामी से पीछा छूटा
क्योंकि पांच राज्यों में चुनाव की घडी आगयी
और टी वी पर चुनाव की ख़बरें छागयी
और फिर कुछ  ऐसे बदले हाल
टी वी पर छागये आम पार्टी के केजरीवाल
अब टी वी वालों के पास थे इतने समाचार
कि टाइम ही नहीं था ,सुनाने को इनके हालचाल
इन दोनों तथाकथित संतो को,
कहना चाहिए ,केजरीवाल का शुक्रिया
रोज रोज होती बदनामी से बचा लिया
 इसके लिए ,वो अगर,
 केजरीवाल के अहसानजदा है
तो उनका,अपनी अकूत दौलत में से ,
आमपार्टी के लिए ,थोडा डोनेशन तो बनता है

 मदन मोहन बाहेती'घोटू'