Saturday, January 11, 2014

भगवान के नाम पर

           भगवान के नाम पर

लोग ,ले ले कर भगवान का  नाम
देखो कर रहे है ,कैसे   कैसे   काम
कोई भगवान के नाम पर भीख माँगता है
कोई भगवान के नाम पर  वोट माँगता है
कोई भगवान के नाम पर मांग रहा है चन्दा 
हर कोई कर रहा है ,भगवान के नाम को गंदा
कोई देवी के आगे ,करता है  पशु का बलिदान
और मांस भक्षण कर रहा है ,प्रसाद का लेकर नाम
कोई बाबा भैरवनाथ को दारु की बोतल चढाता है
और प्रसाद  है के नाम पर मदिरा गटकाता है
कोई शिवजी की  बूटी कह कर भांग पिया करता है
कोई कृष्ण बनने  का स्वांग किया करता है 
भक्तिनो के संग ,जल क्रीड़ा और रास रचाता है
वासना का कीड़ा है पर संत कहा जाता है
लोग भगवान को ,राजभोग और छप्पन भोग चढ़ाते है
और सारा माल ,खुद ही चट कर जाते है
अगर कभी कहीं भगवान प्रकट होकर ,
खाने लगे चढ़ाया गया सब प्रसाद
तो सारे पण्डे पुजारी भूखे मर जायेंगे ,
और हो जायेंगे बरबाद
अगर भगवान प्रसाद खाने लगे ,
तो प्रसाद चढ़ाना भी कम हो जाएगा
और भगवान के नाम पर धंधा चलाने वाले ,
इन धंधेबाजों का धंधा बंद हो जाएगा
हे भगवान! तेरे नाम पर कितना कुछ हो रहा है
और तू सो रहा है
अब तो तेरे नाम पर चलने वाले ,
धंधों की हो गयी है पराकाष्ठा
और घटने लगी है लोगों की आस्था
हे प्रभू !अब तो कुछ कर
शीध्र ही कोई नया अवतार धर

मदन मोहन बाहेती'घोटू'   

पत्नी देवी -पति परमेश्वर

            पत्नी देवी -पति परमेश्वर

फरमाइश कोई तुम्हारी ,कर पाता  जब मैं पूर्ण नहीं,
तुम हो जाती हो बहुत क्षुब्ध ,कहती हो मैं हूँ पत्थर दिल
और हाथ जोड़ पूजा करती ,वरदान मांगती हो उससे ,
जो खुद पत्थर की मूरत है ,ये बात समझना है मुश्किल
हम लोग मान प्रभू का प्रतीक,पूजा करते है मूरत को,
मंदिर में उन्हें बिठाते है ,श्रद्धा से  शीश  नमाते  है
हम उनका आराधन करते ,ले धप,अगरबत्ती ,दीपक ,
करते है आरती सुबह शाम,उन पर परशाद  चढ़ाते है
हो जाता पूर्ण मनोरथ तो ,सब श्रेय प्रभू को दे देते ,
 यदि नहीं हुआतो'प्रभु इच्छा', करते किस्मत को कोसा हम 
प्रभु इच्छा से ही देवीजी ,ये बंधन बंधा  हमारा है ,
मैं सच्चे दिल से प्यार करूं ,पर करती नहीं भरोसा तुम
तुम कहती मुझको पत्थर दिल,मूरत तो पूरा  पत्थर है ,
फिर भी तुम्हारी नज़रों में ,वो मुझ से ज्यादा बेहतर है
हम संस्कार वश,मूर्ती की,पूजा करते ,पर सत्य यही ,
पत्नी होती देवी स्वरुप ,और पति होते परमेश्वर है
पत्थर की मूरत गति विहीन,है शांत,मौन और अचल खड़ी ,
लेकिन श्रद्धा से भक्तों की, पाती है रूप  देवता का
लेकिन जीवंत रूप प्रभू का ,होते है हम नर और नारी ,
है मिलन हमारा सृजनशील, हम सृजक,हमी सृष्टीकर्ता
तो आओ मैं पूजूं तुमको ,तुम पूजो मुझे,मिलें हम तुम,
विश्वास,प्यार ,एक दूजे से,करने से ही बंधता बंधन
पति पत्नी दोनों ही होते , दो पहिये जीवन गाड़ी के,
संग चलें,रखें,विश्वास अटल ,तब ही आगे बढ़ता जीवन

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, January 10, 2014

जी तो करता है तुझे प्यार करूं जी भर के

    जी तो करता है तुझे प्यार करूं जी भर के  

जी तो करता है तुझे प्यार करूं जी भर के ,
मगर तू पास भी आने नहीं देती  मुझको
सताती रहती मुझको नित नयी अदाओं से ,
 चाहूँ मैं ,पर तू  सताने नहीं देती मुझको
            यूं कभी भी ,कहीं भी ,मिलती जब अकेले में,
            जब भी है मिलती ,शरारत से मुस्कराती तू
           अपनी मादक सी और मोहती अदाओं से,
            दिखाके जलवे ,मेरे दिल को लूट जाती तू
मैं करूं  कुछ पहल तो ,शरमाकर के,यह कह के,
कि कोई देख ना ले,खिसक जाती तू झट से
जी तो ये  करता है कि तुझ में समा जाऊं मैं ,
हाथ भी अपना  लगाने नहीं देती मुझको
जी तो करता है कि ……
           कितने अरमान तुझको ले के सजा रख्खे है ,
            ये कभी तूने बताने का भी मौका न दिया
           अपने जलवों की दावत का निमंत्रण दे के,
          कभी भी,दावतें खाने का भी मौका न दिया
अब मैं तुझको क्या बतलाऊँ मेरी जाने जिगर ,
कब से उपवास करके ,जी रहा हूँ,आहें भर
सामने थाली में पुरसे  हुए  पकवान गरम,
और तू है कि जो खाने नहीं देती मुझको
जी तो करता है कि ……
             जब भी करता हूँ मैं कोशिश करीब आने की,
             छिटक के पहलू से मेरे तू खिसक जाती  है
            अकेली रात भर करवट बदलती रहती  है ,
             बाँहों में तकिया लिये ,तूभी सो न पाती है
मैं भी तकिये की तरह,मौन सा बाँहों में बंधू ,
पर ये मुमकिन ना होगा ,कोई हरकत न करूं ,
छलकता जाम है ,मदिरा का ,ये तेरा यौवन,
होंठ से अपने लगाने नहीं देती   मुझको
जी तो करता है तुझे प्यार करूं ,जी भर के,
मगर तू पास भी आने नहीं देती मुझको

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

कांग्रेस का नया प्लान


           कांग्रेस का नया प्लान

अब तक सुनते थे जाप आप ,बस नमो नमो नारायण का ,
अब शीघ्र मिडिया वाले सब ,रागा का  राग अलापेंगे
जब से दिल्ली को दहलाया ,अनजान ऐ के सैतालिस ने,
कर खर्च करोड़ों ,भैया और ,पार्टी की छवि निखारेंगे
एम पी और राजस्थान गया ,छूटा छतीस गढ़ हाथों से ,
तब से ये हक़ीक़त पहचाने ,जनता न बहलती वादों से ,
अब इधर मुलायम सख्त हुए ,छिप कर पवार ,कर रहे वार ,
हम साम,दाम और दंड भेद से ,बिगड़ा भाग्य संवारेंगे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Tuesday, January 7, 2014

हम इमोशनल फूल है

     हम इमोशनल फूल है

ब्रिटिश आर्मी के घोड़े ,
जब बूढ़े होते थे थोड़े ,
उन्हें कर दिया जाता था शूट
और गायें ,जब बंद ,कर देती देना दूध
भेज दी जाती  ,'स्लॉटर हाऊस '
और  माता पिता ,
जब बूढ़े और निर्बल हो जाते है
तो वो 'ओल्ड एज होम 'भेज दिए जाते है
अनुपयोगी चीजों का तिरस्कार
शायद है उनका प्रेक्टिकल व्यवहार
और हम लोग,बूढी गायों के लिए ,
गौशाला बनवाते है
बूढ़े माँ बाप की सेवा कर पुण्य कमाते है 
उनको हम देव तुल्य मानते है
और रिश्तों की अहमियत जानते है
हम ये सब क्यों करते फिजूल है 
क्या ये हमारी भूल है
नहीं नहीं ,हमें तो ये दिल से बड़ा अच्छा लगता है,
क्योंकि हम 'इमोशनल फूल'है ,

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

इंकलाब या चुप्पी

      इंकलाब या चुप्पी

फूंक यदि मारो  नहीं  तो बाँसुरी  चुपचाप है
ढोल भी बजते नहीं,जब तक न पड़ती थाप है 
बिना रोये ,माँ भी बच्चों को न देती दूध है ,
कौन  तुम्हारी सुनेगा ,मौन यदि जो आप है
जब तलक निज पक्ष ना रक्खोगे जोर और शोर से ,
मिलने वाला आपको ,तब तक नहीं इन्साफ है
मांगना अधिकार अपना ,आपका अधिकार है ,
एक आंदोलन है ये  या समझ लो इन्कलाब है
कहते है भगवान  भी करता है उनकी ही मदद ,
करते  रहते नाम का उसके जो हरदम जाप है 
हर जगह ये फारमूला ,मगर चल सकता नहीं,
कई  जगहे है जहाँ चुप रहने भी लाभ है
'घोटू'हमने गलती से कल डाट बीबी को दिया ,
भूखे रह कर ,कर रहे ,अब तक हम पश्चाताप है

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 



Monday, January 6, 2014

खोदा पहाड़ और निकली चुहिया

 खोदा पहाड़ और निकली चुहिया

पता नहीं क्यों,
मुझे यह मुहावरा ,कुछ प्रेक्टिकल नहीं लगता,
क्योंकि,पहाड़ खोदने पर ,चुहिया नहीं निकलती ,
बल्कि मिटटी या पत्थर है निकलता
 चुहिया तो गरीबों के कच्चे घरों में ,
खेत खलिहानो में ,
या हलवाई की दूकान में ,
या वहाँ ,जहाँ उन्हें कुछ खाने को मिलता है
वहीँ रहती है अपना बिल बना कर
क्या करेगी पहाड़ों में रह कर ,जहाँ मिलते है पत्थर

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'